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01 अक्टूबर 2026

श्रीराम मंदिर प्रबंध समिति के पूर्व अध्यक्ष ऋषि कुमार शर्मा का जीवन सेवा और समर्पण की मिसाल

 

श्रीराम मंदिर प्रबंध समिति के पूर्व अध्यक्ष ऋषि कुमार शर्मा का जीवन
सेवा और समर्पण की मिसाल
के. डी. अब्बासी
कोटा। स्टेशन क्षेत्र के भीमगंज मंडी स्थित श्रीराम मंदिर के 80 वर्षीय अध्यक्ष ऋषि कुमार शर्मा का कार्यकाल बेदाग और बेमिसाल रहा। ईमानदार,निडर भाई ऋषि कुमार जी ने लंबे समय तक मंदिर की व्यवस्थाओं, मानव सेवा और गौ सेवा को समर्पित किया है।
ऋषि शर्मा का कहना है कि पद भले ही न रहे, लेकिन श्रीराम मंदिर, मानव सेवा और गौ सेवा का संकल्प जीवनभर जारी रहेगा।
ऋषि शर्मा रोजाना करीब चार से पांच घंटे मंदिर में समय देते रहे हैं। मंदिर में किसी आयोजन या धार्मिक कार्यक्रम के दौरान वे पूरे समय उपस्थित रहकर व्यवस्थाओं में जुटे रहते हैं। लगभग 80 वर्ष की उम्र में भी उनका यह सेवाभाव लोगों के लिए चर्चा का विषय रहा है।
संघ की पाठशाला से सीखा अनुशासन, सेवा को बनाया जीवन का उद्देश्य
ऋषि कुमार शर्मा की पृष्ठभूमि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ी रही है। संघ की पाठशाला में उन्होंने सेवा और अनुशासन का पाठ सीखा और इन्हीं संस्कारों को अपने जीवन में उतारा। मंदिर में कार्य करते समय भी अनुशासन और स्पष्टवादिता उनकी कार्यशैली का हिस्सा रही। अपने कार्यकाल में
चांदी के सिंहासन से लेकर चिकित्सालय तक कई महत्वपूर्ण कार्य
ऋषि कुमार शर्मा और उनकी टीम के कार्यकाल में श्रीराम मंदिर में कई उल्लेखनीय कार्य हुए। इनमें भगवान श्रीराम और हनुमानजी के लिए चांदी के सिंहासन बनवाना प्रमुख है, जिससे मंदिर की शोभा में वृद्धि हुई।
श्रीराम चिकित्सालय के विकास में भी महत्वपूर्ण प्रयास किए गए। चिकित्सालय के लिए उपचार संबंधी मशीनें, एंबुलेंस, भवन सहित विभिन्न कार्यों में सहयोग किया गया। पूर्व मंत्री स्वर्गीय ललित किशोर चतुर्वेदी के योगदान को भी इस दौरान विशेष रूप से याद किया जाता है।
ऋषि शर्मा ने चिकित्सालय से जुड़े कार्यों और पुराने सहयोगियों के योगदान को सम्मान देने की दिशा में भी पहल की। उनका मानना रहा कि संस्था के विकास में जिन लोगों ने योगदान दिया, उनके सहयोग को भुलाया नहीं जाना चाहिए।
कोरोना काल में भी नहीं थमने दी सेवा
कोरोना काल के दौरान जब अनेक व्यवस्थाएं प्रभावित हुईं, तब भी ऋषि कुमार शर्मा ने श्रीराम मंदिर के चिकित्सालय को बंद नहीं होने दिया। कर्मचारियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करते हुए आसपास रहने वाले जरूरतमंद और गरीब लोगों के भोजन की व्यवस्था में भी सहयोग किया।
कोरोना संक्रमण बढ़ने के दौरान मंदिर की एंबुलेंस की व्यवस्था कर जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाने और मंदिर की व्यवस्थाओं की निगरानी में भी वे सक्रिय रहे।
साफगोई और सेवा ही पहचान
ऋषि कुमार शर्मा की कार्यशैली की सबसे बड़ी पहचान उनकी स्पष्टवादिता और सेवा भावना रही है। वे सही को सही और गलत को गलत कहने में संकोच नहीं करते। कई बार उनकी साफगोई लोगों को पसंद नहीं भी आती, लेकिन उन्होंने अपनी कार्यशैली में बदलाव नहीं किया।
पूजा-पाठ, मंदिर सेवा, मानव सेवा और गौ सेवा को अपने जीवन का उद्देश्य मानने वाले ऋषि कुमार शर्मा का जीवन सादगी और सेवा के प्रति समर्पण का उदाहरण रहा है। अध्यक्ष पद से कार्यकाल पूरा होने के बाद भी वे श्रीराम मंदिर को उसी तरह समय दे रहे हैं और सेवा कार्यों से जुड़े हुए हैं जैसे पहले जुड़े हुए थे

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