कोंग्रेस अल्पसंख्यक विभाग की उपेक्षा, कमज़ोरी का उदाहरण इससे बढ़ा और क्या होगा, के कोटा में अल्पसंख्यक विभाग के ज़िला अध्यक्ष तक को वोह पार्षद का टिकिट दिलवाने में नाकामयाब रहे, वोह भी तब जब , राष्ट्रीय स्तर के दो दो नेता अल्पसंख्यक विभाग में कोटा से ही है, दर्जन से भी ज़्यादा सलाहकार है, कोटा ज़िला अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष, जो पूर्व में यूथ कोंग्रेस के निर्वाचित विधानसभा अध्यक्ष भी रहे हैं उनको उनके अपने वार्ड में लोकप्रिय होने के बाद भी अल्पसंख्यक विभाग द्वारा टिकिट नहीं दिलवा पाना बग़ावत की वजह रहा, सभी जानते है, अल्पसंख्यक विभाग के जिला अध्यक्ष ज़ुबैर अपने वार्ड श्रीपुरा में ज़मीन से जुड़े है, स्थानीय हिन्दू, मुस्लिम सभी 36 क़ोमों की दिलों की धड़कन है, आज से पांच साल पहले भी, जब यह विधानसभा यूथ कोंग्रेस अध्यक्ष थे त। भी इनकी टिकिट की , मजबूत दावेदारी थी, लेकिन इन्हें टिकिट नहीं मिला, इन्होंने इनके समर्थकों द्वारा दबाव बनाने पर पार्षद का निर्दलीय फार्म भरा, लेकिन कोंग्रेस की एकता अनुशासन का वास्ता देकर इनका नामांकन वापस लिवा लिया गया, इनसे रिकॉर्डेड , जो मोबाइल रिकॉर्डिंग है, वायदा किया गया कि इन्हें सहवरित पार्षद बना दिया जाएगा, सहवरित पार्षदों की सूचि में इनका नाम रिकॉर्डेड वायदे के बाद भी नहीं रहा तो सभी इस वायदा खिलाफ़ी पर चकित थे, जुबेर कोंग्रेस के प्रति समर्पित रहे, समर्पित हैं, लेकिन अब इस बार फिर इनकी पत्नी की दावेदारी , इनकी एक तरफा लोकप्रियता के चलते मजबूत थी, लेकिन इन्हें टिकिट नहीं दिया, इनके वार्डवासी क्यों मानते, ज़ोर ज़बरदस्ती कर पत्नी का नामांकन हुआ, ओर इनकी लोकप्रियता की वजह से इनकी पत्नी एक तरफा चुनाव जीतीं, कोंग्रेस की जमानत जब्त हुई, आखिर अल्पसंख्यक बस्तियों मे लोकप्रिय होने, पूर्व वायदा होने के बाद भी टिकिट नहीं , वोह भी अल्पसंख्यक विभाग के जिला पदाधिकारी, निर्वाचित यूथ कोंग्रेस अध्यक्ष को, तो यह निश्चित तोर पर अल्पसंख्यक नेतृत्व की असफलता, अल्पसंख्यकों को नेतृत्व ओर इंसाफ दिलाने के, कर्तव्यों की उपेक्षा है, खेर जुबेर के तो रोम रोम में कोंग्रेस है, लेकिन कोंग्रेस ने तो उन्हें सहवरित पार्षद बनाने, पार्षद का टिकिट देने के मामले में अछूत ही समझा है ना, ऐसा इसलिये हुआ है, होता है, ओर आगे भी होता आएगा, क्योंकि इस विभाग को, इस विभाग के लोगों को टिश्यू पेपर, सिर्फ ढेला समझने की भूल की जाती रही है, ओर अल्पसंख्यक विभाग, नेतृत्व इस ना इंसाफी का जवाब नहीं मांगता, जी हुज़ूरी में लगा रहता है, वर्तमान की सैकड़ों की लिस्ट में कसम ख़ाकर, दिल पर हाथ रखकर लोग बताएं, अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश अध्यक्ष एम डी चोपदार, लतीफ आर को, अमीन पठान, ओर इक्का दुक्का अधिकतम एक दर्जन लोगों के अलावा एक शख्स भी कोई ऐसा है, जिसने आंखों में आंखे डालकर अल्पसंख्यकों की समस्या, समाधान , नेतृत्व के मुद्दे अपने अपने भाई साहबों के सामने उठाये हों, या प्रशासन के सामने कभी मुद्दों पर बात की हो, एक अखबार की विज्ञप्ति , अल्पसंख्यको की समस्या समाधान , नेतृत्व देने के अधिकार का बयान भी मिल जाये तो में ऐसे लोगों को सेल्यूट करूंगा, बस में अल्पसंख्यक हूँ , मुझे अल्पसंख्यक बाहुल्य वोटर सीट से टिकिट दे दो, इसके अलावा इनका कोई और एजेंडा हो तो बताओ, बीकानेर में महापोर जीतता है, उप महापोर मुस्लिम है तो उन्ही वोटों में बुरी तरह हार जाता है, टोंक का उदाहरण देख लो, लेकिन ज़मीर इनके जागते नहीं, शर्म इनको आती नहीं , अल्लाह इन्हें जी हुज़ूरी गुलामी से आज़ादी देकर इंसाफाना, हक़ बात कहने , लिखने की तौफ़ीक़ अता फरमाये, कोटा मेले दशहरे में मुशायरा, क़व्वाली, ग़ज़ल कार्यक्रमों को खत्म करने के खिलाफ उर्दू सहाय राष्ट्रीय अध्यक्ष के नेतृत्व की इस अल्पसंख्यक कोंग्रेस की ज़ुबान हलक़ में अटकी रही, अख़्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339
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