अमावस की रात भी नहीं थमी नेत्रदान की ज्योति
2. घर में शोक से हुआ अंधियारा,पर छह घरों में रौशनी की उम्मीद
हाड़ौती में तीन नेत्रदान, छह लोगों के जीवन में आएगा उजाला
कोटा। अमावस की अंधेरी रात में भी हाड़ौती में नेत्रदान की ज्योति जलती रही। गुरुवार को ज्योति-मित्रों के सहयोग से कोटा और भवानी मंडी सहित संभाग में तीन दिवंगतों के नेत्रदान संपन्न हुए। इनसे प्राप्त छह कॉर्निया जरूरतमंद दृष्टिहीन लोगों के जीवन में रोशनी की उम्मीद बनेंगे।
कोटा में संस्था के ज्योति-मित्र डॉ. अमित जैन की सूचना पर करीबी मित्र एवं संस्था सहयोगी दीपक गौतम की माता बसंत मालती, सेवानिवृत्त शिक्षिका, के नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी हुई। पुत्र दीपक ने पिता रमेश चंद्र गौतम (सेवानिवृत्त कृषि विभाग) से सहमति लेकर ईबीएसआर कोटा चैप्टर के माध्यम से नेत्रदान करवाया।
इसी दौरान भवानी मंडी के शहर संयोजक कमलेश दलाल ने पूर्व नेत्रदानी परिवार के दीपक मेघवानी के पिता नेमीचंद मेघवानी के निधन की सूचना दी। परिवार ने पूर्व में नेत्रदान कर चुकी चंदा मेघवानी की तरह ही इस बार भी नेत्रदान की सहमति दी। सूचना मिलते ही ईबीएसआर बीबीजे चैप्टर के कॉर्डिनेटर डॉ. कुलवंत गौड़,करीबी मित्र मुकेश पांचाल के साथ ‘ज्योति रथ’ लेकर कोटा से करीब 120 किलोमीटर दूर भवानी मंडी पहुंचे। देर रात 11 बजे नेत्रदान की प्रक्रिया संपन्न करवाई गई।
इसी बीच तलवंडी निवासी, रोटरी क्लब के संस्थापक सदस्य, वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट एवं समाजसेवी सी.एम. बिरला के निधन की सूचना मिली। वे स्वयं नेत्रदान के प्रबल समर्थक थे। उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए पुत्र आशीष, पत्नि वीना की सहमति से परिजनों ने नेत्रदान करवाया।
रोटरी क्लब सचिव मुकेश चौधरी, पूर्व रोटरी प्रांतपाल प्रद्युम्न पाटनी,ज्योति मित्र गौरव सिंघवी, शशांक मित्तल सहित अनेक लोगों ने बिरला के निधन पर शोक व्यक्त किया।
तीन परिवारों के इस निर्णय ने अमावस की रात को भी रोशन कर दिया। नेत्रदान का यह संदेश फिर सामने आया कि, मृत्यु जीवन का अंत हो सकती है, लेकिन नेत्रदान के संकल्प से किसी और की दुनिया में उजाला किया जा सकता है।
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
11 सितंबर 2026
अमावस की रात भी नहीं थमी नेत्रदान की ज्योति
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