आपका-अख्तर खान

हमें चाहने वाले मित्र

22 जुलाई 2026

कोटा में प्रदर्शनकरियों को राहत, तहसीलदार का आदेश निरस्त*

कोटा में प्रदर्शनकरियों को राहत, तहसीलदार का आदेश निरस्त*
कोटा, 22 जुलाई 2026। अपर सत्र न्यायाधीश क्रम-3, कोटा ने छह प्रदर्शनकारियों की पुनरीक्षण याचिका स्वीकार करते हुए तहसीलदार एवं कार्यपालक मजिस्ट्रेट, लाडपुरा, कोटा द्वारा 1 अप्रैल 2025 को पारित आदेश को निरस्त कर दिया। न्यायालय ने माना कि अधीनस्थ न्यायालय का आदेश विधिक प्रक्रिया, अनिवार्य कारण-उल्लेख और रिकॉर्ड पर उपलब्ध तथ्यों के समुचित परीक्षण के बिना पारित किया गया था । याचिकाकर्ताओं की ओर से आबिद अख्तर लॉयर्स एसोसिएट के एडवोकेट अख़्तर खान अकेला और एडवोकेट अंसार इंदौरी ने तर्क रखा कि आदेश साइक्लोस्टाइल/मुद्रित प्रारूप पर आधारित था, उसमें तलब करने के कारण स्पष्ट नहीं थे, तथा रोज़नामचा रिपोर्ट और इस्तगासा की तारीखों में भी गंभीर विरोधाभास था । राज्य पक्ष ने आदेश को वैध बताते हुए पुनरीक्षण खारिज करने का निवेदन किया था ।
एडवोकेट अंसार इंदौरी ने बताया की न्यायालय ने रिकॉर्ड के अवलोकन के बाद पाया कि नोटिस के साथ आवश्यक आदेश की प्रति संलग्न नहीं थी और दंड प्रक्रिया संहिता/बीएनएसएस के अनिवार्य प्रावधानों का समुचित पालन नहीं किया गया । अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल पूर्व-मुद्रित प्रारूप में आदेश पारित करना पर्याप्त नहीं है; न्यायिक आदेश में उचित मनन और कारणों का उल्लेख अनिवार्य है । एडवोकेट अख़्तर खान अकेला ने अदालत में तर्क देते हुए कहा की कार्यवाही प्रारम्भ करने का आदेश प्रारम्भ से ही शून्य है क्योंकि कार्यपालक मजिस्ट्रेट का दिनांक 01/04/2025 का आदेश शक्ति का यांत्रिक प्रयोग है, जो साइक्लोस्टाइल प्रोफार्मा पर पारित किया गया है, बिना किसी न्यायिक विवेक के। जबकि किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्रतिबंधित करने के लिए न्यायिक विवेक का प्रयोग अनिवार्य है। एडवोकेट अंसार इंदौरी ने अदालत में तर्क देते हुए कहा शिकायत में केवल यह कहा गया है कि प्रदर्शनकारी "साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की बात करते है" और अपने राजनीतिक संबंधों के कारण शांति भंग कर सकते है। इसमें किसी भाषण या उकसावे की एक भी विशिष्ट तारीख, समय, स्थान या विषय-वस्तु का उल्लेख नहीं है।प्रदर्शनकारियों की सामान्य प्रतिष्ठा अच्छी नहीं है जैसे आरोप व्यक्तिपरक और कानूनी रूप से निरर्थक हैं। अज्ञात सूचनादाताओं से प्राप्त ऐसे खाली और गैर-विशिष्ट दावों के आधार पर कार्यवाही प्रारम्भ करना शक्ति का मनमाना प्रयोग है। उन्होंने कहा की पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध शिकायत दिनांक 01/04/2025 को दर्ज की। जबकि सामान्य डायरी जिसे इस शिकायत का आधार बताया गया है, एक दिन बाद दिनांक 02/04/2025 को दर्ज की गई। यह कानूनी और तार्किक असंगति है कि कोई कार्रवाई उस दस्तावेज़ पर आधारित हो जो कार्रवाई के समय अस्तित्व में ही नहीं था। यह निर्विवाद विसंगति सिद्ध करती है कि पूरा मामला प्रदर्शनकारियों को झूठा फंसाने के लिए पूर्वव्यापी रूप से गढ़ा गया था। जो दुर्भावनापूर्ण अभियोजन का स्पष्ट उदाहरण है।दोनो वकीलों द्वारा दिए गए तर्कों के आधार पर न्यायालय ने 1 अप्रैल 2025 का विवादित आदेश रद्द करते हुए पुनरीक्षण याचिका स्वीकार कर ली।
जारीकर्ता:
एडवोकेट अंसार इंदौरी
8955994260
See less
 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

दोस्तों, कुछ गिले-शिकवे और कुछ सुझाव भी देते जाओ. जनाब! मेरा यह ब्लॉग आप सभी भाईयों का अपना ब्लॉग है. इसमें आपका स्वागत है. इसकी गलतियों (दोषों व कमियों) को सुधारने के लिए मेहरबानी करके मुझे सुझाव दें. मैं आपका आभारी रहूँगा. अख्तर खान "अकेला" कोटा(राजस्थान)

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...