आपका-अख्तर खान

हमें चाहने वाले मित्र

26 सितंबर 2025

कोटा मेले की फीकी रंगत के चलते , करोड़ों के भ्रष्टाचार की शिकायत और जांच से नाराज़ होकर तो कहीं मेले से मुशायरा , ग़ज़ल , क़व्वाली का कट ऑफ़ करके बदला नहीं लिया

कोटा मेले की फीकी रंगत के चलते , करोड़ों के भ्रष्टाचार की शिकायत और जांच से नाराज़ होकर तो कहीं मेले से मुशायरा , ग़ज़ल , क़व्वाली का कट ऑफ़ करके बदला नहीं लिया
कोटा ,, कोटा मेले की रंगत भाजपा के हर राज में, सुमन श्रृंगी कार्यकाल को छोड़कर फीकी फीकी ही रही है, ,, पिछली बार भी फीकी थी , लेकिन उस रंगत में भ्रष्टाचार की कई शिकायतें थी , उन शिकायतों को यूं तो अखबारों के विज्ञापन से ढक दिया था लेकिन फिर भ्रष्टाचार की वोह शिकायत कोटा भ्रष्टाचार निरोधक विभाग में पार्षदों द्वारा की गई है ,, जिस पर ओहदेदारान के प्रभाव में कोई कार्यवाही नहीं होती देख , शिकायत कर्ता पार्षदों ने कोटा भ्रष्टाचार निरोधक मामलात कोर्ट में गुहार लगाई है ,, जहां शिकायत की प्रगती रिपोर्ट देने के आदेश से नगर निगम के मेले से जुड़े लोग खुन्नस में हैं और शायद इसी खुन्नस में , बोखला कर मेले के कार्यक्रमों से ग़ज़ल , क़व्वाली , मुशायरे का कटऑफ करके बदला लिया है , इतना ही नहीं , इक्का दुक्का मुशायरे की कॉम के कहे जाने वाले लोगों को निर्देशित भी किया है के वोह जहाँ खड़े हों, कहें काहे का मुशायरा , मंच पर हम जब रहते हैं तो मुशायरे में गिनती के लोग ही तो रहते हैं ऐसे में मुशायरा खत्म तो खत्म हुआ क्या बुराई है , कोटा दशहरे के तुरंत बाद , क्या होता है सभी जानते हैं, आम जनता के टेक्स की गाढ़ी कमाई और शक्तिनगर की सीमा बंदी में कोटा मेले का शुभारम्भ होता है , मेले में रंगारंग कार्यकम होते हैं , दुकाने होती है , चाट पकोड़ी की मस्ती , झूले और सर्कस की धमाल होती है , तो गुब्बारों की पुपाड़ियाँ , हंसी मज़ाक़ खेलकूद होता रहा है , लेकिन वर्ष 2024 के मेले आयोजनकर्ताओं के भ्रष्टाचार पर उँगलियाँ उठाते हुए जब कोटा उत्तर उप महापौर सोनू कुरैशी , कोटा दक्षिण उप महापौर पवन मीणा ,,इसरार मोहम्मद ,, देवेश तिवारी ने भ्रष्टाचार की करतूतों से परतें हटाते हुए भ्रष्टाचार निरोधक विभाग को लिखित शिकायत दी ,, और उस शिकायत पर जब कोई कार्यवाही नहीं हुई तो पार्षद इसरार को , भ्रष्टाचार निरोधक विभाग में अपने वकील के ज़रिये गुहार लगाना पढ़ी , अदालत का आदेश शिकायत पर की गई जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने का जब हुआ तो ज़ाहिर है घबराहट होना वाजबी बात थी , जो लोग वर्ष 2024 में मेले दशहरे के आयोजक थे वही इस वर्ष भी हैं , सभी को पता है , के कांग्रेस के कार्यकाल में , कांग्रेस के महापौर जो वर्तमान में भाजपा में चले गए हैं , वोह कोंग्रेस काल के मेले के कार्यक्रमों से लगभग नदारद थे , इतना ही नहीं ,, मुशायरे के आयोजन के बाद इनके कार्यकाल में , पार्षदों को धरना देने और काफी जतन करने के बाद भी मुशायरे में आये शायरों को ,, बढ़ी मुश्किलों में भुगतान हुआ , तो यह आग तो तभी से लगी थी ,वर्तमान में भी क्या आपने महापौर श्रीमती मंजू मेहरा या उन्हें पदासीन करने वाली शक्तियों का इस मामले में एक शब्द भी विरोध शब्द सूना नहीं ना , तो फिर समझने की बात है, इसरार मोहम्मद पार्षद की शिकायत पर चल रही कार्यवाही गंभीर है ,शिकायत गंभीर है , इसरार मोहम्मद कांग्रेस शासन में आयोजित मेले मुशायरे कार्यक्रम कर्ता धर्ता रहते थे , कोटा उत्तर उप महापौर सोनू कुरैशी भी ज़िम्मेदार रहते थे , तो फिर जब वोह शिकायतकर्ता है तो उनके मनपसन्द मुशायरे कार्यक्रम को तो कटौती करना गुस्सा ठंडा करने के लिए ज़रूरी है ही सही , ,वर्ष 2024 में आयोजित मेले में करोड़ों के भ्रष्टाचार की शिकायत करते हुए इसरार मोहम्मद , सोनू कुरैशी पवन मीणा , देवेश तिवारी ने लिखा है, के दस वर्ष पूर्व फेज़ फर्स्ट मेले का जीर्णोद्धार जब हुआ तो , फेज़ फर्स्ट की दक्षिण दिशा में साढ़े छह बीघा भूमि पर पार्क के लिए भूमि आरक्षित कर पार्क विकसित किया गया , लाखों रूपये के पेड़ लगवाए , बाउंड्री बनवाई , हरे वृक्ष खड़े हो गए , महंगी मखमली घांस लगवाई , पानी का सिस्टम लगवाया और भी कई लाइटिंग वगेरा व्यवस्था थी , लेकिन बिना किसी पूर्वानुमति , हरे पेड़ काटने की अनुमति के दस करोड़ रूपये के खर्चे से बने इस पार्क को मेला समिति आयोजकों ने तोड़ फोड़ कर नेस्तनाबूत कर दिया , दस करोड़ रुपये के कार्य मिटटी में मिला दिए और फिर , स्मार्ट सिटी योजना के तहत बने इस साढ़े छह बीघा की ज़मीन पर बने पार्क के दस करोड़ रूपये तो गए पानी में , उस पर राजस्थान ट्रांसपेरेंसी इन पब्लिक परक्युमेंट एक्ट 2012 के विधि नियम जिसमे एक लाख रूपये से अधिक का कोई भी काम हो तो सार्वजनिक विज्ञप्ति जारी कर , अख़बारों में विज्ञापन देकर ही , उसे प्रतिस्पर्द्धा के आधार पर ज़्यादा कमाई में किराए पर या निर्धारित समयावधि के लिए अधिकतम बोली पर देने के नियमों के होने पर भी , उन नियमों का उलंग्घन कर इस जगह को कम मूल्य में दे दी गई , प्रतिस्पर्द्धा नहीं होने , लोगों की जानकारी में विज्ञापन अभाव में नहीं होने से , नगर निगम को राजस्व का बढ़ा नुकसान हुआ , एक तरफ दस करोड़ के कार्यों को मिटटी में मिलाया तो दूसरी तरफ इस जगह से भी कमाई में कमी होने से नगर निगम को करोड़ों का नुकसान हुआ और टूटफूट का नुकसान अलग था ,, इसमें मेला आयोजन समिति और अधिकारीयों की खूब सांठ गांठ रही ,, सभी चिढ़ी चुप रहे ,, मेले में सर्कस की ज़मीन आवंटन किराया वसूली में तो और भी गज़ब हो गया ,, मेले में सर्कस के लिए तीन चार और आवेदन थे ,, लेकिन अपने चहेते को मनमानी मांग पर किराए पर देने के उद्देश्य से ,,आवंटन नियमों के तहत ना तो कम्पीटिशन नीलामी हुई , ना ही अखबार में विज्ञापन जारी किया गया ,,, इतना ही नहीं 21 जुलाई 2023 को नगर निगम कोटा के पूर्व में जारी परिपत्र को ताक में रख दिया , इस परिपत्र में फेज़ 2 सर्कस की यह भूमि तीन लाख तीस हज़ार रूपये प्रतिदिन किराए पर देना थी , जो पूर्व में ही डिसाइड था , जबकि एक साल ज़्यादा होने से यह किराया राशि और बढ़ाई जाना चाहिए थी , लेकिन यह ज़मीन सर्कस को बढ़ा कर देना तो दूर पुराने निर्धारित किराये से भी कम किराए पर दी गई जो क़रीब पच्चीस दिनों के लिए थी , इस तरह से साठ सत्तर लाख रूपये का नगर निगम को यह नुकसान पृथक से हुआ , कोटा मेले के वेस्ट ज़ोन में स्थाई रूप से 36 झूले और 13 अतिरिक्त झूलों की ज़मीन है ,, जो नियमानुसार दस प्रतिशत किराया बढ़ा कर देना थी , ,लेकिन किराया बढ़ाया नहीं गया , पूर्ववत दिया गया ,, इतना ही नहीं इन झूलों को पूर्व में जो जगह दी गई थी उससे ज़्यादा ज़मीन दी पूर्व की पैमाइश और हदबंदी तोड़ दी गई और वर्ष 2018 से 13 अस्थाई झूलों को जो ज़मीन नीलामी से आवंटित की जाती थी वोह स्थाई झूलों को देने से आवंटित नहीं हो सकी उनका किराया नगर निगम में तो जमा नहीं हुआ लेकिन जिन चहेतों को झूले के लिए ज़मीन दी गई ,,उन्होंने इन 13 अतिरिक्त झूले वालों को अवैध रूप से स्थापित कर मुंह माँगा किराया वसूल कर खुद ने ही नगर निगम के हिस्से की कमाई कर डाली ,,,, इससे निगम को लाखों का नुकसान हुआ ,,, ईस्ट ज़ोन मेला परिसर में दस झूले खुली नीलामी से आवंटित होना थे ,, लेकिन बिना किसी प्रतिस्पर्धा के पूर्व किराए में ही उन्हें वोह ज़मीन किराए पर दे दी गई, इससे नगर निगम को दस लाख रूपये का नुकसान हुआ ,, ,ईस्ट मेला ज़ोन में वर्ष 2018 में 175 दुकानें बनीं जो किरायेदारों को खुली नीलामी से दी जाती रही हैं ,, लेकिन उक्त दुकानों को अपने चहेते होने से पूर्ववत किराए पर बिना किसी नीलामी के 50 ,,60 दुकाने , दे दी गईं नतीजा अव्यवस्था , लेटलतीफी के चलते एक तरफ तो किराया कम आया दूसरी तरफ बक़ाया अस्सी दुकाने मिस मैनेजमेंट के चलते आवंटित ही नहीं हो पाईं , वोह कुछ खाली रहीं , कुछ में बिना किराया रिकॉर्ड के कारोबार भी हुआ , इससे भी निगम को ;लाखों का नुकसान हुआ ,, ,मेले दशहरे के नार्थ ज़ोन में 70 दुकानें 13 झूले रहते हैं , जहां मनमाना , नियम विरुद्ध ,, नीलामी की प्रक्रिया अपनाये बगैर आवंटन हुए , अगर नीलामी से यह दूकान और झूले आवंटित होते तो निगम को करोड़ों की आमदनी होती लेकिन अपनों को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों को ताक में रख दिया और जिन्हे ज़मीने , दुकाने आवंटित कीं , उन्होंने तो कारोबार ही नहीं किया ब्लेक में दूसरे लोगों को ज़मीन और दुकाने देकर काफी रुपया कमाया, इससे शिकमी किरायेदारी प्रथा को तरक़्क़ी मिली और निगम को लाखों लाख रूपये का नुकसान हुआ ,, कई जगह तो एक ही परिवार के भाई भतीजों रिश्तेदारों को बंच के बंच आवंटित हुए ,, मेला दशहरा वेस्ट ज़ोन में 300 दुकानें हैं , जिन्हे वर्ष 2018 की परम्परा के अनुसार 150 दुकाने पूराने आवंटियों को राशि बढ़ाकर दिया जाना था बाक़ी 150 अन्य दुकाने विधि नियम के तहत खुली नीलामी से दिया जाना थीं ,,, लेकिन दुकाने एक ही परिवार के लोगों को दी ,, इसे फूड ज़ोन मनमाने तोर पर घोषित कर दिया , इस क्षेत्र में जो अतिरिक्त ज़मीन बचा कर रखी जाती है , जिसे मेला यात्री विश्राम , आपातकाल भगदड़ के समय राहत व्यवस्था ,वगेरा वगेरा के लिए रखा जाता है वोह ज़मीन भी इन्हे दे दी गई, इससे भी निगम को नुकसान हुआ , ,मेले में फुटकर व्यवसाई जो क़रीब लोग होते है , जहां ठेला या स्टाल लगा लेते हैं , उनसे नगर निगम पैमाइश और जगह के हिसाब से किराया वसूली कर आमदनी बढ़ाती रही हैं ,लेकिन इन स्थानों पर भी खुली मनमानी हुई , मनचाहा आवंटन ,मनचाही किराया वसूली , नतीजन निगम को , अलग अलग गलतियों , मनमानियों , खुली नीलामी नहीं होने , अपनों को एक ही परिवार के सदस्यों को मनमाने आवंटन , शिकमी किरायेदारों का भौतिकसत्यापन नहीं करने से निगम को करोडो करोड़ रूपये का नुकसान हुआ ,,, यह सारी कहानी कोटा के पत्रकारों की जानकारी में ,हैं कोटा के विधायको ,,कोटा के सांसद और प्रतिनिधियों की जानकारी में है , लेकिन जब यह सब अपने हों तो ना ही प्रकाशन का डर , ना ही नेताओं का डर ,, पार्षदों ने भ्रष्टाचार निरोधक विभाग में शिकायत की तो सरकार में होने से इनका कोई डर नहीं , प्रतिपक्ष में जो कोंग्रेसी थे उनमे से कई पार्षद , महापौर ,, कई नेता , बोलने वाले नेता तो भाजपा में शामिल कर जी हुज़ूर वाला बना लिया और जो कुछ कांग्रेस में अभी हैं , उनमे से कुछ तो अभी भी गठबंधन का धर्म चुप रहकर निभा रहे हैं , तो फिर डर काहे का , लेकिन पार्षद मोहम्मद इसरार ,, उनके वकील हरीश जी शर्मा हिम्मत कहाँ हारने वाले हैं , उन्होंने भ्रष्टाचार निरोधक अदालत में कार्यवाही पेश की है , अब न्यायिक आदेशों के बाद, वर्ष 2024 के इन कच्चे चिट्ठों के मामले में जांच क्या ,हुई रिपोर्ट तलब की है , एक बार तो गोलमोल घुमा दिया लेकिन फिर नए आदेश हुए हैं , देखते हैं ,इस में 15 अक्टूबर को क्या रिपोर्ट आती है ,लेकिन इस बार भी कमोबेश खुले रूप से वही नज़ारा है , मनमानी है , खुली नीलामी नियम नहीं है , ,शिकमी किरायेदारी खुले रूप में है , अगर कोटा कलेक्टर , कोटा की ज़िम्मेदार कांग्रेस , कांग्रेस के लोकसभा प्रत्याक्षी प्रह्लाद गुंजल , कोटा दक्षिण की प्रत्याक्षी राखी , गौतम ,,कोटा उत्तर के विधायक ,, कोटा उत्तर नगर निगम की महापौर , लाडपुरा के विधायक प्रत्याक्षी ,नईमुद्दीन गुड्डू ,, कांग्रेस शहर जिला अध्यक्ष रविंद्र त्यागी देहात अध्यक्ष भानू प्रताप सिंह अन्य पदाधिकारी और कोटा के ज़िम्मेदार निष्पक्ष पत्रकार ,, बुद्धिजीवी , मेले की आवंटन दुकानों , झूले आवंटन जिनके नाम हुए है , वोह इन आवंटित दुकानों को कम किराए पर लेकर अधिक किराए में शिकमी किराए पर दूसरों को देकर कैसे गड़बड़ घोटाला कर रहे हैं और ,रिश्तेदारों नातेदारों को कैसे आवंटन है इसका सर्वेक्षण कर कार्यवाही करवाए , प्रेस कॉन्फ्रेंस करवाए तो बढ़ी पोल पट्टी सामने आ सकती है , लेकिन क्या ऐसा सम्भव है , कांग्रेस ,, कोंग्रेसी अपने दिलों पर हाथ रखकर ज़रा सोचे , क्योंकि मेले में मुशायरे के लिए कांग्रेस सरकार में पेश पेश रहे , इसरार मोहम्मद पार्षद , सोनू कुरैशी ,, पवन मीणा , देवेश तिवारी जैसे कितने है , जो सच के लिए ;लड़ रहे हैं , यहां तक के इसरार मोहम्मद की इस साफ़ गोई भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग में तो , कोटा का मुशायरा भी बदले की आग में जल कर स्वाहा हो गया , अब देखते हैं , नतीजे एक ब्रेक के बाद , ,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339

 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

दोस्तों, कुछ गिले-शिकवे और कुछ सुझाव भी देते जाओ. जनाब! मेरा यह ब्लॉग आप सभी भाईयों का अपना ब्लॉग है. इसमें आपका स्वागत है. इसकी गलतियों (दोषों व कमियों) को सुधारने के लिए मेहरबानी करके मुझे सुझाव दें. मैं आपका आभारी रहूँगा. अख्तर खान "अकेला" कोटा(राजस्थान)

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...