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25 सितंबर 2025

राष्ट्रिय मेला कोटा बनाम व्यक्तिगत मनमानी मेला, लोकसभा अध्यक्ष की छवि विवादित करने की साज़िश वाला मेला,

 

राष्ट्रिय मेला कोटा बनाम व्यक्तिगत मनमानी मेला, लोकसभा अध्यक्ष की छवि विवादित करने की साज़िश वाला मेला,
जी हाँ दोस्तों ,, कोटा में दशहरा पूर्व के बाद ,, तुरंत राष्ट्रिय मेले का आयोजन होता है , जो सरकारी ज़मीन पर , सरकारी खर्च पर , कोटा ही नहीं पुरे देश और विदेशियों के लिए आकर्षक का केंद्र बनाने के उदेश्य से राष्ट्रीय मेले का नाम उसे दिया जाता है , राष्ट्रीय यानी ,, पूरे देश के लिए , देश के क़ायदे , क़ानून , संविधान के मायनों में सभी का मेला , सभी के लिए , फिर अगर देश में लोकसभा प्रतिनिधि सांसद के रूप में, संवेधानिक शपथ लेकर , लोकसभा अध्यक्ष की ज़िम्मेदारी हो , सभी का साथ , सभी का विकास , देश और देशवासियों के हर वर्ग के साथ ही सभी को शामिल कर सभी को साथ लेकर चलने वाला अर्थ हो जाता है , कोटा मेला राष्ट्रिय बने इसका नाम देते देते हम थक गए लेकिन कोटा मेला आज तक विधिक रूप से राष्ट्रीय नहीं हो पाया है , राष्ट्रिय स्तर पर देश की सर्वोच्च समिति , व्यवस्था , राष्ट्रिय मेला विभाग , सांस्कृति ,पर्यटन विभाग ने इसे अभी तक राष्ट्रीय मेले के रूप में डिक्लेयर नहीं किया है , सुमन श्रृंगी महापोर के समय , हम इस मेले को राष्ट्रिय मेला घोषित करवाने के क़रीब थे ,लेकिन फिर अचानक हम पिछड़ गए , पिछड़ते चले गए, इस बार कोटा के सांसद देश की सर्वोच्च पंचायत लोकसभा के अध्यक्ष हैं , ओम जी बिरला ने इस मेले को , राष्ट्रिय दर्जा दिलवाने के उद्देश्य से , प्रगति मैदान का रूप देकर इसे राष्ट्रीय बनाने का प्रयास भी किया ,,,, लेकिन अब जब कोटा मेले को राष्ट्रिय मेला घोषित करवाने की बारी थी , कोटा के हाथ में पॉवर थी, केंद्र सरकार के मेलों में राष्ट्रिय मेला इसे घोषित करवाकर , कोटा की नामवरी करने की बारी थी , ऐसे वक़्त पर कोटा के कुछ दुश्मनों ने , कोटा मेले को राष्ट्रिय मेले की घोषणा करवाने से दूर करने के लिए ,, कोटा लोकसभा अध्यक्ष के संसदीय क्षत्र के इसे विवादित करने के लिए आस्तीन के सांप बनकर काम किया है , सभी का साथ , सभी का विकास , की पहचान बनाकर दुश्मन का भी मुस्कुरा कर स्वागत करने के लिए देश भर में प्रसिद्ध ,, हर दिल अज़ीज़ लोकसभा अध्यक्ष ओम जी बिरला को विवादित बनाने का प्रयास किया है , ज़ाहिर है , नगर पालिका क़ानून के विपरीत, भाजपा मेले की समिति बना रही है , भाजपा में अभी ओम जी बिरला सिरमौर है , चाहे इस मेले में अभी ओम जी की जानकारी के बगैर , लोकसभा अध्यक्ष की जो उनकी सभी को साथ लेकर चलने , देश के संविधान की मर्यादाओं को बचाये रखने की जो शपथ थी , उसके खिलाफ एक तरफा कोटा मेले में आयोजन के प्रयास किये गए हैं इसकी जानकारी ना हो , लेकिन इल्ज़ाम उन्हीं पर थोपे जाएँ ऐसा प्रयास कोटा के मेला आयोजकों का लगने लगा है ,,, यही वजह तो है , छात्र जीवन से सभी के चहेते रहे ,, ओम बिरला के सर्वोच्च पद पर बैठे रहने के बाद भी , उनकी छवि खराब करने के लिए कोटा राष्ट्रिय मेले को , व्यक्तिगत मेला बनाने का प्रयास इन लोगों ने शुरू किया है , और व्यक्तिगत मेला यानी , अपनी इच्छानुसार , जेब से निकालो , मनमानी करो , देश के सभी वर्ग के प्रतिनिधित्व , परम्परा , देश के संवैधानिक नियमों को , ताक में रखो , और मनमानी करो , कोटा मेले में , जो राष्ट्रिय मेला सूचि में अभी तक दर्ज नहीं है , राजस्थान से पुष्कर मेला राष्ट्रीय सूचि में आता है, वहीं , कुछ स्थानों पर , चंद्रभागा झालरापाटन के मेले को श्रीमती वसुंधरा सिंधिया के केंद्रीय पर्यटन संस्कृति मंत्री कार्यकाल में हुए थे , फिर श्रीमती वसुंधरा जी मुख्यमंत्री कार्यकाल में भी , उन्होंने इसे राष्ट्रिय घोषित करवाने के प्रयास किये, , कोटा मेले को विधिक रूप से मेले के रूप में सूचीबद्ध करवाने , पर्यटन और संकृति मंत्रालय की विधिक मान्यता करवाकर इसे राष्ट्रिय मेलों की औपचारिक सूचि में जुड़वाने को लेकर , महापौर सुमन श्रंगी के कार्यकाल के बाद कोई पहल नहीं हुई है , कोटा के लिए लोकसभा अध्यक्ष कोटा के सांसद के चलते यह एक सुनहरा अवसर था के कोटा मेला राष्ट्रिय मेला घोषित हो जाए , केंद्रीय पर्यटन , सांस्कृति मंत्रालय में सूचीबद्ध हो जाए , लेकिन कुछ लोग हैं जो कोटा के दुश्मन है , लोकसभा अध्यक्ष ओम जी बिरला की संवेधानिक छवि ,, सभी को साथ लेकर चलने वाली छवि के दुश्मन होकर उसे बिगाड़ने की कोशिशों में है , इसीलिए तो कोटा की धरती पर , सरकारी खर्च पर होने वाले मेले आयोजन में जो महाराजा दुर्जन साल ने 1732 में शुरू किया था फिर 1892 में कर्नल वायली की पत्नी वायली ने उम्मेद क्लब नयापुरा कोटा से इसे शुरू किया था , जिसकी राष्ट्रीय मेला घोषित नहीं होने पर भी राष्ट्रीय साख थी ,, आज वोह मेला भाषाओं , धर्म , मज़हब के नाम पर खुन्नस निकालने ,, का माध्यम बनाने के प्रयास है , परम्परागत कई दशकों से आयोजित होने वाले कार्यक्रम क़व्वाली , ग़ज़ल , फिर मुशायरे को डी लिस्टेड कर दिया गया है , ,,खेर अपनों को किया , अपन तो जबसे , मेला सरहदों में , दीवारों में , शक्तिनगर की तरफ के मकानों से दीवार खडी कर अलग थलग किया गया है , जबसे मेला केसा होता है , उसके कार्यक्रम कैसे हैं ,हम तो देखने ही नहीं गए क्योंकि ,, मेले देश की संस्कृति हैं , पहचान हैं , क़ौमी एकता का प्रतीक हैं ,, इन्हे दीवारों में क़ैद करना , किसी विशिष्ठ विचारधारा , भाषा के दायरे में क़ैद करना ,, राष्ट्रिय छवि को , व्यक्तिगत जेबी छवि बनांने की कोशिशें करना यह ,, भविष्य के लिए , खुद के साफ़ सुथरी छवि वाले नेता के लिए घातक है , तात्कालिक तो आप ख़ुशी ले लो , लेकिन देश के लिये , कोटा , कोटा वासियों के लिए यह जेबी संस्था बनाम कोटा मेला की सोच घातक है , व्यापारियों के लिए नुकसानदायक है , लेकिन क्या करें, व्यापारी भी तो चुप हैं , ,, खेर मुझे क्या में कोनसा पंद्रह वर्षों से मेले में मेला देखने या फिर मेले के कार्यक्रमों को देखने , सुनने गया हूँ ,,,,,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339
akhtar khan akela

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