निखिल , निखिल , निखिल , कोटा की एक दुर्दांत , अपहरण के बाद हत्या की दिल हिला देने वाली ,, खतरनाक घटना ,, अपराधी पकड़े गए , अब उन्हें सज़ा कैसे मिले , इस पर चिंतन मंथन होना चाहिए ,, समाज इस मामले में मुखर है ,, लेकिन केंडिल मार्च निकालने से , अब कुछ नहीं होगा , सियासत करने से इस मामले में अब कुछ नहीं होगा ,, यह कोटा की एक गंभीर घटना है , परिस्थिति जन्य साक्ष्य ,, कढ़ी से कढ़ी जोड़ने के बाद , अपराधियों तक पहुंचकर , उन्हें सज़ा दिलवाने के प्रयासों की ,, अपवादित घटनाओं में से विशिष्ठ है , वैसे कोटा पुलिस का अनुसंधान क़ाबिल ऐ तारीफ़ है ,, लेकिन फिर भी , राजस्थान पुलिस ,, फिर कोटा पुलिस , उपकरणों , एफ एस एल , सहित कई विशिष्ठ , आधुनिक अनुसंधान में अभी भी अपेक्षाकृत सी बी आई के बहुत पीछे है , ऐसे में , निखिल हत्याकांड के मामले में , एफ एस एल , सहित मोबाईल कॉल डिटेल , फिंगर प्रिंट वगेरा , कढ़ी से कढ़ी जोड़ने के मामले में , समाज को , लोकसभा अध्यक्ष जो कोटा के सांसद भी है , उनके ज़रिये , इस मामले की जांच सी बी आई से करवाना चाहिए , ताकि कुछ अतिरिक्त साक्ष्य , कुछ अतिरिक्त आधुनिक उपकरणों के तथ्य भी सामने आ सके , और यह सब केंडिल मार्च निकालने से नहीं होगा , लोकसभा अध्यक्ष पर दबाव बनाने से होगा ,, यूँ तो इस मामले में , कोटा पुलिस की सराहनीय जांच है , इसके पूर्व भी ,, सी बी आई जांच ,मामले में , नीलू राणा हत्याकांड में , कोटा पुलिस जांच की समर्थित रही है , बस कोटा पुलिस , के पास उपकरणों , विशेष प्रशिक्षण , एफ एस एल की तात्कालिक जांच रिपोर्ट , सहित कुछ मजबूरियां हैं , जो सी बी आई को विशिष्ठ अधिकार होने से तात्कालिक व्यवस्थाएं हो जाती है , और थोड़ी बहुत ही सही , अतिरिक्त साक्ष्य ज़रूर मिलती है , ताकि अपराधी को सज़ा दिलवाने में और आसानी हो जाती है ,, निखिल मामले में , समाज केंडिल मार्च नहीं निकाले , बुद्धिजीवियों क़ानून विदों के साथ बैठकें करें , मशवरा करे ,, हाल ही में समाज ने , कोटा अभिभाषक परिषद को , ज्ञापन देकर , अपराधियों की पैरवी नहीं करने के लिए कहा है , यह सम्भवं नहीं है , क्योंकि भारतीय क़ानून ,भारतीय संविधान का सीधा सिद्धांत है के किसी भी व्यक्ति को बिना उसका पक्ष सुने ,, दंडित नहीं किया जा सकता , उसे बचाव का पूरा अधिकार दिया जाता है , फिर चाहे उसे सरकारी स्तर पर ही वकील सरकारी खर्च पर ही उपलब्ध क्यों ना कराना पढ़े ,, इसीलिए सुप्रीमकोर्ट ने , , सामूहिक रूप से किसी भी व्यक्ति के पक्ष में , समूह को पैरवी से रोकने को अवैध क़रार दिया है , उनके कर्तव्य के खिलाफ बताया है , निखिल मामले में भी , अगर अभिभाषक परिषद , पैरवी से इंकार भी कर दे , तो न्यायालय को ही , सरकारी स्तर पर , मुफ्त विधिक सहायता के तहत , अपराधी को वकील हर हाल में उपलब्ध करवाना होगा , ऐसे में केंडल मार्च निकालने और ऐसी मांगों और दिमाग लगाने ,, सियासत करने की जगह , मामले की जांच सी बी आई से भी अतिरिक्त हो , ऐसी व्यवस्था होना चाहिए , जबकि , मामले में जो गवाह , जो परिस्थिति जन्य साक्ष्य की बरामदगी , कढ़ी से कढ़ी जोड़ने वाले सामानों की बरामदगी , ,एफ एस एल , मोबाइल कॉल डिटेल , लोकेशन वगेरा की , साक्ष्य है , उसे कोर्ट में पेश करने के पहले , सुरक्षित तरीके से , केस ऑफिसर स्कीम में त्वरित सुनवाई , दिन प्रति दिन सुनवाई व्यवस्था के तहत ,, गवाहान को , गवाह देने के पहले ,, पुलिस अधिकारी द्वारा , पूरी तरह से , एक एक तथ्य बताये , फिर लोक अभियोजक , अपर लोक अभियोजक के समक्ष , ऐसे गवाह , पृथक से गवाह को समझाने के कक्ष की व्यवस्थाएं कर , गवाहान को फर्द बरामदगी , सहित हर बिंदु और प्रशिक्षित किया जाए अपराधी का वकील , गवाह से बचाव में गुमराह करने के लिए , किस तरह के सवाल करेंगे , और उनका जवाब सत्य पर अटल रहने के लिए किस तरह से आना चाहिए , उस का विशेष पूर्व रिहर्सल , होना ज़रूरी है , क्योंकि ऐसे मामलों में कढ़ी से कढ़ी टूटी , और बस , पूर्व न्यायिक दृष्टांतों के तहत अपराधियों को फायदा मिलने की संभावना बनी रहती है , ऐसे में निखिल के परिवार , उनके समाज को , अब सदमे से उबरना होगा , निखिल कोटा का बेटा था , उसके न्याय के साथ , कोटा का हर नागरिक ,, हर समाज खड़ा है , में खुद अपनी विधिक जानकारी के साथ , निखिल के दोषियों को दंडित करवाने के लिए हर सम्भव मदद देने का भरोसा दिलाता हूँ ,, लेकिन इस मामले को , पूर्व गलतियों से सबक़ लेकर , परिस्थित जन्य ,साक्ष्य कढ़ी से कढ़ी मिलाने की व्यवस्था की पुष्टि करने के लिए , गवाहान , को पूर्व प्रशिक्षण , रिहर्सल , मूक कोर्ट की तरह समझाइश , होना ही चाहिए , इसके लिए , जिला कलेक्टर , पुलिस अधीक्षक मिलकर , गवाहों की सुरक्षा , केस ऑफिसर स्कीम में नियुक्त , अधिकारी ,, गवाहान खर्च , प्रॉसिक्यूशन को अतिरिक्त बजट , व्यवस्थाओं , समझाइश कक्ष जहाँ मूक कोर्ट की तरह , गवाहान को हर संभावित बचाव पक्ष के सवाल , सहित सभी मुद्दों पर ,पूर्व प्रशिक्षित किया जा सके ,और इस मामले की सुनवाई भी , दिन प्रति दिन हो , इसके लिए माननीय हाईकोर्ट से भी निवेदन करवाया जा सके , ताकि कोटा सहित , राजस्थान में , अवैध चौथ वसूली ,लूट को लेकर , ऐसी घिनौनी ,, घृणास्पद , नृशंस हत्या , और सुबूत मिटाने की साज़िश करने वाले , अपराधियों , उनके समर्थकों के दिलों में खौफ जाग्रत हो सके , और ऐसी न्यायिक प्रक्रिया अपराधियों के खिलाफ , कोटा ही नहीं , राजस्थान ही नहीं , देश भर की न्यायिक प्रक्रिया के बाद , साक्ष्य की हुबहु पुष्टि , अदालत में करवाकर , संदेह की ज़रा भी गुंजायश न रहें और एक मिसाल क़ायम हो सके ,, अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
21 अगस्त 2021
निखिल , निखिल , निखिल , कोटा की एक दुर्दांत , अपहरण के बाद हत्या की दिल हिला देने वाली ,, खतरनाक घटना ,, अपराधी पकड़े गए , अब उन्हें सज़ा कैसे मिले , इस पर चिंतन मंथन होना चाहिए
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