सांसदों के आपराधिक मुक़दमे को लेकर सुप्रीमकोर्ट चाहे सख्त हो , लेकिन निर्वाचन आयोग और , पार्टियों के राजनितिक दलों के कानों में , नैतिकता की जूं हरगिज़ नहीं रेंगने वाली , यहां खुद , भाजपा के वरिष्ठ नेताओं , मुख्यमंत्री स्तर के लोगों के भी , ऐसे ही मुक़दमे वापस हुए है , जबकि दो बच्चों , आपराधिक रिकॉर्ड वाले चुनाव नहीं लड़ सकेंगे इस मामले में , आज भी सिर्फ नगर पालिका , नगर निगम के चुनावों तक ही , इसे सीमित रखा है ,, विधायक , सांसद , राज्य सभा सदस्यों के लिए यह नहीं है , ,इसे पक्षपात , बेईमानी , जनता को उल्लू बनाना कहते है , अख्तर
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