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10 जुलाई 2021

*ये "सज्जन" तो फिर दुर्जन कौन..?

 

*ये "सज्जन" तो फिर दुर्जन कौन..?*
एक,दो नहीं शुक्रवार को एसीबी ने
5 घूसखोर पकड़ कर इतिहास रच डाला।अजमेर में आरपीएससी के कनिष्ठ लेखाकार को 23 लाख की घूस मांगने पर एसीबी ने 22 लाख के डमी नोट थमा राज्य में शायद ये पहली रंगे हाथ गिरफ्तारी की है. घूसखोर *सज्जन* की अक्ल पर ये भाटा पटकने जैसा है।फरियादी से सज्जन ने अच्छी मार्किंग कराने के एवज में 40 लाख मांगे थे,बाद
में तोड़बट्टा पच्चीस पर निपटा।इस
बड़ी रकम का जुगाड़ नहीं होने पर
एसीबी चीफ सोनी ने डमी नोट की
तिकड़म लगाई तो सज्जन फंदे में
आ गया। एसीबी इस मेगा डील के पर्दे के पीछे के सूत्रधार तलाशने में जुट गई है।जिन सदस्यों तक बड़ी
रकम पहुंचाने का जिक्र सज्जन ने
किया था।एसीबी अब उन्हें राडार
पर ले रही है।अजमेर रेवेन्यू बोर्ड मामले को अभी ज्यादा दिन नहीं
हुए हैं।जहां पैसों के दम पर न्याय की तिजारत का एसीबी पर्दाफाश
कर चुकी है।वहां बड़ी मछलियों ने
तालाब को गंदा कर रखा था।जहां
मगरमच्छ के एसीबी के राडार पर नहीं आने का मलाल है।एसीबी के
आए दिन मच्छर भुनगे मारने जैसे
कामों की श्रृंखला में इस तरह की
बड़ी कार्यवाहियां ही उसके नाम में
चार चांद लगा रही है। गौरतलब ये है कि कुछ चौकियों की परफॉर्मेंस
इस सबके बावजूद कमजोर है।
डीजीपी सोनी के नेतृत्व में हैट्रिक पुरानी बात है।चौके,छक्के लगाने की दौड़ में एसीबी के जांबाज अब
प्रदेश में रिकॉर्ड बनाने के साथ ही भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की
जीरो टॉलरेंस नीति पर खरे उतर रहे हैं।डीजीपी सोनी बताते हैं कि
विभाग को रोजाना ढेरों शिकायतें
मिलती हैं।कई मामलों में वे पहल
कर पीड़ितों को न्याय दिलवाने में
सहयोग करते हैं।बढ़ते भ्रष्टाचार में
एसीबी की जिम्मेदारी ज्यादा बढ़ी है।जिम्मेदारी के सही निर्वहन ने ही
रिकॉर्ड बनाने में मदद की है।
इधर एक चौंकाने वाली खबर यह आई कि राज्य में पुलिस ने अपनी
मांगों पर ट्विटर ट्रेंड अभियान को
शुरू किया है।पुलिस का एक रूप
ही एसीबी है और एसीबी के टार्गेट
भी सबसे ज्यादा पुलिस वाले हुए हैं।एक तरफ पुलिस भ्रष्ट आचरण
की छवि लिए हुए है दूसरी सच्चाई
ये है कि नेचर अगेंस्ट ड्यूटी पुलिस
वाले निभा रहे हैं।आज भी पुलिस
में एक ईमानदार एसआई को सेवा
निवृत्ति तक खास पगार नहीं मिल
रही।फिर पैसा दे कर सिपाही बना
जवान बीसों अंगुलियां करप्शन के कढ़ाह से कैसे दूर रखेगा?अफसर
खुद जब बजरी और दूसरे अवैध धंधों में चांदी बनाने में लगे हों तो
बेचारे सिपाही की औकात क्या?
प्रदेश में भ्रष्टाचार इन दो तीन वर्ष में बढ़ा हो या फिर एसीबी ही पंजे
झाड़ कर भ्रष्टाचारियों को निपटा
रही हो।कुल मिलाकर इसने राज्य
में करप्शन की जड़ों को हिला कर
रख दिया है।रिश्वतखोर बाज नहीं
आएंगे तो एसीबी शायद कभी भी
बाज नहीं आएगी।कम से कम यह
डीजीपी सोनी के रहते मुमकिन न
होगा।
*-अशोक जैन,स्वतंत्र पत्रकार- 9414211451*

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