इंसानियत जिंदा रहनी चाहिए सूचना केंद्र ऑफीसर हरिओम चन्देल के डी अब्बासी कोटा मई। हमेशा सच बोलने और मजलूमो के दर्द को अपना दर्द समझने वाले कोटा सूचना केंद्र के अफसर उपनिदेशक हरिमोहन चन्देल का एक बार फिर गरीबो और मजदूरों और इंसानियत के लिये अपना दर्द फिर झलका जब उनके सामने यह बात आई कि एक पिता को अपनी पुत्री का शव मजबूरी में अपनी कार के आगे की सीट पर बांधकर अपने घर लेजाना पड़ा तो उनसे रहा नही गया और उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना दर्द इस तर प्रकट किया है। उन्होंने अपने इस दर्द को अपने इन अल्फाजो में इस तरह लिखा है कि
सुख दुख..धन दौलत...पद और पावर आते जाते रहते है........मानवीयता जिंदा रहनी चाहिए.... एक दूसरे के सुख दुख में भागीदार बने...प्रशासन ने मदद के लिए नम्बर जारी कर रखे है कही भी शोषण हो, सहायता की आवश्यकता हो तो कोई भी नागरिक उनको सूचना देकर भी पीड़ित व्यक्ति की मदद प्राप्त कर सकता है। हरिमोहन सिंह चन्देल अपनी जेब से गरीबो और मजलूमो की मदद करते रहते है। पिछली बार लॉक डाउन में भी अफसर हरिमोहन सिंह चन्देल ने एक परिवार को अपनी जेब से खर्च कर उसका उपचार कराकर उसके शहर पहुंचाने की व्यवस्था की थी। शहर .... एक समय और एक ही प्रकार का स्थान....कोटा में कोरोना काल मे मददगार बनकर आगे आ रहे लोगों की कमी नही है...जिससे जैसा बन रहा है मददकर रहा है...एमबीएस अस्पताल के बाहर लग्जरी गाड़ी में बिना दिखावे के भोजन के पैकेट वितरित करता युवा है जो जरूरतमंदों को बुला बुलाकर मदद कर रहा है। हरिओम सिंग चन्देल कोरोना काल मे अपने स्वास्थ्य की बिना परवाह किये कोटा कलेक्टर उज्ज्वल राठौर के साथ बिना नागा, बिना थके उनके साथ लगातार चौबीसो घण्टे काम करते रहे जिसके कारण दो बार बीमार तक हो गए लेकिन काम मे कभी रुकावट नही आने दी। हरिओम सिंह चन्देल के स्वभाव में ईमानदारी से लगातार घण्टो काम करने की आदत नजर आती है।
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