एक गुल जिसपर नाज़ है पुरे लाडपुरा विधानसभा क्षेत्र को ,,,एक गुल जिसने
कोटा ज़िले की ही नहीं ,,राजस्थान की पूरी कांग्रेस को महका दिया है ,,,एक
नईमुद्दीन जो हार कर भी जीते है ,,,एक नईमुद्दीन जो हार कर भी लाडपुरा
विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं के दिलों की धड़कन ,आने वाले कल के शासन में
विकास और मुसीबतों से छुटकारे की उम्मीद बने है ,,जी हाँ दोस्तों में कोटा
ज़िले की लाडपुरा विधानसभा क्षेत्र के चुनाव नतीजों से जुड़े कोटा ज़िले के
चुनाव नतीजों की बात कर रहा हूँ ,सभी को पता है गुल नाज़ ,,उनके पति
नईमुद्दीन उनके अपने क्षेत्र लाडपुरा विधानसभा क्षेत्र में निरंतर सक्रिय
रहकर ,,अमीर ,गरीब ,मजदुर ,किसानों के मददगार रहे है ,,इस क्षेत्र में
हिन्दू मुस्लिम एकता की मिसाल बने भाई नईमुद्दीन गुड्डू ,,इस क्षेत्र में
निरंतर फैलाई गयी नफरत के बाद भी हज़ारों हज़ार हिन्दू समाज के भाई बहनों के
चहेते है ,यह लोग आज भी नईमुद्दीन गुड्डू के लिए जान देने और जान लेने को
तत्पर रहते है ,यह प्यार ,यह विश्वास नईमुद्दीन गुड्डू ,उनके परिवार ने
अपने क्षेत्र के भाइयों का यूँ नहीं जीता है ,इसके लिए वोह हमेशा बिना किसी
बहाने बाज़ी के ,आंधी ,,तूफान ,बरसात ,दिन ,,रात की परवाह किये बगैर लोगों
के दुःख दर्द में शामिल रहते ,है ,यही वजह है के ,पोलोराइजेशन के बावजूद भी
,नईमुद्दीन गुड्डू के समर्थन से गुलनाज ,,लाडपुरा विधानसभा क्षेत्र में
सर्वाधिक वोट लेकर आयी है ,,जितने वोट गुलनाज के आये है ,,उससे आधे वोटों
में तो लोग विधायक बन गए है ,,, कोटा ज़िले के सर्वाधिक वोट हांसिल करने
वाली गुलनाज कांग्रेस की पहली प्रत्याक्षी है ,,,सभी जानते है कांग्रेस
के चुनावी प्रबंधन के तहत गुलनाज को टिकिट देने के बाद ,,अल्पसंख्यक मतदाता
कोटा ज़िले में कांग्रेस के पक्ष में एके जुट लामबंद हुए नतीजन ,विकट
परिस्थितयों के बावजूद भी ,ज़िले की सभी विधानसभा क्षेत्रों में
,अल्पसंख्यकों के वोट बिना विभाजित हुए एक मुश्त पढ़े ,और नतीजा देख ले
,,कोटा उत्तर ,,सांगोद ,,पीपल्दा क्षेत्रों में देखिये हमारी जीत
सुनिश्चित हुई है ,जबकि कोटा दक्षिण में विकट परिस्थियों के बावजूद भी हार
का अंतर् काफी घट गया है ,, खेर चुनाव है ,हार जीत चलती ,है लेकिन लाडपुरा
विधसंसभा क्षेत्र जहाँ विश्व प्रसिद्ध कोटा डोरिया साडी का उत्पादन केंद्र
है ,लाडपुरा विधासनभा क्षेत्र जहाँ विश्व का एक मात्र विभीषण का मंदिर है
,,,इस क्षेत्र के कंसुआ में ऐतिहासिक आस्थाओं का प्रतीक है ,,यहां किसानों
की अपनी पहचान है ,यहां उद्योग लगे है ,लेकिन फिर भी कई सालों से इस
क्षेत्र के लोग समस्याओं से जूझ रहे है ,,,,लाडपुरा विधानसभा क्षेत्र का
मतदाता इस चुनाव परिणाम से आश्चर्यचकित है ,,,कांग्रेस का वोट अचानक दल
बदल के बाद कोंग्रेसी नेता को भाजपा से प्रत्याक्षी बनाये जाने के बाद दो
हिस्सों मे बंटा ,,कुछ निजी नाराज़गी ,गुस्सा ,,ईर्ष्या ,,खासतौर पर
कांग्रेस के लिबास में घुसे आंतरिक रूप से शामिल कुछ चड्डी गेंग के
सदस्यों की कांग्रेस संविधान के खिलाफ विचारधारा ,,आकस्मिक भीतरघात ,की ही
वजह रही के हम यह सीट जीती हुई बाज़ी होने पर भी हार गए ,लेकिन ख़ुशी की बात
यह है ,के इस एक सीट के प्रत्याक्षी की लामबन्दी की वजह से हम तीन सीटें
अतिरिक्त गारंटी से जीत पाए है ,इसलिए गुलनाज हार कर भी जीती है ,कांग्रेस
की चुनावी रणनीति हार कर भी जीती है ,बस अब ज़रूरत है इस क्षेत्र में विकास
की ,आम लोगो की समस्याओं के समाधान की ,शान्ति सद्भावना ,,रोज़गार की ,,,यह
सब कांग्रेस के विधायक के बगैर मुमकिन तो नहीं क्योंकि पांच साला हिसाब के
बाद खुद लाडपुरा क्षेत्र के लोग समझ जाएंगे जिन्हे उन्होंने चुना है
,विधानसभा में उन्होंने उनके लिए कितनी समस्याएं ,कितने सवाल उठाये है
,,लाडपुरा की जनता के लिए उनके विधायक ने कितना संघर्ष किया है ,,लाडपुरा
के लोग उनकी विधायिका से कितने बजे से कितने बजे तक मिल सकेंगे ,,मिल भी
सकेंगे या नहीं ,,,यह वक़्त बतायेगा ,,,लेकिन प्रतिवर्ष दो करोड़ रूपये खर्च
करने के लिए जो लाडपुरा विधायक को मिलेंगे वोह सही जगह लगे इस पर प्रतिपक्ष
के नाते कांग्रेस नज़र रखेगी ,सांसद कोष से लगा अधिकतम रुपया इस क्षेत्र
में लगे इसकी कोशिश वोटरों को दबाव बनाकर करना चाहिए दिल्ली की योजनाए इस
क्षेत्र में पहुंचे ,,इधर नईमुद्दीन गुड्डू,,गुलनाज इस क्षेत्र में गैर
सियासी सेवा भाव से जुटे रहने की घोषणा पूर्व में ही कर चुके है ,ऐसे में
क्षेत्र के लोगो की भावनाओं को देखते हुए अप्रत्यक्ष रूप से इस क्षेत्र के
लोगो में से किसी को सरकार में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए ,,,जबकि कांग्रेस
के कार्यर्ताओं को एक जुट होकर इस क्षेत्र की आहत जनता ,इस क्षेत्र के
,मज़दूर ,,किसान ,बुनकर ,,व्यापारी ,,गरीबी से संघर्ष कर रहे तबके के लोगो
को चिन्हित कर उन्हें इन्साफ दिलाने का संघर्ष करना होगा ,इस क्षेत्र में
जो विकास कार्य नहीं हुए ,जो सिंचाई ,,तुलाई ,,रोज़गारोन्मुखी योजनाए लागु
नहीं हो सकीं ,उन्हें लागु करवाने के लिए सरकार के समक्ष एक्शन प्लान रखकर
इसी बजट में ऐसी घोषणाओं को करवाने के प्रयास होंगे ,,खूब लड़ी मर्दानी वोह
तो झांसी की रानी थी ,,खुद जीती या हारी अलग बात है ,लेकिन कांग्रेस को
कोटा में तीन सीटें जिताने के लिए यह उनकी क़ुर्बानी थी ,,अख्तर खान अकेला
कोटा राजस्थान
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