ऐ ईमानवालों बाकसरत खु़दा की याद किया करो और (41)
सुबह व शाम उसकी तसबीह करते रहो (42)
वह वही तो है जो खु़द तुमपर दूरूद (दर्दों रहमत) भेजता है और उसके फ़रिश्ते ताकि तुमको (कुफ्ऱ की) तारीकि़यों से निकालकर (ईमान की) रौशनी में ले जाए और खु़दा ईमानवालों पर बड़ा मेहरबान है (43)
जिस दिन उसकी बारगाह में हाजि़र होंगे (उस दिन) उनकी मुरादात (उसकी तरफ से हर कि़स्म की) सलामती होगी और खु़दा ने तो उनके वास्ते बहुत अच्छा बदला (बेहश्त) तैयार रखा है (44)
ऐ नबी हमने तुमको (लोगों का) गवाह और (नेकों को बेहश्त की) खुशख़बरी देने वाला और बदों को अज़ाब से डराने वाला (45)
और खु़दा की तरफ उसी के हुक्म से बुलाने वाला और (इमान व हिदायत का) रौशन चिराग़ बनाकर भेजा (46)
और तुम मोमिनीन को खुशख़बरी दे दो कि उनके लिए खु़दा की तरफ से बहुत बड़ी (मेहरबानी और) बख़्शिश है (47)
और (ऐ रसूल) तुम (कहीं) काफिरों और मुनाफिक़ों की इताअत न करना और उनकी ईज़ारसानी का ख़्याल छोड़ दो और खु़दा पर भरोसा रखो और कारसाज़ी में खु़दा काफ़ी है (48)
ऐ ईमानवालों जब तुम मोमिना औरतों से (बग़ैर मेहर मुक़र्रर किये) निकाह करो उसके बाद उन्हें अपने हाथ लगाने से पहले ही तलाक़ दे दो तो फिर तुमको उनपर कोई हक़ नहीं कि (उनसे) इद्दा पूरा कराओ उनको तो कुछ (कपड़े रूपये वग़ैरह) देकर उनवाने शाइस्ता से रूख़सत कर दो (49)
ऐ नबी हमने तुम्हारे वास्ते तुम्हारी उन बीवियों को हलाल कर दिया है जिनको तुम मेहर दे चुके हो और तुम्हारी उन लौंडियों को (भी) जो खु़दा ने तुमको (बग़ैर लड़े-भिड़े) माले ग़नीमत में अता की है और तुम्हारे चचा की बेटियाँ और तुम्हारी फूफियों की बेटियाँ और तुम्हारे मामू की बेटियाँ और तुम्हारी ख़ालाओं की बेटियाँ जो तुम्हारे साथ हिजरत करके आयी हैं (हलाल कर दी और हर ईमानवाली औरत (भी हलाल कर दी) अगर वह अपने को (बग़ैर मेहर) नबी को दे दें और नबी भी उससे निकाह करना चाहते हों मगर (ऐ रसूल) ये हुक्म सिर्फ तुम्हारे वास्ते ख़ास है और मोमिनीन के लिए नहीं और हमने जो कुछ (मेहर या क़ीमत) आम मोमिनीन पर उनकी बीवियों और उनकी लौंडियों के बारे में मुक़र्रर कर दिया है हम खू़ब जानते हैं और (तुम्हारी रिआयत इसलिए है) ताकि तुमको (बीवियों की तरफ से) कोई दिक़्क़त न हो और खु़दा तो बड़ा बख़शने वाला मेहरबान है (50)
सुबह व शाम उसकी तसबीह करते रहो (42)
वह वही तो है जो खु़द तुमपर दूरूद (दर्दों रहमत) भेजता है और उसके फ़रिश्ते ताकि तुमको (कुफ्ऱ की) तारीकि़यों से निकालकर (ईमान की) रौशनी में ले जाए और खु़दा ईमानवालों पर बड़ा मेहरबान है (43)
जिस दिन उसकी बारगाह में हाजि़र होंगे (उस दिन) उनकी मुरादात (उसकी तरफ से हर कि़स्म की) सलामती होगी और खु़दा ने तो उनके वास्ते बहुत अच्छा बदला (बेहश्त) तैयार रखा है (44)
ऐ नबी हमने तुमको (लोगों का) गवाह और (नेकों को बेहश्त की) खुशख़बरी देने वाला और बदों को अज़ाब से डराने वाला (45)
और खु़दा की तरफ उसी के हुक्म से बुलाने वाला और (इमान व हिदायत का) रौशन चिराग़ बनाकर भेजा (46)
और तुम मोमिनीन को खुशख़बरी दे दो कि उनके लिए खु़दा की तरफ से बहुत बड़ी (मेहरबानी और) बख़्शिश है (47)
और (ऐ रसूल) तुम (कहीं) काफिरों और मुनाफिक़ों की इताअत न करना और उनकी ईज़ारसानी का ख़्याल छोड़ दो और खु़दा पर भरोसा रखो और कारसाज़ी में खु़दा काफ़ी है (48)
ऐ ईमानवालों जब तुम मोमिना औरतों से (बग़ैर मेहर मुक़र्रर किये) निकाह करो उसके बाद उन्हें अपने हाथ लगाने से पहले ही तलाक़ दे दो तो फिर तुमको उनपर कोई हक़ नहीं कि (उनसे) इद्दा पूरा कराओ उनको तो कुछ (कपड़े रूपये वग़ैरह) देकर उनवाने शाइस्ता से रूख़सत कर दो (49)
ऐ नबी हमने तुम्हारे वास्ते तुम्हारी उन बीवियों को हलाल कर दिया है जिनको तुम मेहर दे चुके हो और तुम्हारी उन लौंडियों को (भी) जो खु़दा ने तुमको (बग़ैर लड़े-भिड़े) माले ग़नीमत में अता की है और तुम्हारे चचा की बेटियाँ और तुम्हारी फूफियों की बेटियाँ और तुम्हारे मामू की बेटियाँ और तुम्हारी ख़ालाओं की बेटियाँ जो तुम्हारे साथ हिजरत करके आयी हैं (हलाल कर दी और हर ईमानवाली औरत (भी हलाल कर दी) अगर वह अपने को (बग़ैर मेहर) नबी को दे दें और नबी भी उससे निकाह करना चाहते हों मगर (ऐ रसूल) ये हुक्म सिर्फ तुम्हारे वास्ते ख़ास है और मोमिनीन के लिए नहीं और हमने जो कुछ (मेहर या क़ीमत) आम मोमिनीन पर उनकी बीवियों और उनकी लौंडियों के बारे में मुक़र्रर कर दिया है हम खू़ब जानते हैं और (तुम्हारी रिआयत इसलिए है) ताकि तुमको (बीवियों की तरफ से) कोई दिक़्क़त न हो और खु़दा तो बड़ा बख़शने वाला मेहरबान है (50)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
दोस्तों, कुछ गिले-शिकवे और कुछ सुझाव भी देते जाओ. जनाब! मेरा यह ब्लॉग आप सभी भाईयों का अपना ब्लॉग है. इसमें आपका स्वागत है. इसकी गलतियों (दोषों व कमियों) को सुधारने के लिए मेहरबानी करके मुझे सुझाव दें. मैं आपका आभारी रहूँगा. अख्तर खान "अकेला" कोटा(राजस्थान)