फतेहपुर थानाधिकारी मुकेश क़ानूनंगो और सिपाही रामप्रकाश की सीकर के ग्राम
बेसवा में हुई हत्या ,,किसी पुलिस कर्मी की राजकीय कार्य करते वक़्त की गयी
हत्या ,नहीं ,यह एक सिस्टम की हत्या है ,राजस्थान सरकार की हत्या है ,सरकार
में बैठे निरीक्षक अधिकारीयों ,,गृहमंत्री ,,मुख्यमंत्री खुद राजस्थान
सरकार के सिस्टम की हत्या है ,,एक थानाधिकारी अभियुक्त को पकड़ने रूटीन
सिस्टम में जाता है ,अप्रशिक्षित पुलिसकर्मी ,अचानक हुए हमले से घबराकर
मुक़ाबला करने की जगह भागना चाहते है ,एक अकेला बहादुर थानाधिकारी
मुकेश क़ानून गौ ,,सिपाही रामप्रकाश क्या करते ,निहत्थे थे ,आकस्मिक हमला
था ,उन्हें कोई गोलीबारी की छूट नहीं थी ,पुलिस बीट प्रणाली सिस्टम की
कमज़ोरी ,पुलिस की आंतरिक मुखबिरी सिस्टम की कमज़ोरी ,पुलिस के सोर्स जिन्हे
सरकारी सिस्टम कुछ भत्ते मिलते है ,उनकी कमज़ोरी ही थी ,जो इस बदमाश हत्यारे
के बारे में पुलिस पूर्वानुमान ही नहीं लगा पायी ,हर थाने पर अपराधियों के
सिस्टम को खंगालने के लिए राउन्ड्री शीट ,हिस्ट्री शीट ,,,नए आवागमन वालों
की मूमवेंट शीट ,बीट की गतिविधियों की सभी जानकारियां होती है ,शांति
समितियां ,सी एल जी समितियां ,,इन सभी सूचनाओं का निरीक्षण पहले थानाधिकारी
,,फिर उप अधीक्षक ,,,फिर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ,फिर पुलिस अधीक्षक ,फिर
पुलिस रेंज महानिरीक्षक ,,क्राइम मीटिंग्स ,,फिर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक
,पुलिस महानिदेशक की मॉनिटरिंग उनका थानों का निरीक्षण सब कुछ तो है ,,फिर
बदमाश ,सियासी बदमाश ,सियासी ठेकेदार ,,अपराधियों की पत्रावलियां कैसे कहाँ
रुक जाती है ,,,क्यों यह सूचनाएं दबा दी जाती है ,,कहीं इस सिस्टम में
गड़बड़ तो है ,अगर बूंदी में पुलिस अधीक्षक रहते हुए तात्कालिक पुलिस अधीक्षक
पंकज चौधरी ,नेनवा में दंगा भड़काने की साज़िश में लगे प्रभावशाली लोगो की
सिफारिश के बाद भी दंगाइयों के खिलाफ निष्पक्ष कार्यवाही करते है तो यही
सरकार ,यही मुख्यमंत्री ,यही गृहमंत्री पंकज चौधरी की जान के दुश्मन हो
जाते है ,चुन चुन कर उन्हें परेशांन करने की साज़िशे रचते ,है ,लेकिन पुलिस
में दो वर्ग हो जाते है ,एक वर्ग ऐसे अधिकारी पंकज चौधरी के खिलाफ साज़िशों
में सरकार का हथियार बनता है तो दूसरा वर्ग पंकज चौधरी के साथ हो रहे
अन्याय के खिलाफ आवाज़ तो नहीं उठाता ,लेकिन बस देखता रहता है ,एक वर्ग वोह
भी है जो ऐसे जांबाज़ बहादुर पुलिस अधिकारी पंकज चौधरी के संघर्ष को सलाम
करता है ,तो दोस्तों इस पुलिस सिस्टम में चाहे हमने पुलिस क़ानून नया बना
दिया हो ,,चाहे पुलिस आयोग ,,कल्याण आयोग ,,सेवानिवृत्त पुलिस कर्मियों का
संघ हो ,, कोई फ़र्क़ नहीं पढता ,,सरकार के इस सड़े गले सिस्टम को हमे बदलना
होगा ,,पुलिस कर्मियों ,अधिकारीयों को विशेष प्रशिक्षण ,,आधुनिक हथियार
,,सी सी टी वी कैमरे ,,,बुलेट प्रूफ जैकेट ,,खोजी प्र्रशिक्षित खबरी टीम
,,विशेष सोर्स मुखबिरी भत्ता ,,अतिरिक्त भत्ते वगेरा तो उपलब्ध कराना ही
होंगे ,,सरकार का क्या ,,शहीद को तिरंगे में लपेटेंगे ,,सियासत करेंगे
,,कुछ मुआवज़ा दे देंगे ,,,लेकिन पुलिस कर्मियों ,,उनके परिजनों ,सेवानिवृत
पुलिसकर्मियों ने अगर आवाज़ नहीं उठाई तो यह सब ऐसा ही चलता रहेगा
,,क्योंकि पत्रकार ,,चिंतक ,,लेखक ,,कवि ,लिखेंगे नहीं ,,अंधी सरकार देखेगी
नहीं सियासी दल ,,सिर्फ सियासत करेंगे ,,,इसलिए खुद की लड़ाई खुद लड़ो ,,हम
आपके साथ है ,,ईश्वर ,,खुदा ,,अल्लाह भी आपकी मदद करेगा ,,,,,,अख्तर खान
अकेला कोटा राजस्थान
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