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22 अगस्त 2017

खोदा पहाड़ निकली चुहिया ,वोह भी मरी ,हुई ,,ट्रिपल तलाक़ ,,देश में मुद्दा बनाया गया

खोदा पहाड़ निकली चुहिया ,वोह भी मरी ,हुई ,,ट्रिपल तलाक़ ,,देश में मुद्दा बनाया गया ,,ट्रिपल तलाक़ पर बिना तलाक़ के पत्नी को छोड़ देने वाले लोगो ने ,, मुस्लिम महिलाओ ,,नो करोड़ मुस्लिम महिलाओ की मदद का ऐलान कर सियासी मुद्दा बनाया ,,अलग अलग महिलाओ के निजी मामले जीने गैर इस्लामिक ,,गैर क़ुरानी ,,ट्रिपल तलाक़ देकर ,,उनके शोहर ने उन्हें उत्पीड़ित किया था वोह सुप्रीम कोर्ट पहुंची ,,बात वही हुई जो मेने कही थी ,,क़ुरान के आदेश के विपरीत कोई भी तलाक़ ,,तलाक़ ऐ बिद्दत ,,गैर क़ानूनी क़रार दी गयी ,,पांच जज खुद इस मुद्दे पर सहमत नहीं खुद चीफ जस्टिस ने अपनी व्याख्या पृथक से की ,,,टी वी ,,,पत्रकार और नेता लोग इस फैसले का अलग अलग मतलब बता रहे है ,,लेकिन यह तो फैसला 2002 में शमीम आरा वाले मामले में हो चूका है और इसी फैसले को देश भर में लागू कर ,,अदालतों में ,,बिना किसी मतलब के ,,बिना किसी रीज़न के , ,,क़ुरआन के विधि नियम की पालना किये बगैर बिना समझाइश ,,बिना पंचायत समझाइश के एक साथ ट्रिपल तलाक़ अवैध है ,,आज भी हिंदुस्तान की अदालतों में 2002 के फैसले के तहत अदालतों ने ऐसी तलाक़ को तलाक़ नहीं माना और पीड़ित महिलाओं को इंसाफ दिलवाया है ,,करोड़ो करोड़ के विज्ञापन ,,घपलेबाज़िया ,,भूख,, रोटी,, गरीबी ,,बेरोज़गारी सभी मुद्दे मिडिया ट्रिपल तलाक़ की रिश्वत में निगल गया ,,देश के ज़िम्मेदार जजों ने महीनो मशक़्क़त की विश्व के सभी मुस्लिम क़ानूनों को पढ़ा ,,पुराने फेसलो का अवलोकन किया ,,पुरे 403 पेज का फैसला लिखा ,,एक ने कहा ,,ट्रिपल तलाक़ शमीम आरा वाले मामले में क़ुरआन के फैसले के खिलाफ बिना किसी रीज़न ,,बिन समझाइश के अवैध है ,,,,जो पहले ही कहा जा चुका था ,,तीन जज ने ,,शरीयत एप्लिकेशन एक्ट की धारा 2 जो किसी भी व्यक्ति को मुस्लिम सामाजिक क़ानूनों से जीने का हक़ देती है उसे अवैधानिक घोषित कर ख़ारिज कर दिया ,,,,एक ने छह माह में शरीयत और क़ुरआनी क़ानून के तहत तलाक़ ऐ बिद्दत ,,के लिए क़ानून बनाने के सरकार को निर्देश देते हुए ,,तलाक़ ऐ बिद्दत से इस अवधि में मुस्लिम पुरुषो को पाबंद कर दिया ,,तो सामूहिक रूप से जिन महिलाओ को बिना समझाइश के एक साथ तीन तलाक़ दी गयी ,,उस तलाक़ ऐ बिद्दत को ,,सेटसाइड कर दिया गया ,,यानी अदालत में इंसाफ के लिए गयी महिलाओं को उनकी याचिका स्वीकार कर तलाक़ को अवैध क़रार कर खारिज कर दिया ,,अब वोह महिलाये फिर से अपने पति की विधिक पत्नी है ,,लेकिन उन महिलाओ को अगर ,बिना तलाक़ के ,उनके पति ,,महापुरुषों की तरह ही छोड़े रखेगें तो उनके खिलाफ क्या कार्यवाही होगी ,क़ानून ने कोई जवाब दिया ,,ऐसे पुरुष जो अपनी पत्नी को बिना तलाक़ दिए ,,बेवजह छोड़ देते है ऐसे पुरुषो के खिलाफ क्या क़ानून होना चाहिए कोई जवाब इस फैसले में नहीं आया ,,अब सुप्रीम कोर्ट ने न्याय मांगने गयी महिलाओ का तलाक़ तो अवैध घोषित कर ख़ारिज कर दिया ,,लेकिन इन ब्याहता पत्नियों को इनके पति से गुज़ारा खर्च ,अन्य हुक़ूक़ ,दाम्पत्य निर्वहन के मामले में कोई भी जवाब ,,नहीं दिया है ,,कोई हिदायत कोई निर्देश नहीं दिए है ,,,यानी यह महिलाये तलाक़शुदा भी नहीं है और इन्हे पतियों से कोई अधिकार भी नहीं दिलवाये गए है ,,,मेरी मत मानो ,,पूरा फैसला खुद ही पढ़ लो ,,,,,, अब गेंद सरकार के पाले में भी है काश ,सरकार उपेक्षित गैर तलाक़शुदा महिलाये जिन्हे उनके पतियों ने तलाक़ भी नहीं दिया और छोड़ भी रखा है ,,ऐसी महिलाओ के लिए कोई गुज़ाराखर्च ,,रहने ,,गुज़र बसर करने की कोई सुरक्षित योजना बनाकर लागू करे ,,तो ऐसी महिलाये जिनका तलाक़ खारिज होने के बाद वोह शादीशुदा होकर भी पतियों की ठुकराई होने पर उन्हें रोज़ी रोटी मिल सकते ,,,तलाक़शुदा महिला अगर नहीं होगी तो अब परित्यक्ता महिला ज़्यादा हो जाएँगी ,,मुस्लिम मुस्लिम महिलाये महरवसूली और दहेज़ वसूली के लिए रगड़ती रहेंगी ,,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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