कोटा अभिभाषक परिषद के ,,,वरिष्ठ सदस्य ,,श्याम शर्मा के आकस्मिक निधन पर
,,अदालत परिसर में शोक की लहर दौड़ने के साथ ,,एक सवाल गश्त करता रहा
,,अचानक ,,न्यायालय परिसर में ,,हष्ट पुष्ट ,वकील की इस मोत के बाद
,,अभिभाषक परिषद द्वारा ,,शोक व्यक्त करने के लिए आयोजित ,,शोकांजलि के
बाद ,,श्रद्धा स्वरूप ,,,काम बंद रहेगा ,,या इस वक़्त भी ,,,जबरन काम करवाया
जाएगा ,,,,श्याम शर्मा वरिष्ठ ,,ज़िंदादिल ,,विनोदप्रिय ,,,हर दिल अज़ीज़
,,नियमित अदालत आने वाले अभिभाषक थे ,,वोह बुज़ुर्ग में बुज़ुर्ग ,,बच्चो
में बच्चे ,,वकीलों में गिने जाते थे ,,लगातार ,,अभिभाषक परिषद के चुनाव
में ,, अध्यक्ष पद की उम्मीदवारी के रूप में ,,चुनाव में खड़े होना ,,और फिर
सिम्पोजियम में ,,सभी को हंसा हंसा कर लोटपोट करने देने वाली ,,उनकी भाषण
शैली ,,वकीलों के लिए अब यादगार बन गयी ,,श्याम शर्मा आज रोज़ की तरह
नियमित रूप से अदालत परिसर आये ,,उनकी गद्दी पर जाकर बैठे ,,नियमित रूप से
मुझ सहित ,,कई वकील साथियों से उनकी बात हुई ,,मेने भी रोज़ की तरह उनसे
हंसी मज़ाक़ किया ,,फिर में एक अदालत में बयान कराने गया ,,आधे घंटे बाद
,,वापस ,लोटा ,तो एक साथी वकील ने बताया ,,श्याम जी वकील साहब का देहांत हो
गया ,,एक दम धक्का लगा ,,पहले मज़ाक़ समझा ,,लेकिन सच था ,,श्याम जी के सीने
में दर्द की शिकायत हुई ,, सामान्य दर्द समझ कर ,अपने पड़ोसी टाइपिस्ट से
कहकर ,,वोह घर के लिए ऑटो में जाने के लिए निकले ,,लेकिन ऑटो में ही उनकी
साँसे थम गयी ,,,ऑटो चालक ने ,,नयापुरा थाने पर सुचना दी ,,थाने से एक
वरिष्ठ अभिभाषक के पास ,,श्याम जी वकील साहब की सांसे थमने की खबर आयी तो
,,सभी वकील सदमे में आ गए , कोटा अभिभाषक परिषद में तात्कालिक उपचार के लिए
,,एक ,चिकित्सक ,डिस्पेंसरी की मांग लगातार उठती रहे है ,,इसके पूर्व भी
अदालत परिसर में जगदीश नारायण माथुर ,,,,सोहन सिंह सहित कई वरिष्ठ
अभिभाषकों की तबियत बिगड़ने के बाद तत्काल उपचार नहीं मिलने से ,,अकाल मौत
हो गयी है ,,,रोज़ नियमित कई पक्षकार ,,कई वकील अदालत परिसर में ही बीमार
होते है ,,खुद एक न्यायिक अधिकारी भी अदालत परिसर में ही बीमार हुए थे
,,तत्काल उपचार के बाद उन्हें बचाया जा सका था ,,काश अदालत परिसर में आकर
बढे बढे वायदे के रूप में फेंकू हिन्दुस्तानी बनकर डिस्पेंसरी खोलने
,,प्लाट ,,प्लॉटों की क़ीमत कम करने ,,हाईकोर्ट बेंच स्थापित करने ,,,परिसर
में चेंबर बनवाने ,,मूल भूत सेवाएं स्थापित करवाने ,,ढींगे हांकने वालों के
गिरेहबान पर वकील हाथ डालकर ,,उनसे वायदे निभाने के बारे में सवाल करने की
हिम्मत जुटा सके ,,,,जैसे ,,कोटा के वकीलों ने कभी ,,वकीलों को आरक्षित दर
पर भूखंड देने वाले ,,पूर्व मंत्री शांति कुमार धारीवाल के खिलाफ उनके
द्वारा भूखंड आवंटन के बाद भी प्रदर्शन ,,आंदोलन किये थे ,,अब कोटा के
वकीलों का वोह जोश ,,वोह होश ,,वर्तमान सरकार ,,वर्तमान जन प्रतिनिधियों के
खिलाफ क्यों नहीं है ,,सभी के दिल में एक ही सवाल रहता है ,,,,खेर
डिस्पेंसरी तात्कालिक आवश्यकता है ,,वोह तो खुलना ही चाहिए ,,अख्तर खान
अकेला कोटा राजस्थान
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