बिलासपुर।एसपी राहुल शर्मा की अंत्येष्टि के बाद आईजी जीपी सिंह ने बताया कि उन्होंने अपने सुसाइड नोट में बॉस की दखलंदाजी और हाईकोर्ट की नाराजगी को खुदकुशी का कारण बताया है।
मंगलवार की शाम सिटी मजिस्ट्रेट के सामने ऑफिसर्स मेस का वह कमरा खोला गया, जहां शर्मा घटना के पहले ठहरे थे। अंग्रेजी में लिखा यह नोट इसी कमरे से मिला।
मंगलवार की शाम प्रेस कांफ्रेंस में आईजी ने कहा कि उन्होंने पत्नी से बच्चों की अच्छी परवरिश करने की बात कही है। राहुल 18 फरवरी से 13 मार्च तक अवकाश पर थे। 10 मार्च को वे प्रभारी एसपी ध्रुव गुप्ता से मिले और उनसे चार्ज लेने की इच्छा जताई।
बाद में गुप्ता के साथ उनसे मिलने आए। उन्होंने उन्हें चार्ज दिलाया। इसके बाद शर्मा ने सोमवार से ऑफिस में नियमित बैठने की बात कही थी। आईजी के अनुसार रविवार रात करीब 9 बजे वे किसी काम से रायपुर चले गए।
इसी दौरान पता चला कि शर्मा ऑफिसर्स मेस में आकर शिफ्ट हो गए हैं। सोमवार की सुबह 9.45 बजे शर्मा ने उनसे फोन पर बात की और बताया कि वे आज ऑफिस जाएंगे। दोपहर करीब 3 बजे एडिशनल एसपी वेदव्रत सिरमौर ने उन्हें फोन पर बताया कि शर्मा ने खुदकुशी कर ली है। जानकारी मिलते ही सबसे पहले उन्होंने शर्मा को तत्काल हॉस्पिटल ले जाने के निर्देश दिए और मेस का कमरा सील करने के लिए कहा।
उसके बाद खुद बिलासपुर आने के लिए निकल गए। यहां आने के बाद उन्होंने सबसे पहले शर्मा के पिता राजकुमार शर्मा से फोन पर बात की। मंगलवार को परिजनों के आने के बाद शर्मा का पोस्टमार्टम कराया गया। आईजी ने बताया, परिजनों के सामने ही उन्होंने आफिसर्स मेस के उस कमरे को खुलवाया, जहां घटना हुई थी। यहां एक डायरी मिली, जिसमें शर्मा ने अंग्रेजी में अपनी पत्नी जी. गायत्री शर्मा के नाम सुसाइड नोट लिखा था। आईजी प्रेस कांफ्रेंस में सुसाइड नोट लेकर नहीं आए थे। उन्होंने उसमें लिखी बातें पढ़कर पत्रकारों को सुनाई। आईजी ने कहा कि मामले की जांच के बाद सारी बातों का खुलासा होगा।
इसके पहले आईजी जीपी सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट दीपक अग्रवाल सहित पुलिस व प्रशासन के अफसरों की मौजूदगी में कमरे का सील खोला गया। छानबीन में लगे अधिकारियों को शर्मा की डायरी के साथ डेढ़ पन्ने का सुसाइड नोट मिला। सिटी मजिस्ट्रेट की छानबीन देर शाम तक जारी रही। उनके नोट से यह जाहिर हो गया है कि एसपी राहुल शर्मा बॉस की प्रताड़ना का शिकार थे।
इसमें भी संदेह नहीं है कि आईजी जीपी सिंह और राहुल शर्मा के बीच संबंध ठीक नहीं थे। दरअसल, आईजी जीपी सिंह लगातार एसपी के क्षेत्राधिकार और हर काम में दखल दे रहे थे। इसका उल्लेख उन्होंने डायरी व सुसाइड नोट में किया था।
एजेंसी से जांच की जरूरत नहीं
एसपी राहुल शर्मा के अंतिम संस्कार के बाद मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा कि राहुल के रूप में छत्तीसगढ़ का बेटा गया है। उसके सुसाइड केस की जांच राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय एजेंसी से कराने की जरूरत नहीं है। जो घटना हुई, उसके तथ्यों की जांच से ही सारी बातें स्पष्ट हो जाएंगी। पुलिस अधिकारी, डीजीपी और परिजनों के सहयोग से स्पष्ट जांच प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
मंगलवार शाम पत्रकारों से चर्चा में मुख्यमंत्री डॉ. सिंह ने कहा कि दंतेवाड़ा, दुर्ग से बिलासपुर तक राहुल ने बहादुरी के साथ चुनौतियों का सामना करते हुए छत्तीसगढ़ में पुलिस को बेहतर प्रतिष्ठा दिलाई। उन्होंने पुलिस महकमे में ऊर्जावान एवं संघर्षशील अधिकारी के रूप में अपनी पहचान बनाई।
ऐसे अधिकारी के साथ हुई घटना से पूरा प्रदेश स्तब्ध है। आईपीएस अधिकारी के सुसाइड की न्यायिक जांच नाकाफी होने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जांच एजेंसी को लेकर कोई विवाद का विषय नहीं है। घटना के बारे में जो प्राथमिक जानकारी सामने आई है, उसके संदर्भो के साथ पूरी संवेदना के साथ जांच की जा रही है। इसमें वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल हैं।
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
13 मार्च 2012
...तो यह था बिलासपुर एसपी के सुसाइड करने का कारण
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