
क्यूँ
किस्लियें घबरा गए
तुम मेरा
यह वीभत्स
मुस्कुराता चेहरा देख कर ॥
में
आज की सियासत हूँ
आज की राजनीती हूँ
जी हाँ
में वही हूँ
जो वोटों के लियें
हजारों को मरवा देती हूँ
और उनकी लाशों पर बस
यूँ ही
मुस्कुराती हूँ
हाँ में वही हूँ
जो करोड़ों नहीं अरबों नहीं खरबों रूपये के
घोटाले करती हूँ
और बस यूँ ही मुस्कुराती हूँ ॥
में वही हूँ जो देश की इज्ज़त
देश की अस्मत
देश के मान सम्मान का
सोदा करती हूँ
देख लो
आज
मुझ में कहाँ है
इंसानियत कहाँ है मानवता
इसीलियें तो वोटर मुझे चुनते हैं
और में फिर अपना
वीभत्स मुस्कुराता चेहरा
आपके सामने लियें
शासन में आ जाती हूँ
क्यूँ के इसे ही राजनीति कहते है ..इसे ही राजनीति कहते है ......अख्तर कहाँ अकेला कोटा राजस्थान
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
दोस्तों, कुछ गिले-शिकवे और कुछ सुझाव भी देते जाओ. जनाब! मेरा यह ब्लॉग आप सभी भाईयों का अपना ब्लॉग है. इसमें आपका स्वागत है. इसकी गलतियों (दोषों व कमियों) को सुधारने के लिए मेहरबानी करके मुझे सुझाव दें. मैं आपका आभारी रहूँगा. अख्तर खान "अकेला" कोटा(राजस्थान)