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05 अगस्त 2017

राष्ट्रीयता का प्रतीक ,,राष्ट्रिय एकता ,,राष्ट्रिय अखंडता ,,,हमारा गौरव प्रतीक ,यह तिरंगा ,,मान सम्मान का सूचक यह तिरंगा ,, सुरय्या बदरुद्दीन तय्यब द्वारा तैयार किया गया

तिरंगे का डिज़ाइन सुरय्या बदरुद्दीन तैयब ने तैयार किया है ,,,,जी हां दोस्तों राष्ट्रीयता का प्रतीक ,,राष्ट्रिय एकता ,,राष्ट्रिय अखंडता ,,,हमारा गौरव प्रतीक ,यह तिरंगा ,,मान सम्मान का सूचक यह तिरंगा ,, सुरय्या बदरुद्दीन तय्यब द्वारा तैयार किया गया और तीस डिज़ाइनों में से यह डिज़ायन फायनल होकर आज हमारे देश का गौरव बना है ,,,देश की हर जंग ,,देश के हर दुःख ,,हर तकलीफ ,,देश के हर संकट काल में हम सभी का योगदान रहा है ,,,यह देश ,,यह हिन्दुस्तान हमारा था ,,हमारा है ,,चंद मुट्ठी भर कुकुरमुत्ते ,,,जो दीमक की तरह से देश को चाट रहे है ,,वोह चाहे ,,पाकिस्तान ज़िंदाबाद का नारा देने वाले ,,कश्मीरी आतंकवादी हो या फिर सड़को पर राह चलते लोगो की बेवजह हत्या करने वाले ,,अमन सुकुन के दुश्मन भगवा आतंकवादी हो इनसे हमारे देश की अटूट एकता ,,अखडण्ता ,,भाईचारा ,,सद्भावना कभी खत्म नहीं हो सकता ,,यह अमन के दुश्मन ,,विदेशो से घूस लेकर हमारे देश का वातावरण बिगाड़ने की साज़िशों में जुटते है ,और हमारी सरकार के कुछ लोग ऐसे हमलावरों ,,ऐसे गद्दारो को बचाने की कोशिश में जुटते है ,,जबकि हमारे देश का क़ानून ,,कसाब हो ,,अफ़ज़ल गुरु हो ,,प्रज्ञा हो ,,असीमाननंद हो जो भी हो सभी को क़ानून सुनवाई का मौक़ा देता है ,मुफ्त वकील देता है ,,ऐसे में हमारा देश इन्साफ का पूरा मौक़ा देकर ही अपराधी को सजा देता है ,,खेर हमे फिर से नफरत ,,नफरत की हिंसा ,,अंदरूनी तोर पर देश के अमन सुकून को खंडित करने में लगे लोगो के खिलाफ एकजुट होकर प्यार ,,मोहबत ,सद्भावना के पैगाम के साथ आवाज़ उठाना है ,,
जहां तक हमारे प्यारे वतन के राष्ट्रीय ध्वज का सवाल है इसका डिजाइन किसी बंगाली वेंकैया या एनी सेंट ने विकसित नहीं किया बल्कि हैदराबाद से ताल्लुक रखने वाली एक शिक्षित महिला बदरुद्दीन तैयब जी आई सी एस की पत्नी श्रीमती सुरैया तैयब जी ने तैयार क्या था वह हैदराबाद की प्रमुख व्यक्ति सर अकबर हैदरी परिवार से संबंध रखती थीं।श्री सुरैया तय्यब जी ने जहां देश के स्वतंत्रता आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया वहीं अपनी पेंटिंग्स के जरिए लोगों में स्वतंत्रता की भावना पैदा करती रहीं। वह एक बहुत अच्छी कलाकार भी थीं। 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा में जिस समिति ने राष्ट्रीय ध्वज प्रदान किया वह 74 महिला सदस्यों पर ही होता था जिनमें बुलबुल भारत सरोजनी नायडू, जोहरा अंसारी, ज़रीना करीम भाई, सकीना नोमानी, कुदसिया प्रिय दूत, शरीफ़ा हामिद अली, आयशा अहमद , इंदिरा गांधी और खुद सुरैया तैयब जी जैसी महिलाएँ थीं। यह और बात है कि 1921 में बंगाली वेंकैया द्वारा राष्ट्रीय ध्वज का जो डिजाइन प्रदान करने के दावे किए जाते हैं वे वर्तमान राष्ट्रीय ध्वज से काफी अलग था। गौरतलब है कि सुरैया तय्यब जी ने 1916 में महात्मा गांधी राष्ट्रीय तिरंगे के एक नहीं दो नहीं बल्कि 30 डिजाइन पेश किए थे और अंततः उन्ही के तैयार की डिजाइन को ही पारित किया गया और आज 15 अगस्त या 26 जनवरी लाल किले राष्ट्रपति भवन, सरकारी कार्यालयों के भवनों, स्कूलों, कॉलेजों और गली गली में सूर्यया तय्यब जी डिजाइन किया गया तिरंगा लहराया जाता है। आज हम भारतीय गर्व से जय हिन्द का नारा बुलंद करते हैं लेकिन बहुत कम भारतीयों को पता है कि सारी प्रजा को इस नारे का उपहार देने वाला कोई और नहीं बल्कि हैदराबाद के एक प्रतिष्ठित परिवार से संबंध रखने वाले इंजीनियर अबुल सगरानी ज़ैनुल आबेदीन अबुल थे। व्याकरण स्कूल हैदराबाद के इस छात्र को सुभाष चंद्र बोस के साथ रहने का भी गौरव प्राप्त किया। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की इच्छा पर ही उन्होंने जय हिन्द का नारा लिखा था,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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