होली से जुड़ी कई कथाएं पुरातन ग्रंथों में मिलती है। इन कथाओं के पीछे जीवन के सूत्र भी छिपे हैं। होली से जुड़ी एक कथा यह भी है-
इंद्र भगवान शिव की तपस्या भंग करना चाहते थे। उन्होंने कामदेव को इस कार्य पर लगाया वह दिन वसंत पंचमी का था। कामदेव ने उसी समय वसंत को याद किया और अपनी माया से वसंत का प्रभाव फैलाया इससे सारे जगत के प्राणी काममोहित हो गए। कामदेव का शिव को मोहित करने का यह प्रयास होली तक चला इसलिए इन दो माह में वसंत पर्व मनाया जाता है। होली के दिन शिव की तपस्या भंग हुई।
उन्होंने रोष से भरकर कामदेव को भस्म कर दिया तथा यह संदेश दिया कि होली पर काम (मोह, इच्छा, लालच, धन, मद) इनको अपने पर हावी न होने दें। तब से ही होली पर वसंत उत्सव एवं होली जलाने की परंपरा प्रारंभ हुई। इस घटना के बाद शिव ने पार्वती से विवाह की सम्मति दी। जिससे सभी देवी-देवताओं, शिवगणों, मनुष्यों में हर्षोल्लास फैल गया। उन्होंने एक-दूसरे पर रंग गुलाल उड़ाकर आपस में गले मिलकर जोरदार उत्सव मनाया। जो आज धुलेंडी के रूप में घर-घर मनता है।

सुंदर जानकारी ...
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