और फिरआऊन के लोग मूसा से एक मरतबा कहने लगे कि तुम हम पर जादू करने के लिए चाहे जितनी निषानियाँ लाओ मगर हम तुम पर किसी तरह ईमान नहीं लाएँगें (132)
तब हमने उन पर (पानी को) तूफान और टिड़डियाँ और जुए और मेंढ़कों और खून (का अज़ाब भेजा कि सब जुदा जुदा (हमारी कुदरत की) निषानियाँ थी उस पर भी वह लोग तकब्बुर ही करते रहें और वह लोग गुनेहगार तो थे ही (133)
(और जब उन पर अज़ाब आ पड़ता तो कहने लगते कि ऐ मूसा तुम से जो ख़ुदा ने (क़बूल दुआ का) अहद किया है उसी की उम्मीद पर अपने ख़ुदा से दुआ माँगों और अगर तुमने हम से अज़ाब को टाल दिया तो हम ज़रूर भेज देगें (134)
फिर जब हम उनसे उस वक़्त के वास्ते जिस तक वह ज़रूर पहुँचते अज़ाब को हटा लेते तो फिर फौरन बद अहदी करने लगते (135)
तब आखि़र हमने उनसे (उनकी शरारत का) बदला लिया तो चूकि वह लोग हमारी आयतों को झुटलाते थे और उनसे ग़ाफिल रहते थे हमने उन्हें दरिया में डुबो दिया (136)
और जिन बेचारों को ये लोग कमज़ोर समझते थे उन्हीं को (मुल्क कयाम की) ज़मीन का जिसमें हमने (ज़रखेज़ होने की) बरकत दी थी उसके पूरब पच्छिम (सब) का वारिस (मालिक) बना दिया और चूकि बनी इसराईल नें (फिरआऊन के ज़ालिमों) पर सब्र किया था इसलिए तुम्हारे परवरदिगार का नेक वायदा (जो उसने बनी इसराइल से किया था) पूरा हो गया और जो कुछ फिरआऊन और उसकी क़ौम के लोग करते थे और जो ऊँची ऊँची इमारते बनाते थे सब हमने बरबाद कर दी (137)
और हमने बनी ईसराइल को दरिया के उस पार उतार दिया तो एक ऐसे लोगों पर से गुज़रे जो अपने (हाथों से बनाए हुए) बुतों की परसतिष पर जमा बैठे थे (तो उनको देख कर बनी ईसराइल से) कहने लगे ऐ मूसा जैसे उन लोगों के माबूद (बुत) हैं वैसे ही हमारे लिए भी एक माबूद बनाओ मूसा ने जवाब दिया कि तुम लोग जाहिल लोग हो (138)
(अरे कमबख़्तो) ये लोग जिस मज़हब पर हैं (वह यक़ीनी बरबाद होकर रहेगा) और जो अमल ये लोग कर रहे हैं (वह सब मिटिया मेट हो जाएगा) (139)
(मूसा ने ये भी) कहा क्या तुम्हारा ये मतलब है कि ख़ुदा को छोड़कर मै दूसरे को तुम्हारा माबूद तलाश करू (140)
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
19 सितंबर 2026
और फिरआऊन के लोग मूसा से एक मरतबा कहने लगे कि तुम हम पर जादू करने के लिए चाहे जितनी निषानियाँ लाओ मगर हम तुम पर किसी तरह ईमान नहीं लाएँगें
18 सितंबर 2026
ऐडवोकेट हाजी अख्तर खान अकेला द्वारा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजी शिकायत सुझावों को प्रधानमंत्री कार्यालय ने गंभीरता से लेते हुए
आदरणीय, दर्जनों सुझावात्मक पत्र भेजने, पत्र की पावती, की निरंतर निरुत्तरता,
आदरणीय, दर्जनों सुझावात्मक पत्र भेजने, पत्र की पावती, की निरंतर निरुत्तरता, आम कांग्रेस जन की संवाद, मुलाक़ात, फेक्ट चेकिंग, कठोर अनुशासन , आयाराम, गयाराम पर रोक, संगठन सर्वोपरि, बी एल ऐ बूथ कार्यकर्ता मज़बूती, सक्रियता, ज़िला संगठनों पर सत्ता धारियो, विधायक, सांसद , पूर्व लोगों की कठपुतली का खेल, आप का कार्यकर्ताओं से दूर रहना, मुलाक़ात नहीं करना, इवेंट , कॉमरेड अधीनस्थों के ज़रिए संगठन कार्यकर्ताओं की घोर उपेक्षा, वगेरा वगेरा के बाद ही , बोझिल मन से पत्र लिखने के अलावा, इस कड़वे सच को , इस दुआ के साथ के खुदा सद्बुद्धि दे, दृढ़संकल्प दे के इन सुझावों की क्रियान्विति से कोंग्रेस संगठन फिर से हर शहर, हर राज्य, लोकसभा क्षेत्रों में ज़िंदाबाद हो, लेकिन आप कार्यकर्ताओं से रूबरू मिलने का टाइम ही नही देते, इवेंट कम्पनियों से सारा काम करा रहे है, कार्यकर्ताओं से आपके पास मिलने का टाइम नहीं, उनके पत्र , मेसेज पढ़ने उन पर संज्ञान लेकर जवाब देने का टाइम नही, कोंग्रेस कार्यालय में बैठने का टाइम नहीं , कमल छाप कोंग्रेसियों के खिलाफ सुनवाई कार्यक्रम का टाइम नही, बूथ इंचार्ज बी एल ऐ व्यवस्था जुड़ाव, सुधार, व्यक्ति की जगह संगठन के प्रति निष्ठा जवाबदारी के अभियान का टाइम नही , पार्टी के गद्दारो को फिर वापस लेकर समर्पित कोंग्रेसियों की छाती पर मूंग दलते है सोचने का टाइम नहीं, कोंग्रेस संगठन पर सांसद, विधायक, पूर्व मंत्री सन्तरी, सत्ता धारी क्यों हावी है, ज़िला अध्यक्षों से विधायक, सांसद खुद को ऊपर क्यों समझकर संगठन मटियामेट कर रहे है इसका टाइम नही, राष्ट्रीय, प्रदेश , ज़िला, ब्लॉक कोंग्रेस कार्यालय पर ही हर बैठक हो, विधायक, सांसद, पूर्व पेंशनधारी कोंग्रेसी अपने ज़िले के कोंग्रेस कार्यालय में महीने में कम से कम एक हफ्ता उपस्थित रहकर कार्यकर्ताओं की सुने यह व्यवस्था करने का भी आपके पास टाइम नही, आप कुछ नया करे तो पहले अनुशासित तऱीके से कोंग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष से अनुमति लेकर अनुशासन की बाध्यता का उदाहरण दें आपके पास इतना टाइम नहीं, कोंग्रेस विधान को शत प्रतिशत लागू करे , कोंग्रेस चुनाव चिन्ह ओर कोंग्रेस झंडे में चरखे ओर हाथ के निशान के फ़र्क़ को मिटाये इतना टाइम भी नहीं, संगठन बातों, भाषणों, इवेंट से नहीं व्यवहार में आम कार्यकर्ताओं से वन टू वन मिलनसारिता से चलता है, इतना भी टाइम नहीं, अख़्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339
परिजनों के प्रयास से संपन्न हुआ नेत्रदान
परिजनों के प्रयास से संपन्न हुआ नेत्रदान
2. बूंदी जिले का 100वाँ नेत्रदान,शहर में 15 दिन में चार नेत्रदान
सितंबर माह में शाइन इंडिया फाउंडेशन,और ईबीएसआर बीबीजे चैप्टर के माध्यम से पिछले 15 वर्षों से चलाए जा रहे नेत्रदान जागरुकता अभियान से शहर के आसपास की छोटी-छोटी गांव में भी नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ी है ।
आज दोपहर, न्यू कॉलोनी बूंदी निवासी चेतन और अनिल बिरला के पिता ओमप्रकाश बिरला (सेवानिवृत्त यूको बैंक ) का आकस्मिक निधन हुआ । हंसमुख,विनम्र स्वभाव और प्रसन्नचित रहने वाले ओम प्रकाश काफी शांत और सामाजिक कार्यों में अग्रणी रहने वाले व्यक्ति थे,उनके निधन से पूरे बूंदी शहर में शोक की लहर आ गयी।
परिजनों के सामाजिक कार्य में अग्रणी रहने से बेटे चेतन और अनिल बिरला ने माताजी विष्णु कांता बिरला से पिता के नेत्रदान के बारे में चर्चा की और मां की सहमति मिलते ही संस्था के ज्योति मित्र इदरीस बोहरा को संपर्क कर कोटा से नेत्रदान के लिए टीम को बुलाने का अनुरोध किया ।
इदरीस की सूचना पर,नेत्रदान के लिए कोटा से तुरंत टीम रवाना हो गई, घर पहुंच कर परिवार के सभी सदस्यों के बीच में डॉ कुलवंत गौड़ ने, नेत्रदान की प्रक्रिया को संपन्न किया ।
संस्था संस्थापक डॉ संगीता गौड़ ने बताया कि, वर्ष 2015 में,नागदी बाजार,बूंदी निवासी विनोद कोटिया के नेत्रदान से इस क्षेत्र में नेत्रदान अभियान की शुरुआत हुई थी,उसके बाद से आज तक बूंदी जिले में 100 दिवंगतों के नेत्रदान हो चुके हैं, पिछले 15 दिनों में चार नेत्रदान बूंदी शहर से हुए हैं । इसी माह में संस्था के प्रयासों से शहर की तीन दिवंगत महिलाओं स्व० स्नेहलता नाटेकर, स्व० जगन्नाथी मालव और स्व० किरण लता जैन का नेत्रदान हुआ है।
और (आजिज़ी से) बोले हम सारे जहाँन के परवरदिगार पर ईमान लाए
और (आजिज़ी से) बोले हम सारे जहाँन के परवरदिगार पर ईमान लाए (121)
जो मूसा व हारून का परवरदिगार है (122)
फिरआऊन ने कहा (हाए) तुम लोग मेरी इजाज़त के क़ब्ल (पहले) उस पर ईमान ले आए ये ज़रूर तुम लोगों की मक्कारी है जो तुम लोगों ने उस शहर में फैला रखी है ताकि उसके बाशिंदों को यहाँ से निकाल कर बाहर करो पस तुम्हें अन क़रीब ही उस शरारत का मज़ा मालूम हो जाएगा (123)
मै तो यक़ीनन तुम्हारे (एक तरफ के) हाथ और दूसरी तरफ के पाव कटवा डालूगा फिर तुम सबके सब को सूली दे दूगा (124)
जादूगर कहने लगे हम को तो (आखि़र एक रोज़) अपने परवरदिगार की तरफ लौट कर जाना (मर जाना) है (125)
तू हमसे उसके सिवा और काहे की अदावत रखता है कि जब हमारे पास ख़ुदा की निशानियाँ आयी तो हम उन पर ईमान लाए (और अब तो हमारी ये दुआ है कि) ऐ हमारे परवरदिगार हम पर सब्र (का मेंह बरसा) (126)
और हमने अपनी फरमाबरदारी की हालत में दुनिया से उठा ले और फिरआऊन की क़ौम के चन्द सरदारों ने (फिरआऊन) से कहा कि क्या आप मूसा और उसकी क़ौम को उनकी हालत पर छोड़ देंगे कि मुल्क में फ़साद करते फिरे और आपके और आपके ख़ुदाओं (की परसतिश) को छोड़ बैठें- फिरआऊन कहने लगा (तुम घबराओ नहीं) हम अनक़रीब ही उनके बेटों की क़त्ल करते हैं और उनकी औरतों को (लौन्डिया बनाने के वास्ते) जिन्दा रखते हैं और हम तो उन पर हर तरह क़ाबू रखते हैं (127)
(ये सुनकर) मूसा ने अपनी क़ौम से कहा कि (भाइयों) ख़ुदा से मदद माँगों और सब्र करो सारी ज़मीन तो ख़ुदा ही की है वह अपने बन्दों में जिसकी चाहे उसका वारिस (व मालिक) बनाए और ख़ातमा बिल ख़ैर तो सब परहेज़गार ही का है (128)
वह लोग कहने लगे कि (ऐ मूसा) तुम्हारे आने के क़ब्ल (पहले) ही से और तुम्हारे आने के बाद भी हम को तो बराबर तकलीफ ही पहुँच रही है (आखि़र कहाँ तक सब्र करें) मूसा ने कहा अनकरीब ही तुम्हारा परवरदिगार तुम्हारे दुष्मन को हलाक़ करेगा और तुम्हें (उसका जानशीन) बनाएगा फिर देखेगा कि तुम कैसा काम करते हो (129)
और बेशक हमने फिरआऊन के लोगों को बरसों से कहत और फलों की कम पैदावार (के अज़ाब) में गिरफ्तार किया ताकि वह इबरत हासिल करें (130)