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19 सितंबर 2026

और फिरआऊन के लोग मूसा से एक मरतबा कहने लगे कि तुम हम पर जादू करने के लिए चाहे जितनी निषानियाँ लाओ मगर हम तुम पर किसी तरह ईमान नहीं लाएँगें

और फिरआऊन के लोग मूसा से एक मरतबा कहने लगे कि तुम हम पर जादू करने के लिए चाहे जितनी निषानियाँ लाओ मगर हम तुम पर किसी तरह ईमान नहीं लाएँगें (132)
तब हमने उन पर (पानी को) तूफान और टिड़डियाँ और जुए और मेंढ़कों और खून (का अज़ाब भेजा कि सब जुदा जुदा (हमारी कुदरत की) निषानियाँ थी उस पर भी वह लोग तकब्बुर ही करते रहें और वह लोग गुनेहगार तो थे ही (133)
(और जब उन पर अज़ाब आ पड़ता तो कहने लगते कि ऐ मूसा तुम से जो ख़ुदा ने (क़बूल दुआ का) अहद किया है उसी की उम्मीद पर अपने ख़ुदा से दुआ माँगों और अगर तुमने हम से अज़ाब को टाल दिया तो हम ज़रूर भेज देगें (134)
फिर जब हम उनसे उस वक़्त के वास्ते जिस तक वह ज़रूर पहुँचते अज़ाब को हटा लेते तो फिर फौरन बद अहदी करने लगते (135)
तब आखि़र हमने उनसे (उनकी शरारत का) बदला लिया तो चूकि वह लोग हमारी आयतों को झुटलाते थे और उनसे ग़ाफिल रहते थे हमने उन्हें दरिया में डुबो दिया (136)
और जिन बेचारों को ये लोग कमज़ोर समझते थे उन्हीं को (मुल्क कयाम की) ज़मीन का जिसमें हमने (ज़रखेज़ होने की) बरकत दी थी उसके पूरब पच्छिम (सब) का वारिस (मालिक) बना दिया और चूकि बनी इसराईल नें (फिरआऊन के ज़ालिमों) पर सब्र किया था इसलिए तुम्हारे परवरदिगार का नेक वायदा (जो उसने बनी इसराइल से किया था) पूरा हो गया और जो कुछ फिरआऊन और उसकी क़ौम के लोग करते थे और जो ऊँची ऊँची इमारते बनाते थे सब हमने बरबाद कर दी (137)
और हमने बनी ईसराइल को दरिया के उस पार उतार दिया तो एक ऐसे लोगों पर से गुज़रे जो अपने (हाथों से बनाए हुए) बुतों की परसतिष पर जमा बैठे थे (तो उनको देख कर बनी ईसराइल से) कहने लगे ऐ मूसा जैसे उन लोगों के माबूद (बुत) हैं वैसे ही हमारे लिए भी एक माबूद बनाओ मूसा ने जवाब दिया कि तुम लोग जाहिल लोग हो (138)
(अरे कमबख़्तो) ये लोग जिस मज़हब पर हैं (वह यक़ीनी बरबाद होकर रहेगा) और जो अमल ये लोग कर रहे हैं (वह सब मिटिया मेट हो जाएगा) (139)
(मूसा ने ये भी) कहा क्या तुम्हारा ये मतलब है कि ख़ुदा को छोड़कर मै दूसरे को तुम्हारा माबूद तलाश करू (140)  

18 सितंबर 2026

ऐडवोकेट हाजी अख्तर खान अकेला द्वारा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजी शिकायत सुझावों को प्रधानमंत्री कार्यालय ने गंभीरता से लेते हुए

ऐडवोकेट हाजी अख्तर खान अकेला द्वारा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजी शिकायत सुझावों को प्रधानमंत्री कार्यालय ने गंभीरता से लेते हुए , हर सुझावों को स्वीकारोक्ति दी है, जबकि शिकायतों के निवारण के प्रयास के तहत आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए है, इतना ही नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके कार्यालय ने अख्तर खान अकेला द्वारा हज सुधार में सकारात्मक सुझाव देने , ओर भ्रष्टाचार की तथ्यात्मक शिकायत पर अख्तर खान अकेला को धन्यवाद देते हुए उनका आभार भी जताया है, सभी सुझाव शत प्रतिशत लागू करने के लिये हज ऑफिसर को आवश्यक निर्देश के साथ भेजे गए हैं, डिजिटल भास्कर पत्रिका न्यूज़
हज पॉलिसी 2027 पर अख्तर खान अकेला के तीखे सवाल
पूरी रकम वसूली, फिर भी हाजी परेशान! हज पॉलिसी पर अख्तर खान अकेला ने उठाए तीखे सवाल
“स्मार्ट वॉच से लेकर हवाई किराए तक हिसाब दो, सुविधा नहीं मिली तो पैसा लौटाओ” — प्रधानमंत्री, अल्पसंख्यक मंत्री, लोकसभा अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष को भेजे 16 सुझाव
के डी अब्बासी
कोटा, 17 सितम्बर। “हज यात्रियों से पूरी राशि वसूलने के बाद भी अगर सुविधाएं अधूरी मिलें तो जवाबदेही किसकी?” इसी सवाल के साथ एडवोकेट अख्तर खान अकेला ने हज पॉलिसी 2027 को लेकर केंद्र सरकार के सामने 16 सूत्रीय सुझाव रखे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री, केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री, लोकसभा अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष को सुझाव भेजकर हज व्यवस्था में आमूलचूल सुधार और वर्ष 2026 में अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिलने पर राशि की समीक्षा कर अनावश्यक वसूली वापस करने की मांग की है।
अख्तर खान अकेला ने कहा कि हज कोई सामान्य पर्यटन यात्रा नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा पवित्र सफर है। इसलिए “पैसा पूरा तो सुविधा भी पूरी” के सिद्धांत पर हज व्यवस्था चलनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि वर्ष 2027 की हज पॉलिसी संसद में बहुपक्षीय चर्चा, विशेषज्ञों और बुद्धिजीवियों के सुझावों के बाद तैयार की जाए तथा हर खर्च और हर सुविधा की जिम्मेदारी तय हो।
स्मार्ट वॉच पर सबसे बड़ा सवाल
अख्तर खान अकेला ने वर्ष 2026 में स्मार्ट वॉच के नाम पर ली गई राशि पर सवाल उठाते हुए कहा कि पूर्व घोषित हज पॉलिसी में यदि इसका स्पष्ट प्रावधान नहीं था तो बाद में इसे यात्रियों पर क्यों थोपा गया? उनका दावा है कि कई यात्रियों के अनुभव में यह घड़ी अपेक्षित उपयोगी साबित नहीं हुई।
उन्होंने मांग की कि स्मार्ट वॉच के नाम पर ली गई राशि और पूरी व्यवस्था की जांच हो तथा यदि वसूली अनुचित पाई जाए तो पैसा लौटाया जाए।
उनका सुझाव है कि हर हाजी के पास स्मार्टफोन होने के कारण सरकार सऊदी अरब में आवश्यक अवधि के लिए सिम और इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने की व्यवस्था करे। इससे संपर्क, लोकेशन और आपात स्थिति में यात्री को खोजने में मदद मिल सकती है।
हवाई किराया पूरा, सुविधा अधूरी तो किराया भी हो कम
अख्तर खान अकेला ने हवाई किराए को लेकर भी तीखा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि यात्रियों से एक निर्धारित स्तर की एयरलाइन सुविधा के अनुरूप राशि ली जाती है तो उन्हें उसी स्तर की सेवा मिलनी चाहिए।
उन्होंने उड़ानों में सीट व्यवस्था, स्टाफ, लगेज, प्राथमिक चिकित्सा सामग्री और अन्य सुविधाओं को लेकर शिकायतों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि सुविधा कम है तो किराया भी उसी अनुपात में कम होना चाहिए।
उन्होंने प्रत्येक यात्री को पूर्व निर्धारित सीट पर ही बैठाने की सख्त व्यवस्था करने की मांग की।
हज इंस्पेक्टर—जिम्मेदारी भी तय हो, हिसाब भी
उन्होंने हज इंस्पेक्टरों की संख्या, चयन और कार्यप्रणाली की समीक्षा की मांग करते हुए कहा कि यात्रियों से संबंधित खर्च का भार उन्हीं पर पड़ता है, इसलिए इंस्पेक्टरों की जवाबदेही तय होना जरूरी है।
हर इंस्पेक्टर अपने जिम्मे के यात्रियों के साथ लगातार संपर्क में रहे, डिजिटल ग्रुप बनाए जाएं और शिकायत पर तत्काल कार्रवाई की व्यवस्था हो।
कुर्बानी के ₹17 हजार पर भी समीक्षा की मांग
अख्तर खान अकेला ने कुर्बानी की निर्धारित राशि की भी समीक्षा की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि स्थानीय स्तर पर इससे कम राशि में कुर्बानी की व्यवस्था उपलब्ध है तो सरकार बल्क कॉन्ट्रेक्ट के जरिए लागत कम करने की संभावनाएं तलाशे।
साथ ही कुर्बानी पूरी होने के बाद प्रत्येक हाजी को तत्काल डिजिटल सूचना मिले, ताकि तकनीकी समस्या के कारण यात्रियों को असमंजस का सामना न करना पड़े।
“शिकायत लेकर जाओ तो मुख्यालय क्यों भेजते हो?”
उन्होंने मक्का-मदीना में शिकायत निवारण व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर कोई हाजी स्थानीय शिकायत केंद्र पहुंचता है तो उसे दूर मुख्यालय भेजने की बजाय उसी केंद्र को शिकायत का अंतिम निस्तारण करने का अधिकार दिया जाए।
उन्होंने अजीजिया सहित प्रमुख क्षेत्रों में प्रभावी कंट्रोल रूम स्थापित करने तथा फोन, ई-मेल और डिजिटल शिकायत प्रणाली शुरू करने का सुझाव दिया।
बसों की लेटलतीफी और बख्शीश पर सख्ती
अख्तर खान अकेला ने परिवहन व्यवस्था में कथित अव्यवस्थाओं का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि जब परिवहन का भुगतान पहले ही किया जा चुका है तो हज यात्रियों से अतिरिक्त बख्शीश मांगने की शिकायतें गंभीरता से ली जानी चाहिए।
उन्होंने बसों के निर्धारित समय पर नहीं पहुंचने और यात्रियों को बार-बार बस बदलने की व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए सीधे गंतव्य तक परिवहन और समयबद्ध सेवा सुनिश्चित करने की मांग की।
मीना में शौचालय से लेकर भोजन तक—व्यवस्था सुधरे
उन्होंने मीना के खेमों में गद्दों की चौड़ाई बढ़ाने, भोजन की गुणवत्ता सुधारने तथा शौचालय, स्नानघर और वुजू की पर्याप्त व्यवस्था करने का सुझाव दिया। उनका कहना है कि लंबी कतारों और अपर्याप्त सुविधाओं से हज यात्रियों को अनावश्यक परेशानी होती है।
हज भवन के नाम पर वसूली, भवन कहां है?
अख्तर खान अकेला ने हज भवन के नाम पर यात्रियों से ली जाने वाली राशि की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि यदि हर बार हज यात्रियों से हज भवन के नाम पर राशि ली जा रही है तो उसके उपयोग और निर्माण की स्थिति सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती?
इसी तरह हज प्रशिक्षण के नाम पर ली जाने वाली राशि की भी समीक्षा की मांग की गई है।
खाने की समस्या खत्म हो—होटल में ही भोजन मिले
उन्होंने मक्का-मदीना में हज यात्रियों के होटल में ही चाय, नाश्ता और दोनों समय भोजन की व्यवस्था कराने का सुझाव दिया। उनका कहना है कि भोजन की तलाश में यात्रियों को लाइन में लगना पड़ता है और अतिरिक्त राशि खर्च करनी पड़ती है, जिससे इबादत का समय भी प्रभावित होता है।
जमजम, लगेज, मेडिकल सुविधा—हर मद का हो हिसाब
अख्तर खान अकेला ने आबे-जमजम की मात्रा बढ़ाने, लगेज व्यवस्था में सुधार, चोरी या जेब कटने की स्थिति में तत्काल सहायता बढ़ाने और भारतीय मेडिकल स्टाफ की जिम्मेदारी तय करने की भी मांग की।
उन्होंने कहा कि छोटी-मोटी स्वास्थ्य समस्याओं का प्राथमिक स्तर पर ही इलाज उपलब्ध कराया जाए, ताकि हज यात्रियों को अनावश्यक रूप से अस्पतालों के चक्कर न लगाने पड़ें।
हज पॉलिसी पर संसद में हो खुली बहस
अख्तर खान अकेला ने कहा कि हज पॉलिसी सिर्फ कागजों पर तैयार करने के बजाय लोकसभा में बहुपक्षीय चर्चा होनी चाहिए। हज यात्री, विशेषज्ञ, बुद्धिजीवी, हज कमेटियां और संबंधित क्षेत्र के अनुभवी लोग अपने सुझाव दें और उसके बाद ऐसी नीति बने जिसमें—
कम खर्च, पूरी सुविधा, पारदर्शी वसूली और तय जवाबदेही सुनिश्चित हो।
उन्होंने मांग की कि वर्ष 2026 में जिन मदों में राशि ली गई लेकिन उसके अनुरूप सुविधा नहीं मिली, उनकी मदवार जांच और ऑडिट कराया जाए। जहां अतिरिक्त अथवा अनावश्यक राशि वसूली गई हो, वहां नियमानुसार राशि वापस की जाए।
अख्तर खान अकेला ने कहा कि “हाजी से पैसा लेना आसान नहीं, उस पैसे का पूरा हिसाब और उसके बदले पूरी सुविधा देना भी सरकार और संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी है।” उन्होंने वर्ष 2027 के हज यात्रियों के लिए ऐसी व्यवस्था बनाने की मांग की, जिसमें हज यात्रा किफायती, सुरक्षित, सुविधायुक्त और सम्मानजनक हो।
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आदरणीय, दर्जनों सुझावात्मक पत्र भेजने, पत्र की पावती, की निरंतर निरुत्तरता,

 आदरणीय, दर्जनों सुझावात्मक पत्र भेजने, पत्र की पावती, की निरंतर निरुत्तरता, आम कांग्रेस जन की संवाद, मुलाक़ात, फेक्ट चेकिंग, कठोर अनुशासन , आयाराम, गयाराम पर रोक, संगठन सर्वोपरि, बी एल ऐ बूथ कार्यकर्ता मज़बूती, सक्रियता, ज़िला संगठनों पर सत्ता धारियो, विधायक, सांसद , पूर्व लोगों की कठपुतली का खेल, आप का कार्यकर्ताओं से दूर रहना, मुलाक़ात नहीं करना, इवेंट , कॉमरेड अधीनस्थों के ज़रिए संगठन कार्यकर्ताओं की घोर उपेक्षा, वगेरा वगेरा के बाद ही , बोझिल मन से पत्र लिखने के अलावा, इस कड़वे सच को , इस दुआ के साथ के खुदा सद्बुद्धि दे, दृढ़संकल्प दे के इन सुझावों की क्रियान्विति से कोंग्रेस संगठन फिर से हर शहर, हर राज्य, लोकसभा क्षेत्रों में ज़िंदाबाद हो, लेकिन आप कार्यकर्ताओं से रूबरू मिलने का टाइम ही नही देते, इवेंट कम्पनियों से सारा काम करा रहे है, कार्यकर्ताओं से आपके पास मिलने का टाइम नहीं, उनके पत्र , मेसेज पढ़ने उन पर संज्ञान लेकर जवाब देने का टाइम नही, कोंग्रेस कार्यालय में बैठने का टाइम नहीं , कमल छाप कोंग्रेसियों के खिलाफ सुनवाई कार्यक्रम का टाइम नही, बूथ इंचार्ज बी एल ऐ व्यवस्था जुड़ाव, सुधार, व्यक्ति की जगह संगठन के प्रति निष्ठा जवाबदारी के अभियान का टाइम नही , पार्टी के गद्दारो को फिर वापस लेकर समर्पित कोंग्रेसियों की छाती पर मूंग दलते है सोचने का टाइम नहीं, कोंग्रेस संगठन पर सांसद, विधायक, पूर्व मंत्री सन्तरी, सत्ता धारी क्यों हावी है, ज़िला अध्यक्षों से विधायक, सांसद खुद को ऊपर क्यों समझकर संगठन मटियामेट कर रहे है इसका टाइम नही, राष्ट्रीय, प्रदेश , ज़िला, ब्लॉक कोंग्रेस कार्यालय पर ही हर बैठक हो, विधायक, सांसद, पूर्व पेंशनधारी कोंग्रेसी अपने ज़िले के कोंग्रेस कार्यालय में महीने में कम से कम एक हफ्ता उपस्थित रहकर कार्यकर्ताओं की सुने यह व्यवस्था करने का भी आपके पास टाइम नही, आप कुछ नया करे तो पहले अनुशासित तऱीके से कोंग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष से अनुमति लेकर अनुशासन की बाध्यता का उदाहरण दें आपके पास इतना टाइम नहीं, कोंग्रेस विधान को शत प्रतिशत लागू करे , कोंग्रेस चुनाव चिन्ह ओर कोंग्रेस झंडे में चरखे ओर हाथ के निशान के फ़र्क़ को मिटाये इतना टाइम भी नहीं, संगठन बातों, भाषणों, इवेंट से नहीं व्यवहार में आम कार्यकर्ताओं से वन टू वन मिलनसारिता से चलता है, इतना भी टाइम नहीं, अख़्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339

परिजनों के प्रयास से संपन्न हुआ नेत्रदान

 परिजनों के प्रयास से संपन्न हुआ नेत्रदान
2. बूंदी जिले का 100वाँ नेत्रदान,शहर में 15 दिन में चार नेत्रदान

सितंबर माह में शाइन इंडिया फाउंडेशन,और ईबीएसआर बीबीजे चैप्टर के माध्यम से पिछले 15 वर्षों से चलाए जा रहे नेत्रदान जागरुकता अभियान से शहर के आसपास की छोटी-छोटी गांव में भी नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ी है ।

आज दोपहर, न्यू कॉलोनी बूंदी निवासी चेतन और अनिल बिरला के पिता ओमप्रकाश बिरला (सेवानिवृत्त यूको बैंक ) का आकस्मिक निधन हुआ । हंसमुख,विनम्र स्वभाव और प्रसन्नचित रहने वाले ओम प्रकाश काफी शांत और सामाजिक कार्यों में अग्रणी रहने वाले व्यक्ति थे,उनके निधन से पूरे बूंदी शहर में शोक की लहर आ गयी।

परिजनों के सामाजिक कार्य में अग्रणी रहने से बेटे चेतन और अनिल बिरला ने माताजी विष्णु कांता बिरला से पिता के नेत्रदान के बारे में चर्चा की और मां की सहमति मिलते ही संस्था के ज्योति मित्र इदरीस बोहरा को संपर्क कर कोटा से नेत्रदान के लिए टीम को बुलाने का अनुरोध किया ।

इदरीस की सूचना पर,नेत्रदान के लिए कोटा से तुरंत टीम रवाना हो गई, घर पहुंच कर परिवार के सभी सदस्यों के बीच में डॉ कुलवंत गौड़ ने, नेत्रदान की प्रक्रिया को संपन्न किया ।

संस्था संस्थापक डॉ संगीता गौड़ ने बताया कि, वर्ष 2015 में,नागदी बाजार,बूंदी निवासी विनोद कोटिया के नेत्रदान से इस क्षेत्र में नेत्रदान अभियान की शुरुआत हुई थी,उसके बाद से आज तक बूंदी जिले में 100 दिवंगतों के नेत्रदान हो चुके हैं, पिछले 15 दिनों में चार नेत्रदान बूंदी शहर से हुए हैं । इसी माह में संस्था के प्रयासों से शहर की तीन दिवंगत महिलाओं स्व० स्नेहलता नाटेकर, स्व० जगन्नाथी मालव और स्व० किरण लता जैन का नेत्रदान हुआ है।

और (आजिज़ी से) बोले हम सारे जहाँन के परवरदिगार पर ईमान लाए

 

और (आजिज़ी से) बोले हम सारे जहाँन के परवरदिगार पर ईमान लाए (121)
जो मूसा व हारून का परवरदिगार है (122)
फिरआऊन ने कहा (हाए) तुम लोग मेरी इजाज़त के क़ब्ल (पहले) उस पर ईमान ले आए ये ज़रूर तुम लोगों की मक्कारी है जो तुम लोगों ने उस शहर में फैला रखी है ताकि उसके बाशिंदों को यहाँ से निकाल कर बाहर करो पस तुम्हें अन क़रीब ही उस शरारत का मज़ा मालूम हो जाएगा (123)
मै तो यक़ीनन तुम्हारे (एक तरफ के) हाथ और दूसरी तरफ के पाव कटवा डालूगा फिर तुम सबके सब को सूली दे दूगा (124)
जादूगर कहने लगे हम को तो (आखि़र एक रोज़) अपने परवरदिगार की तरफ लौट कर जाना (मर जाना) है (125)
तू हमसे उसके सिवा और काहे की अदावत रखता है कि जब हमारे पास ख़ुदा की निशानियाँ आयी तो हम उन पर ईमान लाए (और अब तो हमारी ये दुआ है कि) ऐ हमारे परवरदिगार हम पर सब्र (का मेंह बरसा) (126)

और हमने अपनी फरमाबरदारी की हालत में दुनिया से उठा ले और फिरआऊन की क़ौम के चन्द सरदारों ने (फिरआऊन) से कहा कि क्या आप मूसा और उसकी क़ौम को उनकी हालत पर छोड़ देंगे कि मुल्क में फ़साद करते फिरे और आपके और आपके ख़ुदाओं (की परसतिश) को छोड़ बैठें- फिरआऊन कहने लगा (तुम घबराओ नहीं) हम अनक़रीब ही उनके बेटों की क़त्ल करते हैं और उनकी औरतों को (लौन्डिया बनाने के वास्ते) जिन्दा रखते हैं और हम तो उन पर हर तरह क़ाबू रखते हैं (127)
(ये सुनकर) मूसा ने अपनी क़ौम से कहा कि (भाइयों) ख़ुदा से मदद माँगों और सब्र करो सारी ज़मीन तो ख़ुदा ही की है वह अपने बन्दों में जिसकी चाहे उसका वारिस (व मालिक) बनाए और ख़ातमा बिल ख़ैर तो सब परहेज़गार ही का है (128)
वह लोग कहने लगे कि (ऐ मूसा) तुम्हारे आने के क़ब्ल (पहले) ही से और तुम्हारे आने के बाद भी हम को तो बराबर तकलीफ ही पहुँच रही है (आखि़र कहाँ तक सब्र करें) मूसा ने कहा अनकरीब ही तुम्हारा परवरदिगार तुम्हारे दुष्मन को हलाक़ करेगा और तुम्हें (उसका जानशीन) बनाएगा फिर देखेगा कि तुम कैसा काम करते हो (129)

और बेशक हमने फिरआऊन के लोगों को बरसों से कहत और फलों की कम पैदावार (के अज़ाब) में गिरफ्तार किया ताकि वह इबरत हासिल करें (130)

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