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03 अगस्त 2026

सांप सीढ़ी के खेल से, बच्चे सीख सकेंगे अंगदान महादान

  सांप सीढ़ी के खेल से, बच्चे सीख सकेंगे अंगदान महादान
2. राष्ट्रीय अंगदान दिवस पर,साँप सीढ़ी खेल के जागरूकता पोस्टर का विमोचन

राष्ट्रीय अंगदान दिवस पर आईजी हरेंद्र कुमार ने किया अंगदान जागरूकता हेतु अनूठी ‘अंगदान सांप-सीढ़ी’ का विमोचन

कोटा, 3 अगस्त। आज राष्ट्रीय अंगदान दिवस के अवसर पर अंगदान जागरूकता को नई दिशा देने के उद्देश्य से शाइन इंडिया फाउंडेशन द्वारा तैयार किए गए अनूठे ‘अंगदान-महादान सांप-सीढ़ी’ खेल का विमोचन पुलिस महानिरीक्षक, कोटा संभाग श्री हरेंद्र कुमार के कर-कमलों द्वारा किया गया।

यह अभिनव शैक्षणिक खेल बच्चों और युवाओं को खेल-खेल में अंगदान की सही जानकारी देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें अंगदान से जुड़ी भ्रांतियों और तथ्यों को सांप और सीढ़ी के माध्यम से सरल एवं रोचक तरीके से समझाया गया है।

बच्चे खेलते-खेलते जान सकेंगे कि अंगदान क्या है, कौन अंगदान कर सकता है, ब्रेन डेथ क्या होती है, किन अंगों का दान संभव है तथा अंगदान से जुड़े भ्रमों की वास्तविकता क्या है।

इस अवसर पर पुलिस महानिरीक्षक श्री हरेंद्र कुमार ने कहा कि, "अंगदान मानवता की सबसे महान सेवाओं में से एक है। समाज में आज भी जानकारी के अभाव और भ्रांतियों के कारण अनेक लोग इस पुण्य कार्य से पीछे रह जाते हैं। यदि बच्चों को बचपन से ही सही और वैज्ञानिक जानकारी दी जाए, तो वे स्वयं जागरूक नागरिक बनेंगे और अपने परिवार व समाज को भी प्रेरित करेंगे। शाइन इंडिया फाउंडेशन का यह सांप-सीढ़ी खेल जागरूकता का एक अत्यंत अभिनव और प्रभावी प्रयास है, जो निश्चित रूप से अंगदान के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।"

शाइन इंडिया फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने बताया कि यह खेल स्कूलों, महाविद्यालयों, सामाजिक संस्थाओं तथा जागरूकता शिविरों में उपयोग किया जाएगा, ताकि अंगदान जैसे गंभीर विषय को सरल, रोचक और व्यवहारिक तरीके से आमजन, विशेषकर बच्चों तक पहुंचाया जा सके।

कार्यक्रम के दौरान सीनियर ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर डॉ कुलवंत गौड़ के अलावा ,संस्था के सदस्य श्री राजेंद्र जैन एवं श्री धीरज शर्मा भी उपस्थित रहे। संस्था का मानना है कि,आज के जागरूक बच्चे ही कल के अंगदान प्रेरक बनेंगे, और यही प्रयास भविष्य में अधिक से अधिक लोगों को अंगदान का संकल्प लेने के लिए प्रेरित करेगा।

वह लोग खुदा के यहाँ मुख़्तलिफ़ दरजों के हैं और जो कुछ वह करते हैं ख़ुदा देख रहा है

 और (तुम्हारा गुमान बिल्कुल ग़लत है) किसी नबी की (हरगिज़) ये शान नहीं कि ख़्यानत करे और ख़्यानत करेगा तो जो चीज़ ख़्यानत की है क़यामत के दिन वही चीज़ (बिलकुल वैसा ही) ख़ुदा के सामने लाना होगा फिर हर शख़्स अपने किए का पूरा पूरा बदला पाएगा और उनकी किसी तरह हक़तल्फ़ी नहीं की जाएगी (161)
भला जो शख़्स ख़ुदा की ख़ुशनूदी का पाबन्द हो क्या वह उस शख़्स के बराबर हो सकता है जो ख़ुदा के गज़ब में गिरफ़्तार हो और जिसका ठिकाना जहन्नुम है और वह क्या बुरा ठिकाना है (162)
वह लोग खुदा के यहाँ मुख़्तलिफ़ दरजों के हैं और जो कुछ वह करते हैं ख़ुदा देख रहा है (163)
ख़ुदा ने तो ईमानदारों पर बड़ा एहसान किया कि उनके वास्ते उन्हीं की क़ौम का एक रसूल भेजा जो उन्हें खुदा की आयतें पढ़ पढ़ के सुनाता है और उनकी तबीयत को पाकीज़ा करता है और उन्हें किताबे (ख़ुदा) और अक़्ल की बातें सिखाता है अगरचे वह पहले खुली हुयी गुमराही में पडे़ थे (164)
मुसलमानों क्या जब तुमपर (जंगे ओहद) में वह मुसीबत पड़ी जिसकी दूनी मुसीबत तुम (कुफ़्फ़ार पर) डाल चुके थे तो (घबरा के) कहने लगे ये (आफ़त) क़हाँ से आ गयी (ऐ रसूल) तुम कह दो कि ये तो खुद तुम्हारी ही तरफ़ से है (न रसूल की मुख़ालेफ़त करते न सज़ा होती) बेशक ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है (165)
और जिस दिन दो जमाअतें आपस में गुंथ गयीं उस दिन तुम पर जो मुसीबत पड़ी वह तुम्हारी शरारत की वजह से (ख़ुदा की इजाजत की वजह से आयी) और ताकि ख़ुदा सच्चे ईमान वालों को देख ले (166)
और मुनाफि़क़ों को देख ले (कि कौन है) और मुनाफि़क़ों से कहा गया कि आओ ख़ुदा की राह में जेहाद करो या (ये न सही अपने दुशमन को) हटा दो तो कहने लगे (हाए क्या कहीं) अगर हम लड़ना जानते तो ज़रूर तुम्हारा साथ देते ये लोग उस दिन बनिस्बते ईमान के कुफ्र के ज़्यादा क़रीब थे अपने मुँह से वह बातें कह देते हैं जो उनके दिल में (ख़ाक) नहीं होतीं और जिसे वह छिपाते हैं ख़ुदा उसे ख़ूब जानता है (167)
(ये वही लोग हैं) जो (आप चैन से घरों में बैठे रहते है और अपने शहीद) भाईयों के बारे में कहने लगे काश हमारी पैरवी करते तो न मारे जाते (ऐ रसूल) उनसे कहो (अच्छा) अगर तुम सच्चे हो तो ज़रा अपनी जान से मौत को टाल दो (168)
और जो लोग ख़ुदा की राह में शहीद किए गए उन्हें हरगिज़ मुर्दा न समझना बल्कि वह लोग जीते जागते मौजूद हैं अपने परवरदिगार की तरफ़ से वह (तरह तरह की) रोज़ी पाते हैं (169)
और ख़ुदा ने जो फ़ज़ल व करम उन पर किया है उसकी (ख़ुशी) से फूले नहीं समाते और जो लोग उनसे पीछे रह गए और उनमें आकर शामिल नहीं हुए उनकी निस्बत ये (ख़्याल करके) ख़ुशियां मनाते हैं कि (ये भी शहीद हों तो) उनपर न किसी कि़स्म का ख़ौफ़ होगा और न आज़ुर्दा ख़ातिर होंगे (170)

02 अगस्त 2026

वह लोग खुदा के यहाँ मुख़्तलिफ़ दरजों के हैं और जो कुछ वह करते हैं ख़ुदा देख रहा है

 और (तुम्हारा गुमान बिल्कुल ग़लत है) किसी नबी की (हरगिज़) ये शान नहीं कि ख़्यानत करे और ख़्यानत करेगा तो जो चीज़ ख़्यानत की है क़यामत के दिन वही चीज़ (बिलकुल वैसा ही) ख़ुदा के सामने लाना होगा फिर हर शख़्स अपने किए का पूरा पूरा बदला पाएगा और उनकी किसी तरह हक़तल्फ़ी नहीं की जाएगी (161)
भला जो शख़्स ख़ुदा की ख़ुशनूदी का पाबन्द हो क्या वह उस शख़्स के बराबर हो सकता है जो ख़ुदा के गज़ब में गिरफ़्तार हो और जिसका ठिकाना जहन्नुम है और वह क्या बुरा ठिकाना है (162)
वह लोग खुदा के यहाँ मुख़्तलिफ़ दरजों के हैं और जो कुछ वह करते हैं ख़ुदा देख रहा है (163)
ख़ुदा ने तो ईमानदारों पर बड़ा एहसान किया कि उनके वास्ते उन्हीं की क़ौम का एक रसूल भेजा जो उन्हें खुदा की आयतें पढ़ पढ़ के सुनाता है और उनकी तबीयत को पाकीज़ा करता है और उन्हें किताबे (ख़ुदा) और अक़्ल की बातें सिखाता है अगरचे वह पहले खुली हुयी गुमराही में पडे़ थे (164)
मुसलमानों क्या जब तुमपर (जंगे ओहद) में वह मुसीबत पड़ी जिसकी दूनी मुसीबत तुम (कुफ़्फ़ार पर) डाल चुके थे तो (घबरा के) कहने लगे ये (आफ़त) क़हाँ से आ गयी (ऐ रसूल) तुम कह दो कि ये तो खुद तुम्हारी ही तरफ़ से है (न रसूल की मुख़ालेफ़त करते न सज़ा होती) बेशक ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है (165)
और जिस दिन दो जमाअतें आपस में गुंथ गयीं उस दिन तुम पर जो मुसीबत पड़ी वह तुम्हारी शरारत की वजह से (ख़ुदा की इजाजत की वजह से आयी) और ताकि ख़ुदा सच्चे ईमान वालों को देख ले (166)
और मुनाफि़क़ों को देख ले (कि कौन है) और मुनाफि़क़ों से कहा गया कि आओ ख़ुदा की राह में जेहाद करो या (ये न सही अपने दुशमन को) हटा दो तो कहने लगे (हाए क्या कहीं) अगर हम लड़ना जानते तो ज़रूर तुम्हारा साथ देते ये लोग उस दिन बनिस्बते ईमान के कुफ्र के ज़्यादा क़रीब थे अपने मुँह से वह बातें कह देते हैं जो उनके दिल में (ख़ाक) नहीं होतीं और जिसे वह छिपाते हैं ख़ुदा उसे ख़ूब जानता है (167)
(ये वही लोग हैं) जो (आप चैन से घरों में बैठे रहते है और अपने शहीद) भाईयों के बारे में कहने लगे काश हमारी पैरवी करते तो न मारे जाते (ऐ रसूल) उनसे कहो (अच्छा) अगर तुम सच्चे हो तो ज़रा अपनी जान से मौत को टाल दो (168)
और जो लोग ख़ुदा की राह में शहीद किए गए उन्हें हरगिज़ मुर्दा न समझना बल्कि वह लोग जीते जागते मौजूद हैं अपने परवरदिगार की तरफ़ से वह (तरह तरह की) रोज़ी पाते हैं (169)
और ख़ुदा ने जो फ़ज़ल व करम उन पर किया है उसकी (ख़ुशी) से फूले नहीं समाते और जो लोग उनसे पीछे रह गए और उनमें आकर शामिल नहीं हुए उनकी निस्बत ये (ख़्याल करके) ख़ुशियां मनाते हैं कि (ये भी शहीद हों तो) उनपर न किसी कि़स्म का ख़ौफ़ होगा और न आज़ुर्दा ख़ातिर होंगे (170)

01 अगस्त 2026

180 किमी दूर जाकर भी रुका नहीं जुनून"

 180 किमी दूर जाकर भी रुका नहीं जुनून"  

शाइन इंडिया फाउंडेशन ने कोटा से दूरस्थ गांवों में फैलाया अंगदान का संदेश


कोटा। शनिवार को "नो बैग डे" के अवसर पर शाइन इंडिया फाउंडेशन की टीम ने राजस्थान सरकार के "अंगदान संजीवनी अभियान" के अंतर्गत कोटा से लगभग 180 किलोमीटर दूर स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, गुराडिया कलाँ और पगारिया में अंगदान जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया।

कार्यशाला में दोनों विद्यालयों के कक्षा 8 से 12 तक के 800 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। टीम ने बच्चों को नेत्रदान, अंगदान और देहदान के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यशाला की मुख्य वक्ता डॉ कुलवंत गौड़ ने बताया कि, बच्चों को बताया गया कि मृत्यु उपरांत एक व्यक्ति अपने अंगदान से 8 से 9 लोगों को नया जीवन दे सकता है। और इसी तरह से मृत्यु के बाद 6 घंटे के अंदर नेत्रों के दान से कॉर्निया की अंधता को भी दूर किया जा सकता है।

संस्था के प्रतिनिधियों ने बताया कि पिछले 15 वर्षों में शाइन इंडिया फाउंडेशन द्वारा 400 से अधिक राजकीय एवं निजी विद्यालयों में इस प्रकार की कार्यशालाओं का आयोजन किया जा चुका है।


गुराडिया कलाँ के प्रधानाचार्य  जितेंद्र सिंह हाड़ा ने संस्था के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि,  

"अपने शहर से तेज बारिश और तूफान में इतनी दूर आकर बच्चों को अंगदान के बारे में जागरूक करना ही एक जुनून का कार्य है। यदि आज के युवा छात्र अंगदान के विषय को अच्छे से समझ लेते हैं तो भविष्य में वे अंगदान प्रेरक के रूप में अन्य लोगों को भी जागरूक कर सकेंगे।"

*पगारिया उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य अजीत कुमार ने भी संस्था को धन्यवाद देते हुए कहा कि, "आज के समय में अंगदान समाज की सबसे बड़ी जरूरत है। एक व्यक्ति के चले जाने के बाद भी उसके अंग कई जिंदगियां बचा सकते हैं। शाइन इंडिया फाउंडेशन इस महत्वपूर्ण विषय पर जिस समर्पण और लक्ष्य के साथ काम कर रही है, वह वाकई काबिल-ए-तारीफ है। हम उम्मीद करते हैं कि ऐसे आयोजन लगातार होते रहें ताकि हर घर तक अंगदान का संदेश पहुंचे।"_

कार्यक्रम के अंत में सदस्य ने अंगदान से संबंधित प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम आयोजित किया और सही जवाब देने वाले प्रतिभागियों को "शाइन मेडल" दिया।

विद्यालय स्टाफ और विद्यार्थियों ने संस्था के इस पुण्य कार्य की सराहना की और भविष्य में भी ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों की मांग की।


संपर्क: शाइन इंडिया फाउंडेशन, कोटा | 8386900102

33 वर्षों की गौरवपूर्ण न्यायिक सेवा पूर्ण कर जिला एवं सेशन न्यायाधीश श्री संदीप कुमार शर्मा सेवानिवृत्त

 

33 वर्षों की गौरवपूर्ण न्यायिक सेवा पूर्ण कर जिला एवं सेशन न्यायाधीश श्री संदीप कुमार शर्मा सेवानिवृत्त
बूंदी, 31 जुलाई। जिला एवं सेशन न्यायाधीश, बूंदी श्री संदीप कुमार शर्मा 33 वर्षों की गौरवपूर्ण एवं निष्कलंक न्यायिक सेवा पूर्ण कर शुक्रवार को सेवानिवृत्त हो गए। इस अवसर पर जिला न्यायालय परिसर में गरिमामय विदाई समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, पुलिस अधिकारियों, न्यायालयीन कर्मचारियों, पक्षकारों एवं गणमान्य नागरिकों ने उन्हें भावभीनी विदाई दी।
समारोह में श्री पंकज नरूका, न्यायाधीश, एम.ए.सी.टी. क्रम 1, बूंदी; श्री वीरेन्द्र प्रताप सिंह, न्यायाधीश, पारिवारिक न्यायालय, बूंदी; श्री प्रशान्त शर्मा, न्यायाधीश, पॉक्सो क्रम 1, बूंदी; श्रीमती सोनाली प्रशान्त शर्मा, न्यायाधीश, एस.सी. एवं एस.टी. (पी.ए.) प्रकरण, बूंदी; श्रीमती प्रीति मुकेश परनामी, अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश क्रम 1, बूंदी; श्रीमती कृष्णा गुप्ता, अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश क्रम 2, बूंदी; श्री अंकुर गुप्ता, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, बूंदी; प्रिन्सिपल मजिस्ट्रेट, जे.जे.बी., बूंदी श्रीमती अम्बिका; श्री सिद्धान्त सक्सेना, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, बूंदी; श्रीमती वृष्टि विज, जे.एम. क्रम 3, बूंदी; सुश्री नूपुर गुप्ता, जे.एम. क्रम 2, बूंदी; सुश्री तनु वर्मा, जे.एम., बूंदी तथा श्री आशीष कुमार परेवा, जे.एम. क्रम 1, बूंदी उपस्थित रहे।
इसके अतिरिक्त प्रोटोकॉल अधिकारी श्री बृजेश श्रृंगी, कोर्ट मैनेजर श्री सुरेन्द्र सांखला, श्री अभिषेक दीक्षित (पी.ए., मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय), अधिवक्तागण, पुलिस अधिकारी, पक्षकार एवं न्यायालय के समस्त अधिकारी-कर्मचारी भी समारोह में उपस्थित रहे।
इस अवसर पर श्री संदीप कुमार शर्मा अपने संपूर्ण परिवार के साथ समारोह में उपस्थित रहे। न्यायिक अधिकारियों एवं उपस्थित अतिथियों द्वारा श्री शर्मा के साथ-साथ उनके परिवारजनों का भी माल्यार्पण, पुष्पगुच्छ भेंट कर एवं आत्मीय अभिनंदन के साथ स्वागत किया गया। सेवानिवृत्ति समारोह में न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं एवं न्यायालयीन कर्मचारियों द्वारा श्री शर्मा का माल्यार्पण कर, साफा बंधवाकर एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मान किया गया। इसके उपरांत राजस्थान पुलिस द्वारा उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर देकर सम्मानपूर्वक सलामी दी गई तथा पुलिस बैंड की मधुर धुनों के साथ जिला न्यायालय परिसर से गरिमापूर्ण विदाई दी गई। समारोह के दौरान वातावरण भावुक एवं सम्मानपूर्ण बना रहा।
अपने 33 वर्षों के न्यायिक सेवाकाल में श्री संदीप कुमार शर्मा ने विभिन्न न्यायालयों में निष्पक्ष, पारदर्शी एवं संवेदनशील न्याय प्रदान करते हुए न्यायपालिका की गरिमा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। उनकी सादगी, सौम्यता, प्रशासनिक दक्षता एवं न्याय के प्रति समर्पित कार्यशैली ने उन्हें न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं एवं न्यायालयीन कर्मचारियों के बीच अत्यंत सम्माननीय स्थान दिलाया। समारोह के अंत में उपस्थित सभी जनों ने उनके स्वस्थ, सुखमय एवं दीर्घायु जीवन की मंगलकामनाएँ करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ प्रेषित कीं

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