सांप सीढ़ी के खेल से, बच्चे सीख सकेंगे अंगदान महादान
2. राष्ट्रीय अंगदान दिवस पर,साँप सीढ़ी खेल के जागरूकता पोस्टर का विमोचन
राष्ट्रीय अंगदान दिवस पर आईजी हरेंद्र कुमार ने किया अंगदान जागरूकता हेतु अनूठी ‘अंगदान सांप-सीढ़ी’ का विमोचन
कोटा,
3 अगस्त। आज राष्ट्रीय अंगदान दिवस के अवसर पर अंगदान जागरूकता को नई दिशा
देने के उद्देश्य से शाइन इंडिया फाउंडेशन द्वारा तैयार किए गए अनूठे
‘अंगदान-महादान सांप-सीढ़ी’ खेल का विमोचन पुलिस महानिरीक्षक, कोटा संभाग
श्री हरेंद्र कुमार के कर-कमलों द्वारा किया गया।
यह अभिनव शैक्षणिक
खेल बच्चों और युवाओं को खेल-खेल में अंगदान की सही जानकारी देने के
उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें अंगदान से जुड़ी भ्रांतियों और
तथ्यों को सांप और सीढ़ी के माध्यम से सरल एवं रोचक तरीके से समझाया गया
है।
बच्चे खेलते-खेलते जान सकेंगे कि अंगदान क्या है, कौन अंगदान
कर सकता है, ब्रेन डेथ क्या होती है, किन अंगों का दान संभव है तथा अंगदान
से जुड़े भ्रमों की वास्तविकता क्या है।
इस अवसर पर पुलिस
महानिरीक्षक श्री हरेंद्र कुमार ने कहा कि, "अंगदान मानवता की सबसे महान
सेवाओं में से एक है। समाज में आज भी जानकारी के अभाव और भ्रांतियों के
कारण अनेक लोग इस पुण्य कार्य से पीछे रह जाते हैं। यदि बच्चों को बचपन से
ही सही और वैज्ञानिक जानकारी दी जाए, तो वे स्वयं जागरूक नागरिक बनेंगे और
अपने परिवार व समाज को भी प्रेरित करेंगे। शाइन इंडिया फाउंडेशन का यह
सांप-सीढ़ी खेल जागरूकता का एक अत्यंत अभिनव और प्रभावी प्रयास है, जो
निश्चित रूप से अंगदान के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने में महत्वपूर्ण
भूमिका निभाएगा।"
शाइन इंडिया फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने बताया कि
यह खेल स्कूलों, महाविद्यालयों, सामाजिक संस्थाओं तथा जागरूकता शिविरों
में उपयोग किया जाएगा, ताकि अंगदान जैसे गंभीर विषय को सरल, रोचक और
व्यवहारिक तरीके से आमजन, विशेषकर बच्चों तक पहुंचाया जा सके।
कार्यक्रम
के दौरान सीनियर ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर डॉ कुलवंत गौड़ के अलावा
,संस्था के सदस्य श्री राजेंद्र जैन एवं श्री धीरज शर्मा भी उपस्थित रहे।
संस्था का मानना है कि,आज के जागरूक बच्चे ही कल के अंगदान प्रेरक बनेंगे,
और यही प्रयास भविष्य में अधिक से अधिक लोगों को अंगदान का संकल्प लेने के
लिए प्रेरित करेगा।
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
03 अगस्त 2026
सांप सीढ़ी के खेल से, बच्चे सीख सकेंगे अंगदान महादान
वह लोग खुदा के यहाँ मुख़्तलिफ़ दरजों के हैं और जो कुछ वह करते हैं ख़ुदा देख रहा है
और (तुम्हारा गुमान बिल्कुल ग़लत है) किसी नबी की (हरगिज़) ये शान नहीं कि
ख़्यानत करे और ख़्यानत करेगा तो जो चीज़ ख़्यानत की है क़यामत के दिन वही
चीज़ (बिलकुल वैसा ही) ख़ुदा के सामने लाना होगा फिर हर शख़्स अपने किए का
पूरा पूरा बदला पाएगा और उनकी किसी तरह हक़तल्फ़ी नहीं की जाएगी (161)
भला जो शख़्स ख़ुदा की ख़ुशनूदी का पाबन्द हो क्या वह उस शख़्स के
बराबर हो सकता है जो ख़ुदा के गज़ब में गिरफ़्तार हो और जिसका ठिकाना
जहन्नुम है और वह क्या बुरा ठिकाना है (162)
वह लोग खुदा के यहाँ मुख़्तलिफ़ दरजों के हैं और जो कुछ वह करते हैं ख़ुदा देख रहा है (163)
ख़ुदा ने तो ईमानदारों पर बड़ा एहसान किया कि उनके वास्ते उन्हीं की
क़ौम का एक रसूल भेजा जो उन्हें खुदा की आयतें पढ़ पढ़ के सुनाता है और
उनकी तबीयत को पाकीज़ा करता है और उन्हें किताबे (ख़ुदा) और अक़्ल की बातें
सिखाता है अगरचे वह पहले खुली हुयी गुमराही में पडे़ थे (164)
मुसलमानों क्या जब तुमपर (जंगे ओहद) में वह मुसीबत पड़ी जिसकी दूनी
मुसीबत तुम (कुफ़्फ़ार पर) डाल चुके थे तो (घबरा के) कहने लगे ये (आफ़त)
क़हाँ से आ गयी (ऐ रसूल) तुम कह दो कि ये तो खुद तुम्हारी ही तरफ़ से है (न
रसूल की मुख़ालेफ़त करते न सज़ा होती) बेशक ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है
(165)
और जिस दिन दो जमाअतें आपस में गुंथ गयीं उस दिन तुम पर जो मुसीबत पड़ी
वह तुम्हारी शरारत की वजह से (ख़ुदा की इजाजत की वजह से आयी) और ताकि
ख़ुदा सच्चे ईमान वालों को देख ले (166)
और मुनाफि़क़ों को देख ले (कि कौन है) और मुनाफि़क़ों से कहा गया कि आओ
ख़ुदा की राह में जेहाद करो या (ये न सही अपने दुशमन को) हटा दो तो कहने
लगे (हाए क्या कहीं) अगर हम लड़ना जानते तो ज़रूर तुम्हारा साथ देते ये लोग
उस दिन बनिस्बते ईमान के कुफ्र के ज़्यादा क़रीब थे अपने मुँह से वह बातें
कह देते हैं जो उनके दिल में (ख़ाक) नहीं होतीं और जिसे वह छिपाते हैं
ख़ुदा उसे ख़ूब जानता है (167)
(ये वही लोग हैं) जो (आप चैन से घरों में बैठे रहते है और अपने शहीद)
भाईयों के बारे में कहने लगे काश हमारी पैरवी करते तो न मारे जाते (ऐ रसूल)
उनसे कहो (अच्छा) अगर तुम सच्चे हो तो ज़रा अपनी जान से मौत को टाल दो
(168)
और जो लोग ख़ुदा की राह में शहीद किए गए उन्हें हरगिज़ मुर्दा न समझना
बल्कि वह लोग जीते जागते मौजूद हैं अपने परवरदिगार की तरफ़ से वह (तरह तरह
की) रोज़ी पाते हैं (169)
और ख़ुदा ने जो फ़ज़ल व करम उन पर किया है उसकी (ख़ुशी) से फूले नहीं
समाते और जो लोग उनसे पीछे रह गए और उनमें आकर शामिल नहीं हुए उनकी निस्बत
ये (ख़्याल करके) ख़ुशियां मनाते हैं कि (ये भी शहीद हों तो) उनपर न किसी
कि़स्म का ख़ौफ़ होगा और न आज़ुर्दा ख़ातिर होंगे (170)
02 अगस्त 2026
वह लोग खुदा के यहाँ मुख़्तलिफ़ दरजों के हैं और जो कुछ वह करते हैं ख़ुदा देख रहा है
और (तुम्हारा गुमान बिल्कुल ग़लत है) किसी नबी की (हरगिज़) ये शान नहीं कि
ख़्यानत करे और ख़्यानत करेगा तो जो चीज़ ख़्यानत की है क़यामत के दिन वही
चीज़ (बिलकुल वैसा ही) ख़ुदा के सामने लाना होगा फिर हर शख़्स अपने किए का
पूरा पूरा बदला पाएगा और उनकी किसी तरह हक़तल्फ़ी नहीं की जाएगी (161)
भला जो शख़्स ख़ुदा की ख़ुशनूदी का पाबन्द हो क्या वह उस शख़्स के
बराबर हो सकता है जो ख़ुदा के गज़ब में गिरफ़्तार हो और जिसका ठिकाना
जहन्नुम है और वह क्या बुरा ठिकाना है (162)
वह लोग खुदा के यहाँ मुख़्तलिफ़ दरजों के हैं और जो कुछ वह करते हैं ख़ुदा देख रहा है (163)
ख़ुदा ने तो ईमानदारों पर बड़ा एहसान किया कि उनके वास्ते उन्हीं की
क़ौम का एक रसूल भेजा जो उन्हें खुदा की आयतें पढ़ पढ़ के सुनाता है और
उनकी तबीयत को पाकीज़ा करता है और उन्हें किताबे (ख़ुदा) और अक़्ल की बातें
सिखाता है अगरचे वह पहले खुली हुयी गुमराही में पडे़ थे (164)
मुसलमानों क्या जब तुमपर (जंगे ओहद) में वह मुसीबत पड़ी जिसकी दूनी
मुसीबत तुम (कुफ़्फ़ार पर) डाल चुके थे तो (घबरा के) कहने लगे ये (आफ़त)
क़हाँ से आ गयी (ऐ रसूल) तुम कह दो कि ये तो खुद तुम्हारी ही तरफ़ से है (न
रसूल की मुख़ालेफ़त करते न सज़ा होती) बेशक ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है
(165)
और जिस दिन दो जमाअतें आपस में गुंथ गयीं उस दिन तुम पर जो मुसीबत पड़ी
वह तुम्हारी शरारत की वजह से (ख़ुदा की इजाजत की वजह से आयी) और ताकि
ख़ुदा सच्चे ईमान वालों को देख ले (166)
और मुनाफि़क़ों को देख ले (कि कौन है) और मुनाफि़क़ों से कहा गया कि आओ
ख़ुदा की राह में जेहाद करो या (ये न सही अपने दुशमन को) हटा दो तो कहने
लगे (हाए क्या कहीं) अगर हम लड़ना जानते तो ज़रूर तुम्हारा साथ देते ये लोग
उस दिन बनिस्बते ईमान के कुफ्र के ज़्यादा क़रीब थे अपने मुँह से वह बातें
कह देते हैं जो उनके दिल में (ख़ाक) नहीं होतीं और जिसे वह छिपाते हैं
ख़ुदा उसे ख़ूब जानता है (167)
(ये वही लोग हैं) जो (आप चैन से घरों में बैठे रहते है और अपने शहीद)
भाईयों के बारे में कहने लगे काश हमारी पैरवी करते तो न मारे जाते (ऐ रसूल)
उनसे कहो (अच्छा) अगर तुम सच्चे हो तो ज़रा अपनी जान से मौत को टाल दो
(168)
और जो लोग ख़ुदा की राह में शहीद किए गए उन्हें हरगिज़ मुर्दा न समझना
बल्कि वह लोग जीते जागते मौजूद हैं अपने परवरदिगार की तरफ़ से वह (तरह तरह
की) रोज़ी पाते हैं (169)
और ख़ुदा ने जो फ़ज़ल व करम उन पर किया है उसकी (ख़ुशी) से फूले नहीं
समाते और जो लोग उनसे पीछे रह गए और उनमें आकर शामिल नहीं हुए उनकी निस्बत
ये (ख़्याल करके) ख़ुशियां मनाते हैं कि (ये भी शहीद हों तो) उनपर न किसी
कि़स्म का ख़ौफ़ होगा और न आज़ुर्दा ख़ातिर होंगे (170)
01 अगस्त 2026
180 किमी दूर जाकर भी रुका नहीं जुनून"
180 किमी दूर जाकर भी रुका नहीं जुनून"
शाइन इंडिया फाउंडेशन ने कोटा से दूरस्थ गांवों में फैलाया अंगदान का संदेश
कोटा।
शनिवार को "नो बैग डे" के अवसर पर शाइन इंडिया फाउंडेशन की टीम ने
राजस्थान सरकार के "अंगदान संजीवनी अभियान" के अंतर्गत कोटा से लगभग 180
किलोमीटर दूर स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, गुराडिया कलाँ और
पगारिया में अंगदान जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया।
कार्यशाला
में दोनों विद्यालयों के कक्षा 8 से 12 तक के 800 से अधिक विद्यार्थियों ने
भाग लिया। टीम ने बच्चों को नेत्रदान, अंगदान और देहदान के महत्व के बारे
में विस्तार से जानकारी दी। कार्यशाला की मुख्य वक्ता डॉ कुलवंत गौड़ ने
बताया कि, बच्चों को बताया गया कि मृत्यु उपरांत एक व्यक्ति अपने अंगदान से
8 से 9 लोगों को नया जीवन दे सकता है। और इसी तरह से मृत्यु के बाद 6 घंटे
के अंदर नेत्रों के दान से कॉर्निया की अंधता को भी दूर किया जा सकता है।
संस्था
के प्रतिनिधियों ने बताया कि पिछले 15 वर्षों में शाइन इंडिया फाउंडेशन
द्वारा 400 से अधिक राजकीय एवं निजी विद्यालयों में इस प्रकार की
कार्यशालाओं का आयोजन किया जा चुका है।
गुराडिया कलाँ के प्रधानाचार्य जितेंद्र सिंह हाड़ा ने संस्था के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि,
"अपने
शहर से तेज बारिश और तूफान में इतनी दूर आकर बच्चों को अंगदान के बारे में
जागरूक करना ही एक जुनून का कार्य है। यदि आज के युवा छात्र अंगदान के
विषय को अच्छे से समझ लेते हैं तो भविष्य में वे अंगदान प्रेरक के रूप में
अन्य लोगों को भी जागरूक कर सकेंगे।"
*पगारिया उच्च माध्यमिक
विद्यालय के प्रधानाचार्य अजीत कुमार ने भी संस्था को धन्यवाद देते हुए कहा
कि, "आज के समय में अंगदान समाज की सबसे बड़ी जरूरत है। एक व्यक्ति के चले
जाने के बाद भी उसके अंग कई जिंदगियां बचा सकते हैं। शाइन इंडिया फाउंडेशन
इस महत्वपूर्ण विषय पर जिस समर्पण और लक्ष्य के साथ काम कर रही है, वह
वाकई काबिल-ए-तारीफ है। हम उम्मीद करते हैं कि ऐसे आयोजन लगातार होते रहें
ताकि हर घर तक अंगदान का संदेश पहुंचे।"_
कार्यक्रम के अंत में
सदस्य ने अंगदान से संबंधित प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम आयोजित किया और सही
जवाब देने वाले प्रतिभागियों को "शाइन मेडल" दिया।
विद्यालय स्टाफ और विद्यार्थियों ने संस्था के इस पुण्य कार्य की सराहना की और भविष्य में भी ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों की मांग की।
संपर्क: शाइन इंडिया फाउंडेशन, कोटा | 8386900102
33 वर्षों की गौरवपूर्ण न्यायिक सेवा पूर्ण कर जिला एवं सेशन न्यायाधीश श्री संदीप कुमार शर्मा सेवानिवृत्त