तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
26 जुलाई 2026
नंदन नीलेकणी कौन हैं जिन्हें पीएम मोदी ने एग्ज़ाम सुधार वाली टास्क फ़ोर्स का दिया ज़िम्मा
और (भला) तुम क्योंकर काफि़र बन जाओगे हालांकि तुम्हारे सामने ख़ुदा की आयतें (बराबर) पढ़ी जाती हैं और उसके रसूल (मोहम्मद) भी तुममें (मौजूद) हैं और जो शख़्स ख़ुदा से वाबस्ता हो वह (तो) जरूर सीधी राह पर लगा दिया गया
और (भला) तुम क्योंकर काफि़र बन जाओगे हालांकि तुम्हारे सामने ख़ुदा की
आयतें (बराबर) पढ़ी जाती हैं और उसके रसूल (मोहम्मद) भी तुममें (मौजूद) हैं
और जो शख़्स ख़ुदा से वाबस्ता हो वह (तो) जरूर सीधी राह पर लगा दिया गया
(101)
ऐ ईमान वालों ख़ुदा से डरो जितना उससे डरने का हक़ है और तुम (दीन) इस्लाम के सिवा किसी और दीन पर हरगिज़ न मरना (102)
और तुम सब के सब (मिलकर) ख़ुदा की रस्सी मज़बूती से थामे रहो और आपस
में (एक दूसरे) के फूट न डालो और अपने हाल (ज़ार) पर ख़ुदा के एहसान को तो
याद करो जब तुम आपस में (एक दूसरे के) दुश्मन थे तो ख़ुदा ने तुम्हारे
दिलों में (एक दूसरे की) उलफ़त पैदा कर दी तो तुम उसके फ़ज़ल से आपस में
भाई भाई हो गए और तुम गोया सुलगती हुयी आग की भट्टी (दोज़ख) के लब पर
(खडे़) थे गिरना ही चाहते थे कि ख़ुदा ने तुमको उससे बचा लिया तो ख़ुदा
अपने एहकाम यू वाजे़ह करके बयान करता है ताकि तुम राहे रास्त पर आ जाओ
(103)
और तुमसे एक गिरोह ऐसे (लोगों का भी) तो होना चाहिये जो (लोगों को)
नेकी की तरफ़ बुलाए अच्छे काम का हुक्म दे और बुरे कामों से रोके और ऐसे ही
लोग (आख़ेरत में) अपनी दिली मुरादें पायेंगे (104)
औेर तुम (कहीं) उन लोगों के ऐसे न हो जाना जो आपस में फूट डाल कर बैठ
रहे और रौशन (दलील) आने के बाद भी एक मुँह एक ज़बान न रहे और ऐसे ही लोगों
के वास्ते बड़ा (भारी) अज़ाब है (105)
(उस दिन से डरो) जिस दिन कुछ यू लोगों के चेहरे तो सफेद नूरानी होंगे
और कुछ (लोगो) के चेहरे सियाह जिन लोगों के मुहॅ में कालिक होगी (उनसे कहा
जायेगा) हाए क्यों तुम तो इमान लाने के बाद काफि़र हो गए थे अच्छा तो (लो)
(अब) अपने कुफ्रकी सज़ा में अज़ाब (के मजे़) चखो (106)
और जिनके चेहरे पर नूर बरसता होगा वह तो ख़ुदा की रहमत (बहिश्त) में होंगे (और) उसी में सदा रहेंगे (107)
(ऐ रसूल) ये ख़ुदा की आयतें हैं जो हम तुमको ठीक (ठीक) पढ़ के सुनाते
हैं और ख़ुदा सारे जहांन के लोगों (से किसी) पर जु़ल्म करना नहीं चाहता
(108)
और जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (सब) ख़ुदा ही का है और (आखि़र) सब कामों की रूज़ु ख़ुदा ही की तरफ़ है (109)
तुम क्या अच्छे गिरोह हो कि (लोगों की) हिदायत के वास्ते पैदा किये गए
हो तुम (लोगों को) अच्छे काम का हुक्म करते हो और बुरे कामों से रोकते हो
और ख़ुदा पर ईमान रखते हो और अगर एहले किताब भी (इसी तरह) ईमान लाते तो
उनके हक़ में बहुत अच्छा होता उनमें से कुछ ही तो इमानदार हैं और अक्सर
बदकार (110)
25 जुलाई 2026
नो बैग डे बना जीवनदान का दिन: स्कूलों में गूंजा अंगदान का संदेश
नो बैग डे बना जीवनदान का दिन: स्कूलों में गूंजा अंगदान का संदेश
2. राज्य सरकार के ‘अंगदान संजीवनी अभियान’ के तहत संभाग के विद्यालयों में जागरूकता कार्यशालाएं जारी
कोटा।
राजस्थान सरकार द्वारा जुलाई माह को अंगदान जागरूकता माह के रूप में मनाते
हुए प्रदेशभर में अंगदान के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न
विभागों के माध्यम से जागरूकता कार्यक्रम और कार्यशालाएं आयोजित की जा रही
हैं। इसी क्रम में ‘नो बैग डे’ को विद्यार्थियों के लिए ज्ञान और जीवनदान
से जोड़ते हुए राजकीय विद्यालयों में अंगदान एवं नेत्रदान विषय पर विशेष
जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं।
संभाग की सक्रिय
सामाजिक संस्था शाइन इंडिया फाउंडेशन भी राज्य सरकार के अंगदान संजीवनी
अभियान को सफल बनाने और अंगदान-नेत्रदान के संदेश को घर-घर तक पहुंचाने में
महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। अभियान के तहत बीते माह संयुक्त निदेशक
प्रारंभिक शिक्षा आशा मंडावत द्वारा सभी राजकीय विद्यालयों में ‘नो बैग डे’
के अवसर पर अंगदान एवं नेत्रदान विषय पर जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित करने
के निर्देश जारी किए गए थे।
इसी क्रम में ग्राम मूंडला, तहसील
दीगोद स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में प्रधानाचार्य रेखा शर्मा के
नेतृत्व में अंगदान-नेत्रदान जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला
में प्रमुख वक्ता डॉ. संगीता गौड़ ने विद्यार्थियों को सरल और सहज भाषा में
नेत्रदान एवं अंगदान की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्होंने
विद्यार्थियों से जुड़े सवालों के जवाब देते हुए अंगदान को लेकर समाज में
फैली विभिन्न भ्रांतियों और गलत धारणाओं का भी समाधान किया।
इसके
पश्चात समीपस्थ ग्राम कोटसुवां के पीएम श्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय
में प्रधानाचार्य अनुराधा खंडेलवाल के नेतृत्व में कक्षा 8 से 12 तक के
विद्यार्थियों के लिए जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई। इस अवसर पर डॉ.
कुलवंत गौड़ ने विद्यार्थियों को ब्रेन डेड अवस्था के बारे में विस्तार से
समझाया और बताया कि ऐसी स्थिति में अंगदान का निर्णय कई जरूरतमंद मरीजों को
नया जीवन दे सकता है।
डॉ. गौड़ ने विद्यार्थियों से कहा कि “अंगदान
केवल मृत्यु के बाद किया जाने वाला दान नहीं, बल्कि यह जीवन के बाद भी
किसी के जीवन में रोशनी, सांस और उम्मीद छोड़ जाने का संकल्प है।” उन्होंने
विद्यार्थियों से स्वयं जागरूक बनने और अपने परिवार एवं समाज में अंगदान
का संदेश पहुंचाने का आह्वान किया।
शाइन इंडिया फाउंडेशन वर्ष 2016
से संभाग स्तर पर विद्यालयों, महाविद्यालयों और विभिन्न संस्थानों में
नेत्रदान एवं अंगदान जागरूकता कार्यशालाओं का आयोजन कर रही है। संस्था का
उद्देश्य है कि बच्चों और युवाओं को अंगदान के प्रति वैज्ञानिक जानकारी
देकर उन्हें समाज में जागरूकता के दूत के रूप में तैयार किया जाए।
आज ‘नो बैग डे’ पर बच्चे किताबों का बोझ लेकर नहीं, बल्कि जीवन बचाने का संदेश लेकर अपने घर लौटे।
विश्व ओआरएस दिवस पर जागरूकता अभियान, आधारशिला पर्यटक स्थल पर लोगों को पिलाया गया ओआरएस घोल
बेशक जिन लोगों ने कुफ्रइखि़्तयार किया और कुफ्रकी हालत में मर गये तो अगरचे इतना सोना भी किसी की गुलू ख़लासी {छुटकारा पाने} में दिया जाए कि ज़मीन भर जाए तो भी हरगिज़ न कु़बूल किया जाएगा यही लोग हैं जिनके लिए दर्दनाक अज़ाब होगा और उनका कोई मददगार भी न होगा
बेशक जिन लोगों ने कुफ्रइखि़्तयार किया और कुफ्रकी हालत में मर गये तो
अगरचे इतना सोना भी किसी की गुलू ख़लासी {छुटकारा पाने} में दिया जाए कि
ज़मीन भर जाए तो भी हरगिज़ न कु़बूल किया जाएगा यही लोग हैं जिनके लिए
दर्दनाक अज़ाब होगा और उनका कोई मददगार भी न होगा (91)
(लोगों) जब तक तुम अपनी पसन्दीदा चीज़ों में से कुछ राहे ख़ुदा में
ख़र्च न करोगे हरगिज़ नेकी के दरजे पर फ़ायज़ नहीं हो सकते और तुम कोई (92)
सी चीज़ भी ख़र्च करो ख़ुदा तो उसको ज़रूर जानता है तौरैत के नाजि़ल
होने के क़ब्ल याकू़ब ने जो जो चीज़े अपने ऊपर हराम कर ली थीं उनके सिवा
बनी इसराइल के लिए सब खाने हलाल थे (ऐ रसूल उन यहूद से) कह दो कि अगर तुम
(अपने दावे में सच्चे हो तो तौरेत ले आओ (93)
और उसको (हमारे सामने) पढ़ो फिर उसके बाद भी जो कोई ख़ुदा पर झूठ तूफ़ान जोड़े तो (समझ लो) कि यही लोग ज़ालिम (हठधर्म) हैं (94)
(ऐ रसूल) कह दो कि ख़ुदा ने सच फ़रमाया तो अब तुम मिल्लते इबराहीम
(इस्लाम) की पैरवी करो जो बातिल से कतरा के चलते थे और मुशरेकीन से न थे
(95)
लोगों (की इबादत) के वास्ते जो घर सबसे पहले बनाया गया वह तो यक़ीनन
यही (काबा) है जो मक्के में है बड़ी (खै़र व बरकत) वाला और सारे जहान के
लोगों का रहनुमा (96)
इसमें (हुरमत की) बहुत सी वाज़े और रौशन निशानिया हैं (उनमें से)
मुक़ाम इबराहीम है (जहाँ आपके क़दमों का पत्थर पर निशान है) और जो इस घर
में दाखि़ल हुआ अमन में आ गया और लोगों पर वाजिब है कि महज़ ख़ुदा के लिए
ख़ानाए काबा का हज करें जिन्हे वहां तक पहुँचने की इस्तेताअत है और जिसने
बावजूद कु़दरत हज से इन्कार किया तो (याद रखे) कि ख़ुदा सारे जहान से
बेपरवाह है (97)
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ अहले किताब खुदा की आयतो से क्यो मुन्किर हुए
जाते हो हालांकि जो काम काज तुम करते हो खु़दा को उसकी (पूरी) पूरी इत्तेला
है (98)
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ अहले किताब दीदए दानिस्ता (जान बुझ कर) खुदा
की (सीधी) राह में (नाहक़ की) कज़ी ढॅूढो (ढूढ) के ईमान लाने वालों को उससे
क्यों रोकते हो ओर जो कुछ तुम करते हो खु़दा उससे बेख़बर नहीं है (99)
ऐ ईमान वालों अगर तुमने एहले किताब के किसी फि़रके़ का भी कहना माना तो
(याद रखो कि) वह तुमको ईमान लाने के बाद (भी) फिर दुबारा काफि़र बना
छोडेंगे (100)