आज़ाद भारत को जिओ और जीने दो का सलीक़ा सिखाने वाले , मानवधर्म संविधान निर्माता ,, डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर जी को श्रद्धाजंलि ,, उन्हें , नमन , लेकिन , उनके बनाये हुए संविधान ,, उनके सिद्धांतों को , मटियामेट करने की वजह से आज हम ,, सोने की चिड़िया से अराजकता वाले देश की श्रेणी में आ खड़े हुए है , निर्वाचन आयोग सहित सभी संस्थाओं पर सवालात खड़े है , मनमानी ,चरम सीमा पर है , हो भी क्यों नहीं , डॉक्टर अम्बेडकर ने संविधान में धर्म , जाती , लिंग , समाज , किसी भी आधार पर पक्षपात पर रोक लगाई थी , लेकिन हुआ क्या , आज़ाद भारत में पंडित नेहरू ने कार्यभार ग्रहण करते ही आरक्षण के लिए जब कर्मकारों का सर्वेक्षण हुआ और ,, सिर्फ कर्म के आधार पर कर्म करने वालों को आरक्षण की सिफारिश हुई , तो जाति , धर्म में भेदभाव का संविधान का आर्टिकल ताक में रखकर , केवल हिन्दुओं के लिए शब्द जोड़कर , मुस्लिम कर्मकार चाहे मीट व्यवसाई हों , कपड़ा बुनने वाले हों , या कोई भी व्यवसाई हों , उन्हें आरक्षण के लाभ से आउट कर अम्बेडकर के समानता के संविधान को तार तार कर दिया , नतीजा , खटीक भाइयों को , कोली समाज से जुड़े बुनकरों सहित सभी हिन्दू समाज के कर्मकारों को आरक्षण मिला , लेकिन मुस्लिम समाज के , बुनकर ,, मीट ,, खाल सहित अन्य व्यवसाय करने वाले आरक्षण से आउट कर दिए गए ,,, आरक्षण दस वर्षों के लिए था , लेकिन सरकारें ऐसी निकम्मी रहीं के वोह दस वर्षो में इनके हालत शैक्षणिक और सामजिक स्तर पर सुधारने में नाकामयाब रहीं , और अब हालात आपके सामने है ,, ज़ीरो नंबर से थोड़े से नंबर वाले विशेषगय डॉक्टर्स बनाये जा रहे हैं , लेकिन दलोटों के साथ अत्याचार की अराजकता जस की तस बनी हुई है , संविधान की मंशा , अम्बेडकर की सामजिक न्याय की मंशा , त्वरित न्याय की मंशा सब बेमानी सी होती जा रही हैं , वोटिंग को आज मूल कर्तव्य नहीं माना जा रहा है , चुनाव आयोग जो चाहता है वोह कर लेता है , देश का प्रधानमंत्री , मुख्यमंत्री , सरकारी खर्चे पर सुरक्षा खर्चे पर , सरकारी विमानों से , सरकारी सिक्युरिटी के बीच उसकी पार्टी का खुले आम प्रचार प्रसार चौबीस घंटे करता रहता है , , पार्षद , पंचायत के चुनाव हों तो हों , नहीं तो कभी भी रोक दिए जाते हैं ,सरकारें बिक रही है , सांसद , विधायक इधर से उधर हो रहे हैं , कौन किस पार्टी से चुनाव जीतता है , फिर पार्टी में जाकर मंत्री बन जाता है , समझ ही नहीं आ रहा है , कुल मिलाकर न्यायिक व्यवस्था का विस्तार भी विकेन्द्रीकृत कर नहीं हुआ है , अदालतों में लाखों मुक़दमे चल रहे हैं , क़ानून बना है के छह माह में मुक़दमे का पूर्ण निस्तारण हो , लेकिन अदालतें और न्यायिक अधिकारी नहीं होने से , पहली तारीख ही छह महीने की देना मजबूरी है , महिलाओं का , दलितों का सम्मान नहीं , बराबरी का दर्जा नहीं , किसानों को संरक्षण नहीं , मज़दूरों की स्थिति तो आज देश देख रहा है , सभी फैक्ट्री बंद , ज़मीनों की सौदेबाज़ी हो रही है , और बढ़े लोग , अज़गर बनकर देश की अर्थव्यवस्था को निगल रहे हैं , शिक्षा निति का आचरण देश देख रहा है , संविधान को रोज़ तार तार क्या जा रहा है , लोकसभा में , विधानसभा में क्या हो रहा है देश देख रहा है , जज की नियुक्तियां कितनी सरलीकृत हो गई है , देश ने देखा है , ,, वकील कोटे से बनने वाले जजों की संख्या निरंतर कटौती कर खत्म सी की जाने लगी है , ,ऐसे में देश के संविधान की स्थति को मज़बूत करने के लिए फिर से हमें एक जुट होना होगा , अम्बेकर का सिद्धांत रहेगा , तो देश रहेगा , नहीं तो , ,,, जो हो रहा है , , जैसा हो रहा ,है ,,,,बगाल , मणिपुर , उत्तर प्रदेश , बुलडोज़र , ,एनकाउंटर व्यवस्थाएं हिरासत में मौतें ,, हिरासत में हत्याएं ,, देश रोज़ देख रहा रहा है , इसीलिए देश को बचाने के लिए आज अम्बेडकर के संविधान की शत प्रतिशत पालना की आवश्यकता है , अम्बेडकर के सिद्धांत , विचारों की आवश्यकता है , उन्हें , उनके विचार को ज़िंदाबाद करने की आवश्यकता है , ,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339