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03 जनवरी 2026

पहले उद्योग नगरी, फिर शिक्षा नगरी की तबाही के बाद कोटा पर्यटन उद्योग नगरी की तरफ बढ़ तो रही है, लेकिन अव्यवस्थित, कुप्रबंध के चलते

 

पहले उद्योग नगरी, फिर शिक्षा नगरी की तबाही के बाद कोटा पर्यटन उद्योग नगरी की तरफ बढ़ तो रही है, लेकिन अव्यवस्थित, कुप्रबंध के चलते गरीब वर्ग, छोटे व्यापारी, थड़ी, खोमचे वालों, ऑटो वालों के लिये बेरोज़गारी का संदेश भी है, कोटा हाड़ौती टूर ट्रेवल्स ऑपरेटर्स की यह कोटा मीट ,,, राजस्थान सरकार के भाजपा शासन के स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह जी खर्रा की कोटा की विकास योजनाओं को लेकर जो उनकी पूर्व में की गई बेहूदा टिप्पणियां है , उन्हें रिजेक्ट करने के लिए काफी हैं , जबकि कोटा के ही विकास पुरुष कहे जाने वाले शान्ति धारीवाल के विकास और सोंदर्यकरण कार्यों के लिए एक शाबाशी भी है ,, जी हाँ कोटा हाड़ौती से प्यार करने वालों , ,कोटा को , कोटा की विकास सोंदर्यकरण योजनाओं के प्रति कोटा के आकर्षण को नीचा दिखाने के लिए , भाजपा सरकार के स्वायत शासन मंत्री कभी सफेद हाथी , कभी भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर अपमानित करते रहे हैं , यह टूर ऑपरेटर्स की मीट ,, उन्हें झूंठा साबित करने के लिए काफी है ,, इधर कोटा और कोटा के पर्यटन स्थलों को , टूरिस्ट पैकेज टूर ऑपरेटर्स के ज़रिये देश भर में आकर्षित करने के लिए टूर ऑपरेटर मीट से , कोटा के छोटे व्यापारी , खोमचे वाले , ठेले वाले , चाट पकोड़ी वाले , छोटी सराये , होटलों, धर्मशाला वाले , ऑटो ,, ई रिक्शा सहित कई छोटे मंझले व्यापारियों , होटलों , भोजनालयों के लिए नुकसानदायक है , इन लोगों के रोज़गार को इसलिए भी खतरा है के होटल व्यवसाई खुद के व्यवसाय को बढ़ाने की दृष्टि से यह महंगी होटलें,, महंगे पास , महंगे व्यंजनों , व्यवस्थाओं के साथ कार्यक्रम करवा रहे हैं , ज़ाहिर है , टूर ऑपरेटर्स के टूर मेप में , यही लोग होंगे और पर्यटक आएंगे तो सही , लेकिन बढ़े होटल व्यवसाई ,, बढ़े रेस्टोरेंट , महंगी टेक्सी स्कीम ,, लक्ज़री बसों के लिए तो रोज़गारोनुमुखी है , यह पर्यटन स्थलों , सरकार के लिए कमाई का साधन हो सकता है , लेकिन कोटा शहर में छोटे मंझोले ,, गरीब रोज़मर्रा की कमाई करने वाले खोमचे वाले , ऑटो वाले , ई रिक्शा वाले , चाट , पकोड़ी वालों के लिए तो यह सब बेकार , बेमानी है , क्यूंकि टूर ऑपरेटर्स के रोज़गार मेप में यह लोग हैं ही नहीं ,, ऐसे में कांग्रेस की विकास योजनाओं का लाभ , जिसके बलबूते पर कोटा को टूरिस्ट मेप में लेकर , सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ाने की कोशिशें जहां एक तरफ स्वागत योग्य क़दम रहा, वहीँ दूसरी तरफ यह सब भाजपा जो दो साल में कोटा में एक ईंट तक नहीं लगा पाई है , अदालत परिसर निर्माण , मिनी सचिवालय को लेकर कोरी बयानबाज़ी चल रही है , तो एयरपोर्ट का शिलान्यास अभी तक नहीं हुआ है , कांग्रेस के सोंदर्यकरण , विकास कार्यों को भाजपा के लोग इस्तेमाल तो कर रहे हैं , लेकिन टूट फूट भी ठीक नहीं करा पाए हैं , इसीलिए तो कोचिंग उद्योग के लड़खड़ाने के बाद , होटल व्यवसाय को लगे आर्थिक धक्के के बाद व्यापारियों ने यह अपने स्तर पर ही यह प्रयास व्यवसायियों ने शुरू किये है , लेकिन कोचिंग सिटी में बच्चों को कोटा में ही केंद्रीकृत करने के मामले में कोई गंभीर नहीं हुआ है , यही वजह है के कोचिंग मालिकों ने तो विकेन्द्रीकरण निति के तहत अपने अपने सेंटर दूसरे राज्यों में फैलाकर , अपने कारोबार , कमाई को कई गुना बढ़ा लिया है , लेकिन इन कोचिंग , कोचिंग में आने वाले बच्चों के भरोसे कोटा को जो रोज़गार मिला था , उस हॉस्टल व्यवसाय , मेस व्यवसाय , स्टेशनरी सहित अन्य व्यवसाय को भी धक्का लगा है , करोड़ो रूपये की ऋण योजनाओं के तहत , हॉस्टल निर्माण हुए और अब उनके समक्ष रोज़गार छिन जाने या न्यूनतम स्तर पर सिमट जाने से , वोह सब निराशावाद में हैं , ,कोटा में व्यापार महासंघ तो है , लेकिन उसका रूहझान हॉस्टल और मेस व्यवसाय को भी पुनर्जीवित योजनाओं की तरफ होना ही चाहिए , सिर्फ पदाधिकारियों के व्यवसाय से जुडी होटल योजनाओं के रोज़गारोन्मुखी व्यवस्था से कोटा का कोई खास भला नहीं होगा , कोटा को एक साथ , मिल ,जुलकर कांग्रेस , भाजपा को भुलाकर ,, आपसी मतभेद भुलाकर , संयुक्त रूप से हर क्षेत्र में ,केंद्र और राज्य सरकार की जो कोटा के विकास और सोंदर्यकरण के प्रति जो लेट लतीफी उपेक्षित व्यवस्थाएं है , उनके खिलाफ कोटा के भाजपा के नेताओं पर विरोध प्रदर्शनों के माध्यम से दबाव बनाना ही होगा , नहीं तो कोटा जो उद्योग नगरी से टूट गया , फिर शिक्षा नगरी से बिखर गया , वोह अब कांग्रेस के शांति कुमार धारीवाल की योजनाओं से पर्यटन उद्योग के नक़्शे पर जो मुनाफे का दौर आया है , उसे भी धक्का लगने की संभावना हो सकती है ,,,,,,यहां कोटा बृज राज भवन जो अंग्रेज़ी शासन में पोलिटिकल एजेंट का बंगला था 1857 कि आज़ादी की जंग में , तात्कालिक दरबार के निकटतम पोलिटिकल एजेंट मेजर बर्टन के ज़ुल्म के खिलाफ आज़ादी की जंग , फिर लाला जय दयाल, मेहराब खान की बग़ावत, कोटा की अंग्रेज़ी शासन से आज़ादी, बृज राजभवन में मेजर बर्टन उसके पुत्रों का क़त्ल, फिर मेजर बर्टन के खोफ को खत्म करने के लिये उसके सर को धड़ से अलग कर, बल्लम पर सर को लटकाकर शहर में घुमाकर अंग्रेज़ी आतताई शासन पर विजय की कहानी, फिर गद्दारों की मुखबिरी, अंग्रेजों का हमला, फिर कोटा की गुलामी ओर कोटा की आज़ादी के जांबाज़ हीरो, लाला जय दयाल, मेहराब खान को बृज राज भवन के बाहर नीम के पेड़ पर फांसी , ऐतिहासिक पर्यटन को बढ़ावा देने की कई घटनाएं कोटा में दबी पढ़ी हैं, यहां के इतिहासकार जो चाटुकारों से अलग है , पर्यटन लेखक , खासकर डॉक्टर प्रभात कुमार सिंघल, फिरोज़ अहमद, हनीफ जेदी , ब्लॉगर्स, सोशल मीडिया एक्टिविस्ट से मशवरा कर अगर यह पर्यटन बढ़ावे के ईमानदार प्रयास होंगे तो यक़ीनन कोटा फिर से अव्वल होगा, नहीं तो कोटा को भाजपा सरकार की उपेक्षा अजगर बनकर निगल रही है, अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339
akhtar khan akela

अहसान फरामोश कोटा व्यापार

 अहसान फरामोश कोटा व्यापार, जी हां , कोंग्रेस सरकार के पूर्व मंत्री, कोटा उत्तर विधायक शांति कुमार धारीवाल, जिनके सौन्दर्यकरण, विकास योजनाओं ने कोटा को पर्यटन सर्किट, व्यापारियों को पर्यटन उद्योग से जोड़ा, उसे भुनाकर खुद के निजी रोजगार के अवसर बढाने के मामले में आयोजित टूर ट्रेवल्स मीट में , उन्हें उपेक्षित रखा, लेकिन शांति धारीवाल किसी अहसान फरामोश के मोहताज नहीं, टूर ट्रेवलर्स कहते सुने गए, वाह शांति धारीवाल ने तो कोटा को स्वर्ग बना दिया, ओर कुछ सवाल खड़े करते नज़र आये के जिनके नाम इनविटेशन कार्ड पर छपे हैं, उनमें से किसी का भी कोटा विकास, सौन्दर्यकरण के नाम पर एक काम भी कोई गिना दे , या बता दे के एक ईंट भी विकास की किसी ने लगाई हो, तो ज़िंदाबाद तो खुद शांति धारीवाल उनके विकास सौंदर्य कार्य खुद बा खुद हो गए,, अख़्तर

उसी की तरफ़ रुजू होकर (ख़ुदा की इबादत करो) और उसी से डरते रहो और पाबन्दी से नमाज़ पढ़ो और मुशरेकीन से न हो जाना

 उसी की तरफ़ रुजू होकर (ख़ुदा की इबादत करो) और उसी से डरते रहो और पाबन्दी से नमाज़ पढ़ो और मुशरेकीन से न हो जाना (31)
जिन्होंने अपने (असली) दीन में तफरेक़ा परवाज़ी की और मुख़्तलिफ़ फिरके़ के बन गए जो (दीन) जिस फिरके़ के पास है उसी में निहाल है (32)
और जब लोगों को कोई मुसीबत छू भी गयी तो उसी की तरफ़ रुजू होकर अपने परवरदिगार को पुकारने लगते हैं फिर जब वह अपनी रहमत की लज़्ज़त चखा देता है तो उन्हीं में से कुछ लोग अपने परवरदिगार के साथ शिर्क करने लगते हैं (33)
ताकि जो (नेअमत) हमने उन्हें दी है उसकी नाशुक्री करें ख़ैर (दुनिया में चन्दरोज़ चैन कर लो) फिर तो बहुत जल्द (अपने किए का मज़ा) तुम्हे मालूम ही होगा (34)
क्या हमने उन लोगों पर कोई दलील नाजि़ल की है जो उस (के हक़ होने) को बयान करती है जिसे ये लोग ख़ुदा का शरीक ठहराते हैं (हरगि़ज नहीं) (35)
और जब हमने लोगों को (अपनी रहमत की लज़्ज़त) चखा दी तो वह उससे खुश हो गए और जब उन्हें अपने हाथों की अगली कारसतानियो की बदौलत कोई मुसीबत पहुँची तो यकबारगी मायूस होकर बैठे रहते हैं (36)
क्या उन लोगों ने (इतना भी) ग़ौर नहीं किया कि खु़दा ही जिसकी रोज़ी चाहता है कुशादा कर देता है और (जिसकी चाहता है) तंग करता है-कुछ शक नहीं कि इसमें इमानरदार लोगों के वास्ते (कुदरत ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं (37)
(तो ऐ रसूल अपनी) क़राबतदार (फातिमा ज़हरा) का हक़ फिदक़ दे दो और मोहताज व परदेसियों का (भी) जो लोग ख़़ुदा की ख़ुशनूदी के ख़्वाहाँ हैं उन के हक़ में सब से बेहतर यही है और ऐसे ही लोग आख़ेरत में दिली मुरादे पाएँगें (38)
और तुम लोग जो सूद देते हो ताकि लोगों के माल (दौलत) में तरक्क़ी हो तो (याद रहे कि ऐसा माल) ख़ुदा के यहाँ फूलता फलता नही और तुम लोग जो ख़़ुदा की ख़ुशनूदी के इरादे से ज़कात देते हो तो ऐसे ही लोग (ख़ुदा की बारगाह से) दूना दून लेने वाले हैं (39)
ख़ुदा वह (क़ादिर तवाना है) जिसने तुमको पैदा किया फिर उसी ने रोज़ी दी फिर वही तुमको मार डालेगा फिर वही तुमको (दोबारा) जि़न्दा करेगा भला तुम्हारे (बनाए हुए ख़ुदा के) शरीकों में से कोई भी ऐसा है जो इन कामों में से कुछ भी कर सके जिसे ये लोग (उसका) शरीक बनाते हैं (40)

02 जनवरी 2026

वरिष्ठतम पत्रकार भाई धीरेंद्र जी राहुल की फेसबुक वॉल से कोटा मिनी सचिवालय को लेकर , ओर नई अदालती शगूफा, पर्यावरण नुकसान को लेकर खरी खरी, उन्हीं की ज़िंदाबाद लेखनी में, पिछले सात साल से लगातार सुनते आ रहे हैं कि

 

वरिष्ठतम पत्रकार भाई धीरेंद्र जी राहुल की फेसबुक वॉल से कोटा मिनी सचिवालय को लेकर , ओर नई अदालती शगूफा, पर्यावरण नुकसान को लेकर खरी खरी, उन्हीं की ज़िंदाबाद लेखनी में, पिछले सात साल से लगातार सुनते आ रहे हैं कि
कोटा की 72 अदालतों का नया परिसर सियामी ऑडिटोरियम यानी दरबार पैट्रोल पम्प के पीछे बनेगा.
लेकिन कब काम शुरू होगा, उसका मुहूर्त का दिन कभी आता नहीं.
राजस्थान पत्रिका में छपी खबर ने आज फिर उम्मीद जगाई है. खबर में मिनी सचिवालय का भी जिक्र है, जिसके बारे में पहले खबरें आती थी कि वर्तमान जेल भवन को तोड़कर वहां मिनी सचिवालय बनेगा. लेकिन आज जो खबर छपी है, उसे पढ़कर आप संतोष की सांस ले सकते हैं कि वर्तमान कलेक्ट्रेट और उसके सामने अदालत परिसर में ही मिनी सचिवालय की संभावनाएं तलाशी जाएंगी.
जेल भवन की जगह मिनी सचिवालय बनता तो
किलर रोड फिर से जिन्दा हो जाता. इस जेल रोड पर वाहनों से कुचलकर हजारों लोगों ने अपनी जान गंवाई है.
मैंने इस पोस्ट के साथ अदालत परिसर के बाहर खड़े हजारों वाहनों के फोटो लगाए हैं, जिसमें सैकड़ों कारें और हजारों दुपहिया वाहनों का जमावड़ा आप देख सकते हैं. जेल परिसर में पार्किंग तो बनाई जा सकती थी लेकिन ये वाहन जेल परिसर से निकलकर आते तो जेल रोड पर ही. जहां दिनभर या तो चक्काजाम लगा रहता या फिर हादसे होते रहते. इसके अलावा भारी संख्या में पेड़ कटते सो अलग.
बर्तमान अदालत परिसर एक हेरिटेज बिल्डिंग है जो महाराव उम्मेदसिंह द्वितीय के काल में बनी है. कोटा का सर्किट हाउस और अदालत की हेरिटेज बिल्डिंग का निर्माण एक साथ ही हुआ था. संभवत सन् 1910 के आसपास ये बनकर तैयार हुई थी. नया मिनी सचिवालय बनाने के लिए इस हेरिटेज बिल्डिंग को भी तोड़ना पड़ेगा, जिसकी इजाजत मिलना मुश्किल है.लेकिन सरकार सर्वशक्तिमान होती है. वह नियमों को भी बदल सकती है. देखते हैं क्या होता है?
मिनी सचिवालय का मतलब है कि सारे सरकारी दफ्तर एक ही छत के नीचे लाना ताकि आम.जनता को भटकना नहीं पड़े.उस हिसाब से तो संभागीय आयुक्त और आईजी पुलिस के कार्यालय भी मिनी सचिवालय में ही आने चाहिए. बीस लाख की आबादी होने पर भविष्य में पुलिस कमिश्नरेट का.दफ्तर खुलता है तो उसका दफ्तर कहां होगा ? इस पर भी मिनी सचिवालय की योजना बनाते समय ही सोचना होगा. कम से कम जो भी योजना बने आगामी 50 साल की आवश्यकताओं के हिसाब से बनें.
सियामी ऑडिटोरियम के पीछे नवीन अदालतों के लिए
कोटा विकास प्राधिकरण ने 23 बीघा जमीन दी है. जिस पर 198 करोड़ की लागत से पांच मंजिला भवन बनाया जाएगा. वाहनों के लिए दो मंजिला पार्किंग बनाई जाएगी.वकीलों के लिए 240 चैम्बर बनाए जाएंगे, हर चैम्बर में पांच वकील बैठ सकेंगे.
वकील मित्र अख्तर खान अकेला के अनुसार कोटा बार में 2900 वकील पंजीकृत है, जिसमें से 1800 से 2200 एक्टिव हैं. जो चैम्बर बनाए जा रहे हैं, उसमें 1000 वकील ही बैठ पाएंगे.अख्तर का कहना था कि कोटा में छोटी बड़ी 125 अदालतें हैं, जिसमें राजस्व और फौजदारी. सभी शामिल है. अगर ज्यूडिशियरी से जुड़ी अदालतों को अलग करें तो उनकी संख्या भी 72 के आसपास हैं. भविष्य में नई अदालतें खुलेंगी. उसी हिसाब से प्लानिंग होनी चाहिए. अख्तर का कहना था कि अदालत और कलेक्ट्रेट में प्रतिदिन 6000 लोग रोज आते हैं, इसलिए आपातकालीन चिकित्सा के लिए डिस्पेंसरी की भी व्यवस्था होनी चाहिए.
अख्तर का कहना था कि मिनी सचिवालय के लिए सबसे आदर्श जगह तो पुराना हवाई अड्डा ही था जिसे बड़ी आसानी से छोड़ दिया गया , अभी जो जगह चुनी है , वह आदर्श जगह नहीं है, फिर जगह भी कम है.
मैंने इस पोस्ट के साथ कुछ रील और फोटो दिए हैं. उसमें किस जगह नया अदालत परिसर बनेगा, मुझे नहीं मालूम. वहां मिलें लोगों ने जो संभावित जगह बताई, उसकी रील मैंने उतारी है. पेड़ यहां भी खूब हैं, कह नहीं सकते कितने कटेंगे ?
इसी क्षेत्र में सियामी ऑडिटोरियम, राजकीय कला महाविद्यालय और चिकित्सा और स्वास्थ्य विभाग का भवन बन चुका है. अभी मेन रोड पर आने का रास्ता बहुत संकरा है, जिसे भी चौड़ा करना होगा.

और उसी की (क़़ुदरत) की निशानियों में से एक ये (भी) है कि उसने तुम्हारे वास्ते तुम्हारी ही जिन्स की बीवियाँ पैदा की ताकि तुम उनके साथ रहकर चैन करो और तुम लोगों के दरमेयान प्यार और उलफ़त पैदा कर दी इसमें शक नहीं कि इसमें ग़ौर करने वालों के वास्ते (क़ु़दरते ख़़ुदा की) यक़ीनी बहुत सी निशानियाँ हैं

 और उसी की (क़़ुदरत) की निशानियों में से एक ये (भी) है कि उसने तुम्हारे वास्ते तुम्हारी ही जिन्स की बीवियाँ पैदा की ताकि तुम उनके साथ रहकर चैन करो और तुम लोगों के दरमेयान प्यार और उलफ़त पैदा कर दी इसमें शक नहीं कि इसमें ग़ौर करने वालों के वास्ते (क़ु़दरते ख़़ुदा की) यक़ीनी बहुत सी निशानियाँ हैं (21)
और उस (की क़़ुदरत) की निशानियों में आसमानो और ज़मीन का पैदा करना और तुम्हारी ज़बानो और रंगतो का एख़तेलाफ भी है यकी़नन इसमें वाकि़फकारों के लिए बहुत सी निशानियाँ हैं (22)
और रात और दिन को तुम्हारा सोना और उसके फज़ल व करम (रोज़ी) की तलाश करना भी उसकी (क़़ुदरत की) निशानियों से है बेशक जो लोग सुनते हैं उनके लिए इसमें (क़़ुदरते ख़़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं (23)
और उसी की (क़़ुदरत की) निशानियों में से एक ये भी है कि वह तुमको डराने वाला उम्मीद लाने के वास्ते बिजली दिखाता है और आसमान से पानी बरसाता है और उसके ज़रिए से ज़मीन को उसके परती होने के बाद आबाद करता है बेशक अक़्लमंदों के वास्ते इसमें (क़ुदरते ख़़ुदा की) बहुत सी दलीलें हैं (24)
और उसी की (क़़ुदरत की) निशानियों में से एक ये भी है कि आसमान और ज़मीन उसके हुक्म से क़ायम हैं फिर (मरने के बाद) जिस वक़्त तुमको एक बार बुलाएगा तो तुम सबके सब ज़मीन से (जि़न्दा हो होकर) निकल पड़ोगे (25)
और जो लोग आसमानों में है सब उसी के है और सब उसी के ताबेए फरमान हैं (26)
और वह ऐसा (क़ादिरे मुत्तलिक़ है जो मख़लूकात को पहली बार पैदा करता है फिर दोबारा (क़यामत के दिन) पैदा करेगा और ये उस पर बहुत आसान है और सारे आसमान व जमीन सबसे बालातर उसी की शान है और वही (सब पर) ग़ालिब हिकमत वाला है (27)
और हमने (तुम्हारे समझाने के वास्ते) तुम्हारी ही एक मिसाल बयान की है हमने जो कुछ तुम्हे अता किया है क्या उसमें तुम्हारी लौन्डी गु़लामों में से कोई (भी) तुम्हारा शरीक है कि (वह और) तुम उसमें बराबर हो जाओ (और क्या) तुम उनसे ऐसा ही ख़ौफ रखते हो जितना तुम्हें अपने लोगों का (हक़ हिस्सा न देने में) ख़ौफ होता है फिर बन्दों को खुदा का शरीक क्यों बनाते हो) अक़्ल मन्दों के वास्ते हम यूँ अपनी आयतों को तफ़सीलदार बयान करते हैं (28)
मगर सरकशों ने तो बगै़र समझे बूझे अपनी नफ़सियानी ख़्वाहिशों की पैरवी कर ली (और ख़़ुदा का शरीक ठहरा दिया) ग़रज़ ख़ुदा जिसे गुमराही में छोड़ दे (फिर) उसे कौन राहे रास्त पर ला सकता है और उनका कोई मददगार (भी) नहीं (29)
तो (ऐ रसूल) तुम बातिल से कतरा के अपना रुख़ दीन की तरफ़ किए रहो यही ख़ुदा की बनावट है जिस पर उसने लोगों को पैदा किया है ख़़ुदा की (दुरुस्त की हुयी) बनावट में तग़य्युर तबद्दुल {उलट फेर} नहीं हो सकता यही मज़बूत और (बिल्कुल सीधा) दीन है मगर बहुत से लोग नहीं जानते हैं (30)

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