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15 अप्रैल 2026

आज़ाद भारत को जिओ और जीने दो का सलीक़ा सिखाने वाले , मानवधर्म संविधान निर्माता ,, डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर जी को श्रद्धाजंलि

आज़ाद भारत को जिओ और जीने दो का सलीक़ा सिखाने वाले , मानवधर्म संविधान निर्माता ,, डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर जी को श्रद्धाजंलि ,, उन्हें , नमन , लेकिन , उनके बनाये हुए संविधान ,, उनके सिद्धांतों को , मटियामेट करने की वजह से आज हम ,, सोने की चिड़िया से अराजकता वाले देश की श्रेणी में आ खड़े हुए है , निर्वाचन आयोग सहित सभी संस्थाओं पर सवालात खड़े है , मनमानी ,चरम सीमा पर है , हो भी क्यों नहीं , डॉक्टर अम्बेडकर ने संविधान में धर्म , जाती , लिंग , समाज , किसी भी आधार पर पक्षपात पर रोक लगाई थी , लेकिन हुआ क्या , आज़ाद भारत में पंडित नेहरू ने कार्यभार ग्रहण करते ही आरक्षण के लिए जब कर्मकारों का सर्वेक्षण हुआ और ,, सिर्फ कर्म के आधार पर कर्म करने वालों को आरक्षण की सिफारिश हुई , तो जाति , धर्म में भेदभाव का संविधान का आर्टिकल ताक में रखकर , केवल हिन्दुओं के लिए शब्द जोड़कर , मुस्लिम कर्मकार चाहे मीट व्यवसाई हों , कपड़ा बुनने वाले हों , या कोई भी व्यवसाई हों , उन्हें आरक्षण के लाभ से आउट कर अम्बेडकर के समानता के संविधान को तार तार कर दिया , नतीजा , खटीक भाइयों को , कोली समाज से जुड़े बुनकरों सहित सभी हिन्दू समाज के कर्मकारों को आरक्षण मिला , लेकिन मुस्लिम समाज के , बुनकर ,, मीट ,, खाल सहित अन्य व्यवसाय करने वाले आरक्षण से आउट कर दिए गए ,,, आरक्षण दस वर्षों के लिए था , लेकिन सरकारें ऐसी निकम्मी रहीं के वोह दस वर्षो में इनके हालत शैक्षणिक और सामजिक स्तर पर सुधारने में नाकामयाब रहीं , और अब हालात आपके सामने है ,, ज़ीरो नंबर से थोड़े से नंबर वाले विशेषगय डॉक्टर्स बनाये जा रहे हैं , लेकिन दलोटों के साथ अत्याचार की अराजकता जस की तस बनी हुई है , संविधान की मंशा , अम्बेडकर की सामजिक न्याय की मंशा , त्वरित न्याय की मंशा सब बेमानी सी होती जा रही हैं , वोटिंग को आज मूल कर्तव्य नहीं माना जा रहा है , चुनाव आयोग जो चाहता है वोह कर लेता है , देश का प्रधानमंत्री , मुख्यमंत्री , सरकारी खर्चे पर सुरक्षा खर्चे पर , सरकारी विमानों से , सरकारी सिक्युरिटी के बीच उसकी पार्टी का खुले आम प्रचार प्रसार चौबीस घंटे करता रहता है , , पार्षद , पंचायत के चुनाव हों तो हों , नहीं तो कभी भी रोक दिए जाते हैं ,सरकारें बिक रही है , सांसद , विधायक इधर से उधर हो रहे हैं , कौन किस पार्टी से चुनाव जीतता है , फिर पार्टी में जाकर मंत्री बन जाता है , समझ ही नहीं आ रहा है , कुल मिलाकर न्यायिक व्यवस्था का विस्तार भी विकेन्द्रीकृत कर नहीं हुआ है , अदालतों में लाखों मुक़दमे चल रहे हैं , क़ानून बना है के छह माह में मुक़दमे का पूर्ण निस्तारण हो , लेकिन अदालतें और न्यायिक अधिकारी नहीं होने से , पहली तारीख ही छह महीने की देना मजबूरी है , महिलाओं का , दलितों का सम्मान नहीं , बराबरी का दर्जा नहीं , किसानों को संरक्षण नहीं , मज़दूरों की स्थिति तो आज देश देख रहा है , सभी फैक्ट्री बंद , ज़मीनों की सौदेबाज़ी हो रही है , और बढ़े लोग , अज़गर बनकर देश की अर्थव्यवस्था को निगल रहे हैं , शिक्षा निति का आचरण देश देख रहा है , संविधान को रोज़ तार तार क्या जा रहा है , लोकसभा में , विधानसभा में क्या हो रहा है देश देख रहा है , जज की नियुक्तियां कितनी सरलीकृत हो गई है , देश ने देखा है , ,, वकील कोटे से बनने वाले जजों की संख्या निरंतर कटौती कर खत्म सी की जाने लगी है , ,ऐसे में देश के संविधान की स्थति को मज़बूत करने के लिए फिर से हमें एक जुट होना होगा , अम्बेकर का सिद्धांत रहेगा , तो देश रहेगा , नहीं तो , ,,, जो हो रहा है , , जैसा हो रहा ,है ,,,,बगाल , मणिपुर , उत्तर प्रदेश , बुलडोज़र , ,एनकाउंटर व्यवस्थाएं हिरासत में मौतें ,, हिरासत में हत्याएं ,, देश रोज़ देख रहा रहा है , इसीलिए देश को बचाने के लिए आज अम्बेडकर के संविधान की शत प्रतिशत पालना की आवश्यकता है , अम्बेडकर के सिद्धांत , विचारों की आवश्यकता है , उन्हें , उनके विचार को ज़िंदाबाद करने की आवश्यकता है , ,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339

 

कोटा बूंदी लोकसभा सांसद ,, देश के सबसे ऊँचे ओहदे लोकसभा अध्यक्ष के पद पर हैं

 

कोटा बूंदी लोकसभा सांसद ,, देश के सबसे ऊँचे ओहदे लोकसभा अध्यक्ष के पद पर हैं , लेकिन जब उन्होंने कोटा में प्राइवेट बिजली कम्पनी के ई डी एल कम्पनी के अधिकारीयों को बेकाबू होते हुए देखा , आम पब्लिक और खासकर वकील , उनके नाबालिग पुत्र , जो खुद आदरणीय लोकसभा अध्यक्ष ओम जी बिरला के प्रथम वक्फेडर पंक्ति में शामिल हैं , उनके साथ धक्का मुक्की , ना इंसाफ़ी हुई हो , तो फिर उन्होंने खुलकर सार्वजनिक मंच से के ई डी एल को चेतावनी दे डाली,, में लोकसभा अध्यक्ष के इस न्यायिक प्राथमिक ज़िम्मेदार कृत्य के लिए उन्हें सेल्यूट करता हूँ , ,, भाजपा का जीत का यही तो मंत्र है , के अगर कार्यर्कता पर कोई बात आई , अगर कोई ना इंसाफ़ी हो जाए तो फिर उनके किसी भी अधिकारी , किसी भी कम्पनी से कैसे ही लाभांश के ये कोई भी समझौता हो वोह परवाह नहीं करते और , कार्यकर्ता के खिलाफ हमलावरों को बाहर का रास्ता ,दिखाने , उन्हें सबक़ सिखाने में , उन्हें तत्काल ऐ पी ओ कर दंडित करने में कोई कसर नहीं छोड़ते , अब इस मामले में जब लोकसभा अध्यक्ष , लोकसभा सांसद , ने के ई डी एल के खिलाफ पूरी तहक़ीक़ के बाद अपना बयांन जारी कर दिया है , तो फिर कोटा गुमानपुरा पुलिस , कोटा पुलिस अधीक्षक , कोटा आई जी रेंज के अधीनस्थ गुमानपुरा पुलिस की ज़िम्मेदारी बढ़ जाती है , ,गुमानपुरा में वकील साहब ने के ई एल कर्मी और अधिकारीयों के वृउद्द नाबालिग से धक्का मुक्की वगेरा की लिखित शिकायत दी है , तो फिर गुमानपुरा पुलिस का कर्तव्य है के वोह उसे एफ आई आर में कन्वर्ट करे , गुमानपुरा पुलिस का कर्तव्य है के वोह उसका स्वस्थ अनुसंधान करे , धक्का मुक्की की विडिओ वगेरा देखे , स्वतंत्र गवाहान से तफ्तीश करे और फ्री दोषी लोगों को तुरतं गिरफ्तार करे ,या अनुसंधान में शिकायत गलत हो तो बताये के ऐसा नहीं है , ,लेकिन क्या ऐसा हो सकेगा , क्या लोकसभा अध्यक्ष जी का यह बयान सिर्फ बयान तक ही सीमित होकर रह जाएगा , ,या जैसे पहले के ई डी एल को खुली छूट है , ऊर्जा मंत्री जी की भी छूट है वैसी ही बनी रहेगी ,, ,यह मामला आम जनता से जुड़ा है , किसी सियासी पार्टी का मामला नहीं अगर ऐसा है तो सभी राजनितिक संगठनों को , इस मामले में न्याय की आवाज़ उठाना ही चाहिए ,, ,कैसे होती है कार्यवाही , या कैसे होगी लीपा पोती ,, देखते हैं एक ब्रेक के ,बाद , अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339

मेरे जनगीत संग्रह -"हम सब नीग्रो हैं " से एक गीत :

 

मेरे जनगीत संग्रह -"हम सब नीग्रो हैं " से एक गीत :
बगावत तो होगी
बगावत तो होगी !
बगावत तो होगी !!
लगातार छीना गया गर हकों को
हमेशा ही तोड़ा गया वायदों को
जबरदस्ती लादा गया कायदों को
हमारे भी दिल कोई पत्थर नहीं हैं
दिलों में थोड़ी तिलमिलाहट तो होगी
बगावत तो होगी
बगावत तो होगी
ये दौलत के बन्दे जमीनों के मालिक
समझते हैं खुद को जो दुनिया का हाकिम
बनाते हैं कानून बर्बर होआदिम
उन्हें ये खुली चिट्ठियां हैं हमारी
रुलाया गया गर यूंही हर ख़ुशी को
सताया गया बेवज़ह आदमी को
अमानत में उनकी ख़यानत तो होगी
बगावत तो होगी
बगावत तो होगी
ये अंधे उसूलों रिवाजों की दुनिया
ये ऐटम ,मिसाइल , मिराजों की दुनिया
सुने खोल कर अपने कानों को सुन ले
डुबोया गया गर यूं ही कश्तियों को
जलाया गया बेवज़ह बस्तियों को
तो बारूद की जगमगाहट तो होगी
बगावत तो होगी
बगावत तो होगी !
# महेंद्र नेह

कोटा से प्रकाशित पहले अंग्रेज़ी समाचार पत्र , कोटा कोलाज , की सम्पादिका बहन श्रीमती रुबीना क़ाज़ी की आज जश्न ऐ सालगिरह है

 

कोटा से प्रकाशित पहले अंग्रेज़ी समाचार पत्र , कोटा कोलाज , की सम्पादिका बहन श्रीमती रुबीना क़ाज़ी की आज जश्न ऐ सालगिरह है , इस मौके पर उन्हें पुरखुलूस दुआओं के साथ ढेरों बधाइयां , मुबारकबाद ,, ,कोटा की पत्रकारिता के इतिहास में ,, रुबीना क़ाज़ी का , कोटा से प्रकाशित अंग्रेजी समाचार पत्र की प्रथम प्रकाशक , सम्पादक , होने का रिकॉर्ड दर्ज है , ,यूँ तो कोटा पत्रकारिता क्षेत्र में हेमशा प्रतिस्पर्धा का केंद्र रहा है , लेकिन कोटा में जब कोचिंग गुरुओं को , कोटा शैक्षणिक गतिविधि प्रचार प्रसार के लिए , कोटा के बाहर से आये अलग अलग भाषाओं से जुड़े लोगों को , कोटा की खबरों के लियें, अंग्रेजी भाषा के अख़बार की ज़रूरत थी , तब , रुबीना क़ाज़ी ने , कोटा कोलाज , के नाम से अंग्रेजी भाषा में , अख़बार के प्रकाशन की शुरुआत की और आज यह अख़बार कोटा की ज़रुरत बन चुका है , रुबीना क़ाज़ी कोटा की ही बेटी है , छोटी बहन है , कोटा में ही , इनकी पढ़ाई हुई , यहां के स्कूल कॉलेज की यह प्रतिभावान छात्रा के साथ साथ बेस्ट खिलाड़ी , हरफन मोला रही हैं , रुबीना क़ाज़ी के वालिद मोहतरम ,, फूटबाल के बेहतरीन खिलाडी थे , इनके भाई आसिफ खान भी फुटबॉल के बेस्ट प्लेयर रहे हैं , , पुलिस थानेदार जी की साहिबजादी रुबीना क़ाज़ी यूँ तो सबसे छोटी , सबसे प्यारी बोटियां है , लेकिन ओहदे में माशाअल्लाह, पत्रकारिता और समाजसेवा क्षेत्र में सबसे बढ़ी निकल गई है , वरिष्ठ पत्रकार भाई आबशार क़ाज़ी से इनका निकाह होने के बाद , रुबीना इण्डिया टू डे सहित अन्य मैगज़ीन और समाचार पत्रों में ज्वलन्त मुद्दों पर बेबाक, लेख लिखती रहीं , रुबीना पहले प्रेस क्लब कोटा की सक्रिय सदस्य रहीं , अब ग्रेटर कोटा प्रेस क्लब की कार्यकारिणी पदाधिकारी हैं , ,पत्रकारों के कार्यक्रम , सेमीनार , संघर्ष , व्यवस्थाओं में रुबीना क़ाज़ी अव्वलीन प्रबंधन कार्यों में शामिल रहती हैं , , ,इनका समाचार पत्र यूँ तो अंग्रेज़ी भाषा में प्रकाशित होता है , लेकिन रुबीना क़ाज़ी महिलाओं के संरक्षण ,, महिलाओं के उत्थान , शैक्षणिक विकास , रोज़गारोन्मुखी योजनाओं सहित , कोटा के हर मुद्दे पर बेबाकी से सादी, सरल ,, आम लोगों के सीधे समझ में आने वाली ज़ुबान में यहां की हर गतिविधियां बेखौफ होकर प्रकाशित करती है , कोटा कोचिंग हब होने की वजह से ,, कोटा पर्यटन नगरी का मुख्य आकर्षण होने की वजह से , ,कोटा उद्योगनगरी होने की वजह से , यहां की सभी गतिविधियों को , अपनी क़लम और जीवंत रिपोर्टिंग , जीवंत फोटोग्राफी के ज़रिये , रुबीना क़ाज़ी एक हुनरमंद जर्नलिस्ट के रूप में , बेबाकी से पेश करती है , और कोटा के लिए , रुबीना क़ाज़ी का महिला होकर भी , पहली अंग्रेजी अखबार की बेबाक जर्नलिस्ट होना गौरव की बात है , रुबीना क़ाज़ी को बधाई , मुबारकबाद , अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339

कोटा में बेटियों की तालीम की नई रोशनी: मदरसा जामिया हुस्न-ए-तारा में आवासीय शिक्षा का शुभारंभ

 

कोटा में बेटियों की तालीम की नई रोशनी: मदरसा जामिया हुस्न-ए-तारा में आवासीय शिक्षा का शुभारंभ
के डी अब्बासी
कोटा। शहर के अन्नतपुरा स्थित केसर विहार में मदरसा जामिया हुस्न-ए-तारा में आवासीय लड़कियों के मदरसे का तालीमी आगाज़ किया गया। इस पहल के साथ ही कोटा व हाड़ौती क्षेत्र की 65 छात्राओं ने दाखिला लेकर अपनी शिक्षा यात्रा की शुरुआत की।
मदरसा संचालक मुफ्ती शमीम अशरफ ने बताया कि कोटा में यह अपने तरह का पहला संस्थान है, जहां छात्राओं को निःशुल्क शिक्षा, हॉस्टल और भोजन की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। खास बात यह है कि यहां दीनियात की तालीम के साथ-साथ छात्राओं को इंग्लिश मीडियम स्कूल की कोचिंग भी दी जाएगी, ताकि वे आधुनिक शिक्षा के साथ आगे बढ़ सकें।
इस मौके पर कई गणमान्य लोगों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम में बादशाह खान (पार्षद), कारी रियाज अहमद तेगी (दारुल उलूम रामगंजमंडी), मौलाना अशरफ रजा फैजी (रावतभाटा), मौलाना आशिक रजवी (दारुल उलूम अन्नतपुरा), मौलाना नजरुल इस्लाम, हाफिज अल्लम, मौलाना गुलाम जिलानी, कारी सदिर हुसैन सहित शहर के सैकड़ों लोगों ने शिरकत कर इस पहल की सराहना की।
मदरसे के प्रिंसिपल मुफ्ती शाहबाज अहमद मिस्बाही ने बताया कि फिलहाल यहां आठ महिला स्टाफ की नियुक्ति की गई है, जो छात्राओं के सर्वांगीण विकास में योगदान देंगी।
इस नई पहल को समाज में बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह मदरसा आने वाले समय में शिक्षा का एक ऐसा चिराग बनेगा, जो कई परिवारों के भविष्य को रोशन करेगा।

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