आपका-अख्तर खान "अकेला"
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
21 जनवरी 2026
केडीए के नियोजन सलाहकार संदीप दंडवते हाड़ौती गौरव सम्मान–2026 से सम्मानित
प्याले और (एक जगह) गड़ी हुयी (बड़ी बड़ी) देग़ें (कि एक हज़ार आदमी का खाना पक सके) ऐ दाऊद की औलाद शुक्र करते रहो और मेरे बन्दों में से शुक्र करने वाले (बन्दे) थोड़े से हैं
कि फँराख़ व कुशादा जिरह बनाओ और (कडि़यों के) जोड़ने में अन्दाज़े का
ख़्याल रखो और तुम सब के सब अच्छे (अच्छे) काम करो वो कुछ तुम लोग करते हो
मैं यक़ीनन देख रहा हूँ (11)
और हवा को सुलेमान का (ताबेइदार बना दिया था) कि उसकी सुबह की रफ़्तार एक
महीने (मुसाफ़त) की थी और इसी तरह उसकी शाम की रफ़्तार एक महीने (के
मुसाफत) की थी और हमने उनके लिए तांबे (को पिघलाकर) उसका चश्मा जारी कर
दिया था और जिन्नात (को उनका ताबेदार कर दिया था कि उन) में कुछ लोग उनके
परवरदिगार के हुक्म से उनके सामने काम काज करते थे और उनमें से जिसने हमारे
हुक्म से इनहराफ़ किया है उसे हम (क़यामत में) जहन्नुम के अज़ाब का मज़ा
चख़ाँएगे (12)
ग़रज़ सुलेमान को जो बनवाना मंज़ूर होता ये जिन्नात उनके लिए बनाते थे
(जैसे) मस्जिदें, महल, कि़ले और (फरिश्ते अम्बिया की) तस्वीरें और हौज़ों
के बराबर प्याले और (एक जगह) गड़ी हुयी (बड़ी बड़ी) देग़ें (कि एक हज़ार
आदमी का खाना पक सके) ऐ दाऊद की औलाद शुक्र करते रहो और मेरे बन्दों में से
शुक्र करने वाले (बन्दे) थोड़े से हैं (13)
फिर जब हमने सुलेमान पर मौत का हुक्म जारी किया तो (मर गए) मगर लकड़ी के
सहारे खड़े थे और जिन्नात को किसी ने उनके मरने का पता न बताया मगर ज़मीन
की दीमक ने कि वह सुलेमान के असा को खा रही थी फिर (जब खोखला होकर टूट गया
और) सुलेमान (की लाश) गिरी तो जिन्नात ने जाना कि अगर वह लोग ग़ैब वा (ग़ैब
के जानने वाले) होते तो (इस) ज़लील करने वाली (काम करने की) मुसीबत में न
मुब्तिला रहते (14)
और (क़ौम) सबा के लिए तो यक़ीनन ख़ुद उन्हीं के घरों में (कु़दरते खु़दा
की) एक बड़ी निशानी थी कि उनके शहर के दोनों तरफ दाहिने बाऐ (हरे-भरे)
बाग़ात थे (और उनको हुक्म था) कि अपने परवरदिगार की दी हुयी रोज़ी खाओ
(पियो) और उसका शुक्र अदा करो (दुनिया में) ऐसा पाकीज़ा शहर और (आख़ेरत
में) परवरदिगार सा बख़्शने वाला (15)
इस पर भी उन लोगों ने मुँह फेर लिया (और पैग़म्बरों का कहा न माना) तो
हमने (एक ही बन्द तोड़कर) उन पर बड़े ज़ोरों का सैलाब भेज दिया और (उनको
तबाह करके) उनके दोनों बाग़ों के बदले ऐसे दो बाग़ दिए जिनके फल बदमज़ा थे
और उनमें झाऊ था और कुछ थोड़ी सी बेरियाँ थी (16)
ये हमने उनकी नाशुक्री की सज़ा दी और हम तो बड़े नाशुक्रों ही की सज़ा किया करते हैं (17)
और हम अहले सबा और (शाम) की उन बस्तियों के दरम्यिान जिनमें हमने बरकत
अता की थी और चन्द बस्तियाँ (सरे राह) आबाद की थी जो बाहम नुमाया थीं और
हमने उनमें आमद व रफ्त की राह मुक़र्रर की थी कि उनमें रातों को दिनों को
(जब जी चाहे) बेखटके चलो फिरो (18)
तो वह लोग ख़ुद कहने लगे परवरदिगार (क़रीब के सफर में लुत्फ नहीं) तो
हमारे सफ़रों में दूरी पैदा कर दे और उन लोगों ने खु़द अपने ऊपर ज़ुल्म
किया तो हमने भी उनको (तबाह करके उनके) अफसाने बना दिए - और उनकी धज्जियाँ
उड़ा के उनको तितिर बितिर कर दिया बेशक उनमें हर सब्र व शुक्र करने वालों
के वास्ते बड़ी इबरते हैं (19)
और शैतान ने अपने ख्याल को (जो उनके बारे में किया था) सच कर दिखाया तो
उन लोगों ने उसकी पैरवी की मगर इमानवालों का एक गिरोह (न भटका) (20)
20 जनवरी 2026
जिले में घुसपैठिए हैं तो जानकारी सार्वजनिक करें प्रशासन : राखी गौतम
हर कि़स्म की तारीफ उसी खु़दा के लिए (दुनिया में भी) सज़ावार है कि जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) उसी का है और आख़ेरत में (भी हर तरफ) उसी की तारीफ है और वही वाकि़फकार हकीम है
सूरए सबा मक्का में नाजि़ल हुआ और इसकी (54) आयतें हैं
खु़दा के नाम से (शुरू करता हूँ) जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है
हर कि़स्म की तारीफ उसी खु़दा के लिए (दुनिया में भी) सज़ावार है कि जो
कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) उसी का है और
आख़ेरत में (भी हर तरफ) उसी की तारीफ है और वही वाकि़फकार हकीम है (1)
(जो) चीज़ें (बीज वग़ैरह) ज़मीन में दाखि़ल हुयी है और जो चीज़ (दरख़्त
वग़ैरह) इसमें से निकलती है और जो चीज़ (पानी वग़ैरह) आसामन से नाजि़ल होती
है और जो चीज़ (नज़ारात फरिश्ते वग़ैरह) उस पर चढ़ती है (सब) को जानता है
और वही बड़ा बख़्शने वाला है (2)
और कुफ्फार कहने लगे कि हम पर तो क़यामत आएगी ही नहीं (ऐ रसूल) तुम कह दो
हाँ (हाँ) मुझ को अपने उस आलेमुल ग़ैब परवरदिगार की क़सम है जिससे ज़र्रा
बराबर (कोई चीज़) न आसमान में छिपी हुयी है और न ज़मीन में कि क़यामत ज़रूर
आएगी और ज़र्रे से छोटी चीज़ और ज़र्रे से बडी (ग़रज़ जितनी चीज़े हैं सब)
वाजे़ए व रौशन किताब लौहे महफूज़ में महफूज़ हैं (3)
ताकि जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और (अच्छे) काम किए उनको खु़दा जज़ाए
खै़र दे यही वह लोग हैं जिनके लिए (गुनाहों की) मग़फेरत और (बहुत ही)
इज़्ज़त की रोज़ी है (4)
और जिन लोगों ने हमारी आयतों (के तोड़) में मुक़ाबिले की दौड़-धूप की उन ही के लिए दर्दनाक अज़ाब की सज़ा होगी (5)
और (ऐ रसूल) जिन लोगों को (हमारी बारगाह से) इल्म अता किया गया है वह
जानते हैं कि जो (क़ुरान) तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से तुम पर नाजि़ल हुआ
है बिल्कुल ठीक है और सज़ावार हम्द (व सना) ग़ालिब (खु़दा) की राह दिखाता
है (6)
और कुफ़्फ़ार (मसख़रेपन से बाहम) कहते हैं कि कहो तो हम तुम्हें ऐसा आदमी
(मोहम्मद) बता दें जो तुम से बयान करेगा कि जब तुम (मर कर सड़़ गल जाओगे
और) बिल्कुल रेज़ा रेज़ा हो जाओगे तो तुम यक़ीनन एक नए जिस्म में आओगे (7)
क्या उस शख़्स (मोहम्मद) ने खु़दा पर झूठ तूफान बाँधा है या उसे जुनून
(हो गया) है (न मोहम्मद झूठा है न उसे जुनून है) बल्कि खु़द वह लोग जो
आख़ेरत पर ईमान नहीं रखते अज़ाब और पहले दरजे की गुमराही में पड़े हुए हैं
(8)
तो क्या उन लोगों ने आसमान और ज़मीन की तरफ भी जो उनके आगे और उनके पीछे
(सब तरफ से घेरे) हैं ग़ौर नहीं किया कि अगर हम चाहे तो उन लोगों को ज़मीन
में धँसा दें या उन पर आसमान का कोई टुकड़ा ही गिरा दें इसमें शक नहीं कि
इसमें हर रुझू करने वाले बन्दे के लिए यक़ीनी बड़ी इबरत है (9)
और हमने यक़ीनन दाऊद को अपनी बारगाह से बुज़ुर्गी इनायत की थी (और पहाड़ों
को हुक्म दिया) कि ऐ पहाड़ों तसबीह करने में उनका साथ दो और परिन्द को
(ताबेए कर दिया) और उनके वास्ते लोहे को (मोम की तरह) नरम कर दिया था (10)
19 जनवरी 2026
अल्लाह का शुक्र