आपका-अख्तर खान "अकेला"
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
09 मार्च 2026
माह ऐ रमज़ान में कोटा के इफ्तियारी बाजारों में क्या इस्लामिक तहज़ीब, रोजेदारों का एहतराम बाकी है ????
प्रेस क्लब कोटा की वार्षिक आमसभा संपन्न, महिला दिवस पर महिला पत्रकारों का सम्मान
कार्यशाला से प्रेरित होकर,भरे जा रहे नेत्रदान देहदान संकल्प पत्र
कार्यशाला से प्रेरित होकर,भरे जा रहे नेत्रदान देहदान संकल्प पत्र
बीते
दिनों इटावा में, इटावा सोशल ग्रुप के माध्यम से, चंदन वाटिका में संस्था
शाइन इंडिया फाउंडेशन के सहयोग से नेत्रदान,अंगदान और देहदान के विषय में
एकदिवसीय विशेष चर्चा का आयोजन किया गया था । जिसमें शहर की कई सामाजिक
संस्थाएं, शहर के प्रबुद्ध एवं गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया था ।
अगले
दिन जब समाचार पत्रों में, नेत्रदान और देहदान के बारे में विस्तार से
जानकारी दी गई तो, उसको पढ़ने के बाद इटावा में नेत्रदान संकल्प करने वालों
की संख्या बढ़ने लगी,इसी जानकारी को जब इटावा शहर के प्रबुद्ध समाजसेवी
एवं लायंस क्लब के संस्थापक अध्यक्ष पारस जैन ने अपनी कोटा निवासी बहन
प्रेमलता गंगवाल को दी, तो उन्होंने भी अपना देहदान संकल्प पत्र भरने की
इच्छा जाहिर की ।
संस्था शाइन इंडिया फाउंडेशन के सहयोग से जब
प्रेमलता गंगवाल का देहदान संकल्प भरा गया, तभी उनके पति पदम कुमार गंगवाल
(सेवानिवृत शिक्षक) ने भी अपना देहदान संकल्प पत्र भरने की सहमति दी, और
उन्होंने भी खुशी-खुशी अपना देहदान का संकल्प पत्र भरा ।
गंगवाल
दंपतियों के इस निर्णय की परिवार ,समाज और करीबी रिश्तेदारों ने प्रशंसा की
। बेटे विनीत, कपिल बेटी दीप्ति जैन ने भी अपनी और से माता-पिता के इस
देहदान संकल्प के पुनीत कार्य में सहमति दी ।
इटावा सोशल ग्रुप के
सदस्य देवेंद्र जैन,पारस जैन, डॉ विकल्प नागर पंकज जैन ने बताया कि,शीघ्र
ही एक और जागरूकता शिविर नेत्रदान,अंगदान और देहदान जागरूकता के विषय पर
आयोजित किया जाएगा
दुख की घड़ी में, संपन्न हुआ नेत्रदान
दुख की घड़ी में, संपन्न हुआ नेत्रदान
ग्राम धूणी,जिला टोंक निवासी
नंदकिशोर शर्मा की बहन मीनाक्षी शर्मा का विवाह 6 वर्ष पूर्व नया
भदाना,कोटा निवासी सतीश शर्मा से हुई थी । मीनाक्षी का स्वास्थ्य कुछ समय
से ठीक नहीं चल रहा था, रविवार को अचानक तबियत बिगड़ने के बाद उनका आकस्मिक
निधन हो गया ।
संस्था शाइन इंडिया फाउंडेशन के ज्योति मित्र
नंदकिशोर, बहन वंदना और बहनोई सुशील कुमार शर्मा भारत विकास परिषद के सेवा
भारती प्रकल्प से जुड़े हुए हैं । समाचार पत्रों में लगातार नेत्रदान की
खबरों को पढ़ते रहने से परिवार के सभी सदस्य काफी जागरूक थे, इसीलिए भाई
नंदकिशोर ने सहमति देकर अपनी बहन मीनाक्षी का नेत्रदान कोटा में संपन्न
करवाया ।
नंदकिशोर ने कहा कि, बहन के असामयिक मृत्यु की घटना से
शायद हम कभी उबर ना पाएंगे,पर हमें यह खुशी है कि,अंत समय में उसके
नेत्रदान से दो दृष्टिहीनों को रोशनी मिलेगी
और ये लोग वहाँ तकिये लगाए हुए (चैन से बैठे) होगें वहाँ (खु़द्दामे बेहिश्त से) कसरत से मेवे और शराब मँगवाएँगे
और ये लोग वहाँ तकिये लगाए हुए (चैन से बैठे) होगें वहाँ (खु़द्दामे बेहिश्त से) कसरत से मेवे और शराब मँगवाएँगे (51)
और उनके पहलू में नीची नज़रों वाली (शरमीली) कमसिन बीवियाँ होगी (52)
(मोमिनों) ये वह चीज़ हैं जिनका हिसाब के दिन (क़यामत) के लिए तुमसे वायदा किया जाता है (53)
बेशक ये हमारी (दी हुयी) रोज़ी है जो कभी तमाम न होगी (54)
ये परहेज़गारों का (अन्जाम) है और सरकशों का तो यक़ीनी बुरा ठिकाना है (55)
जहन्नुम जिसमें उनको जाना पड़ेगा तो वह क्या बुरा ठिकाना है (56)
ये खौलता हुआ पानी और पीप और इस तरह अनवा अक़साम की दूसरी चीज़े हैं (57)
तो ये लोग उन्हीं पड़े चखा करें (कुछ लोगों के बारे में) बड़ों से कहा जाएगा (58)
ये (तुम्हारी चेलों की) फौज भी तुम्हारे साथ ही ढूँसी जाएगी उनका भला न हो ये सब भी दोज़ख़ को जाने वाले हैं (59)
तो चेले कहेंगें (हम क्यों) बल्कि तुम (जहन्नुमी हो) तुम्हारा ही भला न
हो तो तुम ही लोगों ने तो इस (बला) से हमारा सामना करा दिया तो जहन्नुम भी
क्या बुरी जगह है (60)