आपका-अख्तर खान "अकेला"
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
07 फ़रवरी 2026
आवारा कुत्तों के आतंक पर निवर्तमान पार्षद सलीना शेरी ने डॉग-बाइट केस पर नगर निगम आयुक्त से की सख्त कार्रवाई की मांग कोटा
कोटा टायर ऐसोसियेशन के अध्यक्ष मोहम्मद रफीक खान को प्रदेश कोंग्रेस कमेटी खेल प्रकोष्ठ में प्रदेश महासचिव नियुक्त होने पर बधाई
राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक विभाग द्वारा नव-नियुक्त जिला अध्यक्षों का सम्मान एवं प्रशिक्षण शिविर आयोजित।
और (बावजूद इसके) उसने तुममें से बहुतेरों को गुमराह कर छोड़ा तो क्या तुम (इतना भी) नहीं समझते थे
और ये कि (देखो) सिर्फ मेरी इबादत करना यही (नजात की) सीधी राह है (61)
और (बावजूद इसके) उसने तुममें से बहुतेरों को गुमराह कर छोड़ा तो क्या तुम (इतना भी) नहीं समझते थे (62)
ये वही जहन्नुम है जिसका तुमसे वायदा किया गया था (63)
तो अब चूँकि तुम कुफ्र करते थे इस वजह से आज इसमें (चुपके से) चले जाओ (64)
आज हम उनके मुँह पर मुहर लगा देगें और (जो) कारसतानियाँ ये लोग दुनिया
में कर रहे थे खु़द उनके हाथ हमको बता देगें और उनके पाँव गवाही देगें (65)
और अगर हम चाहें तो उनकी आँखों पर झाडू फेर दें तो ये लोग राह को पड़े चक्कर लगाते ढूँढते फिरें मगर कहाँ देख पाँएगे (66)
और अगर हम चाहे तो जहाँ ये हैं (वहीं) उनकी सूरतें बदल (करके) (पत्थर
मिट्टी बना) दें फिर न तो उनमें आगे जाने का क़ाबू रहे और न (घर) लौट सकें
(67)
और हम जिस शख़्स को (बहुत) ज़्यादा उम्र देते हैं तो उसे खि़लक़त में
उलट (कर बच्चों की तरह मजबूर कर) देते हैं तो क्या वह लोग समझते नहीं (68)
और हमने न उस (पैग़म्बर) को शेर की तालीम दी है और न शायरी उसकी शान के
लायक़ है ये (किताब) तो बस (निरी) नसीहत और साफ-साफ कु़रान है (69)
ताकि जो जि़न्दा (दिल आकि़ल) हों उसे (अज़ाब से) डराए और काफि़रों पर (अज़ाब का) क़ौल साबित हो जाए (और हुज्जत बाक़ी न रहे) (70)
06 फ़रवरी 2026
आबिद अख्तर लॉयर्स एसोसिएट के सहयोगी टीम साथी एडवोकेट बिलाल अहमद नूरी