आपका-अख्तर खान

हमें चाहने वाले मित्र

09 जनवरी 2026

तेज ठंड और घने कोहरे में,360 किलोमीटर के सफर से दो को मिलेगी रौशनी।

 तेज ठंड और घने कोहरे में,360 किलोमीटर के सफर से दो को मिलेगी रौशनी।
2. देर रात कोटा से 180 किलोमीटर दूर गयी,टीम ने लिया डग शहर का दूसरा नेत्रदान

नेत्रदान के लिए, पूरे हाडोती संभाग और 200 किलोमीटर के दायरे तक कार्य करने वाली संस्था,शाइन इंडिया फाउंडेशन के भवानी मंडी शाखा के ज्योति मित्र कमलेश दलाल को, उनके मित्र भेरूलाल चौधरी (ब्लॉक उपाध्यक्ष सेवादल कांग्रेस) ने सूचना दी कि,नाई मोहल्ला,डग निवासी उनके मामा केसरीमल जैन (अनाज व्यापारी) का आकस्मिक निधन हुआ है ।

चौधरी ने परिवार के सदस्यों को नेत्रदान के महत्व और उसकी उपयोगिता के बारे में जानकारी दी,जिसके बाद बेटे अमित ने,अपने सभी करीबों रिश्तेदारों की समझाइश कर पिता जी के नेत्रदान की सहमति दे दी ।

सहमति प्राप्त होते हैं,डग से 180 किलोमीटर कोटा शहर से, संस्था के डॉ गौड़,नेत्र संकलन वाहिनी ज्योति रथ लेकर डग के लिये रवाना हुए । देर रात घर परिवार के सदस्यों के बीच नेत्रदान की प्रक्रिया को संपन्न किया गया,इस दौरान सभी महिलाओं ने नेत्रदान की प्रक्रिया तो देखी ही सही बल्कि मौके पर नेत्रदान से जुड़ी जो भ्रांतियां थी, उसका भी डॉ गौड़ ने सटीक जवाब दिया।

नेत्रदान की प्रक्रिया के बाद डॉ गौड़ ने बताया कि, केसरीमल जी का नेत्रदान, डग का दूसरा नेत्रदान है इससे पूर्व वर्ष 2021 में डग निवासी स्व० रेखा जैन का नेत्रदान भी संस्था के माध्यम से मुक्तिधाम में संपन्न हुआ था । अंत में डॉ गौड़ ने परिवार के सभी सदस्यों को संस्था की ओर से प्रशस्ति पत्र और नेत्रदानी गौरव पट्टीका भेंट की ।

चौरडिया के पुत्र अमित ने बताया कि,नेत्रदान ने उनके पिता की ज्योति को अमर किया है, उनके पिता जीवनपर्यंत,धर्म कर्म में आस्था रखने वाले और समाज सेवा से जुड़े रहे हैं, ऐसे में अंतिम समय में भी नेत्र दान से उनके परिवार को आत्मीय संतोष की अनुभूति हुई है।

देर रात दो बजे कोटा पहुंचने के बाद,डॉ गौड़ ने बताया कि, रास्ते भर में,तेज ठंड और घना कोहरा था पर उसमें भी, नेत्रदान के लिए कहीं से भी संपर्क करने के पर हमारी टीम चौबीस घंटे तत्पर रहती है।

नेत्रदान प्रक्रिया में सुशील जैन, पंकज नाहर, पिंटू जैन, पंकज कटारिया, लोकेश जैन, मेघराज जैन, पवन जैन सहित जैन सोशल ग्रुप के सदस्यों ने सहयोग किया।

भाई ज़ाहिद निज़ामी की फेसबुक वॉल से, शिक्षा, सेवा और कुशल नेतृत्व का संगम: वाईजीएन ग्रुप के चेयरमैन Arshad Ansari

 

भाई ज़ाहिद निज़ामी की फेसबुक वॉल से, शिक्षा, सेवा और कुशल नेतृत्व का संगम: वाईजीएन ग्रुप के चेयरमैन Arshad Ansari
​वाईजीएन ग्रुप के अध्यक्ष अरशद अंसारी आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं, क्योंकि उन्होंने अपनी पहचान किसी विशिष्ट पद से नहीं बल्कि अपने निस्वार्थ सेवा भाव और उदार व्यक्तित्व से बनाई है। 12 अगस्त 1985 को कोटा के एक प्रतिष्ठित परिवार में जन्मे अरशद अंसारी के दादा हाजी इस्हाक मोहम्मद अंसारी भी अपने समय के प्रतिष्ठित व्यक्तित्व रहे हैं। उन्होंने वर्ष 2002 में 12वीं की पढ़ाई के बाद कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी। प्रारंभ से ही बेहद मेहनती रहे अरशद जी अपना काम खुद करने में विश्वास रखते हैं। अपनी इसी धुन और साहस के दम पर उन्होंने 2010 में नौकरी छोड़कर YGN एजुकेशन ग्रुप की आधारशिला रखी, जो आज राजस्थान में रेगुलर और डिस्टेंस एजुकेशन के लिए एक बड़ा नाम बन चुका है।
​शिक्षा के क्षेत्र में 'धुन और लगन' का अनूठा उदाहरण
​अरशद अंसारी जी के व्यक्तित्व में बच्चों की शिक्षा को लेकर एक अलग ही जुनून देखने को मिलता है। उनका पैगाम है कि शिक्षा हमारे अखलाक और किरदार के परिवर्तन के लिए सबसे महत्वपूर्ण टूल है, जो न केवल जीवन स्तर में सुधार लाती है बल्कि व्यक्तित्व में निखार भी पैदा करती है। वर्तमान में वाईजीएन ग्रुप के माध्यम से वे तीन इंग्लिश मीडियम स्कूल, डिस्टेंस एजुकेशन कॉलेज, स्किल इंडिया के कोर्सेज, प्लेसमेंट कंसल्टेंसी और कंप्यूटर एजुकेशन जैसे संस्थान संचालित कर रहे हैं। उनके मन में हर वक्त यही धुन रहती है कि समाज का कोई भी बच्चा संसाधनों की कमी की वजह से शिक्षा के अधिकार से पीछे न छूट जाए।
​सर्वसमाज का समन्वय और कुशल नेतृत्व
​अरशद अंसारी जी का मानना है कि असली विकास तभी संभव है जब समाज का हर तबका साथ हो। उनकी सोच का दायरा किसी एक समुदाय तक सीमित न होकर पूरे सर्वसमाज के लिए है। वे समाज के सभी वर्गों और क्षेत्रों के साथ गहरा जुड़ाव रखते हैं। विशेष रूप से, प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर उनका बहुत ही कुशल और प्रभावी तालमेल है, जिसका उपयोग वे हमेशा जन-सरोकार के मुद्दों को सुलझाने और समाज के विकास के लिए करते हैं। वे वर्तमान में कई सामाजिक, धार्मिक और वेलफेयर संस्थाओं से सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं और हर धर्म व जाति के लोगों के सुख-दुख में एक परिवार की तरह खड़े होते हैं।
​सम्मान और उपलब्धियां: निस्वार्थ सेवा का प्रतिफल
​उनकी सेवाओं और अद्भुत निर्णय लेने की क्षमता को देखते हुए उन्हें कई प्रतिष्ठित संस्थाओं ने सम्मानित किया है। उन्हें उर्दू एजुकेशन बोर्ड दिल्ली, इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस अवार्ड (2019), एजुकेशन एक्सीलेंसी एवं सोशल एम्पावरमेंट अवार्ड, करियर पॉइंट इंस्टिट्यूट अवार्ड, अलफलाह अवार्ड, हाड़ौती पत्रकार अधिवेशन अवार्ड, ए.एम.जी प्रोडक्शन अवार्ड और श्रेष्ठ शिक्षक सम्मान जैसे दर्जनों पुरस्कारों से नवाजा गया है। हाल ही में उन्हें सवाई माधोपुर में वतन फाउंडेशन द्वारा "कलाम रत्न नेशनल अवार्ड-2025" और अंसारी वेलफेयर सोसाइटी द्वारा संस्था के सर्वोच्च सम्मान "अंसारी रत्न" से भी सम्मानित किया गया है।
​सादगी और भविष्य का उज्ज्वल संकल्प
​अरशद अंसारी जी की सादगी और हर वर्ग के लिए तत्पर रहने का जज्बा ही उन्हें एक सच्चा जन-नायक बनाता है। वाईजीएन ग्रुप के माध्यम से शिक्षा और सेवा की जो मशाल उन्होंने जलाई है, वह न केवल वर्तमान को संवार रही है बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक सुनहरे भविष्य का मार्ग प्रशस्त कर रही है। निस्संदेह, उनका यह सेवा-सफर समाज के लिए एक मील का पत्थर है। आसिफ खान दैनिक कोटा ब्यूरो

लोगों अपने परवरदिगार से डरो और उस दिन का ख़ौफ रखो जब न कोई बाप अपने बेटे के काम आएगा और न कोई बेटा अपने बाप के कुछ काम आ सकेगा ख़़ुदा का (क़यामत का) वायदा बिल्कुल पक्का है तो (कहीं) तुम लोगों को दुनिया की (चन्द रोज़ा) जि़न्दगी धोखे में न डाले और न कहीं तुम्हें फरेब देने वाला (शैतान) कुछ फ़रेब दे

 क्या तूने इस पर भी ग़ौर नहीं किया कि ख़ुदा ही के फज़ल से कश्ती दरिया में बहती चलती रहती है ताकि (लकड़ी में ये क़ूवत देकर) तुम लोगों को अपनी (कु़दरत की) बाज़ निशानियाँ दिखा दे बेशक उस में भी तमाम सब्र व शुक्र करने वाले (बन्दों) के लिए (कुदरत ख़ुदा की) बहुत सी निषानियाँ दिखा दे बेशक इसमें भी तमाम सब्र व शुक्र करने वाले (बन्दों) के लिए (क़ुदरते ख़़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं (31)
और जब उन्हें मौज (ऊँची होकर) साएबानों की तरह (ऊपर से) दाख लेती है तो निरा खुरा उसी का अक़ीदा रखकर ख़़ुदा को पुकारने लगते हैं फिर जब ख़़ुदा उनको नजात देकर खुश्की तक पहुँचा देता है तो उनमें से बाज़ तो कुछ देर एतदाल पर रहते हैं (और बाज़ पक्के काफिर) और हमारी (क़ुदरत की) निषानियों से इन्कार तो बस बदएहद और नाशुक्रे ही लोग करते हैं (32)
लोगों अपने परवरदिगार से डरो और उस दिन का ख़ौफ रखो जब न कोई बाप अपने बेटे के काम आएगा और न कोई बेटा अपने बाप के कुछ काम आ सकेगा ख़़ुदा का (क़यामत का) वायदा बिल्कुल पक्का है तो (कहीं) तुम लोगों को दुनिया की (चन्द रोज़ा) जि़न्दगी धोखे में न डाले और न कहीं तुम्हें फरेब देने वाला (शैतान) कुछ फ़रेब दे (33)
बेशक ख़़ुदा ही के पास क़यामत (के आने) का इल्म है और वही (जब मौक़ा मुनासिब देखता है) पानी बरसाता है और जो कुछ औरतों के पेट में (नर मादा) है जानता है और कोई षख़्स (इतना भी तो) नहीं जानता कि वह ख़़ुद कल क्या करेगा और कोई शख़्स ये (भी) नहीं जानता है कि वह किस सर ज़मीन पर मरे (गड़े) गा बेशक ख़़ुदा (सब बातों से) आगाह ख़बरदार है (34)

08 जनवरी 2026

कोटा ओरियंटल पावर केबल के बेरोज़गार हुए मज़दूर बुज़ुर्ग हो गए हैं , अशक्त हो गए हैं , कई तो मृत्यु के कगार पर हैं,, कुछ तो आज़ादी के भी बहुत साल पहले जन्मे लोग हैं, लेकिन लोकसभा अध्यक्ष साहब के इस कोटा शहर के यह मज़दूर प्रोविडेंट फंड ई पी एफ पेंशन के अदालती आदेश के बावजूद भी , अनावश्यक अपीलों के झमेले में सिसक रहे हैं

 

कोटा ओरियंटल पावर केबल के बेरोज़गार हुए मज़दूर बुज़ुर्ग हो गए हैं , अशक्त हो गए हैं , कई तो मृत्यु के कगार पर हैं,, कुछ तो आज़ादी के भी बहुत साल पहले जन्मे लोग हैं, लेकिन लोकसभा अध्यक्ष साहब के इस कोटा शहर के यह मज़दूर प्रोविडेंट फंड ई पी एफ पेंशन के अदालती आदेश के बावजूद भी , अनावश्यक अपीलों के झमेले में सिसक रहे हैं , हालात यह है के सवा सो से भी अधिक मज़दूरों को कोटा उपभोक्ता न्यायालय , प्रदेश उपभोक्ता फोरम तुरंत ई पी एफ विभाग को पेंशन देने के आदेश दे चुका है , लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की सरकार में केंद्र सरकार का यह ई पी एफ विभाग उम्र के आखरी पड़ाव पर, मात्र हज़ार रूपये की पेंशन की बाँट जोह रहे मज़दूरों की उम्मीदों पर इस राशि से कहीं ज़्यादा फीस वकीलों और क़ानून व्यवस्था पर खर्च कर उन्हें लटकाने में लगा है , प्रोविडेंट फंड विभाग जिला फोरम ,, स्टेट फोरम से हारने के बाद , राष्ट्रिय उपभोक्ता फोरम में अपील में गया है , जहां लगभग दो वर्षों से सिर्फ तारीख पे तारीख , तारीख पे तारीख का खेल हो रहा है , और ओरियंटल पावर केबल कोटा के डेढ़ सो के लगभग वृद्ध , अशक्त मज़दूर इस पेंशन की उम्मीद में सिसक रहे हैं , हाँ यही तस्वीर दिख रही है , केंद्र सरकार की मज़दूर विरोधी यह निति कोटा में इन मज़दूरों, इनके परिवारों में आक्रोश का कारण बना हुआ है ,,, 60 वर्ष पूर्व कोटा में रियायती दरों पर , सरकार से कई सहूलियतें लेकर , झालावाड़ रोड पर ओरियंटल पॉवर केबल फैक्ट्री खुली थी जहाँ कई मज़दूरों को नौकरी मिली थी ,, फैक्ट्री घाटे के नाम पर बंद हुई ,, सुविधाओं के साथ पूर्व मुख्यमंत्री अशोक जी गहलोत के कार्यकाल में फैक्ट्री नए मालिक ने खरीदी , मज़दूरों का हिसाब हुआ , कितनी ज़मीन थी , अब कितनी ज़मीन पर भौतिक रूप से नए मालिकों की क़ब्ज़ेदारी है , विधि नियम , उद्योग व्यवस्थाएं , संचालित आदेश वगेरा सब पत्रावली में है , वोह अलग जांच का विषय हो सकता है ,, लेकिन ओ पी सी के मज़दूरों के हिसाब के बाद , उनकी जो राशि ई पी एफ एकाउंट में जमा थी , देश के क़ानून के तहत उन्हें पारिवारिक पेंशन मिलना थी , लेकिन ओ पी सी के इन मज़दूरों को काफी प्रयास करने , कई बार प्रधानमंत्री , सांसद साहब को पत्र लिखने के बाद भी इनकी विधिक रूप से दी जाने वाली मात्र, एक हज़ार रूपये प्रति माह की पेंशन भी जो इन मज़दूरों की जमा राशि के ब्याज की हिस्सा राशि होती है , वोह भी नहीं दी गई , नतीजन , मज़दूरों ने एडवोकेट रामगोपाल चतुर्वेदी से सम्पर्क किया , जिन्होंने उक्त मज़दूरों की तरफ से पहले नोटिस दिया , फिर भी कोई कार्यवाही नहीं हुई तो कोटा जिला उपभोक्ता न्यायालय में मुक़दमा पेश किया जहाँ विस्तृत सुनवाई के बाद , उपभोक्ता न्यायलय ने सो से भी अधिक मज़दूरों के पक्ष में मामला मानते हुए , उन्हें एक हज़ार रूपये प्रति माह की पेंशन देने के आदेश जारी किये , लेकिन आदरणीय नरेंद्र जी मोदी की इस केंद्र सरकार के ई पी एफ विभाग को, कोटा ओ पी सी के मज़दूरों को , उनका हक़ देना मंज़ूर नहीं था , तो उन्होंने इस मामले के खिलाफ , राजस्थान उपभोक्ता न्यायालय में अपील पेश कर दी , जहां भी विस्तृत सुनवाई के बाद , केंद्र सरकार के ई पी एफ विभाग की अपील खारिज करते हुए, मज़दूरों को उनके हक़ की पेंशन देने के आदेश यथावत रखे गए , ,मज़दूरों की तरफ से आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र जी मोदी जो पत्र लिखकर इस मांमले में , आदेशित पेशन तुरतं दिलवाने के निर्देश देने की गुहार लगाई , लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई , और इनका प्रार्थना पत्र बिना किसी कार्यवाही के रद्दी की टोकरी में गया ,, इधर केंद्र सरकार का ई पी एफ ऑफिस तो अशक्त , लाचार , वयोवृद्ध ,प्रताड़ित मज़दूरों को उनके हक़ की पेंशन नहीं देने पर अड़ा बैठा है , तो विभाग ने इस मामले में दिल्ली राष्ट्रिय उपभोक्ता फोरम के समक्ष सुप्रीम अपील दायर कर दी, जहाँ पेंशन पर स्थगन के बाद ,, कई बार बहस तो हुई , लेकिन आदेश और सुनवाई के नाम पर तारीख पे तारीख वोह भी तीन ,, ,चार , पांच,, छह छह महीने की तारीखे बिना किसी सुनवाई के हो रही हैं , जबकि उक्त राशि मज़दूरों का हक़ है , उनकी खुद की राशि में ब्याज के बदले की हिस्सा राशि क़ानून में कहा गया है , कोटा के यह मज़दूर सिसक रहे हैं , रो रहे हैं , ज़रूरतों के लिए तड़प रहे हैं , बीमार हैं , अशक्त है , वयोवृद्ध होने के बाद , कब किस मोड़ पर अंतिम सांस हो जाए, किसी को पता नहीं, लेकिन , ,देश भर में कल्याणकारी सरकार का नारा देने वाली केंद्र सरकार , देश भर की पंचायत लोकसभा अध्यक्ष के संसदीय क्षेत्र के गरीब मज़दूरों को , उनके हक़ की पेंशन को क़ानूनी दांव पेंच , अपील , ,तारीख पे तारीख के खेल में उलझाए बैठी है , यूँ भी , ,गरीब वयोवृद्ध लोग तो सरकारी योजनाओं के तहत , कल्याणकारी कार्यों के नाम पर ज़रूरी खर्च के नाम पर, इतनी सी गिनती की पेंशन हज़ार रूपये प्रतिमाह तो प्राप्त करने के अधिकारी है भी , लेकिन एक हज़ार रूपये प्रतिमाह , एक मज़दूर के हलक़ से निवाला छीनने के लिए , केंद्र सरकार के ई पी एफ़ विभाग ने कमर कस रखी है , और ,, अपील पर अपील करके अधीनस्थ न्यायालय के आदेशों को रुका हुआ फैसला बनाकर रोककर बैठे है , मज़दूरों का कहना है के , ईश्वर ,भगवान इन्हे सद्बुद्धि दे , हमारे जीवनकाल में ही हमे हमारा हक़ , हमारी पेंशन मिल जाए तो हम हमारे कुछ अधूरे , टूटे फूटे ख़्वाब है , उन्हें जितना मुमकिन हो , पूरा कर लें ,, मज़दूरों के वकील एडवोकेट रामगोपाल चतुर्वेदी भी इस सवाल पर भाव विहल हो उठते है ,वोह कहते , है के मुझे भी अफ़सोस है , के दो अदालतों से विजेता मज़दूर ,, अपील , स्थगन और तारीख , सुनवाई स्थगन के कारणों से अपना हक़ नहीं ले पा रहे हैं , जबकि एडवोकेट रामगोपाल चतुर्वेदी को तो यूँ ,भी भाजपा और खासकर नरेंद्र मोदी जी के अंधभक्तों में गिनती गिनकर कोटा के कई लोग उन्हें ब्लाइंड फेथर कहकर समझाते भी हैं , चिढ़ाते भी हैं , के देख लो तुम्हारी कल्याणकारी सरकार कोटा के , वोह भी लोकसभा अध्यक्ष के संसदीय क्षेत्र के ओ पी सी के मज़दूरों के साथ क्या सलूक कर रही है , इन जनाब को देखिए आप फूलचंद जी जन्म 1939 , आयु 86 वर्ष, , आप कंचन कंवर जन्म 1 जनवरी 1944, अभी 81 वर्ष की हैं,,लेकिन फिर भी , रामगोपाल चतुर्वेदी मुस्कुराते हैं , कहते हैं , एडवोकेसी एक तरफ , इन्साफ के लिए संघर्ष एक तरफ ,,, मोदी भक्ति एक तरफ , आएंगे तो मोदी ही ,, अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339

पति की राह पर पत्नी का भी सम्पन्न हुआ नेत्रदान

 पति की राह पर पत्नी का भी सम्पन्न हुआ नेत्रदान
2. शिक्षिका के नेत्रदान से आज,परिवार में तीसरा नेत्रदान संपन्न

शाइन इंडिया फाउंडेशन के ज्योति मित्र व लायंस क्लब कोटा विनायकम् के सक्रिय सदस्य मुकेश शर्मा ने सूचना दी की, दानमल जी का अहाता, स्टेशन रोड निवासी राजीव राजपाल की माताजी राजरानी राजपाल (पूर्व शिक्षिका-बाल माध्यमिक स्कूल) का आकस्मिक निधन हुआ है ।

संस्था के डॉ कुलवंत गौड़ ने बताया कि,पूर्व में इनके पति स्व० हरवंश लाल,और देवर वेद प्रकाश राजपाल का भी मरणोपरांत नेत्रदान परिवार के सहयोग से संपन्न हुआ था । परिवार में नेत्रदान अब परंपरा के रूप में बनता चला जा रहा है ।

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...