आपका-अख्तर खान "अकेला"
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
03 जनवरी 2026
पहले उद्योग नगरी, फिर शिक्षा नगरी की तबाही के बाद कोटा पर्यटन उद्योग नगरी की तरफ बढ़ तो रही है, लेकिन अव्यवस्थित, कुप्रबंध के चलते
अहसान फरामोश कोटा व्यापार
अहसान फरामोश कोटा व्यापार, जी हां , कोंग्रेस सरकार के पूर्व मंत्री, कोटा उत्तर विधायक शांति कुमार धारीवाल, जिनके सौन्दर्यकरण, विकास योजनाओं ने कोटा को पर्यटन सर्किट, व्यापारियों को पर्यटन उद्योग से जोड़ा, उसे भुनाकर खुद के निजी रोजगार के अवसर बढाने के मामले में आयोजित टूर ट्रेवल्स मीट में , उन्हें उपेक्षित रखा, लेकिन शांति धारीवाल किसी अहसान फरामोश के मोहताज नहीं, टूर ट्रेवलर्स कहते सुने गए, वाह शांति धारीवाल ने तो कोटा को स्वर्ग बना दिया, ओर कुछ सवाल खड़े करते नज़र आये के जिनके नाम इनविटेशन कार्ड पर छपे हैं, उनमें से किसी का भी कोटा विकास, सौन्दर्यकरण के नाम पर एक काम भी कोई गिना दे , या बता दे के एक ईंट भी विकास की किसी ने लगाई हो, तो ज़िंदाबाद तो खुद शांति धारीवाल उनके विकास सौंदर्य कार्य खुद बा खुद हो गए,, अख़्तर
उसी की तरफ़ रुजू होकर (ख़ुदा की इबादत करो) और उसी से डरते रहो और पाबन्दी से नमाज़ पढ़ो और मुशरेकीन से न हो जाना
उसी की तरफ़ रुजू होकर (ख़ुदा की इबादत करो) और उसी से डरते रहो और पाबन्दी से नमाज़ पढ़ो और मुशरेकीन से न हो जाना (31)
जिन्होंने अपने (असली) दीन में तफरेक़ा परवाज़ी की और मुख़्तलिफ़ फिरके़
के बन गए जो (दीन) जिस फिरके़ के पास है उसी में निहाल है (32)
और जब लोगों को कोई मुसीबत छू भी गयी तो उसी की तरफ़ रुजू होकर अपने
परवरदिगार को पुकारने लगते हैं फिर जब वह अपनी रहमत की लज़्ज़त चखा देता है
तो उन्हीं में से कुछ लोग अपने परवरदिगार के साथ शिर्क करने लगते हैं (33)
ताकि जो (नेअमत) हमने उन्हें दी है उसकी नाशुक्री करें ख़ैर (दुनिया में
चन्दरोज़ चैन कर लो) फिर तो बहुत जल्द (अपने किए का मज़ा) तुम्हे मालूम ही
होगा (34)
क्या हमने उन लोगों पर कोई दलील नाजि़ल की है जो उस (के हक़ होने) को
बयान करती है जिसे ये लोग ख़ुदा का शरीक ठहराते हैं (हरगि़ज नहीं) (35)
और जब हमने लोगों को (अपनी रहमत की लज़्ज़त) चखा दी तो वह उससे खुश हो गए
और जब उन्हें अपने हाथों की अगली कारसतानियो की बदौलत कोई मुसीबत पहुँची
तो यकबारगी मायूस होकर बैठे रहते हैं (36)
क्या उन लोगों ने (इतना भी) ग़ौर नहीं किया कि खु़दा ही जिसकी रोज़ी
चाहता है कुशादा कर देता है और (जिसकी चाहता है) तंग करता है-कुछ शक नहीं
कि इसमें इमानरदार लोगों के वास्ते (कुदरत ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं
(37)
(तो ऐ रसूल अपनी) क़राबतदार (फातिमा ज़हरा) का हक़ फिदक़ दे दो और मोहताज व
परदेसियों का (भी) जो लोग ख़़ुदा की ख़ुशनूदी के ख़्वाहाँ हैं उन के हक़
में सब से बेहतर यही है और ऐसे ही लोग आख़ेरत में दिली मुरादे पाएँगें (38)
और तुम लोग जो सूद देते हो ताकि लोगों के माल (दौलत) में तरक्क़ी हो तो
(याद रहे कि ऐसा माल) ख़ुदा के यहाँ फूलता फलता नही और तुम लोग जो ख़़ुदा
की ख़ुशनूदी के इरादे से ज़कात देते हो तो ऐसे ही लोग (ख़ुदा की बारगाह से)
दूना दून लेने वाले हैं (39)
ख़ुदा वह (क़ादिर तवाना है) जिसने तुमको पैदा किया फिर उसी ने रोज़ी दी
फिर वही तुमको मार डालेगा फिर वही तुमको (दोबारा) जि़न्दा करेगा भला
तुम्हारे (बनाए हुए ख़ुदा के) शरीकों में से कोई भी ऐसा है जो इन कामों में
से कुछ भी कर सके जिसे ये लोग (उसका) शरीक बनाते हैं (40)
02 जनवरी 2026
वरिष्ठतम पत्रकार भाई धीरेंद्र जी राहुल की फेसबुक वॉल से कोटा मिनी सचिवालय को लेकर , ओर नई अदालती शगूफा, पर्यावरण नुकसान को लेकर खरी खरी, उन्हीं की ज़िंदाबाद लेखनी में, पिछले सात साल से लगातार सुनते आ रहे हैं कि
और उसी की (क़़ुदरत) की निशानियों में से एक ये (भी) है कि उसने तुम्हारे वास्ते तुम्हारी ही जिन्स की बीवियाँ पैदा की ताकि तुम उनके साथ रहकर चैन करो और तुम लोगों के दरमेयान प्यार और उलफ़त पैदा कर दी इसमें शक नहीं कि इसमें ग़ौर करने वालों के वास्ते (क़ु़दरते ख़़ुदा की) यक़ीनी बहुत सी निशानियाँ हैं
और उसी की (क़़ुदरत) की निशानियों में से एक ये (भी) है कि उसने तुम्हारे
वास्ते तुम्हारी ही जिन्स की बीवियाँ पैदा की ताकि तुम उनके साथ रहकर चैन
करो और तुम लोगों के दरमेयान प्यार और उलफ़त पैदा कर दी इसमें शक नहीं कि
इसमें ग़ौर करने वालों के वास्ते (क़ु़दरते ख़़ुदा की) यक़ीनी बहुत सी
निशानियाँ हैं (21)
और उस (की क़़ुदरत) की निशानियों में आसमानो और ज़मीन का पैदा करना और
तुम्हारी ज़बानो और रंगतो का एख़तेलाफ भी है यकी़नन इसमें वाकि़फकारों के
लिए बहुत सी निशानियाँ हैं (22)
और रात और दिन को तुम्हारा सोना और उसके फज़ल व करम (रोज़ी) की तलाश करना
भी उसकी (क़़ुदरत की) निशानियों से है बेशक जो लोग सुनते हैं उनके लिए
इसमें (क़़ुदरते ख़़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं (23)
और उसी की (क़़ुदरत की) निशानियों में से एक ये भी है कि वह तुमको डराने
वाला उम्मीद लाने के वास्ते बिजली दिखाता है और आसमान से पानी बरसाता है और
उसके ज़रिए से ज़मीन को उसके परती होने के बाद आबाद करता है बेशक
अक़्लमंदों के वास्ते इसमें (क़ुदरते ख़़ुदा की) बहुत सी दलीलें हैं (24)
और उसी की (क़़ुदरत की) निशानियों में से एक ये भी है कि आसमान और ज़मीन
उसके हुक्म से क़ायम हैं फिर (मरने के बाद) जिस वक़्त तुमको एक बार बुलाएगा
तो तुम सबके सब ज़मीन से (जि़न्दा हो होकर) निकल पड़ोगे (25)
और जो लोग आसमानों में है सब उसी के है और सब उसी के ताबेए फरमान हैं (26)
और वह ऐसा (क़ादिरे मुत्तलिक़ है जो मख़लूकात को पहली बार पैदा करता है
फिर दोबारा (क़यामत के दिन) पैदा करेगा और ये उस पर बहुत आसान है और सारे
आसमान व जमीन सबसे बालातर उसी की शान है और वही (सब पर) ग़ालिब हिकमत वाला
है (27)
और हमने (तुम्हारे समझाने के वास्ते) तुम्हारी ही एक मिसाल बयान की है
हमने जो कुछ तुम्हे अता किया है क्या उसमें तुम्हारी लौन्डी गु़लामों में
से कोई (भी) तुम्हारा शरीक है कि (वह और) तुम उसमें बराबर हो जाओ (और क्या)
तुम उनसे ऐसा ही ख़ौफ रखते हो जितना तुम्हें अपने लोगों का (हक़ हिस्सा न
देने में) ख़ौफ होता है फिर बन्दों को खुदा का शरीक क्यों बनाते हो) अक़्ल
मन्दों के वास्ते हम यूँ अपनी आयतों को तफ़सीलदार बयान करते हैं (28)
मगर सरकशों ने तो बगै़र समझे बूझे अपनी नफ़सियानी ख़्वाहिशों की पैरवी कर
ली (और ख़़ुदा का शरीक ठहरा दिया) ग़रज़ ख़ुदा जिसे गुमराही में छोड़ दे
(फिर) उसे कौन राहे रास्त पर ला सकता है और उनका कोई मददगार (भी) नहीं (29)
तो (ऐ रसूल) तुम बातिल से कतरा के अपना रुख़ दीन की तरफ़ किए रहो यही
ख़ुदा की बनावट है जिस पर उसने लोगों को पैदा किया है ख़़ुदा की (दुरुस्त
की हुयी) बनावट में तग़य्युर तबद्दुल {उलट फेर} नहीं हो सकता यही मज़बूत और
(बिल्कुल सीधा) दीन है मगर बहुत से लोग नहीं जानते हैं (30)