अब छोटे शहरों के परिवारों में परंपरा बन रहा नेत्रदान
2. 80 किलोमीटर दूर, कोटा से आयी टीम ने लिया इंद्रगढ़ क्षेत्र का पांचवा नेत्रदान
शोक
की घड़ी में, परिजनों द्वारा नेत्रदान का कार्य संपन्न कराने की पहल अब
इंदरगढ़ क्षेत्र में भी परंपरा के रूप में दिखने लगी है ।
बूंदी
जिले के इंदरगढ़ क्षेत्र में संस्था शाइन इंडिया फाउंडेशन और ईबीएसआर के
बीबीजे चैप्टर द्वारा चलाए जा रहे नेत्रदान जागरुकता अभियान से क्षेत्र में
आज पांचवा नेत्रदान आज संपन्न हुआ ।
वर्ष 2019 में, इंदरगढ़
निवासी महावीर प्रसाद जैन की पत्नी मंजू, और 2025 में इन्हीं के पोते मनन
जैन का आकस्मिक निधन हुआ,जिसके उपरांत परिजनों ने नेत्रदान का पुनीत कार्य
संपन्न करवाया था ।
आज इसी परिवार की बड़े मुखिया महावीर प्रसाद
जैन का भी हृदयघात से आकस्मिक निधन हो गया, उनके निधन के ठीक उपरांत बहनोई
महावीर जैन ने तुरंत कोटा की संस्था शाइन इंडिया फाउंडेशन को दिवंगत महावीर
प्रसाद जैन के नेत्रदान के लिए संपर्क किया ।
सूचना मिलते ही कोटा
से डॉ कुलवंत गौड़ तुरंत ही नेत्र संकलन वाहिनी ज्योति रथ लेकर 80 किलोमीटर
दूर इंदरगढ़ के लिए रवाना हो गए, दिवंगत के नेत्रदान हो सके,इसके लिए
शोकाकुल परिवार के सदस्यों ने अंतिम संस्कार का समय भी थोड़ा देरी से कर
दिया ।
तय समय पर डॉ गौड़ ने परिवार के सभी सदस्यों के बीच में
नेत्रदान की प्रक्रिया को संपन्न किया, प्रक्रिया के दौरान नेत्रदान से
जुड़ी सावधानी और जरूरी बातों को भी विस्तार से बताया ।
डॉ गौड़ ने
बताया कि,गर्मियों में प्राप्त होने वाले नेत्रदानों में कॉर्निया की
गुणवत्ता ठीक बनी रहे उसके लिए ध्यान रहे की,दान दाता की आंखों को पूरी तरह
बंद कर,उन पर गीला रुमाल रख दें ।
आंखों में जितनी नमी बनी रहेगी कॉर्निया की गुणवत्ता उतनी ही अच्छी रहेगी ।
आपका-अख्तर खान "अकेला"
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
01 अप्रैल 2026
अब छोटे शहरों के परिवारों में परंपरा बन रहा नेत्रदान
हम दुनिया की जि़न्दगी में तुम्हारे दोस्त थे और आख़ेरत में भी तुम्हारे (रफ़ीक़) हैं और जिस चीज़ का भी तुम्हार जी चाहे बेहिष्त में तुम्हारे वास्ते मौजूद है और जो चीज़ तलब करोगे वहाँ तुम्हारे लिए (हाजि़र) होगी
हम दुनिया की जि़न्दगी में तुम्हारे दोस्त थे और आख़ेरत में भी तुम्हारे
(रफ़ीक़) हैं और जिस चीज़ का भी तुम्हार जी चाहे बेहिष्त में तुम्हारे
वास्ते मौजूद है और जो चीज़ तलब करोगे वहाँ तुम्हारे लिए (हाजि़र) होगी
(31)
(ये) बख्शने वाले मेहरबान (ख़़ुदा) की तरफ़ से (तुम्हारी मेहमानी है) (32)
और इस से बेहतर किसकी बात हो सकती है जो (लोगों को) ख़़ुदा की तरफ़ बुलाए
और अच्छे अच्छे काम करे और कहे कि मैं भी यक़ीनन (ख़ुदा के) फ़रमाबरदार
बन्दों में हूँ (33)
और भलाई बुराई (कभी) बराबर नहीं हो सकती तो (सख़्त कलामी का) ऐसे तरीके
से जवाब दो जो निहायत अच्छा हो (ऐसा करोगे) तो (तुम देखोगे जिस में और
तुममें दुशमनी थी गोया वह तुम्हारा दिल सोज़ दोस्त है (34)
ये बात बस उन्हीं लोगों को हासिल हुई है जो सब्र करने वाले हैं और उन्हीं लोगों को हासिल होती है जो बड़े नसीबवर हैं (35)
और अगर तुम्हें शैतान की तरफ़ से वसवसा पैदा हो तो ख़ुदा की पनाह माँग लिया करो बेशक वह (सबकी) सुनता जानता है (36)
और उसकी (कुदरत की) निशानियों में से रात और दिन और सूरज और चाँद हैं तो
तुम लोग न सूरज को सजदा करो और न चाँद को, और अगर तुम ख़़ुदा ही की इबादत
करनी मंज़ूर रहे तो बस उसी को सजदा करो जिसने इन चीज़ों को पैदा किया है
(37)
पस अगर ये लोग सरकशी करें तो (ख़़ुदा को भी उनकी परवाह नहीं) वो लोग
(फ़रिश्ते) तुम्हारे परवरदिगार की बारगाह में हैं वह रात दिन उसकी तसबीह
करते रहते हैं और वह लोग उकताते भी नहीं (38)
उसकी क़ुदरत की निशानियों में से एक ये भी है कि तुम ज़मीन को ख़ुश्क और
बेगयाह देखते हो फिर जब हम उस पर पानी बरसा देते हैं तो लहलहाने लगती है और
फूल जाती है जिस ख़ुदा ने (मुर्दा) ज़मीन को जि़न्दा किया वह यक़ीनन
मुर्दों को भी जिलाएगा बेशक वह हर चीज़ पर क़ादिर है (39)
जो लोग हमारी आयतों में हेर फेर पैदा करते हैं वह हरगिज़ हमसे पोशीदा
नहीं हैं भला जो शख़्स दोज़ख़ में डाला जाएगा वह बेहतर है या वह शख़्स जो
क़यामत के दिन बेख़ौफ व ख़तर आएगा (ख़ैर) जो चाहो सो करो (मगर) जो कुछ तुम
करते हो वह (ख़़ुदा) उसको देख रहा है (40)
31 मार्च 2026
अंतिम सफर को जाते हुए भी सुशीला देवी दे गई दो नेत्रहीनो को नई रोशनी
अंतिम सफर को जाते हुए भी सुशीला देवी दे गई दो नेत्रहीनो को नई रोशनी
मथुरा में धार्मिक यात्रा में मृत्यु,घर लाते समय,देर रात,बीच रास्ते में एंबुलेंस में संपन्न हुआ नेत्रदान
नेत्रदान प्रक्रिया के लिए पार्थिव शरीर को कहीं ले जाना नहीं होता है, घर पर, चिकित्सालय पर, मुक्तिधाम में या एंबुलेंस में भी इस प्रक्रिया को संपादित किया जा सकता है, इसी तरह का विलक्षण उदाहरण मंगलवार को देखने को मिला जब सुशीला शर्मा का नेत्रदान एंबुलेंस में प्राप्त किया गया।
शाइन इंडिया फाउंडेशन एवं भारत विकास परिषद के नेत्रदान संयोजक कमलेश गुप्ता दलाल ने बताया कि ट्रांसपोर्ट व्यवसायी धनराज शर्मा का परिवार देव दर्शन के लिए मथुरा गया हुआ था, वहीं पर उनकी पत्नी सुशीला देवी को हृदयाघात हुआ और उनका निधन हो गया, आकस्मिक मृत्यु के बाद परिवारजन पार्थिव शरीर को मथुरा से एम्बुलेंस के द्वारा भवानीमंडी लेकर आ रहे थे, ऐसे में पार्षद राहुल बोहरा एवं स्वास्थ्य विभाग के जिला सलाहकार डॉ राजकुमार शर्मा की प्रेरणा से सुशीला देवी के पुत्रों राजू, नवीन, कमल एवं कुंदन शर्मा के द्वारा नेत्रदान की सहमति प्रकट की गई।
जब तक सहमति प्राप्त हुई,परिवारजन पार्थिव शरीर को लेकर कोटा से गुजर रहे थे,ऐसे में कमलेश गुप्ता की सूचना पर शाइन इंडिया फाउंडेशन के डॉ कुलवंत गौड़ ने रात को 4 बजे ही ज्योति रथ से 30 किलोमीटर दूर गोपालपुरा,कोटा के ऐट लेन पर पहुंचे,और एंबुलेंस में ही नेत्रदान प्रक्रिया संपादित करके कॉर्निया प्राप्त किया।
राहुल बोहरा एवं डॉ राजकुमार शर्मा ने बताया कि नेत्रदान के प्रति सहमति होने के बाद भी परिवार के मन में संशय था कि,रात्रि को 4 बजे नेत्रदान कैसे होगा और कहां पर होगा? ऐसे में जब उन्हें जानकारी दी गई कि नेत्रदान प्रक्रिया एंबुलेंस में भी संपादित की जा सकती है, एवं देर रात्रि में भी शाइन इंडिया फाउंडेशन की टीम नेत्रदान लेने के लिए आने को तैयार है,तो उन्होंने तुरंत नेत्रदान के लिए स्वीकृति प्रकट कर दी ।
धनराज शर्मा के साथ-साथ सभी परिवार सदस्यों ने एंबुलेंस में संपन्न नेत्रदान प्रक्रिया को अच्छी तरह से देखा और यह जानकर संतोष हुआ कि नेत्रदान में केवल आंखों के ऊपर की झिल्ली (कोर्निया) को ही लिया जाता है, इसमें चेहरे पर कोई विकृति नहीं आती है।
नेत्र उत्सरक डॉ कुलवंत गौड़ के अनुसार कि, सुशीला देवी का कॉर्निया अच्छा पाया गया है, इसे आई बैंक जयपुर भिजवा दिया गया है,जहां यह दो नेत्रहीनों को नई रोशनी दे सकेगा। वही ज्योति मित्र कमलेश गुप्ता दलाल के अनुसार,यह नगर से 156 वां नेत्रदान प्राप्त हुआ है।
प्रेषक.
शाइन इंडिया फाउंडेशन
बहुत दिनों बाद ऐतिहासिक लुप्त पीपली रामपुरा कोटा के पास स्थित महात्मा गांधी स्कूल के सामने से निकला तो स्कूल ने पूछा..
बहुत दिनों बाद ऐतिहासिक लुप्त पीपली रामपुरा कोटा के पास स्थित महात्मा गांधी स्कूल के सामने से निकला तो स्कूल ने पूछा....."मुझसे तो तू बहुत परेशान था, अब ये बता कि जिंदगी के इम्तहान कैसे चल रहे हैं “ कोटा के हालात क्या चल रहे है, कोतवाली पर कब्ज़ा जमाकर आज़ादी की जंग लड़ने वाले, कोटा को 1857 में अंग्रेज़ पोलटिकल एजेंट कोटा शासक से कोटा को आज़ाद कराने वाले शहीद महराब खान, लाला जय दयाल के इन्साफ संघर्ष के मामले में क्या चल रहा है, महात्मा गांधी के नाम से मुझे समूल तो बनाया लेकिन मेरे समर्थक अब मेरे हत्यारे गोडसे विचारक, समर्थकों के साथ क्यों है, में क्या जवाब देता, आंखों में पानी और दिल पर कोटा के गद्दारों, अंग्रेजों के महिमामंडकों की सीना जोरी ओर क़लम की थकावट, हार, हथियार डालने की प्रव्रत्ति पर बोझा लिए वापस हो गया, अख्तर
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