आपका-अख्तर खान

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04 जनवरी 2026

अजीब है यह मेरा कोटा शहर , अजीब है यहां के खबरची ,,, जो होता है वोह दिखाते नहीं

 

अजीब है यह मेरा कोटा शहर , अजीब है यहां के खबरची ,,, जो होता है वोह दिखाते नहीं , जो नहीं होता है , उसे दूसरे का नाम देकर महिमा मंडित करने का व्यवसाय करते है , कल की खबर चंबल घड़ियाल अभ्यारण्य की डी लिमिटेशन सभी ने देखी है ,, पढ़ी है , न्यूज़ चैनल पर सुनी है ,खबर में ऐसा भ्रम फैलाया है , जैसे यह सब कोटा सांसद महोदय की वजह से और राजस्थान में भाजपा की सरकार की वजह से सम्भव हुआ है , लेकिन पर्दे के पीछे की कहानी आम जनता तक , ज़्यादा तक नहीं तो कुछ गिनती के लोगों तक तो पहुंचाने की मेरी ज़िम्मेदारी है , क्योंकि भाजपा और भाजपा द्वारा शासित जर्नलिज़्म से जुड़े लोग तो इसे उजागर हरगिज़ नहीं करेंगे , और कांग्रेस के लोगों की प्रचारक व्यवस्था का हाल तो कोटा के लोग देख ही रहे हैं ,,कोंग्रेस की यह व्यवस्था तो लुप्त सी हो गई है, आज से तीन साल पहले लगभग आप पीछे जाइएगा ,, कोटा में चंबल रिवर फ्रटं का उद्घाटन था , इसे रोकने के लिए यही भाजपा से जुड़े लोग , भाजपा के ज़िम्मेदार ,, चंबल रिवर फ्रटं का खुल कर विरोध कर रहे थे , चंबल रिवर फ्रटं का उस वक़्त भी मेने फारेस्ट नोटिफिकेशन पेश किया था , जिसमे अप स्ट्रीम में घड़ियाल सेंचुरी की पाबंदियां थी , और डाउन स्ट्रीम बैराज के बाद यह पाबंदियां नहीं थी , ,खेर फिर भी भाजपा के इशारे पर ,, कोटा चंबल रिवर फ्रंट के विकास और सौंदर्य कार्यों को विवादित करने , नीचा दिखाने की गरज़ से अजमेर के अशोक मलिक , द्रुपद मलिक ,, जयपुर के गिर्राज अग्रवाल ने , ग्रीन ट्रिब्यूनल में चंबल रिवर फ्रंट को घड़ियाल सेंचुरी को नुकसान पहुंचाने ,, पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाला बताकर , एक याचिका पेश की , और चंबल रिवर फ्रटं को अजमेर के सात अजूबों की तर्ज़ पर तोड़ फोड़ करने की मांग उठाई , ,खेर अख़बार नवीसों के पास भाजपा का चेहरा था , भाजपा के रिमोट से चल रहे थे , सो , कोटा के रिवर फ्रंट को खूब कोसा गया , चंबल घड़ियाल सेंचुरी को महिमा मंडित किया , घड़ियाल के लुप्त होने को लेकर काफी चिंताएं ज़ाहिर कीं ,, घरों में छुपे बैठे भाजपा से सम्मानित होने वाले , भाजपा वैचारिक व्यवस्था के तहत पर्यावरण विद , वन्य जीव प्रेमी बाहर निकले , खूब चिल्लाये , घड़ियालों को बचाने की मुहीम चलाने लगे और यही अख़बार , यही खबर नवीस ,,यही बुद्धिजीवी, घड़ियाल सेंचुरी की खबरें उस वक़्त प्रमुख बनाकर , चबंल रिवर फ्रंट को कोस रहे थे , जबकि यह सब डाउन स्ट्रीम में था , लेकिन जब ग्रीन ट्रिब्यूनल ने संयुक्त समिति बनाई , बिंदुवार हर व्यवस्था की जांच हुई , और चंबल घड़ियाल सेंचुरी , पर्यावरण का कोई उलंग्घन होना नहीं पाया , तो फिर , ग्रीन ट्रिब्यूनल ने चंबल रिवर फ्रंट और राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार , स्वायत शासन मंत्री शांति कुमार धारीवाल द्वारा करवाए गए कार्यों को क्लीन चिट दे दी , भूल गए कोटा के खबर नवीस , इस कड़वे सच को , इस इतिहास को , भाजपा ने उस वक़्त घड़ियाल , घड़ियाल चिल्लाकर उधम मचाया था ,तब स्वायत शासन मंत्री शांति कुमार धारीवाल जिनके सामने घड़ियाल सेंचुरी क्षेत्र में शक्ति नगर जी हां शक्तिनगर सहित सभी आसपास के सीमा क्षेत्र के मकान प्रतिबंधित श्रेणी में थे , उन्होंने व्यवहारिक रूप से सोचा और फिर कोटा घड़ियाल सेंचुरी को डीलिमिटेशन के लिए कुछ प्रस्ताव बनाकर , मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को दिया , मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस प्रस्ताव को , नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्ड लाइफ को , कोटा के कुछ क्षेत्रों को डी लिमिट करने के लिए भेजा , क्योंकि गहलोत सरकार शांति धारीवाल के शहर में अधिकतम लोगों को पट्टे देने का इतिहास रच रही थी , जबकि वर्तमान भाजपा सरकार ने , आज तक एक पट्टा भी इस श्रेणी में जारी नहीं किये है , ,खेर ग्रीन ट्रिब्यूनल के रिवर फ्रंट को क्लीन चिट देने के आदेश ,, और भी बहुत सी दलीलों के साथ भेजे गए अशोक गहलोत के प्रस्ताव के बाद , भाजपा सरकार आ गई , 15 दिसम्बर 2023 को पर्ची शपथ हो गई, और रूटीन में तकनीकी , विधिक प्रस्ताव होने से , इस प्रस्ताव को बिना किसी हील हुज्जत के मंज़ूर किया गया , क्योंकि नेशनल बोर्ड ऑफ़ वाइलड़ लाइफ के राष्ट्रिय अध्यक्ष , खुद प्रधामंत्री नरेंद्र मोदी जी हैं , और यह बैठक 3 मार्च 2025 को आदरणीय प्रधामंत्री की अध्यक्षता में गिरी में हुई , जिसमे डॉल्फिन , घड़ियाल सहित पेंथर , टाइगर सहित पांच मुद्दों पर चर्चा हुई , उसमे घड़ियालों को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई ,,, कोटा घड़ियाल सेंचुरी के नोटिफिकेशन को डी नोटिफाइड करने पर कोई चर्चा हुई ही नहीं , वोह तो कांग्रेस सरकार के साक्ष्यों , सुबूतों और जनभावना के अनुरूप जनहित मुद्दे के तोर पर भेजे हुए प्रस्ताव को रूटीन में जनहित का मानकर स्वीकार कर लिया गया , और राज्य सरकार को स्वीकृत प्रस्ताव के आधार पर अधिसूचना जारी करने के लिए पहुंचा दिया , घरों में बैठे पर्यावरण विद , वन्य जीव प्रेमी , जो भाजपा के रिमोट से चल रहे हैं , जो खबरनवीस अनावश्यक रूप से बिना किसी प्रयास के सत्तापक्ष को महिमामंडित कर रहे हैं , ज़रा वोह किसी भी सांसद , विधायक ,या किसी भी भाजपा ज़िम्मेदार का इस संबंध में एक भी लिखा हुआ पत्र लाकर बताये , सार्वजनिक रूप से प्रकाशित कर आम जनता का भ्रम दूर करे तो सही,, तो जनाब एक वक़्त चंबल रिवर फ्रंट के उद्घाटन के समय ,, घड़ियालों की सेंचुरी को बचाने वाले , इस सेंचुरी के नाम पर चंबल रिवर फ्रटं को तुड़वाने की कोशिशों में लगने वाले , अख़बारों में , न्यूजों में प्रचार प्रसार करने वाले यही लोग आज , घड़ियाल सेंचुरी से कांग्रेस के कार्यकाल में भेजे प्रस्ताव की स्वीकृति का क्रेडिट किसी और को देकर महिमामंडन कर रहे है , जो लोग कहते थे, घड़ियाल खत्म हो जायेंगे , उनका प्रजनन मटियामेट हो जाएगा आज उन्हें घड़ियालों की कोई चिंता नहीं है , बल्कि खुशी है, उनका विचार सत्ता के बदलते ही बदल गया है , पर्यावरण विद , वन्य जीव प्रेमी , घड़ियालों के प्रजनन को लेकर चिंता जताने वाले लोग आज कहाँ है , ना सड़कों पर है, ना विरोध में हैं , क्योंकि उनका रिमोट तो किसी और के हाथ में हैं , जो कुछ एक , दो , तीन ,, ओरिजनल पर्यावरणविद , ओरिजनल वन्य जीव प्रेमी है , उनकी आवाज़ को दबा देने के लिए एक पब्लिसिटी कोकस है ना , जो पेड कोकस है , और वही कुछ आम जनता को दिखाता है ,जो कोकस को चलाने वाले आक़ा अपने रिमोट के मुताबिक़ चलाना चाहते हैं , तो जनाब तथ्य , तलाशो कोई पत्र इस मामले में सिफारिश का जो लिखा हो , तलाशकर लाओ ,, चंबल घड़ियाल सेंचुरी के सत्य को समझो , पहचानो , काम तो कांग्रेस सरकार और वोह भी कोटा में तो सिर्फ शांति कुमार धारीवाल साहब के कार्यकाल में ही हुए है , भाजपा में तो ललित चतुर्वेदी के कार्यकाल तक काम होते थे , अब तो बस बातें होतीं है ,बयानबाज़ी होती है ,वायदे होते हैं ,और आप सब जानते ही हैं , अब क्या क्या होता है , ,ओर क्या क्या हो रहा है, ,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339

बात करना शुरू भी उसने किया°

 

बात करना शुरू भी उसने किया°
बात करना बंद भी उसने किया°°
हम तो बस उनके लिए एक खिलौना जैसे थे°°
जब जी चाहा मन बहलाया खेला जैसे चाहा°°
जब जी चाहा छोड़ दिया हमारा दिल तोड़ दिया.

वह उससे पाक व पाकीज़ा और बरतर है ख़़ुद लोगों ही के अपने हाथों की कारस्तानियों की बदौलत ख़ुश्क व तर में फ़साद फैल गया ताकि जो कुछ ये लोग कर चुके हैं ख़़ुदा उन को उनमें से बाज़ करतूतों का मज़ा चखा दे ताकि ये लोग अब भी बाज़ आएँ

 वह उससे पाक व पाकीज़ा और बरतर है ख़़ुद लोगों ही के अपने हाथों की कारस्तानियों की बदौलत ख़ुश्क व तर में फ़साद फैल गया ताकि जो कुछ ये लोग कर चुके हैं ख़़ुदा उन को उनमें से बाज़ करतूतों का मज़ा चखा दे ताकि ये लोग अब भी बाज़ आएँ (41)
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ज़रा रुए ज़मीन पर चल फिरकर देखो तो कि जो लोग उसके क़ब्ल गुज़र गए उनके (अफ़आल) का अंजाम क्या हुआ उनमें से बहुतेरे तो मुशरिक ही हैं (42)
तो (ऐ रसूल) तुम उस दिन के आने से पहले जो ख़ुदा की तरफ़ से आकर रहेगा (और) कोई उसे रोक नहीं सकता अपना रुख़ मज़बूत (और सीधे दीन की तरफ़ किए रहो उस दिन लोग (परेशान होकर) अलग अलग हो जाएँगें (43)
जो काफि़र बन बैठा उस पर उस के कुफ़्र का वबाल है और जिन्होने अच्छे काम किए वह अपने ही आसाइश का सामान कर रहें है (44)
ताकि जो लोग ईमान लाए और अच्छे अच्छे काम किए उनको ख़़ुदा अपने फज़ल व (करम) से अच्छी जज़ा अता करेगा वह यक़ीनन कुफ़्फ़ार से उलफ़त नहीं रखता (45)
उसी की (क़ुदरत) की निशानियों में से एक ये भी है कि वह हवाओं को (बारिश) की ख़ुशख़बरी के वास्ते (क़ब्ल से) भेज दिया करता है और ताकि तुम्हें अपनी रहमत की लज़्ज़त चखाए और इसलिए भी कि (इसकी बदौलत) कष्तियाँ उसके हुक्म से चल खड़ी हो और ताकि तुम उसके फज़ल व करम से (अपनी रोज़ी) की तलाश करो और इसलिए भी ताकि तुम शुक्र करो (46)
औ (ऐ रसूल) हमने तुमसे पहले और भी बहुत से पैग़म्बर उनकी क़ौमों के पास भेजे तो वह पैग़म्बर वाज़ेए व रौशन मोजिज़े लेकर आए (मगर उन लोगों ने न माना) तो उन मुजरिमों से हमने (खू़ब) बदला लिया और हम पर तो मोमिनीन की मदद करना लाजि़म था ही (47)
ख़ुदा ही (क़ादिर तवाना) है जो हवाओं को भेजता है तो वह बादलों को उड़ाए उड़ाए फिरती हैं फिर वही ख़ुदा बादल को जिस तरह चाहता है आसमान में फैला देता है और (कभी) उसको टुकड़े (टुकड़े) कर देता है फिर तुम देखते हो कि बूँदियां उसके दरमियान से निकल पड़ती हैं फिर जब ख़़ुदा उन्हें अपने बन्दों में से जिस पर चहता है बरसा देता है तो वह लोग ख़ुशियाँ मनाने लगते हैं (48)
अगरचे ये लोग उन पर (बाराने रहमत) नाजि़ल होने से पहले (बारिश से) शुरु ही से बिल्कुल मायूस (और मज़बूर) थे (49)
ग़रज़ ख़ुदा की रहमत के आसार की तरफ़ देखो तो कि वह क्योकर ज़मीन को उसकी परती होने के बाद आबाद करता है बेशक यक़ीनी वही मुर्दो केा जि़न्दा करने वाला और वही हर चीज़ पर क़ादिर है (50)

03 जनवरी 2026

पहले उद्योग नगरी, फिर शिक्षा नगरी की तबाही के बाद कोटा पर्यटन उद्योग नगरी की तरफ बढ़ तो रही है, लेकिन अव्यवस्थित, कुप्रबंध के चलते

 

पहले उद्योग नगरी, फिर शिक्षा नगरी की तबाही के बाद कोटा पर्यटन उद्योग नगरी की तरफ बढ़ तो रही है, लेकिन अव्यवस्थित, कुप्रबंध के चलते गरीब वर्ग, छोटे व्यापारी, थड़ी, खोमचे वालों, ऑटो वालों के लिये बेरोज़गारी का संदेश भी है, कोटा हाड़ौती टूर ट्रेवल्स ऑपरेटर्स की यह कोटा मीट ,,, राजस्थान सरकार के भाजपा शासन के स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह जी खर्रा की कोटा की विकास योजनाओं को लेकर जो उनकी पूर्व में की गई बेहूदा टिप्पणियां है , उन्हें रिजेक्ट करने के लिए काफी हैं , जबकि कोटा के ही विकास पुरुष कहे जाने वाले शान्ति धारीवाल के विकास और सोंदर्यकरण कार्यों के लिए एक शाबाशी भी है ,, जी हाँ कोटा हाड़ौती से प्यार करने वालों , ,कोटा को , कोटा की विकास सोंदर्यकरण योजनाओं के प्रति कोटा के आकर्षण को नीचा दिखाने के लिए , भाजपा सरकार के स्वायत शासन मंत्री कभी सफेद हाथी , कभी भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर अपमानित करते रहे हैं , यह टूर ऑपरेटर्स की मीट ,, उन्हें झूंठा साबित करने के लिए काफी है ,, इधर कोटा और कोटा के पर्यटन स्थलों को , टूरिस्ट पैकेज टूर ऑपरेटर्स के ज़रिये देश भर में आकर्षित करने के लिए टूर ऑपरेटर मीट से , कोटा के छोटे व्यापारी , खोमचे वाले , ठेले वाले , चाट पकोड़ी वाले , छोटी सराये , होटलों, धर्मशाला वाले , ऑटो ,, ई रिक्शा सहित कई छोटे मंझले व्यापारियों , होटलों , भोजनालयों के लिए नुकसानदायक है , इन लोगों के रोज़गार को इसलिए भी खतरा है के होटल व्यवसाई खुद के व्यवसाय को बढ़ाने की दृष्टि से यह महंगी होटलें,, महंगे पास , महंगे व्यंजनों , व्यवस्थाओं के साथ कार्यक्रम करवा रहे हैं , ज़ाहिर है , टूर ऑपरेटर्स के टूर मेप में , यही लोग होंगे और पर्यटक आएंगे तो सही , लेकिन बढ़े होटल व्यवसाई ,, बढ़े रेस्टोरेंट , महंगी टेक्सी स्कीम ,, लक्ज़री बसों के लिए तो रोज़गारोनुमुखी है , यह पर्यटन स्थलों , सरकार के लिए कमाई का साधन हो सकता है , लेकिन कोटा शहर में छोटे मंझोले ,, गरीब रोज़मर्रा की कमाई करने वाले खोमचे वाले , ऑटो वाले , ई रिक्शा वाले , चाट , पकोड़ी वालों के लिए तो यह सब बेकार , बेमानी है , क्यूंकि टूर ऑपरेटर्स के रोज़गार मेप में यह लोग हैं ही नहीं ,, ऐसे में कांग्रेस की विकास योजनाओं का लाभ , जिसके बलबूते पर कोटा को टूरिस्ट मेप में लेकर , सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ाने की कोशिशें जहां एक तरफ स्वागत योग्य क़दम रहा, वहीँ दूसरी तरफ यह सब भाजपा जो दो साल में कोटा में एक ईंट तक नहीं लगा पाई है , अदालत परिसर निर्माण , मिनी सचिवालय को लेकर कोरी बयानबाज़ी चल रही है , तो एयरपोर्ट का शिलान्यास अभी तक नहीं हुआ है , कांग्रेस के सोंदर्यकरण , विकास कार्यों को भाजपा के लोग इस्तेमाल तो कर रहे हैं , लेकिन टूट फूट भी ठीक नहीं करा पाए हैं , इसीलिए तो कोचिंग उद्योग के लड़खड़ाने के बाद , होटल व्यवसाय को लगे आर्थिक धक्के के बाद व्यापारियों ने यह अपने स्तर पर ही यह प्रयास व्यवसायियों ने शुरू किये है , लेकिन कोचिंग सिटी में बच्चों को कोटा में ही केंद्रीकृत करने के मामले में कोई गंभीर नहीं हुआ है , यही वजह है के कोचिंग मालिकों ने तो विकेन्द्रीकरण निति के तहत अपने अपने सेंटर दूसरे राज्यों में फैलाकर , अपने कारोबार , कमाई को कई गुना बढ़ा लिया है , लेकिन इन कोचिंग , कोचिंग में आने वाले बच्चों के भरोसे कोटा को जो रोज़गार मिला था , उस हॉस्टल व्यवसाय , मेस व्यवसाय , स्टेशनरी सहित अन्य व्यवसाय को भी धक्का लगा है , करोड़ो रूपये की ऋण योजनाओं के तहत , हॉस्टल निर्माण हुए और अब उनके समक्ष रोज़गार छिन जाने या न्यूनतम स्तर पर सिमट जाने से , वोह सब निराशावाद में हैं , ,कोटा में व्यापार महासंघ तो है , लेकिन उसका रूहझान हॉस्टल और मेस व्यवसाय को भी पुनर्जीवित योजनाओं की तरफ होना ही चाहिए , सिर्फ पदाधिकारियों के व्यवसाय से जुडी होटल योजनाओं के रोज़गारोन्मुखी व्यवस्था से कोटा का कोई खास भला नहीं होगा , कोटा को एक साथ , मिल ,जुलकर कांग्रेस , भाजपा को भुलाकर ,, आपसी मतभेद भुलाकर , संयुक्त रूप से हर क्षेत्र में ,केंद्र और राज्य सरकार की जो कोटा के विकास और सोंदर्यकरण के प्रति जो लेट लतीफी उपेक्षित व्यवस्थाएं है , उनके खिलाफ कोटा के भाजपा के नेताओं पर विरोध प्रदर्शनों के माध्यम से दबाव बनाना ही होगा , नहीं तो कोटा जो उद्योग नगरी से टूट गया , फिर शिक्षा नगरी से बिखर गया , वोह अब कांग्रेस के शांति कुमार धारीवाल की योजनाओं से पर्यटन उद्योग के नक़्शे पर जो मुनाफे का दौर आया है , उसे भी धक्का लगने की संभावना हो सकती है ,,,,,,यहां कोटा बृज राज भवन जो अंग्रेज़ी शासन में पोलिटिकल एजेंट का बंगला था 1857 कि आज़ादी की जंग में , तात्कालिक दरबार के निकटतम पोलिटिकल एजेंट मेजर बर्टन के ज़ुल्म के खिलाफ आज़ादी की जंग , फिर लाला जय दयाल, मेहराब खान की बग़ावत, कोटा की अंग्रेज़ी शासन से आज़ादी, बृज राजभवन में मेजर बर्टन उसके पुत्रों का क़त्ल, फिर मेजर बर्टन के खोफ को खत्म करने के लिये उसके सर को धड़ से अलग कर, बल्लम पर सर को लटकाकर शहर में घुमाकर अंग्रेज़ी आतताई शासन पर विजय की कहानी, फिर गद्दारों की मुखबिरी, अंग्रेजों का हमला, फिर कोटा की गुलामी ओर कोटा की आज़ादी के जांबाज़ हीरो, लाला जय दयाल, मेहराब खान को बृज राज भवन के बाहर नीम के पेड़ पर फांसी , ऐतिहासिक पर्यटन को बढ़ावा देने की कई घटनाएं कोटा में दबी पढ़ी हैं, यहां के इतिहासकार जो चाटुकारों से अलग है , पर्यटन लेखक , खासकर डॉक्टर प्रभात कुमार सिंघल, फिरोज़ अहमद, हनीफ जेदी , ब्लॉगर्स, सोशल मीडिया एक्टिविस्ट से मशवरा कर अगर यह पर्यटन बढ़ावे के ईमानदार प्रयास होंगे तो यक़ीनन कोटा फिर से अव्वल होगा, नहीं तो कोटा को भाजपा सरकार की उपेक्षा अजगर बनकर निगल रही है, अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339
akhtar khan akela

अहसान फरामोश कोटा व्यापार

 अहसान फरामोश कोटा व्यापार, जी हां , कोंग्रेस सरकार के पूर्व मंत्री, कोटा उत्तर विधायक शांति कुमार धारीवाल, जिनके सौन्दर्यकरण, विकास योजनाओं ने कोटा को पर्यटन सर्किट, व्यापारियों को पर्यटन उद्योग से जोड़ा, उसे भुनाकर खुद के निजी रोजगार के अवसर बढाने के मामले में आयोजित टूर ट्रेवल्स मीट में , उन्हें उपेक्षित रखा, लेकिन शांति धारीवाल किसी अहसान फरामोश के मोहताज नहीं, टूर ट्रेवलर्स कहते सुने गए, वाह शांति धारीवाल ने तो कोटा को स्वर्ग बना दिया, ओर कुछ सवाल खड़े करते नज़र आये के जिनके नाम इनविटेशन कार्ड पर छपे हैं, उनमें से किसी का भी कोटा विकास, सौन्दर्यकरण के नाम पर एक काम भी कोई गिना दे , या बता दे के एक ईंट भी विकास की किसी ने लगाई हो, तो ज़िंदाबाद तो खुद शांति धारीवाल उनके विकास सौंदर्य कार्य खुद बा खुद हो गए,, अख़्तर

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