आपका-अख्तर खान "अकेला"
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
08 अप्रैल 2026
आगामी 22 अप्रेल को होने वाले बार कौंसिल ऑफ़ राजस्थान के चुनाव में
कोटा अभिभाषक परिषद के वरिष्ठ वकील साथी सत्यप्रकाश जी गौतम के आकस्मिक निधन से वकील समुदाय सहित कोटा शहर के बुद्धिजीवियों, समाजसेवियों में शोक की लहर दौड़ गई,
देहदान संकल्पित पिता का बेटी दामाद ने संपन्न कराया नेत्रदान देहदान
देहदान संकल्पित पिता का बेटी दामाद ने संपन्न कराया नेत्रदान देहदान
2. 120 किलोमीटर की भाग दौड़,पर देहदान संकल्पित का संपन्न हुआ देहदान
हाडोती
संभाग में, शाइन इंडिया फाउंडेशन के नेत्रदान जागरुकता के बाद अब देहदान
का कार्य भी, क्षेत्रवासियों में जागरूकता ला रहा है । शोक की घड़ी ने
परिवार की ओर से देहदान के लिए संपर्क करने के बाद टीम के सदस्य सक्रिय
होकर पुण्य कार्य को संपन्न करने में मदद करते हैं ।
कल,मंगलवार को
मंडी रोड,देवपुरा,बूंदी निवासी राजेंद्र प्रसाद शर्मा का आकस्मिक निधन
हुआ, जिसके उपरांत बेटी मनीषा और दामाद सतीश ने संस्था के ज्योति मित्र
इदरीस बोहरा, को पिता के नेत्रदान और देहदान का संकल्प पूरा करवाने का
अनुरोध किया ।
ज्ञात हो कि,5 दिन पहले राजेंद्र प्रसाद ने अपनी
स्वेच्छा से बेटी दामाद को अपना देहदान करने की इच्छा बताई थी, जिसके
उपरांत उनका देहदान संकल्प संस्था शाइन इंडिया के माध्यम से भरवाया गया था ।
सहज,सरल व सादा जीवन जीने वाले राजेंद्र प्रसाद, धार्मिक प्रवृत्ति के
मिलनसार व्यक्ति थे ।
जब संस्था को नेत्रदान देहदान की सहमति मिली,
उस समय ईबीएसआर बीबीजे चैप्टर के तकनीशियन डॉ कुलवंत गौड़, कोटा से 80
किलोमीटर दूर बारां में,व्यक्तिगत कार्य से गए हुए थे,सूचना मिलते ही,वह
कार्यक्रम को बीच में छोड़, बारां से 120 किलोमीटर दूर सीधा बूंदी पहुंचे,
और परिजनों के बीच नेत्रदान की प्रक्रिया को संपन्न किया ।
नेत्रदान
के उपरांत राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय,बूंदी के भावी चिकित्सकों के
अध्ययन के लिए,राजेंद्र प्रसाद शर्मा की देहदान की गयी । ज्ञात हो
कि,संस्था शाइन इंडिया फाउंडेशन के माध्यम से यह चौथा देहदान बूंदी मेडिकल
कॉलेज को किया गया है, इससे पहले स्व० पिंकी छाबड़ा,स्व० सुरेश विजयवर्गीय,
स्व० प्रेम सिंह परिहार की देह भी मेडिकल कॉलेज को दी गई है ।
देहदान
प्रक्रिया के दौरान, मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभागाध्यक्ष डॉ विजय नायक,
अन्य सहयोगी चिकित्सक, संस्था शाइन इंडिया के संस्थापक डॉ कुलवंत गौड़ और
बूंदी के ज्योति मित्र इदरीस बोहरा मौजूद थे ।
सीआई महेंद्र मारू को मिली बड़ी कामयाब,12 घंटे में पुलिस ने आरोपी को दबोचा
और हमको तो यक़ीनन अपने परवरदिगार की तरफ़ लौट कर जाना है
और जिसने एक (मुनासिब) अन्दाजे़ के साथ आसमान से पानी बरसाया फिर हम ही ने
उसके (ज़रिए) से मुर्दा (परती) शहर को जि़न्दा (आबाद) किया उसी तरह तुम भी
(क़यामत के दिन क़ब्रों से) निकाले जाओगे (11)
और जिसने हर किस्म की चीज़े पैदा कीं और तुम्हारे लिए कष्तियाँ बनायीं और चारपाए (पैदा किए) जिन पर तुम सवार होते हो (12)
ताकि तुम उसकी पीठ पर चढ़ो और जब उस पर (अच्छी तरह) सीधे हो बैठो तो अपने
परवरदिगार का एहसान माना करो और कहो कि वह (ख़ुदा हर ऐब से) पाक है जिसने
इसको हमारा ताबेदार बनाया हालांकि हम तो ऐसे (ताक़तवर) न थे कि उस पर क़ाबू
पाते (13)
और हमको तो यक़ीनन अपने परवरदिगार की तरफ़ लौट कर जाना है (14)
और उन लोगों ने उसके बन्दों में से उसके लिए औलाद क़रार दी है इसमें शक नहीं कि इन्सान खुल्लम खुल्ला बड़ा ही नाशुक्रा है (15)
क्या उसने अपनी मख़लूक़ात में से ख़ुद तो बेटियाँ ली हैं और तुमको चुनकर बेटे दिए हैं (16)
हालांकि जब उनमें किसी शख़्स को उस चीज़ (बेटी) की ख़ुशख़बरी दी जाती है
जिसकी मिसल उसने ख़ुदा के लिए बयान की है तो वह (ग़ुस्से के मारे) सियाह हो
जाता है और ताव पेंच खाने लगता है (17)
क्या वह (औरत) जो ज़ेवरों में पाली पोसी जाए और झगड़े में (अच्छी तरह) बात तक न कर सकें (ख़ुदा की बेटी हो सकती है) (18)
और उन लोगों ने फ़रिश्तों को कि वह भी ख़ुदा के बन्दे हैं (ख़ुदा की)
बेटियाँ बनायी हैं लोग फ़रिश्तों की पैदाइश क्यों खड़े देख रहे थे अभी उनकी
शहादत क़लम बन्द कर ली जाती है (19)
और (क़यामत) में उनसे बाज़पुर्स की जाएगी और कहते हैं कि अगर ख़ुदा चाहता
तो हम उनकी परसतिश न करते उनको उसकी कुछ ख़बर ही नहीं ये लोग तो बस अटकल
पच्चू बातें किया करते हैं (20)