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02 अप्रैल 2025

कोटा कचोरी का आकार छोटा होता गया, क़ीमतें बढ़ती गईं, आम लोग तो चुप हैं, प्रशासन, ने कुछ सोचा ही नहीं,

 

कोटा कचोरी का आकार छोटा होता गया, क़ीमतें बढ़ती गईं, आम लोग तो चुप हैं, प्रशासन, ने कुछ सोचा ही नहीं,
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल जी शर्मा और कोटा कचोरी ,, का रहस्य क्या है , इसके पीछे अचानक क्या मंतव्य था , कोई राज़ भी हो अगर, तो क्या फ़र्क़ पढ़ता है , लेकिन मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा जी का कचोरी स्वाद ,, और मूल्य नियंत्रण व्यवस्था को लेकर प्रश्न उठाना तो वाजिब है , वोह भी जब ,, तब कोटा में बाहर के लाखों स्टूडेंट कोटा में आकर इस कचोरी के मज़े लेकर ,, कचोरी व्यवसाइयों को माला माल कर देते हों , ,जी हाँ दोस्तों कोटा कचोरी देश भर में अपना अलग स्थान रखती है , मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा जी , भाजपा के प्रदेश महासचिव कार्यकाल में यूँ तो कई बार , कोटा प्रभारी के वक़्त कोटा में , कचोरी का स्वाद चखते रहे हैं , उनके लिए कोटा कचोरी का स्वाद कोई नया नहीं है , इस बार भी वोह अगर चाहते तो कोटा कचोरी सर्किट हाउस , गेस्ट हाउस , कार में , या हवाई यात्रा के वक़्त वोह इसका स्वाद चख सकते थे , लेकिन ऐसा हुआ नहीं , अचानक कचोरी की दुकान पर रुकना , फिर बढ़े प्यार , अदब , खुलूस से एक दूसरे के साथ कचोरी खाना , स्वाद चखना , बढ़ी बात है , कचोरी की दूकान पर क़ाफ़िला रुकते ही , कुछ लोगों ने सोचा था , के कोटा के कचोरी प्रेमियों के पक्ष में अब कचोरी को सस्ता करने , कचोरी पर मूल्य नियंत्रण व्यवस्था लागू करने का कोई फरमान जारी होगा , आम जनता की सोच थी , के एक छोटी कचोरी , ,जिसकी लागत अधिकतम 5 रूपये प्रति कचोरी के लगभग है , उस कचोरी की क़ीमत दस रूपये कैसे वसूली जाती है , कोटा में सभी जानते है , लाख , दो लाख कचोरियाँ , क़रीब तीन सो चार सो , दुकानों ठेलों पर बिकती हैं , कुछ तो सस्ते में दे देते हैं , लेकिन ब्रांड नाम के बदले , महंगी कचोरी परोसने की शुरुआत कोटा में हुई है ,, इधर जोधपुर की कचोरी के नाम पर तो , जोधपुर कचोरी का ओरिजनल टेस्ट परिवार के बटवारा विवाद में खत्म सा हो गया है ,ग्राहक अब पुरानी ओरिजनल जोधपुर की प्याज कचोरी का टेस्ट तलाशता फिर रहा है , कोन सी कचोरी असली है , कोनसी नक़ली कुछ कह नहीं सकते , लेकिन अब तो ओरिजनल दूकान की कचोरी का टेस्ट भी वैसा नहीं है जैसा होना चाहिए था , जबकि इन कचोरियों की क़ीमत , लगभग पंद्रह रूपये लागत के बदले , तीस रूपये कर दी गई है , खेर मुख्यमंत्री भजनलाल ने प्याज की कचोरी तो सार्वजनिक रूप से नहीं चखी , लेकिन दाल की कचोरी तो काफिले को रोक कर चखी है , उन्हें स्वादिष्ट भी लगी होगी ,, यूँ तो पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत , , राहुल गाँधी भी , कोटा की कचोरी का स्वाद कई बार चख चुके हैं , हाल ही में भारत एकता यात्रा के दौरान अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री रहते हुए सुबह सवेरे , राहुल गाँधी के लिए कचोरी की डिमांड की थी जो पूर्व कोंग्रेसी कचोरियाँ , तत्काल लेकर पहुंचे थे , , यह कचोरियाँ मुम्बई तक भिजवाई गई हैं , लेकिन अफ़सोस इस बात का है , के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आम आदमी का पेट भरने वाली इस कचोरी की कीमतें अधिक होने और इसका आकार छोटा होने पर प्रशासनिक स्तर पर कोई शिकंजा नहीं कसा और आम आदमी को लूटने के लिए छोड़ रखा है , अभी भजनलाल जी जो आम जनता से सीधे जुड़े आम आदमी है , वोह खुद के बलबूते पर बनकर आये हैं , किसी व्यापारी किसी उद्योगपति की कोई सिफारिश या चंदा उन्होंने नहीं लिया है , तो आम आदमी को उम्मीद थी के कचोरी की दूकान पर रुक कर वोह कचोरी की साइज़ , कचोरी की लागत और कचोरी बनाने पर आने वाले खर्च और बिक्री की जाने वाली क़ीमत को नियंत्रित करवाने के लिए कोई आदेश ,, कोई निर्देश जारी करेंगे लेकिन जनता , आम आदमी , खासकर बाहर से आने वाले छात्र छात्रों की किसे चिंता है ,, इंद्रा रसोई सोचते हैं पेट भर देगी , ,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339

तुमसे पहले भी लोगों ने इस किस्म की बातें (अपने वक़्त के पैग़म्बरों से) पूछी थीं

 

ऐ ईमान वालों ऐसी चीज़ों के बारे में (रसूल से) न पूछा करो कि अगर तुमको मालूम हो जाए तो तुम्हें बुरी मालूम हो और अगर उनके बारे में कु़रान नाजि़ल होने के वक़्त पूछ बैठोगे तो तुम पर ज़ाहिर कर दी जाएगी (मगर तुमको बुरा लगेगा जो सवालात तुम कर चुके) ख़ुदा ने उनसे दरगुज़र की और ख़ुदा बड़ा बख़्शने वाला बुर्दबार है (101)
तुमसे पहले भी लोगों ने इस किस्म की बातें (अपने वक़्त के पैग़म्बरों से) पूछी थीं (102)
फिर (जब बरदाश्त न हो सका तो) उसके मुन्किर हो गए ख़ुदा ने न तो कोई बहीरा (कान फटी ऊँटनी) मुक़र्रर किया है न सायवा (साँढ़) न वसीला (जुडवा बच्चे) न हाम (बुढ़ा साँढ़़) मुक़र्रर किया है मगर कुफ़्फ़ार ख़ुदा पर ख़्वाह मा ख़्वाह झूठ (मूठ) बोहतान बाँधते हैं और उनमें के अक्सर नहीं समझते (103)
और जब उनसे कहा जाता है कि जो (क़ुरान) ख़ुदा ने नाजि़ल फरमाया है उसकी तरफ और रसूल की आओ (और जो कुछ कहे उसे मानों तो कहते हैं कि हमने जिस (रंग) में अपने बाप दादा को पाया वही हमारे लिए काफी है क्या (ये लोग लकीर के फकीर ही रहेंगे) अगरचे उनके बाप दादा न कुछ जानते ही हों न हिदायत ही पायी हो (104)
ऐ ईमान वालों तुम अपनी ख़बर लो जब तुम राहे रास्त पर हो तो कोई गुमराह हुआ करे तुम्हें नुक़सान नहीं पहुँचा सकता तुम सबके सबको ख़ुदा ही की तरफ लौट कर जाना है तब (उस वक़्त नेक व बद) जो कुछ (दुनिया में) करते थे तुम्हें बता देगा (105)
ऐ ईमान वालों जब तुममें से किसी (के सर) पर मौत खड़ी हो तो वसीयत के वक़्त तुम (मोमिन) में से दो आदिलों की गवाही होनी ज़रुरी है और जब तुम इत्तेफाक़न कहीं का सफर करो और (सफर ही में) तुमको मौत की मुसीबत का सामना हो तो (भी) दो गवाह ग़ैर (मोमिन) सही (और) अगर तुम्हें हक़ हो तो उन दोनों को नमाज़ के बाद रोक लो फिर वह दोनों ख़ुदा की क़सम खाएँ कि हम इस (गवाही) के (ऐवज़ कुछ दाम नहीं लेंगे अगरचे हम जिसकी गवाही देते हैं हमारा अज़ीज़ ही क्यों न) हो और हम खुदा लगती गवाही न छुपाएँगे अगर ऐसा करें तो हम बेशक गुनाहगार हैं (106)
अगर इस पर मालूम हो जाए कि वह दोनों (दरोग़ हलफ़ी {झूठी कसम} से) गुनाह के मुस्तहक़ हो गए तो दूसरे दो आदमी उन लोगों में से जिनका हक़ दबाया गया है और (मय्यत) के ज़्यादा क़राबतदार हैं (उनकी तरवीद में) उनकी जगह खड़े हो जाएँ फिर दो नए गवाह ख़ुदा की क़सम खाएँ कि पहले दो गवाहों की निस्बत हमारी गवाही ज़्यादा सच्ची है और हमने (हक़) नहीं छुपाया और अगर ऐसा किया हो तो उस वक़्त बेशक हम ज़ालिम हैं (107)

ये ज़्यादा क़रीन क़यास है कि इस तरह पर (आख़ेरत के डर से) ठीक ठीक गवाही दें या (दुनिया की रूसवाई का) अन्देषा हो कि कहीं हमारी क़समें दूसरे फरीक़ की क़समों के बाद रद न कर दी जाएँ मुसलमानों ख़ुदा से डरो और (जी लगा कर) सुन लो और ख़ुदा बदचलन लोगों को मंजि़ले मक़सूद तक नहीं पहुँचाता (108)
(उस वक़्त को याद करो) जिस दिन ख़ुदा अपने पैग़म्बरों को जमा करके पूछेगा कि (तुम्हारी उममत की तरफ से तबलीग़े एहकाम का) क्या जवाब दिया गया तो अर्ज़ करेगें कि हम तो (चन्द ज़ाहिरी बातों के सिवा) कुछ नहीं जानते तू तो खुद बड़ा ग़ैब वा है (109)
(वह वक़्त याद करो) जब ख़ुदा फरमाएगा कि ये मरियम के बेटे ईसा हमने जो एहसानात तुम पर और तुम्हारी माँ पर किये उन्हे याद करो जब हमने रूहुलक़ुदूस (जिबरील) से तुम्हारी ताईद की कि तुम झूले में (पड़े पड़े) और अधेड़ होकर (यक सा बातें) करने लगे और जब हमने तुम्हें लिखना और अक़ल व दानाई की बातें और (तौरेत व इन्जील (ये सब चीजे़) सिखायी और जब तुम मेरे हुक्म से मिट्टी से चिडि़या की मूरत बनाते फिर उस पर कुछ दम कर देते तो वह मेरे हुक्म से (सचमुच) चिडि़या बन जाती थी और मेरे हुक्म से मादरज़ाद {पैदायशी} अॅधे और कोढ़ी को अच्छा कर देते थे और जब तुम मेरे हुक्म से मुर्दों को जि़न्दा (करके क़ब्रों से) निकाल खड़ा करते थे और जिस वक़्त तुम बनी इसराईल के पास मौजिज़े लेकर आए और उस वक़्त मैने उनको तुम (पर दस्त दराज़ी करने) से रोका तो उनमें से बाज़ कुफ़्फ़ार कहने लगे ये तो बस खुला हुआ जादू है (110)

01 अप्रैल 2025

परिवार की सहमति से संपन्न हुआ नेत्रदान

 परिवार की सहमति से संपन्न हुआ नेत्रदान

आज दोपहर महावीर नगर विस्तार योजना निवासी राधेश्याम गुप्ता (किराना व्यवसायी) धर्मपत्नी गोकुल बाई गुप्ता का हृदयाघात से आकस्मिक निधन हो गया ।

उनके निधन की सूचना जैसे ही समाज के व्हाट्सएप ग्रुप में गई, तो तुरंत शाइन इंडिया फाउंडेशन के ज्योति मित्र और गोकुल बाई के देवर रमेश चंद्र गुप्ता,और राधे श्याम गुप्ता ने तुरंत ही,गोकुल के पति राधेश्याम, बेटे उपेंद्र,विश्वास,अनिल,बेटी रेखा से गोकुल बाई के नेत्रदान करवाने के विषय में चर्चा की ।

नेत्रदान की प्रति पहले से जागरूक होने के कारण परिवार की ओर से तुरंत ही सहमति आ गई और नेत्रदान का पुनीत कार्य शाइन इंडिया फाउंडेशन की सहयोग से निवास स्थान पर संपन्न हुआ ।

शैतान की तो बस यही तमन्ना है कि शराब और जुए की बदौलत तुममें बाहम अदावत व दुश्मनी डलवा दे और ख़ुदा की याद और नमाज़ से बाज़ रखे तो क्या तुम उससे बाज़ आने वाले हो

 शैतान की तो बस यही तमन्ना है कि शराब और जुए की बदौलत तुममें बाहम अदावत व दुश्मनी डलवा दे और ख़ुदा की याद और नमाज़ से बाज़ रखे तो क्या तुम उससे बाज़ आने वाले हो (91)
और ख़ुदा का हुक्म मानों और रसूल का हुक्म मानों और (नाफ़रमानी) से बचे रहो इस पर भी अगर तुमने (हुक्म ख़ुदा से) मुँह फेरा तो समझ रखो कि हमारे रसूल पर बस साफ़ साफ़ पैग़ाम पहुँचा देना फर्ज़ है (92)
(फिर करो चाहे न करो तुम मुख़तार हो) जिन लोगों ने ईमान कुबूल किया और अच्छे (अच्छे) काम किए हैं उन पर जो कुछ खा (पी) चुके उसमें कुछ गुनाह नहीं जब उन्होंने परहेज़गारी की और ईमान ले आए और अच्छे (अच्छे) काम किए फिर परहेज़गारी की और नेकियाँ कीं और ख़ुदा नेकी करने वालों को दोस्त रखता है (93)
ऐ ईमानदारों कुछ शिकार से जिन तक तुम्हारे हाथ और नैज़ें पहुँच सकते हैं ख़ुदा ज़रुर इम्तेहान करेगा ताकि ख़ुदा देख ले कि उससे बे देखे भाले कौन डरता है फिर उसके बाद भी जो ज़्यादती करेगा तो उसके लिए दर्दनाक अज़ाब है (94)
(ऐ ईमानदारों जब तुम हालते एहराम में हो तो शिकार न मारो और तुममें से जो कोई जान बूझ कर शिकार मारेगा तो जिस (जानवर) को मारा है चैपायों में से उसका मसल तुममें से जो दो मुन्सिफ आदमी तजवीज़ कर दें उसका बदला (देना) होगा (और) काबा तक पहुँचा कर कुर्बानी की जाए या (उसका) जुर्माना (उसकी क़ीमत से) मोहताजों को खाना खिलाना या उसके बराबर रोज़े रखना (यह जुर्माना इसलिए है) ताकि अपने किए की सज़ा का मज़ा चखो जो हो चुका उससे तो ख़ुदा ने दरग़ुज़र की और जो फिर ऐसी हरकत करेगा तो ख़ुदा उसकी सज़ा देगा और ख़ुदा ज़बरदस्त बदला लेने वाला है (95)
तुम्हारे और काफि़ले के वास्ते दरियाई शिकार और उसका खाना तो (हर हालत में) तुम्हारे वास्ते जायज़ कर दिया है मगर खुश्की का शिकार जब तक तुम हालते एहराम में रहो तुम पर हराम है और उस ख़ुदा से डरते रहो जिसकी तरफ (मरने के बाद) उठाए जाओगे (96)
ख़ुदा ने काबा को जो (उसका) मोहतरम घर है और हुरमत दार महीनों को और कुरबानी को और उस जानवर को जिसके गले में (कुर्बानी के वास्ते) पट्टे डाल दिए गए हों लोगों के अमन क़ायम रखने का सबब क़रार दिया यह इसलिए कि तुम जान लो कि ख़ुदा जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है यक़ीनन (सब) जानता है और ये भी (समझ लो) कि बेशक ख़ुदा हर चीज़ से वाकि़फ है (97)
जान लो कि यक़ीनन ख़ुदा बड़ा अज़ाब वाला है और ये (भी) कि बड़ा बख़्षने वाला मेहरबान है (98)
(हमारे) रसूल पर पैग़ाम पहुँचा देने के सिवा (और) कुछ (फजऱ्) नहीं और जो कुछ तुम ज़ाहिर बा ज़ाहिर करते हो और जो कुछ तुम छुपा कर करते हो ख़ुदा सब जानता है (99)
(ऐ रसूल) कह दो कि नापाक (हराम) और पाक (हलाल) बराबर नहीं हो सकता अगरचे नापाक की कसरत तुम्हें भला क्यों न मालूम हो तो ऐसे अक़्लमन्दों अल्लाह से डरते रहो ताकि तुम कामयाब रहो (100)

31 मार्च 2025

रामायण पाठ छोड़कर,120 किलोमीटर दूर से लिया नेत्रदान

 रामायण पाठ छोड़कर,120 किलोमीटर दूर से लिया नेत्रदान

महिला ने स्वयं पहल करके करवाया सासू माँ का नेत्रदान-

लगातार नेत्रदान की बढ़ती जागरूकता नववर्ष पर भी दो लोगों को नई नेत्र ज्योति का सौगात दे गई, भवानीमंडी में पूर्व पार्षद बालमुकुंद मीणा की माता नटीबाई मीणा की मृत्यु के पश्चात परिवार के द्वारा नेत्रदान करवाया गया।

भारत विकास परिषद के नेत्रदान प्रभारी एवं शाइन इंडिया फाउंडेशन के नगर संयोजक कमलेश गुप्ता दलाल ने बताया कि,पूर्व पार्षद बालमुकुंद मीणा की माता नटीबाई की रविवार सुबह अचानक तबीयत बिगड़ने पर परिवारजन उन्हें निजी अस्पताल लेकर गए,परंतु वहीं उनकी मृत्यु हों गई ।

बालमुकुंद की पत्नी सीमा मीणा ने,पहल कर,माता के नेत्रदान की परिवार से इच्छा प्रकट की, बालमुकुंद ने पिता नारायण लाल एवं छोटे भाई महेश से नेत्रदान के विषय में चर्चा की और सहमति प्राप्त करके शाइन इंडिया फाउंडेशन को सूचना दी गई ।

समाचार प्राप्त होते समय डॉ कुलवंत नवरात्रा की पूजा में रामायण पाठ के लिए बैठे हुए थे,परंतु सूचना प्राप्त होते ही पूजा अधूरी छोड़ डॉ गौड नेत्र संकलन वाहिनी से भवानीमंडी पहुंचे ।

कोटा से 120 किलोमीटर तय कर,समय पर पहुंचकर परिवार के सभी सदस्यों के बीच में डॉ गौड़ ने कॉर्निया प्राप्त किया । नेत्रदान प्रक्रिया में बालमुकुंद की चारों बहनों मंजू, कृष्णा, मनभरत और मीना मीणा ने भी पूरा सहयोग किया, नेत्रदान प्रक्रिया के समय बड़ी संख्या में समाज की महिलाएं उपस्थिति थी।

यह भवानीमंडी क्षेत्र से शाइन इंडिया फाउंडेशन के सहयोग से प्राप्त 135 वाँ नेत्रदान है,मीणा समाज से  झालावाड़ जिले से दूसरा नेत्रदान भवानीमंडी से प्राप्त हुआ है। इससे पहले वर्ष 2022 में राजू मीणा का नेत्रदान भवानीमंडी से संपन्न हो चुका है।

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