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09 मार्च 2026

माह ऐ रमज़ान में कोटा के इफ्तियारी बाजारों में क्या इस्लामिक तहज़ीब, रोजेदारों का एहतराम बाकी है ????

 

माह ऐ रमज़ान में कोटा के इफ्तियारी बाजारों में क्या इस्लामिक तहज़ीब, रोजेदारों का एहतराम बाकी है ????
कोटा 8 मार्च , रोज़ शाम को घण्टाघर, विज्ञाननगर, स्टेशन, किशोरपुरा, वक़्फ़ नगर, कंसुआ प्रेम नगर रोजेदारों के लिये इफ्तियारी बाज़ार होता है, लेकिन इस बाज़ार में क्या रोजेदारों की सहत्याबी, उन्हें अनावश्यक लूट खसोट से रोकने की कोशिशें, वगेरा ईमानदाराना व्यवस्थाएं होती हैं, अगर नहीं तो इज़राइल, अमेरिका और इन्हें अपनी जगह इराक़ पर रमज़ानों में बम बरसाने के लिये देने वाले खबीस ओर हममें क्या फ़र्क़ रह जाता है, खुदा का शुक्र है , के, अल्लाह ने हमे ज़िन्दगी को खूबसूरत बनाने के लिए हुक्म ऐ क़ुरआन दिया, सही रास्ता दिखाया और बज़रिये हुज़ूर स अ व आसान ईमानदाराना ज़िन्दगी के टिप्स दिए, फिर हर साल इन सब को बज़रिये सब्र शुक्र की ट्रेनिंग के साथ, क़ुरआन को दोहराकर समझने के क़ायदे के साथ, माह ऐ रमज़ान, तरावीह दी, लेकिन क्या हम आज भी जब, इस माह में शैतान केद है , तब भी, अल्लाह के क़ानून की बंदिशों के बावुजूद भी , क्या इंसान बन पा रहे हैं , लूट खसोट से, लोगों की इज़ारशी से बाज़ आ पा रहे है , व्यापारी, ठेले , खोमचे वाले, इफ्तियारी से जुड़े सामान बेचने वाले , खासकर कोटा वाले सीने पर हाथ रखकर , खुद से ही पूंछ लें,
अल्लाह का कितना बढ़ा इनाम है, के हमे, आपको हुज़ूर स अ व की उम्मत में शामिल किया, हमें हुज़ूर स अ व ने बज़रिये क़ुरआन ओर खुद की ज़िंदगी की खूबसूरती से तहज़ीब, इंसाफ, ईमानदारी, नेकी के साथ ज़िन्दगी के क़ायदे क़ानून , अख़लाक़ सिखाये गए, लेकिन किया हम हुज़ूर स अ व की दी गई सीख, खुदा के दिये गए क़ुरानी हुक्म के मुताबिक चल रहे, शायद हरगिज़ हरगिज़ नहीं, आम दिनों की तो छोड़िए, माह ऐ रमज़ान जो इबादत, सब्र, शुक्र, इस्लाम की जीवनशैली की परवरिश, याद्दाहनी का महीना है, जिस इबादत के महीने हम तरावीह के नाम पर, अल्लाह का क़ानून , क़ुरआन शरीफ के हर हुक्म को दोहराते हैं, वोह बात अलग है, के यह सब हम आसान ज़ुबान में चाहे ना समझते हैं, लेकिन अरबी में तो सुनते भी है, ओर पढ़ते भी है, फिर भी हमारी, हमारे ओर हमारे हुस्न ऐ अख़लाक़ में इतनी दूरी क्यों, हम आज भी इतने बुरे क्यों , किसलिए है, क्या हम सोचते हैं , वोह भी इस रमज़ान के माह में जब शैतान केदखाने में है, तो फिर हम में शैतानी, बेईमानी, झूँठ, फरेब दूसरों को तकलीफ देने, व्यापार में लूट खसोट करने की यह शैतानी आदत क्यों, खुद अपने आप से पूँछिये, शायद यह हम पर खुदा की फिटमार है, ओर यूँ ही हम झूँठ फरेब की ज़िल्लत भरी जिंदगी की तरफ रुजू हैं, कोटा विज्ञाननगर चौराहे के, एक नज़ारे को नज़र सानी कीजिये, वहां ट्रैफिक प्रॉब्लम, लोगों की आवाजाही में सहूलियतें खत्म कर आम लोगों की आवाजाही में कितनी दिक़्क़तें पैदा कर रहे हैं, कितने लोगों की इज़ा रसाई कर रहे हैं, विज्ञाननगर चौराहे के इफ्तियारी बेचने वाले हम हमारे भाइयों को देखिए, खराब तेल, मसाले, ना जाने क्या क्या मुनाफे से कई ज़्यादा दामों में बेचकर लूट खसोट कर रहे है, आटे के समोसे, छोटे छोटे, जिस तेल में चिकन, पकोड़ी, कवाब, दूसरी चीजें तली है, उसी तेल में यह आटे, दाल के समोसे भी आधे कच्चे आधे पक्के तले हैं, स्लिप क़ीमें के समोसे की लगी हैं और दाल भी पूरी नहीं भरी है, आधे कच्चे , आधे पक्के यह समोसे 3 रुपये की लागत, और दस रुपये प्रति नग वसूली, फ्रूट की मुनाफा बढ़ोतरी का यही हाल, इफ्तियारी के सभी सामान, हलीम, बिरियानी , कवाब शर्बत सभी का यही हाल, अब सोचिये एक रोज़ेदार आप के भरोसे यह सब इफ्तियारी मे ले जाता है, किसी का पेट खराब, गला खराब, अलग अलग बीमारियां , क्या रमज़ान में रोज़ेदारों के साथ , इस माह में आपका यह सुलूक, आम लोगों की तकलीफ ट्रैफिक जाम वगेरा सही है, सिर्फ टोपी लगाकर खोमचों, ठेलों, नुक्कड़ों पर यह बिक्री, यह खराब तेल, चिकनाई जल जाने के बाद तले भुने सामान रोज़ेदारों के लिये महंगे दामों में बेचना सही है, खुद ही अपने दिल पर हाथ रखकर सोचियेगा, क्योंकि आप खुद जब अपने रोज़ेदार लोगों की तंदरुस्ती के दुश्मन हैं तो फिर स्वास्थ्य विभाग, मिलावट की जांच करने वाले इंस्पेक्टर, नमूने लेकर स्तरहीन सामान बेचने वाले लोगों के खिलाफ ज़िम्मेदार अधिकारी , हमारे समाज के रोज़ेदारों को बचाने के लिये कुछ क्यों करेंगे, एक वक्त था घण्टाघर की सबसे पुरानी नॉनवेज होटल के मालिक, कई साल पहले हर रमज़ानों में कवाब वगेरा नो लॉस नो प्रॉफिट में बनाकर कम दामों में बेचते थे, उनके बच्चों की भी यह परम्परा है जो शुद्धता ओर रोज़ेदारों की तंदरुस्ती का भी पूरा ध्यान
रखते हैं , अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339

प्रेस क्लब कोटा की वार्षिक आमसभा संपन्न, महिला दिवस पर महिला पत्रकारों का सम्मान

 

प्रेस क्लब कोटा की वार्षिक आमसभा संपन्न, महिला दिवस पर महिला पत्रकारों का सम्मान
पत्रकार हित सर्वोपरि, सदस्यों के सुझावों पर अमल का भरोसा : गजेन्द्र व्यास
के डी अब्बासी
कोटा, 9 मार्च। प्रेस क्लब कोटा की वार्षिक आमसभा रविवार को प्रेस क्लब स्थित प्रो. ललित किशोर चतुर्वेदी सभागार में उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई। आमसभा में क्लब की गतिविधियों, आय-व्यय, पत्रकार हितों और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में क्लब की महिला सदस्यों सहित जनसंपर्क विभाग की सहायक निदेशक श्रीमती रचना शर्मा एवं सहायक जनसंपर्क अधिकारी श्रीमती आकांक्षा शर्मा पुष्पहार भेंट कर सम्मान भी किया गया।
आमसभा की अध्यक्षता प्रेस क्लब अध्यक्ष गजेन्द्र व्यास ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।
सदस्य हितों के लिए निरंतर प्रयासरत रहेगा प्रेस क्लब
अपने स्वागत उद्बोधन में अध्यक्ष गजेन्द्र व्यास ने उपस्थित सदस्यों का स्वागत करते हुए अपने एक वर्ष के कार्यकाल की उपलब्धियों का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि प्रेस क्लब कोटा सदैव अपने सदस्यों के हितों के लिए कार्य करता रहा है और आगे भी पत्रकारों की समस्याओं के समाधान के लिए पूरी प्रतिबद्धता से प्रयास किए जाएंगे।
उन्होंने आमसभा में सदस्यों द्वारा दिए गए सुझावों और प्रस्तावों पर विस्तार से जवाब देते हुए आश्वस्त किया कि क्लब की गतिविधियों और सुविधाओं को और बेहतर बनाने के लिए सभी सुझावों पर सकारात्मक पहल की जाएगी।
पत्रकार पेंशन बढ़ाने पर जताया आभार
प्रेस क्लब के सचिव जितेन्द्र कुमार शर्मा ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए क्लब की गतिविधियों और योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विभिन्न चुनौतियों और विकट परिस्थितियों के बावजूद प्रेस क्लब की आय बरकरार है, जो सभी सदस्यों के सहयोग का परिणाम है।
उन्होंने वरिष्ठ अधिस्वीकृत पत्रकारों की पेंशन राशि 15 हजार से बढ़ाकर 18 हजार रुपये किए जाने पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का आभार भी व्यक्त किया।
आय-व्यय का ब्यौरा प्रस्तुत
कोषाध्यक्ष रघुवीर कपूर शम्मी ने गत वर्ष के आय-व्यय का विस्तृत ब्यौरा आमसभा के समक्ष प्रस्तुत किया, जिसे सदस्यों ने सर्वसम्मति से स्वीकार किया।
महिला दिवस पर महिला पत्रकारों का सम्मान
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर प्रेस क्लब से जुड़ी महिला पत्रकारों और सदस्यों का सम्मान कर उनके योगदान की सराहना की गई। इस दौरान वक्ताओं ने पत्रकारिता में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को सकारात्मक परिवर्तन बताते हुए कहा कि महिला पत्रकार समाज में सशक्त भूमिका निभा रही हैं।
कई वरिष्ठ पत्रकारों ने रखे विचार
आमसभा में वरिष्ठ पत्रकार मनोहर पारीक, विशाल उपाध्याय, मोहनलाल बड़ोदिया, विनोद कुमार देवलिया, शैलेन्द्र मेड़तवाल और सूर्यप्रकाश हरितवाल सहित कई सदस्यों ने अपने विचार रखे तथा प्रेस क्लब की गतिविधियों को और मजबूत बनाने के लिए सुझाव दिए।
मंच पर ये रहे मौजूद
इस अवसर पर मंचासीन पदाधिकारियों में अध्यक्ष गजेन्द्र व्यास, सचिव जितेन्द्र कुमार शर्मा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेन्द्र सिंह हाड़ा, उपाध्यक्ष प्रताप सिंह तोमर, सह सचिव गिरीश गुप्ता, कोषाध्यक्ष रघुवीर कपूर शम्मी, कार्यकारिणी सदस्य संजीव सक्सेना, रमेशचंद गौतम, नीरज राजावत, अनिल कुमार देवलिया, यतीश व्यास और योगेन्द्र योगी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन सचिव जितेन्द्र कुमार शर्मा ने किया।
दिवंगत पत्रकारों को श्रद्धांजलि
आमसभा के अंत में दिवंगत पत्रकारों की स्मृति में दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके बाद राष्ट्रगान और स्नेहभोज के साथ वार्षिक आमसभा का समापन हुआ।

कार्यशाला से प्रेरित होकर,भरे जा रहे नेत्रदान देहदान संकल्प पत्र

 कार्यशाला से प्रेरित होकर,भरे जा रहे नेत्रदान देहदान संकल्प पत्र

बीते दिनों इटावा में, इटावा सोशल ग्रुप के माध्यम से, चंदन वाटिका में संस्था शाइन इंडिया फाउंडेशन के सहयोग से नेत्रदान,अंगदान और देहदान के विषय में एकदिवसीय विशेष चर्चा का आयोजन किया गया था । जिसमें शहर की कई सामाजिक संस्थाएं, शहर के प्रबुद्ध एवं गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया था ।

अगले दिन जब समाचार पत्रों में, नेत्रदान और देहदान के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई तो, उसको पढ़ने के बाद इटावा में नेत्रदान संकल्प करने वालों की संख्या बढ़ने लगी,इसी जानकारी को जब इटावा शहर के प्रबुद्ध समाजसेवी एवं लायंस क्लब के संस्थापक अध्यक्ष पारस जैन ने अपनी कोटा निवासी बहन प्रेमलता गंगवाल को दी, तो उन्होंने भी अपना देहदान संकल्प पत्र भरने की इच्छा जाहिर की ।

संस्था शाइन इंडिया फाउंडेशन के सहयोग से जब प्रेमलता गंगवाल का देहदान संकल्प भरा गया, तभी उनके पति पदम कुमार गंगवाल (सेवानिवृत शिक्षक) ने भी अपना देहदान संकल्प पत्र भरने की सहमति दी, और उन्होंने भी खुशी-खुशी अपना देहदान का संकल्प पत्र भरा ।

गंगवाल दंपतियों के इस निर्णय की परिवार ,समाज और करीबी रिश्तेदारों ने प्रशंसा की । बेटे विनीत, कपिल बेटी दीप्ति जैन ने भी अपनी और से माता-पिता के इस देहदान संकल्प के पुनीत कार्य में सहमति दी ।

इटावा सोशल ग्रुप के सदस्य देवेंद्र जैन,पारस जैन, डॉ विकल्प नागर पंकज जैन ने बताया कि,शीघ्र ही एक और जागरूकता शिविर नेत्रदान,अंगदान और देहदान जागरूकता के विषय पर आयोजित किया जाएगा 

दुख की घड़ी में, संपन्न हुआ नेत्रदान

दुख की घड़ी में, संपन्न हुआ नेत्रदान

ग्राम धूणी,जिला टोंक निवासी नंदकिशोर शर्मा की बहन मीनाक्षी शर्मा का विवाह 6 वर्ष पूर्व नया भदाना,कोटा निवासी सतीश शर्मा से हुई थी । मीनाक्षी का स्वास्थ्य कुछ समय से ठीक नहीं चल रहा था, रविवार को अचानक तबियत बिगड़ने के बाद उनका आकस्मिक निधन हो गया ।

संस्था शाइन इंडिया फाउंडेशन के ज्योति मित्र नंदकिशोर, बहन वंदना और बहनोई सुशील कुमार शर्मा भारत विकास परिषद के सेवा भारती प्रकल्प से जुड़े हुए हैं । समाचार पत्रों में लगातार नेत्रदान की खबरों को पढ़ते रहने से परिवार के सभी सदस्य काफी जागरूक थे, इसीलिए भाई नंदकिशोर ने सहमति देकर अपनी बहन मीनाक्षी का नेत्रदान कोटा में संपन्न करवाया ।

नंदकिशोर ने कहा कि, बहन के असामयिक मृत्यु की घटना से शायद हम कभी उबर ना पाएंगे,पर हमें यह खुशी है कि,अंत समय में उसके नेत्रदान से दो दृष्टिहीनों को रोशनी मिलेगी

और ये लोग वहाँ तकिये लगाए हुए (चैन से बैठे) होगें वहाँ (खु़द्दामे बेहिश्त से) कसरत से मेवे और शराब मँगवाएँगे

 और ये लोग वहाँ तकिये लगाए हुए (चैन से बैठे) होगें वहाँ (खु़द्दामे बेहिश्त से) कसरत से मेवे और शराब मँगवाएँगे (51)
और उनके पहलू में नीची नज़रों वाली (शरमीली) कमसिन बीवियाँ होगी (52)
(मोमिनों) ये वह चीज़ हैं जिनका हिसाब के दिन (क़यामत) के लिए तुमसे वायदा किया जाता है (53)
बेशक ये हमारी (दी हुयी) रोज़ी है जो कभी तमाम न होगी (54)
ये परहेज़गारों का (अन्जाम) है और सरकशों का तो यक़ीनी बुरा ठिकाना है (55)
जहन्नुम जिसमें उनको जाना पड़ेगा तो वह क्या बुरा ठिकाना है (56)
ये खौलता हुआ पानी और पीप और इस तरह अनवा अक़साम की दूसरी चीज़े हैं (57)
तो ये लोग उन्हीं पड़े चखा करें (कुछ लोगों के बारे में) बड़ों से कहा जाएगा (58)
ये (तुम्हारी चेलों की) फौज भी तुम्हारे साथ ही ढूँसी जाएगी उनका भला न हो ये सब भी दोज़ख़ को जाने वाले हैं (59)
तो चेले कहेंगें (हम क्यों) बल्कि तुम (जहन्नुमी हो) तुम्हारा ही भला न हो तो तुम ही लोगों ने तो इस (बला) से हमारा सामना करा दिया तो जहन्नुम भी क्या बुरी जगह है (60)

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