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13 जनवरी 2026

प्रशिक्षु आईपीएस सिद्धार्थ श्रीवास्तव के नेतृत्व में चाइनिंज मांझे से होने वाली दुर्घटनाओं को रोक - थाम का अभियान शुरू

 

प्रशिक्षु आईपीएस सिद्धार्थ श्रीवास्तव के नेतृत्व में चाइनिंज मांझे से होने वाली दुर्घटनाओं को रोक - थाम का अभियान शुरू
के डी अब्बासी
कोटा,जनवरी। कोटा शहर में आगामी मकर संक्राति पर्व पर शहरवासियों द्वारा पतंगबाजी को लेकर काफी उत्साह रहता है जिसके चलते पतंगबाजी के दौरान चाइनिज मांझे (प्लास्टिक / सिथेंटिक) के इस्तेमाल किया जाता है जिससे पशु पक्षियों और हुपहिया वाहन चालकों के साथ गम्भीर दुर्घटना होने का अंदेशा बना रहता है जिसके चलते पुलिस अधीक्षक सुश्री तेजस्वनी गौतम के निर्देशन पर आज प्रशिक्षु आईपीएस सिद्धार्थ श्रीवास्तव ने दुपहिया वाहन चालकों की सुरक्षा के लिए पहल करते हुये यातायात पुलिस के सहयोग से दुपहिया वाहनों पर निःशुल्क हैण्डल गार्ड एवं चालकों को सुरक्षा नैक बैण्ड (गले में बांधी जाने वाली पट्टी) वितरित की साथ ही सभी दुपहिया वाहन चालकों को वाहन चलाते समय हेलमेट का उपयोग करने व यातायात नियमों की पूर्ण पालना करने हेतु समझाईश की गई

बस नाम ही बदले जाएंगे , काम नहीं करेंगे , करेंगे तो नज़दीकियों को मेडिकल भूमि आवंटन, चौराहों का होगा नाम परिवर्तन

 

बस नाम ही बदले जाएंगे , काम नहीं करेंगे , करेंगे तो नज़दीकियों को मेडिकल भूमि आवंटन, चौराहों का होगा नाम परिवर्तन
घोड़े वाले बाबा चौराहे का नाम परिवर्तन कर टीलेश्वर चौराहा करने, विवेकानन्द नगर क्षेत्र में स्थित टोटका चौराहे का नामकरण भगवान बिरसा मुंडा के नाम करने, एमबीएस मार्ग पर प्राइवेट बस स्टेण्ड के समीप सर्किल का नामकरण सैन महाराज सर्किल करने के प्रस्तावों पर नगरीय विकास विभाग के नवीनतम सर्कुलर के अनुसार नाम परिवर्तन करने का फैसला किया गया।
इसके अलावा इस्कॉन संस्था को ग्राम आनंदपुरा उर्फ फुटा तालाब में भूमि आवंटन, जांगिड़ ब्राह्मण फाउंडेशन संस्था को मुकुंदरा विस्तार योजना में सामुदायिक भवन एवं अतिथि गृह निर्माण के लिए भूमि आवंटन, लॉर्ड कृष्णा पब्लिक एजुकेशन सोसायटी को शिक्षण संस्थान एवं मेडिकल कॉलेज रिसर्च सेंटर की स्थापना के लिए दौलतगंज उर्फ नया गांव में भूमि आवंटन, श्री तेजा मंदिर ट्रस्ट को बालिका छात्रावास के लिए आनंदपुरा उर्फ फुटा तालाब में भूमि आवंटन, बाधित बाल विकास केन्द्र कोटा को दिव्यांग बालिकाओं के शिक्षण-प्रशिक्षण एवं छात्रावास हेतु झालावाड़ रोड पर मुकुंदरा विहार स्पेशल आवास योजना में भूमि आवंटन के प्रस्तावों की पुष्टि करते हुए अनुमोदन उपरांत राज्य सरकार को स्वीकृति के लिए भेजे जाने का निर्णय किया गया।
बैठक में प्राधिकरण अध्यक्ष श्री अनिल कुमार अग्रवाल ने केडीए अधिकारियों से पैंडिंग प्रकरणों की जानकारी ली। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी प्रकरणों पर समान रूप से विचार करते हुए उन्हें समय पर निस्तारित किया जाए।
बैठक में प्राधिकरण आयुक्त ममता तिवारी, केडीए सचिव मुकेश कुमार चौधरी, आयुक्त नगर निगम कोटा ओपी मेहरा, केडीए उपायुक्त मालविका त्यागी एवं हर्षित वर्मा, केडीए में नियोजन सलाहकार संदीप दंडवते, निदेशक वित्त डॉ. नीतू सिंह, निदेशक अभियांत्रिकी रविन्द्र माथुर, निदेशक विधि राजीव गर्ग, निदेशक नियोजन भूपेश मालव, राजस्व सलाहकार परमानन्द गोयल, अधीक्षण अभियंता सागर मीना, उप आवासन आयुक्त आवासन मंडल सहित जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, रीको, पीडब्ल्यूडी, नगर निगम आदि विभागों के प्रतिनिधि एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
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यहाँ पर मोमिनों का इम्तिहान लिया गया था और ख़ूब अच्छी तरह झिंझोड़े गए थे।

 यहाँ पर मोमिनों का इम्तिहान लिया गया था और ख़ूब अच्छी तरह झिंझोड़े गए थे। (11)
और जिस वक़्त मुनाफेक़ीन और वह लोग जिनके दिलों में (कुफ्र का) मरज़ था कहने लगे थे कि खु़दा ने और उसके रसूल ने जो हमसे वायदे किए थे वह बस बिल्कुल धोखे की टट्टी था। (12)
और अब उनमें का एक गिरोह कहने लगा था कि ऐ मदीने वालों अब (दुश्मन के मुक़ाबलें में) तुम्हारे कहीं ठिकाना नहीं तो (बेहतर है कि अब भी) पलट चलो और उनमें से कुछ लोग रसूल से (घर लौट जाने की) इजाज़त माँगने लगे थे कि हमारे घर (मर्दों से) बिल्कुल ख़ाली (गै़र महफूज़) पड़े हुए हैं - हालाँकि वह ख़ाली (ग़ैर महफूज़) न थे (बल्कि) वह लोग तो (इसी बहाने से) बस भागना चाहते हैं (13)
और अगर ऐसा ही लश्कर उन लोगों पर मदीने के एतराफ से आ पड़े और उन से फसाद (ख़ाना जंगी) करने की दरख़्वास्त की जाए तो ये लोग उसके लिए (फौरन) आ मौजूद हों (14)
और (उस वक़्त) अपने घरों में भी बहुत कम तवक़्कु़फ़ करेंगे (मगर ये तो जिहाद है) हालाँकि उन लोगों ने पहले ही खु़दा से एहद किया था कि हम दुश्मन के मुक़ाबले में (अपनी) पीठ न फेरेगें और खु़दा के एहद की पूछगछ तो (एक न एक दिन) होकर रहेगी (15)
(ऐ रसूल उनसे) कह दो कि अगर तुम मौत का क़त्ल (के ख़ौफ) से भागे भी तो (यह) भागना तुम्हें हरगिज़ कुछ भी मुफ़ीद न होगा और अगर तुम भागकर बच भी गए तो बस यही न की दुनिया में चन्द रोज़ा और चैनकर लो (16)
(ऐ रसूल) तुम उनसे कह दो कि अगर खुदावन्द तुम्हारे साथ बुराई का इरादा कर बैठे तो तुम्हें उसके (अज़ाब) से कौन ऐसा है जो बचाए या भलाई ही करना चाहे (तो कौन रोक सकता है) और ये लोग खु़दा के सिवा न तो किसी को अपना सरपरस्त पाएँगे और न मद्दगार (17)
तुममें से जो लोग (दूसरों को जिहाद से) रोकते हैं खु़दा उनको खू़ब जानता है और (उनको भी खू़ब जानता है) जो अपने भाई बन्दों से कहते हैं कि हमारे पास चले भी आओ और खु़द भी (फक़त पीछा छुड़ाने को लड़ाई के खेत) में बस एक ज़रा सा आकर तुमसे अपनी जान चुराई (18)
और चल दिए और जब (उन पर) कोई ख़ौफ (का मौक़ा) आ पड़ा तो देखते हो कि (आस से) तुम्हारी तरफ देखते हैं (और) उनकी आँखें इस तरह घूमती हैं जैसे किसी शख्स पर मौत की बेहोशी छा जाए फिर वह ख़ौफ (का मौक़ा) जाता रहा और ईमानदारों की फतेह हुयी तो माले (ग़नीमत) पर गिरते पड़ते फौरन तुम पर अपनी तेज़ ज़बानों से ताना कसने लगे ये लोग (शुरू) से ईमान ही नहीं लाए (फक़त ज़बानी जमा ख़र्च थी) तो खु़दा ने भी इनका किया कराया सब अकारत कर दिया और ये तो खु़दा के वास्ते एक (निहायत) आसान बात थी (19)
(मदीने का मुहासेरा करने वाले चल भी दिए मगर) ये लोग अभी यही समझ रहे हैं कि (काफि़रों के) लश्कर अभी नहीं गए और अगर कहीं (कुफ्फार का) लश्कर फिर आ पहुँचे तो ये लोग चाहेंगे कि काश वह जंगलों में गँवारों में जा बसते और (वहीं से बैठे बैठे) तुम्हारे हालात दरयाफ़्त करते रहते और अगर उनको तुम लोगों में रहना पड़ता तो फ़क़त (पीछा छुड़ाने को) ज़रा ज़हूर (कहीं) लड़ते (20)

12 जनवरी 2026

राजस्थान भर के वकीलों को प्रतिनिधित्व देने वाली अनुशासित संस्था बार कौंसिल ऑफ़ राजस्थान के चुनाव

 

राजस्थान भर के वकीलों को प्रतिनिधित्व देने वाली अनुशासित संस्था बार कौंसिल ऑफ़ राजस्थान के चुनाव , आगामी 12 मार्च रमज़ानों के दिनों में, अलविदा के जुमे के दिन को होना तय है ,,, बार कौंसिल ऑफ़ राजस्थान के चुनाव में पिछले चुनावों में कोटा संभाग से , एक भी प्रत्याक्षी जीत कर नहीं गया , और कोटा संभाग की मूल विधिक समस्याये, जैसे हाईकोर्ट बेंच की स्थापना सहित अनेक मुद्दों पर हाड़ोती का कोई भी वकील व्यक्तिगत रूप से इंट्रेस्टेड होकर मुखर नहीं हुआ , वकीलों की समस्याएं , सामान्य तोर पर अभिभाषक परिषद कोटा के नियंत्रण में होती है , कार्य स्थगन , शोक सभा ,, कभी कभार वकीलों के खिलाफ थानों की कार्यवाही , अधिकारीयों के मिसबिहेव मामले में , अभिभाषक परिषद का निर्णय सभी को स्वीकार्य रहा , ,कोटा से लोकसभा अध्यक्ष ,, कोटा सांसद है , कोटा के वकीलों ने , तृतीय शनिवार को , इस मामले में आंदोलन के बढ़े रुख को लेकर, कोई खास पहल भी नहीं की , और कोटा के वकील साथियों के लिए संघर्ष की सोच रखने वाले, किसी वकील साथी ने मुखर होकर इस मामले में कोई लिखित या मौखिक सुझाव देकर आवाज़ भी नहीं उठाई , जबकि कई बार ऐसे गंभीर मुद्दे, जिसमे सच को सच , और गलत को गलत कहना , नैतिक ज़िम्मेदारी थी तब भी , वकील साथी अधिकतम मोन रहे ,तटस्थ रहे ,, ऐसे में वकील साथियों के संघर्ष के लिये, मर्दानी आवाज़ कहो , या फिर जंगजू सिपाही का नेतृत्व कहो , समझ ही नहीं आ पा रहा है , कोटा के वकीलों के लिए कोटा संभाग के सबसे बढे जिला मुख्यालय के न्यायालय में ,, लाखों करोड़ो रूपये की मशीनें , उपकरण आये ,, सभी उपकरण लगभग लगा दिए गए , सी सी टी वी कैमरे लगाने की घोषणाएं तो हुई , लेकिन मुताबिक़ घोषणा के सी सी टी वी कैमरे नहीं लगाए गए , यहां उपकरण है लेकिन चालू नहीं है , तारीख पेशी देखने के लिए कियोस्क हैं लेकिन उनका कोई उपयोग नहीं है , ,व्यवस्थाओं में बदलाव है , कोई भी नया मुक़दमा पेश करो , तो पहले कम्प्युटराइज़्ड परफोर्मे के साथ इंद्राज करवाओ , यह काम पहले खुद कर्मचारी ही कर रहे थे , लेकिन अब, एक काउंटर पृथक से बढ़ा दिया गया है , नक़ल व्यवस्था को ही लो , राजस्थान क्रिमनल , सिविल नियम बने हुए पांच साल से भी ज़्यादा वक़्त हो गया , इन नियमों के तहत नक़ल लगाने के बाद, नक़ल के मामले में एक डिस्प्ले डिस्क होगी , जो नक़ल के आवेदन उस पर की गई कार्यवाही को स्क्रीन पर नियमित दिखाएगी , वकील को मेसेज जाएंगे जैसे प्रावधान है , लेकिन इतने साल बीतने , कर्मचारियों की नियुक्तियां होने , ,कम्प्यूटर , उपकरण होने के बाद भी, अभी तक यह सब हाईटेक सुविधाएं कोटा में शुरू नहीं हो पाई हैं , और तो और , कोटा में ई कोर्ट व्यवस्था भी कभी चालू होती है , कभी बंद हो जाती है , खराब हो जाती है , और फैसले अपलोड , जमानतों के आदेश अपलोड , आदेशिकाएँ , आंतरिक आदेश , पूर्ण आदेश अपलोड मामले में भी अव्यवस्थित है , अपडेटेड नहीं है, सभी तरह की व्यवस्थाएं , बजट , और टारगेट दिनांक और साल गुज़रने के बाद भी , आज तक यह व्यवस्थित नहीं हो पाए है , अंतिम रूप से परफेक्ट अंतिम फैसला ,, सुचना , आदेशिका , कार्यवाही अपलोडिंग में लापरवाहियां कहो , लेट लतीफी कहो , बरती ही जा रही हैं , ,कोटा में चेक अनादरण के मामले थोक में हैं , लेकिन अदालतों की कमी होने से , यहां एक तारीख छह छह महीने की जाती है , जबकि तीन माह में तो पूरा केस निपटाने का नियम है , यहां मोटर यान दुर्घटना प्राधिकरण , जहां दुर्घटना में विकलांगों के मामलों की सुनवाई होती है , वोह दूसरी और तीसरी मंज़िल पर छोटी छोटी अव्यवस्थित सीढ़ियों के साथ बनी हुई है , किराये का परिसर है , लेकिन इन अदालतों को निचली मंज़िल पर संचालित करने के लिए किसी ने भी , आज तक आवाज़ नहीं उठाई है , महिला कोर्ट भी काफी दूर है , कॉमर्शियल कोर्ट , किराया अधिकरण ,, चेक अनादरण कोर्ट नंबर चार सभी तो इधर उधर बिखरी पढ़ी हैं , लकिन इस सोच को व्यवस्थित करने , वकीलों के लिए सुविधाजनक बनाने के लिए , मेरे अलावा या मेरी प्रेरणा से बार एसोसिसिएशन कोटा के अलावा , चिट्ठी लिखने का इतिहास किसी एक भी जो खुद को संघर्षषील , जंगजू सिपाही कहता हो , उसने कहा हो , या पत्र लिखा हो तो बताये ,, ,इन दो सालों में देश के सर्वोच्च पद पर बैठे कोटा सांसद लोकसभा अध्यक्ष आदरणीय ओम जी बिरला कोटा न्यायालय परिसर में आये है , लेकिन कोई बताये के किसी एक ने भी कोटा में हाईकोर्ट की बेंच स्थापना के मामले में उन्हें रोककर कोई सवाल किया भी है या नहीं , बीकानेर में वर्चुअल हाईकोर्ट सुनवाई की व्यवस्था अफवाह के बाद यह काम बार एसोसिएशन ने ज़रूर किया , लेकिन कोटा के , कोटा संभाग के वकीलों के हक़ संघर्ष के बारे में वैचारिक व्यवस्था के तहत , राजस्व न्यायलय की डबल बेंच , सर्विस ट्रिब्यूनल की बेंच ,, हायकोर्ट बेंच , सहित वकीलों की कल्याणकारी व्यवस्थाएं , युवाओं के स्टाइफंड की शुरुआत के लिए किसी एक भी कोटा के वकील ने कोई पत्र लिखा हो , कोई आवाज़ उठाई हो , तो, सार्वजनिक होना ही चाहिए , खेर कोटा के लोग नहीं बोले , तो राजस्थान के किसी भी ज़िले के वकील साथियों ने भी इस तरफ आवाज़ नहीं उठाई , लेकिन अब तो चुनाव सर पर हैं , अब तो कोटा जिला सेशन न्यायालय में नक़ल व्यवस्था सुधार , ई कोर्ट व्यवस्था अप्डेटेशन सुधार , खाली पदों की भर्ती , सहित कई मुद्दों पर तो बोलना ही चाहिए , क्या सही है क्या गलत है, इस पर अपनी टिप्पणी देना ही चाहिए , कोटा के वकील मतदाता , बूंदी , बारां , झालावाड़ और क़स्बाई बार एसोसिएशन के सभी सदस्य अगर एक जुट हो जाएँ , तो कोटा संभाग से तीन लोग तो कम से कम जीत कर जा ही सकते हैं , और अब जब महिलाओं के लिए विशेष आरक्षण भी हो गया है , तो अगर महिलाओं के लिए अलग वोटिंग का बैलेट पेपर बनता है , तो इस अलग वोटिंग व्यवस्था में कोटा संभाग से एक महिला का भी अतिरिक्त प्रतिनिधित्व हो सकता है , लेकिन इस तरफ मेरे एक अकेले के सोचने , लिखने या बात करने से कोई काम नहीं होगा , सभी की अपनी अपनी ढपली , अपना अपना राग है , फिर भी अगर कोटा ,, बूंदी , बारां , झालावाड़ , और आँचलिक बार एसोसिएशन के सभी अध्यक्ष इस चुनाव के पहले जल्द , बहुत जल्द , आपस में मिल बैठकर कोई रणनीति बनाये , विचार विमर्श करें , तो यक़ीनन हाड़ोती से बार कौंसिल ऑफ़ राजस्थान में हमारे वकील साथियों को , ,तीन ,, या फिर महिलाओं के अतिरिक्त प्रतिनिधित्व सहित चार सदस्यों तक का हो सकता है , लेकिन इसके लिए कोई तो पहल करे , प्रेरित करें ,, ,,,, और जो समस्याएं स्थानीय बार एसोसिएशन्स की हैं , वकील साथियों की है , उनके प्रोफेशनल प्रशिक्षण , ज्ञानवर्धन , सहित तकनीकी व्यवस्थाएं है , उन पर भी चर्चा होकर , हाड़ोती में हाईकोर्ट बेंच , राजस्व बोर्ड की डबल बेंच , सर्विस ट्रिब्यूनल की सर्किट बेंच के पक्ष में भी आगे आये ,, हमारा झुकाव उसी तरफ होना चाहिए , ऐसा नहीं के जब हम कोटा हाईकोर्ट बेंच, राजस्व बोर्ड डबल बेंच , सर्विस ट्रिब्यूनल सर्किट बेंच का आंदोलन करें , तो हमारे वोट से ही जीतकर गए बाहरी उम्मीदवार मुंह पर पट्टी बाँध कर बैठ जाएँ या फिर कोटा के खिलाफ , कोटा के ही वोटों से जीतकर जाने के बाद भी मुखालिफ आवाज़ बन जाएँ , यह वक़्त बहुत नाज़ुक है , वक़्त कम है , अभी भी कोटा संभाग को फिर से बार कौंसिल ऑफ़ राजस्थान में मुखर नेतृत्व वाला बनाने के लिए बहुत टाइम बाक़ी है , सभी को आपसी मतभेद भुलाकर एक जुट होकर , कोशिश करना चाहिए , बाहर के लोग आते हैं , वोह मेहमान है उन्हें बुलाओ ,, सबसे मिलाओं ,, खिलाओ , पिलाओ , अतिथि सत्कार करो , उन्हें हाड़ोती के प्रत्याक्षियों के बाद की प्रिफरेंस भी दो , लेकिन हाड़ोती संभाग बार कौंसिल नेतृत्व के लिए प्लीज़ एक जुट हो जाओ , ,, अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339

निर्माणाधीन मकान की चौकीदारी को लेकर हुए विवाद में हत्या, दो पक्षों में हुई थी मारपीट

 

निर्माणाधीन मकान की चौकीदारी को लेकर हुए विवाद में हत्या, दो पक्षों में हुई थी मारपीट
मृतक के रिश्तेदारों का कहना है कि दोनों पक्षों में अलाव तापते समय विवाद हुआ था.
कोटा: शहर के उद्योग नगर थाना इलाके में निर्माणाधीन मकान की चौकीदारी के विवाद में हत्या का मामला सामने आया है. जिसमें एक चौकीदार पक्ष ने दूसरे चौकीदार की हत्या साथियों के साथ मिलकर कर दी. इस मामले में दूसरे पक्ष ने रामफूल व उसके साथियों पर मारपीट का आरोप लगाकर मुकदमा दर्ज करवाया था. रामफूल के शव का पोस्टमार्टम सोमवार को मेडिकल बोर्ड से करवाया गया. मामले में हत्या का प्रकरण भी दर्ज किया गया है.
उद्योग नगर थाना अधिकारी जितेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि घटनाक्रम रविवार रात देर रात को गायत्री नगर में हुआ. इस मामले में रामगंजमंडी तहसील निवासी कालूलाल और उसका बेटा बिट्टू थाने पर आए थे. उन्होंने बताया कि वे गायत्री विहार में काम पर जा रहे थे. जहां पर रामफूल और उनके साथियों ने उनके साथ झगड़ा किया. जिसमें बिट्टू के सिर में चोट आई. इस पर प्रकरण दर्ज कर लिया गया था. मौके पर पुलिस गई, तब कोई भी व्यक्ति नहीं मिला था.
पढ़ें: मामूली विवाद में हत्या,
उन्होंने बताया कि इसके करीब 2 घंटे बाद देर रात 12 बजे पुलिस को एमबीएस पुलिस चौकी से सूचना मिली कि रामाजी की टापरिया निवासी रामफूल को अस्पताल लाया गया था. जहां पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया. इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची. एफएसएल टीम और एमओबी टीम को मौके पर बुलाया गया. सीआई जितेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि घटना के समय हुई मारपीट में रामफूल मौके पर ही गिर गया था. उसके साथ लाठी-डंडे से मारपीट हुई थी.
सर्दी से बचाव के लिए अलाव तापते समय हुआ विवाद: असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर शूरवीर सिंह ने बताया कि मृतक रामफूल के शव का पोस्टमार्टम करवा कर परिजनों को सौंप दिया है. इन लोगों के बीच में निर्माणाधीन मकान की चौकीदारी करने को लेकर विवाद हुआ था. इनमें लाठियों-डंडे और अन्य हथियारों से आपस में मारपीट हुई थी. आगे घटनाक्रम क्या रहा, इसका खुलासा जांच में ही हो पाएगा. रामफूल के रिश्तेदारों का कहना है कि झगड़ा अलाव तापते समय हुआ था.

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