चम्बल नदी की सेहत खतरे में, दशहरा मेले से बढ़ा प्रदूषण: अधिवक्ता सानिया शेरी
के डी अब्बासी
कोटा। शहर का ऐतिहासिक दशहरा मेला इस बार भी भव्यता के साथ सजने की तैयारी में है, लेकिन इसके पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर चिंता गहराती जा रही है। अधिवक्ता सानिया शेरी ने कहा कि मेले के दौरान चम्बल नदी और उसके किनारों पर प्रदूषण, कचरे का ढेर, सीवेज बहाव से नदी की सेहत के लिए खतरा बन चुका है। इसकी लिखित लिखित शिकायत संभागीय आयुक्त जिला कलेक्टर से की थी
अतिरिक्त संभागीय आयुक्त ममता तिवारी नगर निगम दक्षिणी आयुक्त व प्रदूषण क्षेत्रीअधिकारी को निर्देश दिए थे इसके बाद भी चंबल नदी में मेला दशहरा ग्राउंड के सीवरेज के पानी को नहीं रोका गयाउन्होंने बताया कि चम्बल कोटा की जीवनरेखा है, लाखों लोग इसके जल पर निर्भर हैं। ऐसे में गंदगी और प्रदूषण बढ़ने से जनस्वास्थ्य पर सीधा खतरा मंडरा रहा है।
कानूनों की अनदेखी
सानिया शेरी का कहना है कि मेले में हो रही कई गतिविधियाँ पर्यावरणीय कानूनों की सीधी उल्लंघन हैं। इनमें जल प्रदूषण अधिनियम 1974, वायु प्रदूषण अधिनियम 1981, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016 और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 शामिल हैं।
सुझाव
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि—
मेले में अपशिष्ट प्रबंधन और जल निकासी की ठोस व्यवस्था हो।एकल-उपयोग प्लास्टिक पर सख्त रोक लगे।नदी किनारे पर दुकानें और झूले लगाने पर पाबंदी हो।निगरानी समिति बनाई जाए जो अनुपालन की रिपोर्ट दे।
सानिया शेरी ने कहा कि दशहरा मेला कोटा की पहचान है, लेकिन अगर परंपरा पर्यावरण को नुकसान पहुँचा रही है तो इसे बचाने के लिए समय रहते ठोस कदम उठाना ज़रूरी है।
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