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04 अप्रैल 2017

खूब बदलते हो ,

तुम बदलते हो
खूब बदलते हो ,,
कभी प्रोफ़ाइल ,,
कभी स्टेटस ,,
कभी इरादे
बदलते हो ,,
तुम बदलते हो
खूब बदलते हो
कभी कसमे
कभी वायदे ,,
कभी मिजाज़
कभी खुद को
बदलते हो ,,
तुम मौसम हो
तुम सुबह
तुम शाम हो
तुम बदलते हो
तुम बदलते हो
हमे बदलते तुम नहीं
हमे ठहरा हुआ
हमारे लिए
सिर्फ हमारे लिए
ठहरा हुआ मिजाज़ चाहिए ,,
बदलते हो
तुम बदलते ,,हो ,अख्तर

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