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25 फ़रवरी 2017

कोटा में पुलिस और विधायिका के टकराव के बाद ,,हालात अजीब बदतमिज़ाना ,,ज़ुबानदराज़ी वाले हो गए

कोटा में पुलिस और विधायिका के टकराव के बाद ,,हालात अजीब बदतमिज़ाना ,,ज़ुबानदराज़ी वाले हो गए है ,,सभी जानते है ,सत्ता पक्ष के लोगो के इर्द गिर्द कुछेक जांबाज़ पुलिस अधिकारियो को छोड़कर ,दूसरे लोग कैसे बेहतर पोस्टिंग हांसिल करने के लिए जी हुज़ूरी में लगे होते है ,,फिर ऐसे ही लोग ,,जनप्रतिनिधियो को पायजामे में पहनकर मनमानी भी करते है ,,कोटा का वाक़िया दुखद है ,,शर्मसार करने वाला है ,,लेकिन उसके बाद जो खेमाबंदी ,,समाजबंदी और टकराव ,,बदज़ुबानी जो शुरू हुई है वोह और शर्मसार कर देने वाली है ,,,,कुछ लोगो ने तो हाईकोर्ट के नाम से गलत खबर सोशल मिडिया पर चला रखी है ,,जिसमे विधायक की गिरफ्तारी के आदेशो का हवाला है ,,कुछ लोग टँकी पर चढ़ रहे है ,,पहले टँकी पर चढ़ने वालो की गिरफ्तारी ,ठुकाई के बाद ही ज़मानत होती रही है ,,वोह भी शान्तीभंग में कई बार जेल भी ऐसे लोगो को भेजा गया है ,,,वर्तमान में सेवा निवर्त्त अधिकारी और दूसरे भाजपा नेता बेवजह टकरा रहे है ,, मामला जांच में है ,,आपसी ज़ुबानदराज़ी से किसी को कोई हांसिल नहीं होने वाला है ,,जो लोग कोटा में पुराने पापड है ,जिनकी हर घटना पर नज़र रहती है वोह सभी के माजने खूब अच्छी तरह से जानते है ,,कोन कितना बहादुर है ,,,और किसके क्या कारनामे है ,,,ऐसे में पुलिस प्रशासन ,,जांच अधिकारी को अपना काम करने देना चाहिए ,,इस घटना को सिर्फ एक अपराध की निगाह से देखना होगा ,,किसी सियासत ,,,किसी धर्म ,,किसी समाज ,,किसी पुलिस कर्मी या फिर भाजपा विधायक की हैसियत से यह खबर देखकर प्रतिक्रिया करने वाले लोग ,,इस कोटा शहर के अमन सुकून ,,क़ानून व्वयस्था के साथ इन्साफ नहीं कर रहे है ,,,कई लोगो के अगर फोन की कोल डिटेल निकलवाई जाए ,,सीडी देखी जाए तो काफी षड्यन्त्र इस घटना को लेकर सामने आ सकते है ,,,जांच होने दो ,,पुलिस सी आइ सम्मानित है ,,वोह जहां भी रहेंगे सी आइ ही रहेंगे ,,उन्हें सरकार ने नहीं हटाया है ,,पुलिस अधिकारियो ने ही हटाया है ,,व्यवस्था देखना शीर्ष अधिकारियो का काम है ,,मेस बहिष्कार ,,धरने प्रदर्शन ,,,कोई बेहतर काम नहीं है ,,,,वैसे भी सरकार में बैठे लोग अगर अधिकारियो को इंस्ट्रूमेंट के रूप में इस्तेमाल करना बन्द नहीं करेंगे ,,उनसे निजी काम नहीं लेंगे तो व्यवस्था में बदलाव आ सकता है ,,सभी जानते है पुलिस अधिकारियो से कई नेता अपने खिलाफ लोगो की सूचि बनाने ,,मुखबिरी करवाने ,,उनकी जन्म कुंडली निकलवाने और उन्हें झूंठे मुक़दमे में बन्द करवाने की कोशिशें भी कर चुके है ,,मंत्री के दरबार में पोस्टिंग के लालच में कई अधिकरी धक्के भी खा चुके है ,,पुलिस को निष्पक्ष होना चाहिए ,,क़ाबिल पुलिस अधिकारी कभी किसी के गुलाम नहीं रहे ,,वोह अपने बलबूते पर नोकरी करते रहे है ,उन्हें न पोस्टिंग चिंता रही ,,न ही सस्पेंशन की ,,वोह शेर की तरह से जिए है ,,और वर्तमान में भी सेवानिव्रत्ति के बाद शेर की तरह ही जी रहे है ,, यह सेवानिव्रत जोशीले पुलिस अधिकरी जब कहा गए थे जब सवाईमाधोपुर क्षेत्र में ,,फूल मोहम्मद पुलिस निरीक्षक को सरे आम पुलिस अधिकारियो के सामने ज़िंदा जला दिया गया था ,,,यह सेवानिव्रत अधिकारियो की जुबां उस वक़्त हलक़ में क्यों अटक गयी , थी ,,,यह लोग आज भी उस मामले में चुप क्यों है ,,क्या है इस बात का जवाब इन लोगो के पास ,,या फिर यह भी किसी पार्टी से टिकिट लेने के लिए सियासी बयानात दे रहे है ,,,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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