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27 फ़रवरी 2017

अल्फ़ाज़ों को क्रोध में पिरोकर,,


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अल्फ़ाज़ों को क्रोध में पिरोकर,, अपशब्द भी बनाये जा सकते है ,,इन्ही अल्फ़ाज़ों को प्यार में डुबो कर मोहब्बत का पैगाम भी बना सकते है ,,तो इन्ही अल्फ़ाज़ों को खोजपूर्ण लेखन कर लोगो के लिए एक मार्गदर्शन ,,एक ज्ञानवर्धक जानकारी का ज़रिया बना सकते है ,,, इन दिनों नफरत ,,अराजकता ,फैलाने वाले भोंडे अल्फ़ाज़ों के इस दौर में अल्फ़ाज़ों के एक मसीहा डॉक्टर प्रभात कुमार सिंघल ऐसे भी है ,,,जो अल्फ़ाज़ों की मरम्मत कर ,,,अल्फ़ाज़ों की बीमारी का इलाज कर ,,उन्हें अपनी क़लम से कागज़ के कलेजे पर उकेर कर ,,आमजनता के लिए हितकारी ,,ज्ञानवर्धक ,,पर्यटन ,,कृषक ,,धार्मिक आस्थाओ के प्रति समर्पण जागरण के लिए लेखन का काम कर रहे है ,,,यूँ तो डॉक्टर प्रभात कुमार सिंघल किसी परिचय के मोहताज नहीं ,,इनके तार्रुफ़ के लिए कुछ भी लिखना ,,सूरज को दिया दिखाने जैसा है ,,,लेकिन इनकी शख्सियत ,,,इनकी अल्फ़ाज़ों की अदाकारी ,,इनकी कलमकारी ,,खूब ब खुद मजबूर करती है ,,के मेरे अपनों को भी में इनसे रूबरू करवाऊं ,,इसलिए यह गुस्ताखी में कर रहा हूँ ,,,दोस्तों सभी जानते है ,,कोटा पर्यटन ,,राजस्थान पर्यटन ,,या फिर हिंदुस्तान का पर्यटन लेखन से दूर था ,,लेकिन अपने शिक्षण काल से ही ,,डॉक्टर प्रभात कुमार सिंघल ने क़लम उठाई ,,कोटा के जंगलों में छुपे पर्यटन रहस्य ,,,धार्मिक स्थलों की तहक़ीक़ात के बाद उनकी आस्थाये और खूबियां आम लोगो तक पहुंचाई ,,,आज भी सेवानिव्रत होने के बाद भी ,,कई मैगज़ीन ,,कई अखबारों के महंगे ऑफर ठुकरा कर ,,डॉक्टर प्रभात कुमार सिंघल ,,बीमार अल्फ़ाज़ों का इलाज कर इन्हें जीवनदान देने की कोशिशो में लगे है ,,आलोचना ,,समालोचना के इस दौर में कुंठाओं से कोसों दूर ,,खूबसूरती ,,ऐतिहासिक धरोहर ,,आम लोगो की ज़रूरत के लिए जो भी फायदेमंद है बस उस विषय पर ही इनकी क़लम अल्फ़ाज़ों को उगलती है ,,ना काहू से दोस्ती ,,न काहू से बेर ,,के सिद्धांत के तहत ,,,एकला चालो रे ,,का इनका लेखन,, पत्रकारिता क्षेत्र से जुड़े प्रशिक्षु कलमकारों के लिए एक सबक़ है ,,क़लमकार कभी अपने ज़मीर की आवाज़ को नहीं दबाता ,,सिर्फ मन की सुनता है ,,मन की बात करता है ,,और इसीलिए अपने ज़मीर को जीवित रखकर सरकारी अधिकारी के रूप में भी बिना किसी लाग लपेट के,, इन्होंने अपनी क़लम का जोहर,, सरकारी योजनाओ को ,,आम जनता तक पहुंचाने का हुनर बनाया है ,,कई पुरस्कार ,,जीते ,,है खूब वाहवाही लूटी है ,,लेकिन हमेशा मुस्कुराना ,,,दुसरो को लुभाना ,,अपने क़लम से लोगो को पढाना ,,प्रशिक्षण देना इनकी खासियत बन गयी है ,,,,,,,कहते है क़लम ,,कभी बूढी नहीं होती ,,क़लम कभी रिटायर नहीं होती ,,,और यह सच ,,,साबित कर दिखाया है,, हमारे भाई डॉक्टर प्रभात कुमार सिंघल सेवानिवृत्त संयुक्त निदेशक जनसम्पर्क ने ,,,अपने सरकारी कार्यकाल में,,, सुबह से शाम तक,,, सरकारी योजनाओ के लिखित प्रचार प्रसार के बाद,,,, थोड़ा सा सुस्ताने की जगह,,, यह अपनों के लिए,,,,अपनों की बात लिखते रहे है ,,,इनकी सेवानिवृत्ति के बाद,,, डॉक्टर सिंघल की क़लम की सियाही सूखी नहीं,,, बल्कि और तेज़ तर्रार हो गयी है ,,नियमित रूप से,,, कोटा आई समाचार पत्र का प्रकाशन ,,स्मारिकाओं का लेखन ,,,,प्राकर्तिक सौंदर्य ,,पर्यटन से आम लोगों को परिचित कराने का इनका लेखन ,,इनका हुनर,,, इन्हे लेखन क्षेत्र का महागुरु बनाता जा रहा है ,,,,,,,,,,,ख्यातनाम लेखक ,,,डॉक्टर प्रभात कुमार सिंघल का जन्म 1953 में ,,,कोटा के बारां क़स्बे में हुआ ,,,,जो अब अलग से,,, जिला बन गया है ,,पुलिस की गोद में पले बढ़े ,,संस्कारवान ,,,रिश्ते रहे और फि,,,र अपना शिक्षण कार्य पूरा कर,,,, लेखन कार्य के साथ साथ,,, कोटा में सहायक जन सम्पर्क अधिकारी का पदभार ग्रहण किया ,,कहने को सफर थोड़ा सा था ,,,जो जनसम्पर्क अधिकारी से संयुक्त निदेशक जनसम्पर्क तक पहुंचा ,,,लेकिन इस दौरान प्रभात कुमार सिंघल ,,,कोटा पुलिस के मामले में,,, शोध करने के बाद डॉक्टर बन गए ,,,,हाड़ोती की चित्र शैली ,,ऐतिहासिक धरोहर ,,,गीत ,,कला ,,भवन ,,महल ,,शेल चट्टाने ,,संस्कृति ,,,मौसम ,,इतिहास ,,,खाद,, बीज ,,त्यौहार ,,सड़क ,,पुल,,, बांध ,,कुछ भी तो,,, ऐसा नहीं बचा ,,,,जिस पर,, डॉक्टर सिंघल ने,, नहीं लिखा हो ,,,कोटा के त्योहारों ,,कोटा के मेले ,,कोटा के हर कार्यक्रम को ,,,राष्ट्रिय स्तर पर,,, प्रचारित करने वाले ,,,डॉक्टर सिंघल को,,, लिखने की आदत है और इसीलिए ,,,हिंदुस्तान की ,,,,कोई ऐसी मेगज़ीन ,,,कोई ऐसा अख़बार नहीं ,,जहां इनके आलेख,,, प्रकाशित नहीं किये गए हो ,,,डॉक्टर सिंघल शांत ,,सौम्य ,हंसमुख ,,मिलनसार व्यक्तित्व के धनी होने से ,,,आज भी,, यारों के यार,,, कहे जाते है ,,,जो इनसे मिलगया ,,समझो बस वोह इनका ही ,,, होकर रह गया ,,,,,,काम को,,, समर्पण भाव से करते रहना ,,,बिना किसी की ,,,आलोचना के ,,,खुद को बुलंद करना ,,,इनकी संस्कृति रही है और इसीलिए ,,,यह शीर्ष पद से,,, रिटायर होने के बाद भी,,, सिस्टम से लड़ते रहे ,, डॉक्टर सिंघल की योग्यता देखते हुए इन्हें ,,फिर राजकीय सेवा में रखा गया ,,,लेकिन ,,हालातों ने साथ नहीं दिया और बीच में ही,,, इन्होने सरकार को अलविदा कह दिया ,,,कई दर्जन पुस्तकों के प्रकाशक ,,कई दर्जन,, स्मारिकाओं के प्रकाशक ,,,सैकड़ों ,,पुस्तकों के संपादक ,,हज़ारो हज़ार ,,लेखों के लेखक रहे ,,भाई डॉक्टर प्रभात कुमार सिंघल,,,,, अभी रुके नहीं है इनका लेखन दर्शन लगातार चालू है ,,डॉक्टर सिंघल अपने अल्फ़ाज़ों से ज़र्रे को आफ़ताब बनाने का हुनर रखते है ,,,,,,,, उन्हें बधाई मुबारकबाद ,,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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