हमें चाहने वाले मित्र

31 जनवरी 2017

तुमसे अब

सोचा था
मिल गए तुम
खुशियों के साथ रहेंगे
तुमसे अब
कभी जुदा होंगे ,,
इधर कमबख्त
मलेकुल मोत
अनक़रीब
ले जाना चाहता है ,,अख्तर

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

दोस्तों, कुछ गिले-शिकवे और कुछ सुझाव भी देते जाओ. जनाब! मेरा यह ब्लॉग आप सभी भाईयों का अपना ब्लॉग है. इसमें आपका स्वागत है. इसकी गलतियों (दोषों व कमियों) को सुधारने के लिए मेहरबानी करके मुझे सुझाव दें. मैं आपका आभारी रहूँगा. अख्तर खान "अकेला" कोटा(राजस्थान)

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...