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07 नवंबर 2016

राहुल का कांग्रेस प्रेसिडेंट बनना तय, पार्टी ने दिए 3 संकेत; 4 साल में पहली बार CWC ने उनके नाम की सिफारिश की

राहुल का कांग्रेस प्रेसिडेंट बनना तय, पार्टी ने दिए 3 संकेत; 4 साल में पहली बार CWC ने उनके नाम की सिफारिश की

नई दिल्ली.130 साल पुरानी कांग्रेस पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन की मांग उठी है। राहुल गांधी के उपाध्यक्ष बनने के करीब चार साल बाद पहली बार कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने एक सुर से उन्हें पार्टी प्रेसिडेंट बनाने की सिफारिश की है। CWC की सोमवार को हुई मीटिंग में नेताओं ने कहा कि राहुल को अब पार्टी की कमान संभालनी चाहिए। 1998 से पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी की गैर-मौजूदगी में हुई इस मीटिंग की पहली बार खुद राहुल ने अध्यक्षता की। तीन संकेत जो बता रहे हैं कि राहुल का जल्द कांग्रेस प्रेसिडेंट बनना तय है...
1. पहली बार राहुल ने की CWC की अगुआई
- कांग्रेस वर्किंग कमेटी पार्टी की सबसे ताकतवर बॉडी है।
- राहुल ने सोनिया की गैर-मौजूदगी में पहली बार सोमवार को इसकी अध्यक्षता की।
- बीमार होने की वजह से सोनिया मीटिंग में नहीं पहुंचीं।
- बताया जा रहा है कि सोनिया का जाना तय था। घर के बाहर गाड़ी भी खड़ी थी। पर दिल्ली में स्मॉग को देखते हुए उन्होंने आखिरी वक्त में फैसला टाल दिया।
2. पहली बार CWC ने उनके नाम की सिफारिश की
- राहुल का CWC मेंबर्स ने पहली बार प्रेसिडेंट पोस्ट के लिए समर्थन किया।
- चार घंटे चली मीटिंग में पूर्व डिफेंस मिनिस्टर एके एंटनी ने राहुल को प्रेसिडेंट बनाने की बात सबसे पहले उठाई।
- मीटिंग में मौजूद मनमोहन सिंह, पी. चिदंबरम, गुलाम नबी आजाद, अहमद पटेल, जनार्दन द्विवेदी और अंबिका सोनी ने इस मांग का सपोर्ट किया।
- बता दें कि 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को जब महज 44 सीटें मिली थीं तब प्रदेश स्तर के कुछ नेता राहुल के नेतृत्व की आलोचना कर रहे थे।
- एंटनी ने कहा, ''ऐसा पहली बार हुआ है जब CWC ने उन्हें (राहुल को) प्रेसिडेंट बनाने की सिफारिश की है। उम्मीद है कि कांग्रेस प्रेसिडेंट इस बात पर उचित तरीके से ध्यान देंगीं।''
3. पार्टी ने संगठन के चुनाव टाले
- न्यूज एजेंसी के मुताबिक, कांग्रेस ने 31 दिसंबर से पहले होने वाले पार्टी संगठन के चुनाव एक साल के लिए टालने का फैसला किया है। इसके लिए चुनाव आयोग से वक्त भी मांगा गया है।
- जाहिर है कि पार्टी राहुल के नाम पर खुद सोनिया गांधी की मंजूरी चाहती है।
राहुल की लीडरशिप में 60 महीने में 20 चुनाव हार चुकी पार्टी
- राहुल को 2013 में कांग्रेस वाइस प्रेसिडेंट बनाया गया था।
- हालांकि, यूपी चुनाव के वक्त 2012 की शुरुआत से पार्टी में एक्टिव हुए राहुल की अगुआई में कांग्रेस कुछ खास रिजल्ट हासिल नहीं कर पाई।
- राहुल के नेतृत्व में कांग्रेस 60 महीने में 20 चुनाव हार गई। पार्टी देश में महज 7% आबादी में सिमट कर रह गई।
अगर प्रेसिडेंट बने तो सबसे बड़ा टेस्ट यूपी में
- 2017 की शुरुआत में उत्तर प्रदेश में चुनाव है। ये विधानसभा चुनाव अहम होगा।
- ये वही राज्य है जहां से राहुल ने 2012 में पार्टी के इलेक्शन कैंपेन की कमान संभाली थी।
- 2017 में पंजाब, उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा में चुनाव होंगे। साल के आखिर में गुजरात और गोवा में चुनाव होने हैं।
- यूपी में कांग्रेस अपनी किस्मत बदलने के लिए इलेक्शन स्ट्रैटजिस्ट प्रशांत किशोर को लेकर आई है।
अभी कहां-कहां कांग्रेस की सरकार
- 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस 44 सीटों पर सिमट गई थी। केंद्र के साथ राज्यों में भी पार्टी सिमटती गई थी।
- फिलहाल कांग्रेस सिर्फ हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, पुड्डुचेरी और उत्तराखंड में सत्ता में है।
- इन राज्यों में देश की कुल आबादी मात्र 7% से थोड़ा ज्यादा हिस्सा रहता है।
राहुल की लीडरशिप में यहां हारी कांग्रेस
2012 : यूपी, पंजाब, गोवा, गुजरात
2013 : त्रिपुरा, नगालैंड, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़
2014 : लोकसभा चुनाव, महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड, जम्मू-कश्मीर
2015 :दिल्ली
2016 :असम, वेस्ट बंगाल, केरल, तमिलनाडु
यहां जीती कांग्रेस
2012 : उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मणिपुर
2013 : कर्नाटक, मिजोरम, मेघालय
2014 : सभी चुनाव हारे
2015 : बिहार में गठबंधन जीता
2016 : पुड्डुचेरी

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