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28 अक्तूबर 2016

,यह फ़क़ीर जो मीरा दातार के नाम से जाने जाते है और हाडौती के क़ुतुब ,,हाडौती के शहंशाह,, इन्हें कहा जाता है

दोस्तों ऐतिहासिक हाड़ा नगरी बूंदी ,,जिसकी पहाड़ी पर बना ,,,एक फ़क़ीर का मज़ार ,जिसके साथ पैतालीस शहीद शामिल है ,,यह फ़क़ीर जो मीरा दातार के नाम से जाने जाते है और हाडौती के क़ुतुब ,,हाडौती के शहंशाह,, इन्हें कहा जाता है ,,लाखो लाख,,, लोगो की आस्थाओ के प्रतीक,,, इस मज़ार के रखरखाव के मामले में,,,, राजस्थान सरकार ,,केंद्र सरकार ,,राजस्थान वक़्फ़ बोर्ड ,,आस्थावान मुस्लिमों सहित सभी की उपेक्षा ही रही है ,,यही वजह है के ,,,सदियो पुराने इस आस्था केंद्र का,,, इतिहास भी अभी तक,, किसी इतिहासकार द्वारा ठीक से ,,,सँजोया नहीं गया है ,,सरकार ,, ने पर्यटन विभाग ने,,,, इस तरफ को ध्यान भी नहीं दिया है ,,,दोस्तों ,,,,,आस्था के इस प्रतीक मज़ार का इतिहास जानने,,, कल में अपने साथी सुल्तानपुर पूर्व उप प्रधान रईस कहना के साथ ,,बूंदी की पहाड़ी पर उपथित ,,इतिहास में उपेक्षित आस्था के इस केंद्र,,,,जो लोगो की दीवानगी की हद तक आस्था का केंद्र है ,,,मीरा दातार साहब के मज़ार पर पहुंचे ,,,एक पहाड़ी पर सेकड़ो साल पहले ,,बूंदी के हाड़ा वंश को हिम्मत ,,ताक़त और सुरक्षा देने आये बाबा ,,,मीरा दातार साहब अपने साथियो के साथ ख्वाजा गरीब नवाज़ के कार्यकाल में इंसानियत का पैगाम देने पहुंचे थे ,,उनका क़याम बूंदी के जंगल की यह पहाड़ी थी पहाड़ी पर बने इस मज़ार तक पहुंचने के लिए पहले आस्थावानों ने बूंदी दरबार की मदद से सीढ़ियां बनाई थी ,,फिर पहाड़ी पर रास्ता बनाया गया ,,एक निजी आस्थावान ने ,,,पहाड़ी पर पक्की सड़क बना दी ,,लेकिन बारिश सड़क टूट फुट होने के बाद पूर्व सांसद इज्यराज सिंह ने जब सांसद कोष से साढ़े तीन लाख स्वीकृत किये तो वन विभाग वालो ने टांग अड़ा दी नतीजन ,,सड़क का काफी हिस्सा अब रिपेयर नहीं होने से इस केंद्र तक वाहन से आने जाने में काफी दिक़्क़तें उठाना पढ़ रही है ,,,,हमने मज़ार के आसपास रहवासियो से इस मज़ार ,,,,बाबा के इतिहास के बारे में पूंछा किसी के पास कोई काल ,,कोई दिनांक तारीख़ नहीं ,,कोई इतिहास नहीं बस ,,ख्वाजा गरीब नवाज़ के साथ इंसानियत का पैगाम देने मीरा दातार साहब भी बूंदी पहुंचे थे ,,यही जानकारी सभी को थी ,,,मज़ार की देख रेख कर रहे मुजाविर ,,सय्यद मोहम्मद अली ,,सय्यद लियॉकत अली से इस बारे काफी जानकारी चाही ,,लेकिन वोह खामोश थे ,,मज़ार कच्ची क़ब्र के ऊपर बना होना बताया गया ,,पुरानी एक हज़ार साल पुराने निर्माण शैली से लगता है मज़ार आठ सो साल पुराना तो रहा होगा ,,,,यहां पहाड़ी पर पानी की बावड़ी जो हमेशा भरी रहती है ,,अब चाहे सरकार ने नल लगा दिए हो लेकिन पानी इस पहाड़ी पर स्थाई रूप से बावड़ी में रहना अपने आप में एक विज्ञान का विषय है ,,हमने पूर्व नगर पालिका चेयरमेन सदाक़त भाई से इस बारे में जाना ,,सदाक़त भाई ने मज़ार के रखरखाव ,,सौन्दर्यकरण और यहां सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए कई विकास कार्य करवाये है ,,सदाक़त भाई बताते है के यह मज़ार कई सेकड़ो साल पुराना है ,,यह मज़ार और गुजरात में स्थित मीरा दातार साहब दोनों मज़ार अलग अलग है ,,, उन्होंने बताया के दरबार रतन सिंह हाड़ा की इस मज़ार पर आस्था थी ,,उन्होंने बताया युद्ध के पहले यहां के सिपाही ,,बाबा साहब के नाम से हिम्मत लिया करते थे और ,,यहां के बारे मे एक कहावत प्रसिद्ध है:-दारू गोली रंगजी की ,,,मदद मीरा साहब की ,,यानी हथियार वगेरा सब राजा साहब के ,,लेकिन मदद मीरा साहब की होती है तभी जीत होती है ,,और बूंदी इसी आस्था की वजह से अविजित रहा ,,बूंदी को कोई जीत नहीं पाया ,,दरबार इस मज़ार पर हर साल ईद के एक दिन पहले सवामनी के नाम से ,,,लोगो को खाना खिलाते थे ,,यहां आस्थावानों का मेला लगता था ,,यह परम्परा आज भी चल रही है ,,ईद के दिन इस मज़ार पर हज़ारो हज़ार की तादाद में आस्थावानों का मेला लगता है ,,,लोग कहते है हाडौती में पहले कोटा का अस्तित्व नहीं था ,,बूंदी अस्तित्व में था ,,यहां बाबा साहब का हाडौती में सबसे पहला मज़ार होने और करिश्माई होने से ,,मीरादातार साहब को हाडौती का शहंशाह भी कहा जाता है ,,,,मीरा दातार साहब इबादत के ज़रिये लोगो का दिल जीता करते थे ,,इबादत और खुदा से दुआओं के ज़रिये दूसरे लोगो की भी दुआएं पूरी करवाने की कामयाब कोशिश करते थे ,,लोगो की हिफाज़त ,,लोगो की खुशहाली ,,भाईचारा ,,सद्भावना इनकी हिम्मत से यहां नियमित थी ,,,लोग कहते है के इनके मज़ार पर सुबह सवेरे कई शेर ,,अपनी पूंछ से आकर झाड़ू दिया करते थे ,,लेकिन यह शेर दूसरे किसी भी व्यक्ति को नुकसान नहीं पहुंचाते थे ,,बस शेर आते ,,झाड़ू देते और चले जाते थे ,,एक बार अंग्रेज़ो के शासन काल में एक अँगरेज़ ने पहाड़ी पर अकेली जगह देखकर ,,इसे सैरगाह ,,ऐशगाह बनाने के लिए मज़ार के पास ,,अंग्रेजी बंगला बनाने की कोशिशें शुरू की ,,बंगला का स्ट्रक्चर तैयार हो गया ,,छत दल दी गयी ,,,इसी बीच बाबा मीरा दातार ने ख्वाब में इस अँगरेज़ को बशारत देकर समझाइश की के इस पवित्र इबादत स्थान पर बंगला मत बनाओ ,,वोह अँगरेज़ अधिकारी नहीं माने ,,बाबा साहब ने फिर उन्हें चेताया के परिणाम सही नहीं होंगे ,,अँगरेज़ अधिकारी फिर नहीं माने ,,नतीजा एक दिन अँगरेज़ बंगला देखने जब गए तो उन्हें अज्ञात ताक़त ने ज़ोर से उठाकर फेंका जो पहाड़ी के नीचे बूंदी राजकीय महाविद्यालय के पास स्थित मज़ार के पास आकर गिरे ,,उनके प्राण पखेरू हुए ,,इसके बाद से किसी ने भी वहां रहने की कोशिश नहीं की वोह बंगला आज भी वीरान खण्डहर पढ़ा है ,,,मीरा दातार साहब के यहां एक पेड़ ,,,जिसे बूंदी मीरादातार के पेड़ के नाम से अजमेर स्थित तारागढ़ में भी लगाया गया है ,,,वहां इस पेड़ के फल को खाने और दुआ करने से कहते है के बाँझ के भी बच्चे का जन्म हो जाता है ,,एक ख्वाजा सरा यानी किन्नर का किस्सा लोगो के सामने है ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,मीरा दातार साहब बूंदी का मज़ार जो खूबसूरत वादियो के बीच पहाड़ी पर है ,,वहां अगर पर्यटन दृष्टि से कोई कार्ययोजना तैयार की जाए तो कई पर्यटको का यह मज़ार आकर्षण का केंद्र बन सकता है ,,ताज्जुब है राजस्थान वक़्फ़ बोर्ड ,,वक़्फ़ विकास परिषद और स्थानीय लोगो ने इस मज़ार के इतिहास की रचना और इस मज़ार के पर्यटन रखरखाव की दृष्टि से कोई कार्ययोजना तैयार क्यों नहीं की ,,,हिंदुस्तान में केवल अकेला यह ऐसा मज़ार है जिसके साथ अनगिनत शहीद है और इस मज़ार में पांच मीनारे है जबकि सभी मज़ारो में चार मीनारे होती है ,,,,,,,,,,मीरादातार साहब जिनकी मदद के हौसले से बूंदी के जांबाज़ सिपाही दुश्मनो को फ़तेह कर लेते थे ,,बूंदी जो इनकी मदद से अविजित अजय रहा ,,इस बूंदी में इस मज़ार के आस्थावानों को एक संगठन बनाकर सरकार और वक़्फ़ बोर्ड पर दबाव बनाना चाहिए ताकि मज़ार तक पहुंचने के लिए सड़क मार्ग सही हो ,,यहां सुविधाएं हो ,,पर्यटन द्रष्टी से अगर बूंदी के किले से मज़ार तक पहाड़ियों के बीच में रूप वे की योजना लागु की जाए तो सच यह पर्यटकों के लिए बारिश के दिनों में ,,हसीन वादियो के बीच ,,आस्था का एक खूबसूरत तोहफा होगा ,,,,,,,,,,अखतर खान अकेला कोटा राजस्थान

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