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12 फ़रवरी 2016

MP: भोजशाला में पहली बार गर्भगृह के बाहर पूजा, नमाज भी अदा की गई

सुमेरू पीठ के शंकराचार्य धरने पर बैठ गए हैं।
सुमेरू पीठ के शंकराचार्य धरने पर बैठ गए हैं।
धार/इंदौर. हिंदू जागरण मंच और भोज उत्सव समिति ने शुक्रवार सुबह 8 बजे भोजशाला के बाहर हवन-पूजन शुरू किया। जानकारी के मुताबिक, ऐसा करीब एक हजार साल के इतिहास में संभवत: पहली बार हुआ है, जब भोजशाला में गर्भगृह के बजाय बाहर पूजा हो रही है। इस बीच, पूरे दिन पूजा की मांग को लेकर सुमेरू पीठ के शंकराचार्य धरने पर बैठ गए हैं। प्रशासन ने सांकेतिक नमाज अदा कराने की कवायद में सिर्फ 17 लोगों से भोजशाला के गर्भगृह में नमाज अदा करवाई। एडमिनिस्ट्रेशन ने इम्प्लॉइज को आम जन बताकर भीतर करवाई पूजा...
- हिंदू जागरण मंच और भोज उत्सव समिति ने पहले ही एलान कर दिया था कि अगर उन्हें पूरे दिन की पूजा की परमिशन नहीं दी गई, तो वे वसंत पंचमी पर भोजशाला के बाहर पूजा करेंगे।
- समिति का आरोप है कि एडमिनिस्ट्रेशन ने अपने ही इम्प्लॉइज को आम जन के रूप में भोजशाला के भीतर पूजा करने भेजा। इन लोगों ने जूते-चप्पल पहनकर ही भीतर पूजा की।
- परिसर के बाहर बड़ी संख्या में लोग मौजूद हैं। ये लोग ज्योति अखंड मंदिर में बने कुंड पर हवन-पूजन कर रहे हैं। इनमें 3 से 90 साल तक के बच्चे-बुजुर्ग शामिल हैं।
सरकार से बातचीत बनी नहीं

- इससे पहले गुरुवार को दिनभर बीजेपी और प्रदेश सरकार के रिप्रेजेंटेटिव, समिति को भोजशाला के भीतर पूजा करने के लिए मनाते रहे, लेकिन बात बनी नहीं।
- हिंदू जागरण मंच के संयोजक गोपाल शर्मा ने बताया कि 1952 में भोज उत्सव समिति का गठन हुआ था और तब से ही वसंत पंचमी की पूजा भोजशाला के गर्भगृह में होती आई है।
- प्रशासन की तैयारी इस बार 2006 के फॉर्मूले के तहत पूजा और नमाज साथ-साथ करवाने की थी।
- मसले का हल निकालने के लिए एडीजी विपिन माहेश्वरी और इंदौर कमिश्नर संजय दुबे लगे हुए थे।
- भोज उत्सव समिति के संरक्षक विजय सिंह राठौर के मुताबिक, भोजशाला के भीतर पूजा खंडित होने का अंदेशा बना हुआ था।
- उन्होंने कहा, "पिछली बार भी श्रद्धालुओं के साथ पुलिस-प्रशासन ने बदसलूकी करते हुए मारपीट की थी। हम अखंड पूजा चाहते थे। लेकिन हमें ऐसा आश्वासन नहीं मिला कि पूजा को बीच में रोका नहीं जाएगा।"
ऐसा था पूजा और नमाज का समय

- आर्कियोलॉजी डिपार्टमेंट ने सुबह से दोपहर 12 बजे तक पूजा और फिर 1 बजे से दोपहर 3 बजे तक नमाज का समय तय किया था।
- 3 बजे के बाद इसके बाद फिर से पूजा की जा सकती थी। लेकिन हिंदू समाज पूरे दिन पूजा करना चहता था।

कैसे की गई है भोजशाला की सिक्युरिटी?

- भोजशाला परिसर और आसपास का इलाका छावनी में तब्दील हो गया है। चप्पे-चप्पे पर मिलिट्री और पैरा मिलिट्री के जवान तैनात हैं।
- पहली बार सिक्युरिटी फोर्सेस की 26 कंपनियां बुलाई गई हैं।
- 9 हजार से ज्यादा जवान सड़कों और गलियों में मुस्तैद हैं।
क्या हुआ शुक्रवार को भोजशाला में?
- सुबह सात बजे एडमिनिस्ट्रेशन ने अपने इम्पलॉइज को आम लोगों की तरह पूजा करने मंदिर के गर्भगृह में भेजना शुरू किया।
- धार कलेक्टर श्रीमन शुक्ला ने गुरुवार रात में ही इसकी तैयारी करा ली थी।
- महिला बाल विकास, आदिम जाति कल्याण हॉस्टल सहित सभी डिपार्टमेंट के महिला-पुरुष कर्मचारियों ने भोजशाला में सुबह पूजन की।
- सुबह से वीडियोग्राफी शुरू की जा रही थी। रिकॉर्डिंग भोपाल भेजी जा रही थी।
- भोज उत्सव समिति और हिंदूवादी संगठनों के मेंबर्स ने सुबह 8 बजे परिसर के बाहर अखंड ज्योति मंदिर में हवनकुंड बनाकर पूजन शुरू की।
- सुबह 9 बजे से समिति के लोगों ने मंदिर के भीतर जा रहे लोगों को रोकते हुए बाहर बने कुंड में हवन करने का कहा।
- समिति के सक्रिय होते ही लोग मंदिर की बजाय बाहर बने हवनकुंड की ओर रुख करने लगे।
- सुबह से बमुश्किल 250 के करीब कर्मचारी और अन्य लोग मंदिर के भीतर पहुंचे थे।
- पंडाल के बाहर हजारों की संख्या में लोग जुटे और हवन में शामिल हुए।
- सुबह 10 बजे लालबाग से शोभायात्रा निकली, जो करीब 12.30 बजे भोजशाला परिसर पहुंची।
- 12 बजे के करीब सुमेरू पीठ के शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती भोजशाला पहुंचे और धरने पर बैठ गए।
- दोपहर 1 बजे जब शंकराचार्य पुलिस के सुरक्षा कवच में मंदिर के भीतर जाने लगे तो आरएसएस के कार्यकर्ताओं के आग्रह पर वे मंदिर परिसर में दाखिल नहीं हुए।
- दोपहर 1.30 बजे के करीब प्रशासन कुछ मुस्लिमजनों को लेकर भोजशाला पहुंची।
- यहां पर कुल 17 लोगों ने नमाज अदा की, जिसकी वीडियोग्राफी करवाई गई।
- तनाव की स्थिति को देखते हुए पूरा धार बंद रहा।

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