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13 फ़रवरी 2016

DB SPL: इशरत एनकाउंटर पर बोले पूर्व IB चीफ- असहाय PM से क्या उम्मीद करता

राजेंद्र कुमार : फाइल फोटो
राजेंद्र कुमार : फाइल फोटो
नई दिल्ली. इशरत जहां पर हेडली की गवाही के बाद विवाद जारी है। इस मामले में उस वक्त गुजरात में आईबी के इंचार्ज राजेंद्र कुमार पर अंगुली उठी थी। कहा गया था कि उन्होंने खास मकसद से गलत एनकाउंटर किया। मुंबई हमलों के आरोपी हेडली के बयान के बाद राजेंद्र खुलकर सामने आए हैं।
सवाल : वर्षों तक चुप रहे आप, अब क्यों परतें खोल रहे हैं?
जवाब : पहले मैं गवर्नमेंट सर्विस में था। वह भी इंटेलीजेंस ब्यूरो में। तब कुछ भी कहना नियमों के खिलाफ होता। अब इसलिए कह रहा हूं कि दूसरी बार साबित हुआ कि एनकाउंटर फर्जी नहीं था। इससे पहले एफबीआई ने भी इशरत जहां को टेररिस्ट बताया था। और अब हेडली ने।

सवाल : पीएम से कम्प्लेन कर सकते थे। क्यों नहीं की?
जवाब : मैं एक असहाय पीएम से क्या उम्मीद कर सकता था? उन्होंने तो कहा भी था कि यह गलत हो रहा है, लेकिन किसी ने कहां सुनी उनकी।
सवाल : गलत नहीं थे तो आपको टारगेट क्यों किया गया?
जवाब : कोई और होता तो उसके साथ भी यही होता। वह मेरे बहाने किसी और को टारगेट कर रहे थे। वह चाहते थे कि मैं अपनी गर्दन से फांसी का फंदा हटाने के लिए किसी और का नाम ले लूं। पर मैंने ऐसा नहीं किया।
सवाल : कौन किसको टारगेट करना चाहता था और क्यों।
जवाब : सभी जानते हैं कि तत्कालीन सरकार को गुजरात में किसने हराया था। वह चाहती थी कि इस मामले से वह गुजरात में उन्हें हराने वाले को घेरे। इसका लाभ कुछ ऐसे सीबीआई ऑफिसर्स ने लेना चाहा जो रिटायरमेंट के बाद सरकार से अवॉर्ड चाहते थे। सीबीआई में उस वक्त कुछ सीनियर ऑफिसर्स ने साजिश करके मुझे फंसाने की कोशिश की।
सवाल : किसी ने आपके काम को नहीं सराहा? कोई साथ नहीं आया?
जवाब : चिदंबरम बतौर होम मिनिस्टर आए तो उन्होंने मेरी सुनी। उन्होंने मेरी सर्विस को सबके सामने सराहा था।
सवाल : कहा जाता है कि उस वक्त आपको खास तरह का बयान देने पर रिटायरमेंट के बाद बेहतर पोस्ट का आॅफर दिया गया था...।
जवाब : यह सही है। मुझे कहा गया कि आप हमारी मर्जी का बयान दीजिए। आपको छोड़ देंगे। ऐसा नहीं करने पर आपको नतीजे देखने होंगे। लेकिन मैं अपनी जगह सही था। इसलिए मैंने कभी गलत का साथ नहीं दिया।
सवाल : उन्होंने आपको धमकी दी। पर आपको तो कुछ नहीं हुआ...
जवाब : मुझे सीबीआई टीम ने अहमदाबाद बुलाया था। पूरी तैयारी थी मुझे अरेस्ट करने की। पर मैं भी पुलिस ऑफिसर ही था। उन्हें मेरे खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला। ऐसे में लाचारी में मुझे वापस आने दिया। यह उनकी हार थी।
सवाल : क्या आपने मौजूदा पीएम से मिलकर अपनी बात रखी है?
जवाब : मुझे किसी पोस्ट या लाभ का लालच नहीं था। ऐसे में पीएम नरेंद्र मोदी से भी मिलने का सवाल कहां उठता है? जहां तक उनसे मदद का सवाल है तो वह स्वयं उस वक्त दबाव में थे तो वह मेरी क्या हेल्प करते। उनकी ओर से न मुझे कोई हेल्प मिली और ना ही मुझे इसकी दरकार थी।
सवाल : आगे की रणनीति क्या है?
जवाब : मुझे कोई सजा नहीं हुई है। मेरा नाम किसी केस में नहीं है। मैं अपने रिटायरमेंट का आनंद ले रहा हूं। हां, यह जरूर है कि सीबीआई के कुछ ऑफिसर्स ने सरकार के टॉप पर बैठे लोगों के इशारों पर इस संस्था का दुरुपयोग किया। उनके खिलाफ जांच होनी चाहिए।

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