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02 जून 2013

...सलमान को झूंठ बोलने की और मुसलमानों से धोखा करने की आदत है इसलियें एक बार फिर कर दिया कोई बात नहीं ...

दोस्तों कहावत है के नो सो चूहे खाकर बिल्ली हज को चली ...यह कहावत भारत सरकार के विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद पर पूरी तरह साबित होती है ,,देश के अल्पसंख्यक खासकर मुसलमानों को नुकसान पहुँचने वाले सलमान खुर्शीद को अब मुसलमानों और सच्चर कमेटी की याद आई है उन्होंने जयपुर में राजस्थान के मुसलमानों को गुमराह करने के लियें मुस्लिम आरक्षण का एक झूंठ और बोला है ......आधे क्रिश्चियन आधे मुसलमान पुरे इन्सान नहीं सलमान खुर्शीद साहब शायद भूल गए के देश के अल्पसंख्यकों की कमान और मंत्रालय इनके ही हाथों में रहा है तब अल्पसंख्यकों और खासकर मुसलमानों के लियें कुछ खास नहीं किया जा सका है हाँ सोनिया को खुश करने के लियें क्रिश्चियनों को और मनमोहन सिंह को खुश करने के लियें सिक्खों को तरजीह जरूर दी है खुद जीते नहीं बीवी को हर दिया और उत्तर प्रदेश मके राहुल गाँधी की पूरी महनत पर पानी फेरा और उत्तर प्रदेश से दो बार कोंग्रेस का सफाया करा दिया ज़ाहिर है जो शख्स अपनी कोम का नहीं हुआ वोह कोंग्रेस या देश का केसे होगा सोचने की बात है यह व्ही सलमान खुर्शीद है जिनके अल्पसंख्यक मंत्रालय के मंत्री रहने के दोरान चुनावी स्टंट के लियें रातो रात विधिविरुद्ध तरीके से मुसलमानों को आरक्षण देने की गेर्कानुनी अधिसूचना जन बुझ कर इसलियें निकाली थी के दिखावे के तोर पर तो हम मुसलमानों के हमदर्द कहलाये और अदालत में जानबूझ कर इस मुद्दे को हर कर कहें के क्या करे अदालत ने अधिसूचना ख़ारिज कर दी तो जनाब जयपुर में इस शख्स ने बिरला ऑडिटोरियम में सच्चर कमेटी के छ साल और कोंग्रेस की लापरवाही मामले में फिर गुमराह करने के लियें आरक्षण का फंसा फेंका है देखा न राजनीति में आदमी कितना गिर जाता है ......सलमान को झूंठ बोलने की और मुसलमानों से धोखा करने की आदत है इसलियें एक बार फिर कर दिया कोई बात नहीं ......अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

विदेश मंत्री सलमान ने कहा जिन मजहबों के लोग पिछड़े हों उन्हें मिले आरक्षण



 
जयपुर। विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने मुस्लिमों का नाम लिए बिना कहा कि आरक्षण का नया कानून लाते समय ऐसे तबकों को हक मिलना चाहिए, जिनके सारे लोग पिछड़े हुए हैं। भले ही देश में आरक्षण का आधार मजहब न हो, लेकिन जब भी कोई कैबिनेट या सलेक्शन कमेटी बनाई जाती है तो पिछड़ों को आरक्षण देने में कहीं न कहीं जाति व मजहब का ताल्लुक अवश्य रहता है।
 
वे रविवार को बिड़ला ऑडिटोरियम में ‘सच्चर कमेटी रिपोर्ट के सात साल बाद’ विषय पर आयोजित सेमिनार में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में के. रहमान कमेटी की सिफारिश पर सभी मुस्लिमों को पिछड़ा मानते हुए आरक्षण लागू किया। आंध्र प्रदेश में भी ऐसा ही हुआ, हालांकि मसला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। यूपी में भी आबादी के हिसाब से 14 मुस्लिम बिरादरियों को आरक्षण का लाभ दिया। 
 
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की भारतीय मीडिया से दोनों देशों के बीच रिश्ते सुधारने में मदद की गुजारिश पर सलमान खुर्शीद ने कहा कि यह स्वागत योग्य है। हालांकि उन्होंने पुरानी चोटों पर मरहम लगाने की जरूरत बताई। केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलात मंत्री के. रहमान ने कहा कि अगले वर्ष से प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप डिमांड के आधार पर आवेदन करने वाले सभी को मिलेगी।
 
साथ ही स्कॉलरशिप सीधे ही आवेदक के बैंक खाते में ट्रांसफर होगी। ये मानसिकता बदलनी पड़ेगी कि मुस्लिमों के पिछड़ेपन का कारण हुकूमत है। हमें खुद को जागरूक करने की जरूरत है। यूपी कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष रीता बहुगुणा ने कहा कि राजस्थान का इतिहास ही साम्प्रदायिक सौहार्द का रहा है।
 
शिक्षामंत्री बृज किशोर शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार ने मुस्लिमों के लिए बजट में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं  की हैं। जोधपुर में अलग से मौलाना आजाद विश्वविद्यालय खोला जा रहा है। अल्पसंख्यक विभाग अलग से बनाकर 200 करोड़ रु. का प्रावधान रखा है। 
 
 
7 करोड़ मुस्लिमों की मासिक आय 1 हजार रु. से कम
स्ट्राइव एमीनेन्स एंड एम्पावरमेंट के अध्यक्ष एवं जामिया- तुल हिदाया के मौलाना मो. फजलुर्रहीम मुजाद्दी ने सभागार में पावर पाइंट प्रजेंटेशन के जरिए सच्चर कमेटी की सिफारिशों के बाद यूपीए सरकार की ओर से लागू की गई योजनाओं की ग्राउंड रियलिटी के बारे में बताया। उन्होंने सरकारी आंकड़ों के जरिए बताया कि अभी भी देश में 7 करोड़ से अधिक मुस्लिमों की मासिक आय एक हजार रुपए से कम है। 
 

गुजरात का एक गांव, जहां परिवार ही करवाता है बेटियों से वेश्यावृत्ति



वाडिया (गुजरात)। आर्थिक रूप से समृद्ध विकास के रोल मॉडल के रूप में पहचाने जाने वाले गुजरात में एक गांव ऐसा भी है, जो आज भी आर्थिक रूप से इतना जर्जर है कि यहां देह व्यापार अब जैसे एक परंपरा बन चुका है। इस मामले में यह कहावत यहां बिल्कुल सटीक बैठती है कि ‘सोने की थाली में मिट्टी का ढेला’।

जी हां, इस गांव का नाम है ‘वाडिया’। बनासकांठा जिला, थराद तहसील के अंतर्गत आने वाले वाडिया गांव में लड़कियों के जवान होते ही खुद उनके परिजन ही उनसे जिस्मफरोशी करवाते हैं। अब तो इस गांव के लोगों के लिए यह एक पारंपरिक व्यवसाय सा बन गया है। इसमें भी आश्चर्य की बात यह है कि यहां के अधिकतर लोग वेश्यावृत्ति को बुरा नहीं मानते, बल्कि इसे एक परंपरा के रूप में देखते हैं।

इस गांव में सराणिया समुदाय की बहुलता है। यह संप्रदाय खानाबदोशों की श्रेणी में आता है। गुजरात में आजादी के पहले तक इस समुदाय का मुख्य व्यवसाय छोटे-मोटे घरेलू सामान बनाना था। इनमें से अधिकतर युवक चाकू-छुरी-तलवार आदि पर धार करने का काम किया करते थे।

हाईप्रोफाइल महिलाओं के साथ सेक्स+कमाई के ऑफर पर लड़के हो जाएं सावधान..



अहमदाबाद। बिना मेहनत किए और कम समय में ही पैसा कमाने के लिए शैतानी दिमाग वाले लोग किसी भी काम में पीछे नहीं हटते। एक ऐसा ही मामला अहमदाबाद में सामने आया है, जहां एक युवक को सेक्स के साथ कमाई करने वाला ऑफर महंगा पड़ गया। हालांकि यह युवक ज्यादा लुट पाता कि इससे पहले ही उसकी बुद्धि काम कर गई और वह बच गया।

लेकिन यह पहला ऐसा मामला नहीं है। इस तरह की घटनाएं देश में कई जगह सामने आ चुकी हैं। ठगों के लिए यह काम आसान भी होता है कि क्योंकि लड़के हाईप्रोफाइल महिलाओं के साथ सेक्स कर कमाई करने के ऑफर में जल्दी फंस जाते हैं।
 
अहमदाबाद के वस्त्रापुर इलाके में रहने वाले एक युवक को कुछ दिन पहले एक एस्कोर्ट सर्विस नामक कंपनी से एक ई-मेल आया। इस मेल में लिखा था कि एस्कोर्ट सेवा देकर हर महीने 40 हजार रुपए कमाएं। युवक इस ऑफर के आकर्षण में एक झटके में ही फंस गया और उसने ई-मेल का जवाब हां में भेज दिया।
इसके बाद युवक को दूसरे ई-मेल आया और इसमें कंपनी के अकाउंट में 5000 रुपए सिक्युरिटी जमा करवाने की बात कही गई। युवक ने तुरंत ही 5000 रुपए कंपनी के अकाउंट में जमा करा दिए और अब वह कंपनी के मेल का इंतजार करने लगा कि जिसमें उसे किसी हाईप्रोफाइल महिला के साथ सेक्स करने के लिए भेजा जाने की बात लिखी होगी।
  कुछ दिनों बाद युवक के पास फिर से एक मेल आया और उसमें और 5 हजार रुपए की सिक्युरिटी जमा कराने की बात कही गई। इस पर युवक को शक हुआ और उसने ये पैसे कंपनी के अकाउंट में जमा न कराकर सीधे पुलिस थाने में इसकी शिकायत दर्ज करा दी। युवक की शिकायत पर पुलिस इस अकाउंट के मालिक की तलाश कर रही है। हालांकि यह आश्चर्य की बात नहीं हो सकती कि उस अकाउंट का पता भी फर्जी निकले।
 
इतना ही नहीं, इंटरनेट पर तो ऐसी सैकड़ों वेबसाइट भी मौजूद हैं, जो अधिकर महिलाओ के नाम से हैं। वेबसाइट दावा करती हैं कि वे हाईप्रोफाइल महिलाओं को सेक्स के लिए लड़के उपलब्ध कराती हैं। कई लड़के वेबसाइट के फ्रंट पेज पर लिखी उत्तेजक बातों को ही पढ़कर वेबसाइट पर दिए मोबाइल नंबर पर काल करते हैं और जब उस नंबर पर उनकी किसी महिला से बात होती है तो फिर आसानी से चंगुल में फंस जाते हैं।
 
इसके बाद युवक से सिक्युरिटी डिपॉजिट करने की बात कही जाती है और इसके ऐवज में उनसे 5 से 10 हजार रुपए तक वसूल लिए जाते हैं। इसके बाद लड़के ऑफर का इंतजार करते रह जाते हैं। यह स्थिति ऐसी होती है कि बदनामी के डर से इसके खिलाफ पुलिस थाने में शिकायत भी दर्ज नहीं कराई जाती।

कॉलेज से निकाल दिए गए थे दिग्विजय सिंह, राजीव गांधी ने बढ़ाया था इनका कद


भोपाल। वक्त-बेवक्त बेतुके-से लगने वाले बयान देने से कभी न थकने वाले कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह आखिर ऐसे क्यों हैं? और ऐसा करने पर भी उन्हें कोई रोकता क्यों नहीं?
 
गालिब ने कहा था छूटती कहां है कमबख्त मुंह से लगी हुई, अंग्रेजी में इसके लिए ओल्ड हैबिट्स डाइ हार्ड का जुमला है और दोनों का लब्बोलुआब यह है कि पुरानी आदतें आसानी से पीछा नहीं छोड़तीं। साठ के दशक में इंदौर के प्रतिष्ठित डेली कॉलेज का एक छात्र जो राघोगढ़ राजपरिवार से ताल्लुक रखता था, आज अपनी उसी आदत से जूझ रहा है।
कॉलेज में भी अनुशासनहीनता के मिले थे नोटिस
 
दिग्विजय सिंह अपने कॉलेज में लगातार छह साल तक सेंट्रल इंडिया के जूनियर स्क्वैश चैंपियन भी थे। लेकिन उनके व्यक्तित्व का दूसरा पहलू यह है कि कॉलेज के जमाने में जितनी बार उन्हें अनुशासनहीनता संबंधी नोटिस भेजे गए उसका भी कोई मुकाबला नहीं है। उन्हें कई बार स्कूल से निकाल देने की भी चेतावनी मिली थी।
 
ईमानदारी के चश्मे से देखें तो आज भी उनके बयान और काम-काज का तरीका अनुशासनहीनता के दायरे में ही आता है लेकिन जैसा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सीडब्ल्यूसी के एक सदस्य कहते हैं, 'देखते हैं पार्टी कब तक उनके इस रवैये को बर्दाश्त करती है।
 
क्यों नहीं लगाई जा रही है जुबान पर लगाम
 
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए अलग नियम और बड़े नेताओं के लिए अलग नियम तो नहीं होने चाहिए। आजकल जितने भी कार्यकर्ताओं से बात की जाए सबकी चिंता बस यही होती है कि दिग्विजय सिंह की जुबान पर लगाम क्यों नहीं लगाई जा रही है। जानकार बताते हैं कि दिग्विजय सिंह का कद पार्टी में काफी ऊपर है और उन्होंने अपने राजनीतिक सरपरस्तों को विश्वास में लिया हुआ है इसलिए उन पर कार्रवाई करना शायद पार्टी के बस में भी नहीं है।
 

50 पैसे में आज भी मिलता है भरपेट खाना, महंगाई तोड़ देती है यहां दम



रांची. आलू चॉप 10 पैसे में। समोसा 10 पैसे में। ऐसे ही प्याजी, चाय या नमकीन सबकी कीमत 10-10 पैसे। यहां तक कि दाल, चावल, सब्जी, पापड़, अचार यानी भरपेट भोजन सिर्फ 50 पैसे में। महंगाई के इस आलम में ऐसा है हेवी इंजीनयिरिंग कॉपरेरेशन यानी एचईसी की कैंटीन का रेट चार्ट। मजेदार बात ये है कि 10, 20, 25 पैसे के सिक्कों का चलन कब से बंद हो गया। 
 
लेकिन, यहां के रेट इन्हीं सिक्कों के हैं। वह भी 50 साल से। इन रेटों में कभी परिवर्तन ही नहीं हुआ।सिर्फ एक बार भोजन की दर जरूर बढ़ी। वह भी 10 पैसे।
 
पहले तो ये महज 40 पैसे में ही मिलता था। यह सुविधा सिर्फ प्लांट में काम करने वाले कर्मचारियों व अधिकारियों के लिए ही है। लेकिन, अगर आप एचईसी में किसी से मिलने जा रहे हैं तो 50 पैसे का सिक्का जेब में रखिए, भरपेट भोजन कीजिए।

जवानी के इंजेक्शन से नाबालिग लड़कियों के साथ खेला जाता है घिनौना 'खेल'



नीमच। देह व्यापार के धंधे में अपनी पहचान बना चुकी बाछड़ा जाति की एक ऐसी सच्चाई भी है जिसे सुनकर लोग अपनी दांतों तले उंगलियां दबा लेंगे। छोटी उम्र में लड़कियों को सेक्स के लिए तैयार करना इस जाति के लिए आम बात है। यही नहीं बल्कि जाति के लोग लड़कियों को बेचने का भी धंधा खुलेआम करते हैं। सबसे खतरनाक और दिल को दहलाने वाला सच है कि यहां कम उम्र में ही लड़कियों को जवान बनाया जाता है और बच्चे पैदा कर चुकी वेश्याओं की जगह इन्हें धंधे में उतार दिया जाता है।
 
पहले खुद ही बाछड़ा जाति की औरतें अपने ग्राहकों से पैदा हुई लडकियों को पाला पोसा करती थी। उनसे धंधा कराती थी, लेकिन ऐसे हालत में बच्चे पैदा होने के बाद जिस्मफरोशी के बाजार में उनकी कीमत कम हो जाती थी। अपनी कीमत को घटता देख, पिछले 10 वर्षों में लड़कियों की तस्करी ने तेजी पकड़ी है। बच्चियो को खरीदने का गौरखधंधा काफी लंबे समय से चलता आ रहा है।
 
जवानी का इंजेक्शन
 
आठ साल की उम्र की लडकियों को जल्द जवान बनाने के लिए मोर का मांस और स्टेरोयड्स दिया जाता था..! जिससे लड़कियां जल्द जवान होकर जिस्मफरोशी के बाजार में ढकेला जा सके..! इनके सेवन से कम उम्र की लडकियों का शरीर बड़ा दिखने लगता हे, पुलिस जांच में सामने आया की जिस्मफरोशी करने वाली ज्यादातर महिलाओ के बच्चे है ही नहीं....! पुलिसे के गिनती करने पर इन डेरो में 482 लड़कियां पाई गयी....!
 

नक्सलियों के लगातार संपर्क में थे चार नेता, काफिले में शामिल थे दो भेदिये!



नई दिल्ली/रायपुर. छत्तीसगढ़ में कांग्रेस नेताओं पर हुए नक्सली हमले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की टीम का मानना है कि हमले में कुछ भीतरी व्यक्तियों का हाथ है। यह व्यक्ति कांग्रेस के काफिले में शामिल थे। नेताओं के मूवमेंट की पल-पल की जानकारी नक्सलियों तक पहुंचा रहे थे।  
 
एजेंसी के अधिकारियों के मुताबिक ये भेदिये हत्या के षड्यंत्र में शामिल थे। उन्होंने न केवल रूट परिवर्तन की जानकारी समय-समय पर नक्सलियों को दी, बल्कि उन्हें यह भी बताया कि किस गाड़ी में कौन बैठा है। ऐसे चार लोगों की पहचान की गई है, जो हत्यारों से लगातार संपर्क में थे। इनमें से दो काफिले में शामिल थे और दो इनसे फोन पर संपर्क रखे हुए थे।
 
नेताओं का रुकना, सड़क पर मुड़ना, गाड़ी की गति तक की जानकारी रनिंग कमेंटरी की तरह नक्सलियों को दी गई। जांच एजेंसी ने जगदलपुर के सेलफोन टॉवर्स से उस दिन के रूट की सारी कॉल डिटेल्स निकाल ली है। चार नेताओं के कॉल की भी जांच-पड़ताल हुई है।

अब नहीं बिगड़गी कानून व्यवस्था एक नहीं दो-दो संगठन पलक छपकते संभालेंगे कमान



 

कोटा। शहर में कानून व्यवस्था बिगड़ने पर अब तत्काल पैरामिलिट्री फोर्स कमान संभाल लेगी। सेना व आरएसी के अलावा शहर में केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) तथा बार्डर सिक्युरिटी फोर्स (बीएसएफ) की बटालियन भी हर समय मुस्तैद रहेंगी।
 
दोनों ही पैरा मिलिट्री फोर्स का कोटा में स्थायी कैंप बनाने के लिए इनके मुख्यालयों द्वारा यूआईटी से जमीन मांगी गई है। यूआईटी ने सीआरपीएफ को तो जमीन देने की तैयारी भी कर ली है। बस शुल्क को लेकर अंतिम निर्णय करना शेष है। 
कोटा से मुख्य रेल व सड़क मार्ग द्वारा देश के कई राज्यों में तत्काल पहुंचने की सुगमता के चलते पैरा मिल्रिटी फोर्स सीआरपीएफ व बीएसएफ अपनी बटालियन यहां रखना चाहती हैं।
 
इसके लिए पिछले दिनों यूआईटी से उन्होंने जमीन मांगी थी। प्रस्ताव पर यूआईटी ने सीआरपीएफ के अधिकारियों को धर्मपुरा में नई जेल के सामने वाली 20 हैक्टेयर जमीन दिखाई थी। ये जमीन उन्हें पसंद भी आ गई और उसके लिए आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसी प्रकार बीएसएफ के अधिकारियों को शंभूपुरा में यूआईटी ने जमीन दिखाई थी। उन्हें भी जमीन पसंद आ गई, लेकिन अभी तक उनकी तरफ से कोई कार्रवाई शुरू नहीं की गई है। जमीन मिलने के बाद दोनों फोर्स एक साल में उस पर अपने लिए ऑफिस, बैरक और ग्राउंड आदि का निर्माण करेंगी।
 
लॉ एंड आर्डर बिगड़ा तो इंतजार नहीं करना होगा
दो पैरा मिलिट्री फोर्स की बटालियन कोटा में होने से शहर में लॉ एंड आर्डर मेंटेन करना आसान होगा। 29 मई 2009 को जब गुर्जर आंदोलन के समय स्थिति पुलिस के कंट्रोल से बाहर हो गई थी, तब सीआरपीएफ को बुलाने के लिए पहले मुख्यालय से पत्र व्यवहार किया गया था। उसके बाद गुजरात से सीआरपीएफ की टुकड़ी कोटा आई थी। इसके अलावा नगर निगम, विधानसभा व लोकसभा चुनावों में भी सीआरपीएफ की मदद लेनी पड़ती है।
 
 बैठक में होना था अंतिम निर्णय
सीआरपीएफ को यूआईटी द्वारा डीएलसी दर पर जमीन दी जाएगी। धर्मपुरा में वर्तमान में डीएलसी दर 1.64 लाख रुपए प्रति बीघा है। सीआरपीएफ को 20 हैक्टेयर यानी 125 बीघा जमीन चाहिए। सीआरपीएफ को यूआईटी को जमीन के बदले 2.05 करोड़ रुपए देने होंगे। दर को निर्धारण करने के लिए संभागीय आयुक्त अश्विनी भगत की अध्यक्षता में कमेटी बनी हुई है। कमेटी की यूआईटी व सीआरपीएफ के साथ बुधवार को बैठक होनी थी। सीआरपीएफ के डीआईजी नहीं आने से अब बैठक आगामी आदेश तक स्थगित कर दी है।

कुरान का सन्देश

  
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