रायपुर. छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के पास छह हजार से ज्यादा देसी रॉकेट हैं। कोलकाता में गिरफ्तार किए गए नक्सलियों के बड़े नेता सदानला रामकृष्णा उर्फ टेक्नी अन्ना से हुई पूछताछ में यह खुलासा हुआ है।
रामकृष्णा ने कई सालों तक छत्तीसगढ़ में काम किया है। मुंबई, कोलकाता और अन्य स्थानों से कई हिस्सों में पहुंचे रॉकेटों को अबूझमाड़ में स्थित गुप्त ठिकाने पर नक्सलियों ने असेंबल किया। इस मामले की जांच नेशनल इन्वेस्टिगेटिव एजेंसी (एनआईए) कर रही है।
सदानला से कोलकाता और आंध्रप्रदेश की पुलिस ने पूछताछ की थी। इसकी प्रारंभिक रिपोर्ट छत्तीसगढ़ पुलिस को भी मिली है। खुफिया एजेंसियों के अनुसार टेक्नी अन्ना ने स्वीकार किया कि उसका संगठन रॉकेट तैयार करने के प्रोजेक्ट पर करीब 10 सालों से काम कर रहा था। इस पर 30 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि खर्च हो चुकी है। इसके कई हिस्से कर्जत (महाराष्ट्र) में तैयार किए गए। कुछ कोलकाता के आसपास की फैक्ट्रियों में बने।
यह साफ नहीं है कि अलग-अलग रास्तों से टुकड़ों में भेजे गए रॉकेट असेंबल करने के बाद कहां पर रखे गए हैं। कोलकाता से भेजे गए रॉकेट लांचर के कुछ हिस्सों को रायपुर में भी जब्त किया गया था। एनआईए की कई टीमें जानकारी जुटाने के लिए छत्तीसगढ़, झारखंड, कोलकाता, ओडिशा और आंध्रप्रदेश में घूम रही है। खबर है कि एनआईए ने रामकृष्णा से पूछताछ करने के अलावा मुंबई में पकड़े गए असीम कुमार भट्टाचार्य और उसके तीन साथियों को भी रिमांड पर लेने की कोशिश शुरू कर दी है।
गुणवत्ता पता लगाने में जुटीं एजेंसियां
ठाणो में असीम कुमार भट्टाचार्य के साथ काम करने वाला नक्सलियों का गुट रामकृष्णा के साथ लगातार संपर्क में था। खुफिया एजेंसियां देसी रॉकेट की गुणवत्ता पता करने में जुटी हुई हैं। शुरुआती सूचना यही है कि नक्सली सटीक निशाने के लिए इसके केलिब्रेशन पर काम कर रहे थे। नक्सली हथियार कंपनियों द्वारा निर्मित रॉकेटों से उम्दा राकेट बनाने में अब तक सफल नहीं हुए हैं। अनुमान है कि वे रॉकेटों का इस्तेमाल पुलिस, सीआरपीएफ के कैंप या काफिले के अलावा सेना के खिलाफ करने की कोशिशों में हैं।
सलवा जुड़ूम शुरू कराने में मांझी की थी अहम भूमिका
माओवादियों ने मंगलवार को जिला पंचायत सदस्य हेमला सिका मांझी की दिनदहाड़े साप्ताहिक बाजार में गोली मार कर हत्या कर दी। 55 वर्षीय मांझी ने गंगालूर इलाके में सलवा जुडूम शुरू कराने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी। इस कारण वे माओवादियों के निशाने पर थे। सिका मांझी रोज की तरह सोमवार की रात भी थाना परिसर में सोने के बाद मंगलवार की सुबह घर पहुंचे। वहां से वे बाजार के लिए निकले। शासकीय आयुर्वेद औषधालय के सामने बनी झोपड़ी में वे उपसरपंच कमलू, सुकलू व मंगू पदम के साथ बातचीत कर रहे थे।
इसी दौरान भीड़ के बीच से लुंगी-टीशर्ट पहने दो लोग थैला लेकर वहां आए और करीब दो फीट दूर से गोलियां चला दीं। फिर वे फरार हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दो हमलावर कुछ दूरी पर खड़े रहे जबकि दो लोगों ने घटना को अंजाम दिया।
सिका के सिर और गर्दन में एक-एक गोली लगी जबकि दो गोली उसके सीने में और एक पैर में मारी गई थी। मौके पर ही मांझी ने दम तोड़ दिया। घटनास्थल पुलिस थाने से महज 200 मीटर के फासले पर है। इसके बावजूद पुलिस घटना के आधे घंटे बाद वहां पहुंची। मौके से पुलिस ने पिस्टल के दो और देसी कट्टे का एक खाली खोखा बरामद किया है। नक्सलियों की हिट लिस्ट में होने के कारण सुरक्षा के लिए मांझी को 5 एसपीओ मुहैया कराए गए थे। बाद में उनकी सुरक्षा हटा ली गई थी।