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05 जून 2012

एक अजीबोगरीब मंदिर, जिसके अंदर का दृश्य हैरान करने वाला है


इंदौर। बंगाली चौराहे से बायपास की ओर जाते समय वैभवनगर में अपने तरह का एक अजीबोगरीब मंदिर हैं। यहां भगवानों के साथ साथ रामायण और महाभारत काल के राक्षसों की मूर्तियों की भी स्थापना की गई है। मंदिर के द्वार पर पहुंचते ही इसके अलग होने का अहसास शुरू हो जाता है क्योंकि यह प्रवेश भी सशर्त दिया जाता है।

शर्तों पर कर सकते हैं भगवान के दर्शन

यदि आपको यह अजीबोगरीब मंदिर अंदर से भी देखना है तो यहां आप 108 बार राम नाम लिखने की शर्त स्वीकार करने के बाद ही प्रवेश कर सकते हैं। मंदिर के मुख्य द्वार सहित पूरे परिसर में इसके लिए चेतावनी भरे बोर्ड पर बड़े बड़े अक्षरों में सूचना लिखी हुई है। मंदिर में एक बार अंदर आ गए तो बगैर राम नाम लिखे आप बाहर नहीं निकल सकते।

यहां के पंडित इसके लिए आपको गालियां देना शुरू कर दें तो भी कोई बड़ी बात नहीं क्योंकि यहां आने वाले सभी जानते हैं कि राम नाम तो लिखना ही पड़ेगा फिर भले ही आप कोई बड़े नेता हो पुरूष हो या कोई महिला हैं इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। 108 बार राम नाम लिखने के लिए लगाए गए एक बोर्ड शनि महाराज का संदेश भी लिखा है। इस बोर्ड के मुताबिक शनि महाराज कहते हैं कि हे कलियुग वासियो तुम मुझपर तेल चढ़ाना छोड़ दो तो मैं तुम्हारा पीछा छोड़ दूंगा। यदि तुम 108 बार राम नाम लिखना शुरू कर दो तो मैं तुमको सारी विपत्तियों से मुक्त कर दूंगा।

यहां रावण भी पूजे जाते हैं

पूरे मंदिर में हर जगह राम नाम लिखा हुआ है लेकिन फिर भी यहां रावण की विशाल मूर्ति बनाई गई है जो मंदिर के खुले परिसर में स्थापित है। इस मूर्ति के सामने ही शयनअवस्था में कुंभकरण, मेघनाथ और विभीषण की मूर्तियां भी हैं। इसके सामने बने एक अन्य कमरे में त्रिजटा, शबरी, कैकयी, मन्थरा और सूर्पणखा की मूर्तियां स्थापित हैं। इसके ठीक पास में अहिल्या,मन्दोदरी, कुन्ती, द्रोपदी और तारा की मूर्तियां रखी गई हैं।

एक अनोखा गांव जहां पेड़-पौधे ही हैं औलाद

कोटा. कोटा संभाग में एक ऐसा गांव है, जहां के लोग पेड़-पौधों को बेटे-बेटियों की तरह पालते हैं। यहां किसी पेड़ों की पत्तियों से लेकर टहनी तक तोड़ना मना है। सुरक्षा के लिए ग्रामीण इनकी बारी-बारी से निगरानी करते हैं। वन सुरक्षा एवं प्रबंधन समिति का पेड़ों की सुरक्षा के लिए गठन किया हुआ है।

महिला, पुरुष व बुजुर्ग व बच्चे इसमें भागीदारी निभाते हैं। टांडी सोहनपुरा गांव झालावाड़ से 32 किमी दूर है। जहां के लोग प्रकृति प्रेमी का अनूठा संदेश दे रहे हैं। 1995 में पर्यावरण प्रेमी व संस्था अध्यक्ष दिवंगत बापूलाल भील ने पहाड़ी पर पेड़ों के बचाने का अभियान शुरू किया था। उन्होंने ग्रामीणों को पेड़ जिंदगी है-की सीख देकर पौधरोपण व जंगल की रक्षा का संदेश दिया। प्रेरणा के बाद गांव वाले जुड़ गए। 250 घरों वाले इस गांव में हर आदमी पेड़ों की रक्षा व स्मृति वन की देखभाल करता है।

मिला था अमृतादेवी पुरस्कार

पर्यावरण की रक्षा व पर दिवंगत भील को राज्य सरकार ने 28 अगस्त 1997 में वन संरक्षण के लिए अमृतादेवी पुरस्कार मिला था। बाद में उनके पुत्र पूर्व सरपंच को जिलास्तर पर प्रकृति प्रेमी के रूप में सम्मान मिल चुका है।

टहनी तोड़ी तो जुर्माना

इस क्षेत्र में पेड़ काटना तो दूर टहनी तोड़ना तक सख्त मना है। यदि किसी ने टहनी भी तोड़ दी तो समिति मिलकर जुर्माना तय करती है। टहनी तोड़ने वाले से भविष्य में इस टहनी नहीं तोड़ने की सौगंध भी दिलवाई जाती है।

पहाड़ी पर घना जंगल

पूर्व सरपंच नंदलाल ने बताया कि पिता के देहांत के बाद वन सुरक्षा एवं प्रबंध समिति उनकी प्रेरणा को लेकर कार्य कर रही है। 17 साल में पूरी पहाड़ी पर जंगल घना बन गया है। यहां वन्यजीवों का बसेरा होने लगा है।

पौधरोपण की जरूरत नहीं

जंगल में पौधरोपण की जरूरत नहीं है। पेड़ों से गिरने वाले बीज उगकर पौधे तैयार होते रहते हैं। परिसर में बड़ी संख्या में फलदार एवं फूलदार पौधों की हरियाली आकर्षित करने लगी है।

लव सेक्स और धोखाः फ़िल्मी अंदाज में व्यापारी को देने पड़े 40 करोड़

यमुनानगर.चंडीगढ़ सेक्टर-11 निवासी व्यापारी के साथ उसके साथी ने फिल्मी अंदाज में 40 करोड़ की ठगी कर ली। साहा स्कूल में बच्चे के दाखिले के दौरान आरोपी की मुलाकात व्यापारी से हुई। व्यापारी को ठगी का पता लगने पर बचाव में आरोपी ने व्यापारी के बेटे के एक महिला से शारीरिक संबंध बनवाए।

ब्लैक मेलिंग कर व्यापारी से 20 करोड़ में सौदा कर 10 करोड़ रुपए ले लिए। शेष राशि न मिलने पर महिला के बयान पर व्यापारी के बेटे के खिलाफ दुराचार का केस दर्ज करवा दिया। पुलिस जांच में आरोपी की साजिश का खुलासा हो गया। पुलिस ने मुख्य आरोपी सहित दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया। निशानदेही पर 54 लाख रुपए पुलिस ने बरामद किए।

कोर्ट में पेशकर पुलिस ने आरोपियों को पांच दिन के रिमांड पर लिया है। वर्ष 2010 में नाहरपुर निवासी सोनू बंसल साहा स्कूल में बच्चे का दाखिला कराने गया था। उसकी मुलाकात स्कूल मालिक चंड़ीगढ़ सेक्टर-11 निवासी ईश्वर चंद बंसल के साथ हुई।

सोनू व्यापारी के साथ ब्रोकर के रूप में काम करने लगा। ईश्वर चंद के विश्वास का लाभ उठाते हुए सोनू ने महज कागजों में जमीन दिखाकर उसकी एवज में व्यापारी से 25 करोड़ रुपए ठगी कर ली। पुलिस जांच में सामने आया कि सोनू ने ईश्वर चंद को बेची गई जमीन हकीकत में कहीं नहीं थी।


सोनू ने व्यापारी से पैसे ऐंठने के लिए जगाधरी के बिट्टू के साथ मिलकर तरकीब बनाई। बिट्टू ने सोनू को सोनीपत के राज मलिक से मिलवाया। उन्होंने व्यापारी के बेटे अजय को फंसाने के लिए महिमा नाम की लड़की को ढाल बनाया।

महिमा प्लान के मुताबिक अजय को जगाधरी वर्कशाप रोड स्थित प्रतिष्ठित होटल में ले गई। वहां पर उसके साथ शारीरिक संबंध बना लिए। सोनू ने अजय व महिमा के शारीरिक संबंध की क्लिपिंग की धमकी देकर उसे ब्लैकमेल करने लगा।


साजिश में सोनू ने अपने साथी महिमा, सिक्का, वरुण, सुलतान के साथ मिलकर व्यापारी को हांसी बुला लिया। आरोपियों ने समझौते के लिए 50 करोड़ रुपए की मांग रखी। सौदा 20 करोड़ रुपए में हो गया। पुलिस का कहना है कि 10 करोड़ रुपए पीड़ित पक्ष ने तुरंत मौके पर ही दे दिए। शेष 10 करोड़ रुपए के लिए पीड़ित पक्ष ने समय मांगा। कुछ दिनों के बाद सोनू ने ईश्वर चंद से संपर्क किया।

व्यापारी ने उसके खाते में चार करोड़ रुपए जमा कर दी। इसके बाद भी महिमा ने ईश्वरचंद के लड़के अजय के खिलाफ 12 मई को थाना शहर में दुराचार का मामला दर्ज करा दिया। पुलिस जांच में मामला फर्जी निकला। पुलिस पूछताछ में सोनी व उसके साथी वरुण ने पूरी सच्चाई ब्यां कर दी। उनसे 54 लाख रुपए की राशि भी बरामद की।

एसएचओ को भी दी थी धमकी
मामले में गिरफ्तार हुए सोनू और वरुण को छुड़वाने के लिए किसी महिला ने शहर थाना प्रभारी संदीप के मोबाइल पर फोन कर छोड़ने के लिए कहा। एसएचओ के पूछने पर बात करने वाली महिला ने खुद को न्यायाधीश बताया। नहीं छोड़े जाने पर वर्दी उतरवाने की धमकी दी। छानबीन में मामला फर्जी निकाला। थाना प्रभारी ने धमकी देने वाली महिला के खिलाफ केस दर्ज करवा दिया है।


इस पर बिगड़ गई बात
थाना प्रभारी संदीप कुमार ने बताया कि चार माह पहले सोनू ने व्यापारी को यूपी में 1200 बीघा जमीन दिलवाई। इसी दौरान रणजीतपुर के धनौरा गांव में 170 किले साढ़े 10 लाख रुपए में खुद लेकर उसे आगे ईश्वर चंद को साढ़े 18 लाख रुपए में बेच दी। इस बारे में व्यापारी को पता चल गया। ईश्वर चंद ने सोनू के साथ काम करना बंद कर दिया।

छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के पास छह हजार से ज्यादा रॉकेट


रायपुर. छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के पास छह हजार से ज्यादा देसी रॉकेट हैं। कोलकाता में गिरफ्तार किए गए नक्सलियों के बड़े नेता सदानला रामकृष्णा उर्फ टेक्नी अन्ना से हुई पूछताछ में यह खुलासा हुआ है।

रामकृष्णा ने कई सालों तक छत्तीसगढ़ में काम किया है। मुंबई, कोलकाता और अन्य स्थानों से कई हिस्सों में पहुंचे रॉकेटों को अबूझमाड़ में स्थित गुप्त ठिकाने पर नक्सलियों ने असेंबल किया। इस मामले की जांच नेशनल इन्वेस्टिगेटिव एजेंसी (एनआईए) कर रही है।

सदानला से कोलकाता और आंध्रप्रदेश की पुलिस ने पूछताछ की थी। इसकी प्रारंभिक रिपोर्ट छत्तीसगढ़ पुलिस को भी मिली है। खुफिया एजेंसियों के अनुसार टेक्नी अन्ना ने स्वीकार किया कि उसका संगठन रॉकेट तैयार करने के प्रोजेक्ट पर करीब 10 सालों से काम कर रहा था। इस पर 30 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि खर्च हो चुकी है। इसके कई हिस्से कर्जत (महाराष्ट्र) में तैयार किए गए। कुछ कोलकाता के आसपास की फैक्ट्रियों में बने।

यह साफ नहीं है कि अलग-अलग रास्तों से टुकड़ों में भेजे गए रॉकेट असेंबल करने के बाद कहां पर रखे गए हैं। कोलकाता से भेजे गए रॉकेट लांचर के कुछ हिस्सों को रायपुर में भी जब्त किया गया था। एनआईए की कई टीमें जानकारी जुटाने के लिए छत्तीसगढ़, झारखंड, कोलकाता, ओडिशा और आंध्रप्रदेश में घूम रही है। खबर है कि एनआईए ने रामकृष्णा से पूछताछ करने के अलावा मुंबई में पकड़े गए असीम कुमार भट्टाचार्य और उसके तीन साथियों को भी रिमांड पर लेने की कोशिश शुरू कर दी है।

गुणवत्ता पता लगाने में जुटीं एजेंसियां

ठाणो में असीम कुमार भट्टाचार्य के साथ काम करने वाला नक्सलियों का गुट रामकृष्णा के साथ लगातार संपर्क में था। खुफिया एजेंसियां देसी रॉकेट की गुणवत्ता पता करने में जुटी हुई हैं। शुरुआती सूचना यही है कि नक्सली सटीक निशाने के लिए इसके केलिब्रेशन पर काम कर रहे थे। नक्सली हथियार कंपनियों द्वारा निर्मित रॉकेटों से उम्दा राकेट बनाने में अब तक सफल नहीं हुए हैं। अनुमान है कि वे रॉकेटों का इस्तेमाल पुलिस, सीआरपीएफ के कैंप या काफिले के अलावा सेना के खिलाफ करने की कोशिशों में हैं।

सलवा जुड़ूम शुरू कराने में मांझी की थी अहम भूमिका

माओवादियों ने मंगलवार को जिला पंचायत सदस्य हेमला सिका मांझी की दिनदहाड़े साप्ताहिक बाजार में गोली मार कर हत्या कर दी। 55 वर्षीय मांझी ने गंगालूर इलाके में सलवा जुडूम शुरू कराने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी। इस कारण वे माओवादियों के निशाने पर थे। सिका मांझी रोज की तरह सोमवार की रात भी थाना परिसर में सोने के बाद मंगलवार की सुबह घर पहुंचे। वहां से वे बाजार के लिए निकले। शासकीय आयुर्वेद औषधालय के सामने बनी झोपड़ी में वे उपसरपंच कमलू, सुकलू व मंगू पदम के साथ बातचीत कर रहे थे।

इसी दौरान भीड़ के बीच से लुंगी-टीशर्ट पहने दो लोग थैला लेकर वहां आए और करीब दो फीट दूर से गोलियां चला दीं। फिर वे फरार हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दो हमलावर कुछ दूरी पर खड़े रहे जबकि दो लोगों ने घटना को अंजाम दिया।

सिका के सिर और गर्दन में एक-एक गोली लगी जबकि दो गोली उसके सीने में और एक पैर में मारी गई थी। मौके पर ही मांझी ने दम तोड़ दिया। घटनास्थल पुलिस थाने से महज 200 मीटर के फासले पर है। इसके बावजूद पुलिस घटना के आधे घंटे बाद वहां पहुंची। मौके से पुलिस ने पिस्टल के दो और देसी कट्टे का एक खाली खोखा बरामद किया है। नक्सलियों की हिट लिस्ट में होने के कारण सुरक्षा के लिए मांझी को 5 एसपीओ मुहैया कराए गए थे। बाद में उनकी सुरक्षा हटा ली गई थी।

छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के पास छह हजार से ज्यादा रॉकेट


रायपुर. छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के पास छह हजार से ज्यादा देसी रॉकेट हैं। कोलकाता में गिरफ्तार किए गए नक्सलियों के बड़े नेता सदानला रामकृष्णा उर्फ टेक्नी अन्ना से हुई पूछताछ में यह खुलासा हुआ है।

रामकृष्णा ने कई सालों तक छत्तीसगढ़ में काम किया है। मुंबई, कोलकाता और अन्य स्थानों से कई हिस्सों में पहुंचे रॉकेटों को अबूझमाड़ में स्थित गुप्त ठिकाने पर नक्सलियों ने असेंबल किया। इस मामले की जांच नेशनल इन्वेस्टिगेटिव एजेंसी (एनआईए) कर रही है।

सदानला से कोलकाता और आंध्रप्रदेश की पुलिस ने पूछताछ की थी। इसकी प्रारंभिक रिपोर्ट छत्तीसगढ़ पुलिस को भी मिली है। खुफिया एजेंसियों के अनुसार टेक्नी अन्ना ने स्वीकार किया कि उसका संगठन रॉकेट तैयार करने के प्रोजेक्ट पर करीब 10 सालों से काम कर रहा था। इस पर 30 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि खर्च हो चुकी है। इसके कई हिस्से कर्जत (महाराष्ट्र) में तैयार किए गए। कुछ कोलकाता के आसपास की फैक्ट्रियों में बने।

यह साफ नहीं है कि अलग-अलग रास्तों से टुकड़ों में भेजे गए रॉकेट असेंबल करने के बाद कहां पर रखे गए हैं। कोलकाता से भेजे गए रॉकेट लांचर के कुछ हिस्सों को रायपुर में भी जब्त किया गया था। एनआईए की कई टीमें जानकारी जुटाने के लिए छत्तीसगढ़, झारखंड, कोलकाता, ओडिशा और आंध्रप्रदेश में घूम रही है। खबर है कि एनआईए ने रामकृष्णा से पूछताछ करने के अलावा मुंबई में पकड़े गए असीम कुमार भट्टाचार्य और उसके तीन साथियों को भी रिमांड पर लेने की कोशिश शुरू कर दी है।

गुणवत्ता पता लगाने में जुटीं एजेंसियां

ठाणो में असीम कुमार भट्टाचार्य के साथ काम करने वाला नक्सलियों का गुट रामकृष्णा के साथ लगातार संपर्क में था। खुफिया एजेंसियां देसी रॉकेट की गुणवत्ता पता करने में जुटी हुई हैं। शुरुआती सूचना यही है कि नक्सली सटीक निशाने के लिए इसके केलिब्रेशन पर काम कर रहे थे। नक्सली हथियार कंपनियों द्वारा निर्मित रॉकेटों से उम्दा राकेट बनाने में अब तक सफल नहीं हुए हैं। अनुमान है कि वे रॉकेटों का इस्तेमाल पुलिस, सीआरपीएफ के कैंप या काफिले के अलावा सेना के खिलाफ करने की कोशिशों में हैं।

सलवा जुड़ूम शुरू कराने में मांझी की थी अहम भूमिका

माओवादियों ने मंगलवार को जिला पंचायत सदस्य हेमला सिका मांझी की दिनदहाड़े साप्ताहिक बाजार में गोली मार कर हत्या कर दी। 55 वर्षीय मांझी ने गंगालूर इलाके में सलवा जुडूम शुरू कराने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी। इस कारण वे माओवादियों के निशाने पर थे। सिका मांझी रोज की तरह सोमवार की रात भी थाना परिसर में सोने के बाद मंगलवार की सुबह घर पहुंचे। वहां से वे बाजार के लिए निकले। शासकीय आयुर्वेद औषधालय के सामने बनी झोपड़ी में वे उपसरपंच कमलू, सुकलू व मंगू पदम के साथ बातचीत कर रहे थे।

इसी दौरान भीड़ के बीच से लुंगी-टीशर्ट पहने दो लोग थैला लेकर वहां आए और करीब दो फीट दूर से गोलियां चला दीं। फिर वे फरार हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दो हमलावर कुछ दूरी पर खड़े रहे जबकि दो लोगों ने घटना को अंजाम दिया।

सिका के सिर और गर्दन में एक-एक गोली लगी जबकि दो गोली उसके सीने में और एक पैर में मारी गई थी। मौके पर ही मांझी ने दम तोड़ दिया। घटनास्थल पुलिस थाने से महज 200 मीटर के फासले पर है। इसके बावजूद पुलिस घटना के आधे घंटे बाद वहां पहुंची। मौके से पुलिस ने पिस्टल के दो और देसी कट्टे का एक खाली खोखा बरामद किया है। नक्सलियों की हिट लिस्ट में होने के कारण सुरक्षा के लिए मांझी को 5 एसपीओ मुहैया कराए गए थे। बाद में उनकी सुरक्षा हटा ली गई थी।

कुरान का संदेश



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शादी में बदली फेसबुक पर हुए इस अनोखे प्रेम की कहानी


सरायकेला. सोशल नेटवर्किंग साईट फेसबुक पर दो अनजान लोग दोस्त बने। दोनों की दोस्ती बढ़ी और दोनों में प्यार हो गया। बस, फिर क्या था। दोनों ने शादी करने का फैसला भी ले लिया। जिसने भी सुना एक पल के लिए जरुर चौंका। लेकिन, इस अनोखे प्रेम को बीते सोमवार को मंजिल मिल गयी और दोनों चाहने वाले एक दूसरे के हो गए। मंदिर में इनकी शादी हुई और इनके प्रेम को सामाजिक मान्यता भी मिल गयी।

क्या है मामला?

झारखंड के सरायकेला-खरसांवा जिले के सीनी गांव के रहने वाले हिमांशु शेखर पाल को फेसबुक पर असम के तिनसुकिया की टीना चक्रवर्ती मिल गयी। दोनों पहले फेसबुक फ्रेंड बने। फिर चैटिंग करते-करते कब एक दूसरे को चाहने लगे पता भी न चला। फिर तो दोनों ने शादी करने का फैसला ले लिए और साथ जीने-मरने की कसमें भी खा लीं।

बीते दस मार्च को ही दोनों ने शादी करने का फैसला किया था, परंतु परिवारवालों की सहमति के लिए थोड़ी देरी हुई। अंत में दोनों परिवारों की ओर से रजामंदी मिल गयी। लड़की टीना तिनसुकिया में मां नोमिता चक्रवर्ती के साथ रहती थी। उसके पिता नहीं हैं।

दूसरी ओर हिमांशु के पिता शरद चंद्र पाल हैं। इनकी मोबाइल दुकान है। इस शादी की चर्चा इलाके में खूब है। सब इसे तकनीक का जादू मान रहे

'15 साल की मुस्लिम लड़की की शादी गैर कानूनी नहीं'

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नई दिल्ली. अगर किसी मुस्लिम लड़की ने 15 साल की उम्र में तरुणाई (मासिक धर्म शुरू होने की उम्र) हासिल कर ली है तो उसकी शादी गैर कानूनी नहीं है। यह फैसला दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनाया है। दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस एस. रवींद्र भट्ट और जस्टिस एस. पी. गर्ग की बेंच ने अपने फैसले में कहा, 'इस्लामिक कानून के मुताबिक कोई भी मुस्लिम लड़की बिना अपने माता-पिता की इजाजत के शादी कर सकती है बशर्ते उसने तरुणाई (प्यूबर्टी) हासिल कर ली हो। अगर उसकी उम्र 18 साल से कम भी है तो उसके पास अपने पति के साथ रहने का हक है।'

मुस्लिम धर्म मानने वाली नाबालिग लड़की की शादियों पर सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का उदाहरण देते हुए कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, ऐसे निर्णयों की रोशनी में यह साफ है कि तरुणाई की उम्र (अमूमन 15 साल) में शादी करने पर शादी अवैध नहीं ठहराई जा सकती है। हालांकि, ऐसी लड़की के पास यह विकल्प है कि बालिग (18 साल) होने पर वह अपनी शादी को खारिज कर सकती है। एक 16 साल की लड़की की दलील को स्वीकार करते हुए अदालत ने उसकी मां की तरफ से बंदी प्रत्यक्षीकरण की अपील को ठुकरा दिया। लड़की ने अदालत से गुहार लगाई थी कि उसे अपने पति के यहां रहने की इजाजत दी जाए। लड़की की मां ने आरोप लगाया था कि उनकी बेटी का पिछले साल अप्रैल में अपहरण किया गया है।

बेंच ने लड़की के उस बयान को स्वीकार कर लिया जिसमें उसने कहा था कि अपनी पसंद के लड़के से शादी करने के लिए उसने अपने मां-बाप का घर छोड़ा है और उसके पति पर अपहरण का मुकदमा दायर नहीं होना चाहिए। दिल्ली हाई कोर्ट का यह फैसला ऐतिहासिक माना जा रहा है। भारतीय कानूनों के मुताबिक विवाह के समय लड़की की उम्र 18 साल और लड़के की 21 साल होनी चाहिए।

इंदिरा को पहले बताया 'पापी', फिर पलट गए मोदी

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नई दिल्‍ली. गुजरात के मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी के एक बयान को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। बयान में मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री और कांग्रेस नेता इंदिरा गांधी पर निशाना साधा है। इसके बाद कांग्रेस ने उन्‍हें सांप्रदायिक और दुर्भावना फैलाने वाला नेता करार दिया है।
लेकिन जैसे ही बयान पर बवाल बढ़ा नरेंद्र मोदी अपनी बात से पलट गए। मोदी ने सफाई देते हुए कहा है कि उन्होंने इंदिरा पर नहीं बल्कि उनकी पार्टी कांग्रेस पर टिप्पणी की थी।
इससे पहले सोमवार को मुंबई में नरेंद्र मोदी ने कहा था, 'मित्रों, श्रीमती इंदिरा गांधी ने एक बहुत बडा पाप किया था...मैं एक की बात करुंगा...वैसे तो बहुत हुए हैं...वहां पर जब वो चुनाव लड़ रही थीं...और उस चुनाव में उन्होंने....बातें सेक्यूलरिज्म की करनेवाले लोग...अधिकृत रुप से उन्होंने अपने मैनीफेस्टो में...कांग्रेस ने कहा था कि हम यहां पर चुनाव जीतेंगे तो हम बाइबिल के मुताबिक शासन का दौर चलाएंगे।'
मोदी ने इंदिरा गांधी पर धर्म और संप्रदाय के नाम पर राजनीति करने का यह आरोप मुंबई में एक सम्‍मान समारोह में लगाया। समारोह अरुणाचल प्रदेश के समाजसेवी नाबाम अतुम के सम्मान के लिए आयोजित था। मोदी ने जब कहा, 'वैसे तो बहुत बातें हैं, लेकिन मैं एक की बात करूंगा', तो हॉल ठहाकों से गूंज उठा। मोदी ने केंद्र सरकार पर पूर्वोत्‍तर के राज्यों की सुरक्षा में लापरवाही बरतने और वहां के खराब हालात के लिए भी इंदिरा गांधी की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया।
मोदी ने कहा, 'इंदिरा ने पूर्वोत्तर से भारत की दूरियां बढ़ाने का काम किया। आजादी के आंदोलन में पूर्वोत्तर के बहुत से लोगों ने बलिदान दिया, लेकिन उनको जान बूझकर उपेक्षित रखा गया।' उन्होंने गांधी परिवार को निशाने पर लेते हुए कहा यदि इन (पूर्वोत्‍तर के) लोगों को याद किया जाता तो एक परिवार का क्या होता? एक परिवार के लिए पूरे इतिहास को रौंदा जा रहा है। मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह असम का प्रतिनिधित्व करने के बावजूद पूर्वोत्तर के साथ न्याय नहीं कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अरुणाचल के सीमावर्ती क्षेत्रों में भारत का मोबाइल चीन की कनेक्टिविटी से चलता है। कच्छ के पाकिस्तान से लगे क्षेत्रों में लगे टीवी सेट पाकिस्तानी कार्यक्रम दिखाते हैं। इन इलाकों में हम अपने शक्तिशाली टावर भी नहीं खड़े कर पाए हैं। यदि सरदार पटेल कुछ और दिन रहते, तो पूर्वोत्तर के राज्यों को उपेक्षा के दौर से नहीं गुजरना पड़ता।

लेकिन कांग्रेस ने मोदी के आरोपों पर जमकर पलटवार किया है। कांग्रेस सांसद प्रभा ठाकुर ने मोदी पर धर्म के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया है। उन्‍होंने कहा, 'मोदी धर्म और जाति के नाम पर लोगों को गुमराह करते हैं। उन्‍हें यह जवाब देना होगा कि यह मेनिफेस्‍टो किस साल का था।' मोदी ने इंदिरा गांधी पर आरोप लगाते हुए यह साफ नहीं किया कि वह किस चुनाव की बात कर रहे हैं और किस साल के कांग्रेसी घोषणापत्र में ऐसी बातें कही गई थीं।
कांग्रेस प्रवक्‍ता राशिद अल्‍वी ने भी मोदी को सांप्रदायिक बताते हुए कहा, 'इंदिरा जी पर कोई किसी तरह का इल्‍जाम लगाए तो बेहद दुर्भाग्‍यपूर्ण है। वो ऐसी पीएम थीं जिनकी पूरी दुनिया इज्‍जत करती थी।' उन्‍होंने कहा कि अगर बीजेपी नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्‍मीदवार बनाती है तो यह देश की उम्‍मीदों के मुताबिक नहीं होगा, क्‍योंकि देश किसी सांप्रदायिक व्‍यक्ति को प्रधानमंत्री की कुर्सी पर नहीं देखना चाहेगा।

महीने में एक पढ़ लगाओ दो पढ़ बचाओ देश और देश का भविष्य सुधार जाएगा

दोस्तों आज विश्व पर्यावरण दिवस की रस्म अदा की जा रही है ..सरकार ने यह रस्म अखबारी और मिडिया के विज्ञापनों से गोष्ठियों से निभाई है तो कुछ समाजसेवी संगठनों ने श्रम दान से इसकी शुरुआत की है कुल मिलाकर इन सबसे ना तो देश को फायदा है और न ही विश्व को फायदा है क्योंके कोई चिंतन कोई मनन और फिर अगर इस मामले में कोई निर्णय हों तो उनकी क्रियानाविती के लियें कोई पहल नहीं है हम भारत देश को देखे यहाँ अलग से वन मंत्रालय ..क्रषि मंत्रालय ..प्रदूषण पर्यावरण मंत्रालय है ...करोड़ों नहीं अरबों रूपये इस जाग्रति के नाम पर खर्च होते है समितियां बनाने का प्रावधान है लेकिन अभी तक कोइस समिति कोई आयोग का गठन नहीं किया गया है राजस्थान में इस मामले में कानून बनाया है लेकिन क्रियान्विति नहीं समिति नहीं तो फिर इसका फायदा क्या होगा ...सभी जानते है के शहरीकरण और उदारीकरण के नाम पर पर्यावरण को तबाह और बर्बाद किया जा रहा है जबकि उद्द्योगों का प्रदूषण वाहनों की गंदी हवा पेड़ों को जला कर राख कर रही है अब शहरों में न तो बरगद की छायाँ है ना ही ठंडी हवा बस टीन शेड ..या बरामदे बने है ..सरकार पेड़ों के प्रति गम्भीर नहीं है शहरीकरण के नाम पर जंगल और क्रषि भूमि खत्म उद्ध्योगों ने तबाही मचाई ....सडकें ऐसी बनी के उनका डामर जो पेड़ों के आसपास लगा उन्होएँ इन पेड़ों की जिंदगी बर्बाद कर दी ..हर शहर में देखे तो पता चलेगा के पेड़ गायब हो गए है और जो बचे है वोह हर बार अंधड़ में बर्बाद हो रहे है इन पेड़ों को तरक्की के नाम पर बिजली के तारों को बचाने के नाम पर काटा जाता है आपने कभी सर्कार से पूंछा है के क्रषि..पर्यावरण..वन ..भूतल..श्ह्रिविकास मंत्रालयों ने पेड़ बचाने के लियें कितने अरब रूपये अब तक खर्च किये है और उसका नतीजा क्या रहा नहीं ना क्योंकि यह पूछा तो फिर एक और करोड़ों अरबों का घोटाला सामने आएगा कोंग्रेस कहेगी भाजपा ने घोटाला किया भाजपा कहेगी कोंग्रेस ने घोटाला किया ..सपा बसपा के लियें कहेगी ममता समता के लियें और बाक़ी बचा तो साधू संत मोलवी मुल्ला कथित समाजसेवी अप्रत्यक्ष रूप से राजनितिक दलों के पिट्ठू बनकर उन्हें बचाने आ जायेगे या फिर ब्लेकमेल कर सोदेबाज़ी करने के लियें धरने प्रदेशन का माहोल बनायेंगे जनता को जमा करेंगे चंता उगायेंगे और कहेंगे हमे फ़िक्र हे देश की बढ़े आराम के साथ आज यह करेंगे फिर दो महीने बाद यह करेंगे फिर तीन महीने बाद यह करेंगे तब तक चाहे देश बर्बाद हो जाए इन्हें क्या यह तो दाव फेंक कर सोदेबाज़ी के इन्तिज़ार में बैठते है बात पत्गायी तो ठीक नहीं तो एक धरना और सही ..तो दोस्तों समझे न पर्यावरण की किसी को चिंता नहीं है इस दिवस के नाम पर नोटंकी होती है और कुछ नहीं इसलियें किसी के भरोसे न रहे खुद जिंदगी बचाएं रोज़ नहीं तो कमसे काम एक महीने में एक पेड़ लगाये दो पेड़ बचाए देश भी बचेगा ..खुबसूरत होगा .ताज़ी हवा मिलेगी सह्त्याबी मिलेगी खुशहाली होगी गर्मी काम होगी झगड़े काम होंगे पानी ज़मीं में जो घुस गया है वोह ऊपर आ जाएगा आप भी खुश खुदा भी खुश और आनेवाला कल भी सुधर जायेगा ..................

दुर्लभ घटना: एक कतार में होंगे सूर्य, शुक्र और पृथ्वी, जानिए असर और राशिफल


अब से कुछ ही घंटों बाद आसमान में एक दुर्लभ घटना घटने वाली है। ज्योतिष में वैभव और सौंदर्य का प्रतीक सितारा शुक्र 5 और 6 जून की दरमियानी रात सूर्य और पृथ्वी के बीच से गुजरेगा। सूर्य, पृथ्वी और शुक्र तीनों ग्रह कुछ घंटों के लिए एक कतार में आ जाएंगे।

इससे सूर्य पर एक छोटा काला धब्बा बनेगा। 243 साल में महज चार बार होने वाली इस घटना का नजारा आप अगली बार नहीं देख पाएंगे क्योंकि यह घटना 6 जून के बाद 11 दिसंबर 2117 को होगी।

यह दुर्लभ घटना 6 जून को अलसुबह 3.09 बजे से शुरू होगी, जो सुबह 10.19 बजे तक देखी जा सकेगी। उज्जैन वेधशाला जंतर-मंतर के अधीक्षक राजेंद्र प्रकाश गुप्त के मुताबिक वैज्ञानिक भाषा में इसे शुक्र का पारगमन कहते हैं जबकि ज्योतिषीय दृष्टिकोण से इसे शुक्र का सूर्यातिक्रमण कहा जाता है। खगोल विज्ञान के अलावा ज्योतिष में भी इस घटना को दुर्लभतम माना गया है।

कहां-कहां देखा जा सकेगा?

भारत के अलावा यह घटना पूर्वोत्तर ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, फिलीपींस, उत्तर एशिया, पूर्वोत्तर चीन, कोरिया, जापान, पसिफिक महासागर, न्यू गुयाना, हवाई, रुस, अलास्का, उत्तर-पश्चिम कनाडा में दिखाई देगा। सूर्योदय के साथ इसे खाड़ी, दुबई, सिंगापुर, मलेशिया एवं नेपाल में देखा जा सकेगा। बिना किसी साधन के इसको देखने को प्रयास न करें अन्यथा आंखों के खराब होने का भय है।

क्या होता है पारगमन?

जिस प्रकार पृथ्वी एवं सूर्य के बीच चंद्रमा के आने पर सूर्यग्रहण की स्थिति निर्मित होती है, उसी प्रकार अन्य ग्रह भी पृथ्वी एवं सूर्य के मध्य आते हैं परंतु वे पृथ्वी से काफी दूर होने के कारण आकार में छोटे दिखाई देते हैं और सूर्य को ढंक नहीं पाते और एक बिंदु के समान सूर्य की छाया से गुजरते हुए दिखाई पड़ते हैं, इसे ही पारगमन कहते हैं। सूर्य बिंब के ऊपर से पारगमन की घटना आंतरिक कक्षा वाले ग्रह बुध एवं शुक्र के साथ ही होती है।

क्या प्रभाव पड़ेगा भविष्य में?

पं. मनीष शर्मा के अनुसार ज्योतिष के दृष्टिकोण से शुक्र के पारगमन की यह घटना आषाढ़ कृष्ण द्वितीया तिथि को होगी। शुक्र का सूर्य पर यह अतिक्रमण तब होगा जब शुक्र अपनी ही राशि वृषभ में टेड़ी चाल चलेगा, जिसमें वर्तमान में चार ग्रह और गुजर रहे हैं। इस समय सूर्य भी वृषभ राशि में रहेगा जो कि शुक्र की राशि है। इसका असर पूरी देश-दुनिया पर पड़ेगा।

क्या होगा देश-दुनिया पर असर?

पं. शर्मा के अनुसार सूर्य, शुक्र का एक ही राशि में गोचर साथ ही गुरु एवं केतु का भी वृषभ राशि में गोचर तथा शुक्र का अतिक्रमण तूफानी वर्षा की ओर संकेत करता है। कई क्षेत्रों में बाढ़ के हालातों का निर्माण होगा। वृषभ राशि वालों को मानसिक परेशानियां हो सकती हैं। आयात-निर्यात में कमी आने का संकेत है। मंदी आने का भ्रम हो सकता है किंतु ऐसा कुछ नहीं होगा। सोने-चांदी के भाव में अचानक कमी आ सकती है। सिनेमा उद्योग को नुकसान होने की संभावना बनेगी। खान-पान का व्यवसाय पनपेगा एवं जल से नुकसान होगा।

राशियों पर प्रभाव

पं. शर्मा के अनुसार शुक्रके पारगमन का राशियों पर ये प्रभाव पड़ेगा-

मेष-लाभ के अवसर बनेंगे तथा व्यापार में बदलाव का मन बनेगा।

वृषभ-समय अनुकूल नहीं है। मौन धारण करना सर्वश्रेष्ठ रहेगा। निवेश से बचें।

मिथुन-व्यापार में लाभ होगा। नए वाहन की प्राप्ति संभव होगी। विदेश जाने की मंशा वालों को सफलता मिलेगी।

कर्क- अचानक कोई बड़ा कार्य सिद्ध होने के आसार बनेंगे। बिगड़े कार्य फिर से बनने लगेंगे।

सिंह- किसी बड़े लाभ के आसार बनेंगे। कार्य बिना किसी रुकावट के संपन्न होंगे।

कन्या- छोटी सी बात पर बड़ा विवाद हो सकता हैं। वाहन प्रयोग में सावधानी रखें।

तुला-जगह परिवर्तन के योग बनेंगे। सावधान रहें कुछ आर्थिक हानि की संभावना बन रही है।

वृश्चिक- उन्नति, तरक्की व कार्यक्षेत्र में लाभ होगा। व्यापार में वृद्धि होगी, नए अनुबंध होंगे व बेहतर सफलता मिलेगी। मन प्रसन्न रहेगा।

धनु- समयबद्ध कार्य में कमी आएगी। ज्यादा समय उलझनों को सुलझाने में व्यय होगा।

मकर-दोस्तों से मिलना होगा। कार्य में तेजी आएगी। आर्थिक लाभ होने के योग बन रहे हैं।

कुंभ- शुभ समाचार मिलेंगे। अटके कामों को पूरा करने में समर्थ होंगे। नींद न आने के कारण परेशान रहेंगे।

मीन- सरकारी कामों में समस्याएं खड़ी होंगी। वाद-विवाद की स्थिति से बचें तो बेहतर रहेगा।

शुक्र के बारे में क्या ये जानते हैं आप

- शुक्र, सूर्य और चंद्रमा के बाद सौरमंडल का सबसे चमकीला ग्रह है।

- सभी ग्रह क्लॉक वाइज सूर्य की परिक्रमा करते हैं जबकि शुक्र एंटी क्लॉक वाइज घूमता है।

- शुक्र का एक दिन पृथ्वी के 243 दिन के बराबर होता है।

- शुक्र का एक साल खुद के एक दिन से भी छोटा होता है, इसका कारण यह है कि शुक्र खुद की धुरी पर धरती के 243 दिन के बराबर समय में घूमता है लेकिन यह सूर्य की परिक्रमा मात्र 225 दिनों में पूरी कर लेता है।

- शुक्र का आकार लगभग पृथ्वी के बराबर ही है।

- इस ग्रह पर अधिकतम तापमान 480 डिग्री है जबकि न्यूनतम -138 डिग्री तक होता है।

- शुक्र पर कार्बन डाइऑक्साइड सबसे अधिक मात्रा में पाई जाती है।

- वहीं इस ग्रह पर पाए जाने वाले बादल सल्फ्यूरिक एसिड के होते हैं।

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