तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
30 अगस्त 2011
खुदा का शुक्र है फितरा और ईद की नमाज़ अदा हुई ...
राजिव के हत्यारों की फांसी और भाजपा की चुप्पी
क्या करे बाबा रामदेव का, तय नहीं कर पा रही है केंद्र सरकार
नई दिल्ली.दिल्ली के रामलीला मैदान से चार जून को योग गुरु बाबा रामदेव के निष्कासन के मामले में सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय से कहा गया कि केंद्रीय गृह सचिव और दिल्ली पुलिस द्वारा दाखिल हलफनामों में कुछ भी स्पष्ट नहीं है।
एमिकस क्यूरी राजीव धवन ने न्यायमूर्ति बी.एस.चौहान एवं न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की खंडपीठ से कहा कि हलफनामे में कई सवालों के जवाब नहीं दिए गए हैं।
उन्होंने अदालत से कहा कि गृह सचिव ने रुख स्पष्ट नहीं किया है और पुलिस का जवाब भी स्पष्ट नहीं है। हलफनामे से यह स्पष्ट नहीं होता कि लाठीचार्ज किया गया था या नहीं।
धवन ने इसे 'अत्यंत दुखद' स्थिति करार दिया।
उन्होंने कहा कि अहम सवाल यह है कि 'पुलिस की कार्रवाई के लिए आदेश कहां से आया। क्या पुलिस आयुक्त ने स्वयं आदेश दिया या उन्हें ऊपर से निर्देश मिला।'
धवन ने कहा कि कार्रवाई मध्यरात्रि में किया जाना तर्कसंगत नहीं है।
धवन द्वारा उठाए गए सवालों पर अदालत ने कहा, "हमें तह तक जाना होगा कि कार्रवाई करने का निर्णय उचित था या नहीं।"
न्यायाधीशों ने कहा कि 'हम मामले की पृष्ठभूमि में जाएंगे लेकिन अभी फैसला नहीं देंगे'। उन्होंने कहा कि 'हम हर चीज के विस्तार में जाना नहीं चाहते।'
उन्होंने यह कहते हुए कि मामले की सुनवाई 30 सितम्बर को होगी, सम्बंधित पक्षों को चार जून को हुई पुलिस कार्रवाई से जुड़ी सभी सीडी के आदान-प्रदान का निर्देश दिया।
पत्नी-पुत्र को छोड़ लापता हो गए आईएएस नवीन जैन
पुलिस सूत्रों के अनुसार जैन मंगलवार तड़के जयपुर से अपनी पत्नी, पुत्र और एक दोस्त के साथ दिल्ली की तरफ निकले थे। वे कुछ समय बहरोड़ के महारानी होटल में सपरिवार रुके। सुबह वे यहां से निकले और साढ़े नौ बजे शाहजहांपुर के निकट हाईवे स्थित नरूलाज रेस्टोरेंट पहुंचे। यहां सबने ब्रेकफास्ट किया। निजी सचिव की ओर से दर्ज करवाई गई एफआईआर के अनुसार जैन एक बर्गर खाने के बाद मोबाइल पर बातचीत करते हुए लॉन की तरफ निकल गए। वे बीस मिनट इंतजार के बाद भी नहीं लौटे तो उनकी तलाश शुरू हुई। कार के पास गए तो चाबी वहीं लगी थी और मोबाइल कार में पड़ा था।
काफी तलाश और इंतजार के बाद भी वे नहीं मिले तो उनके दोस्त हरीश शर्मा ने पुलिस को सूचित किया। पत्नी और बेटे को इस तरह छोड़कर अचानक गायब हो जाने के बाद पुलिस और प्रशासन हरकत में आ गया। अलवर पुलिस अधीक्षक महेश गोयल ने अपनी टीम के साथ शाहजहांपुर थाने में ही कैंप करते रहे।
पत्नी के नाम पत्र छोड़ा
जैन ने कार में अपनी पत्नी के नाम नरूलाज रेस्टोरेंट के एक नैपकिन पर लिखा पत्र भी छोड़ गए, जो इस प्रकार है :
मुझे अफसोस है कि 11 साल की नौकरी होते हुए भी मैं तुम्हें एक अच्छा मकान नहीं दिलवा सका, लेकिन ऊपर वाला भगवान भी सब देखता है। एक दिन सच्चाई सामने जरूर आएगी तो मैं भी सामने आऊंगा। तुम अपना ख्याल रखना। नरवाना या दिल्ली चले जाना। डोंट वरी, आई लव यू बेटा। नवीन
केवल इसलिए मार डाला क्योंकि कभी नहीं चखा था इंसान का गोश्त"
गिरफ़्तार किए गए व्यक्ति की उम्र 21 वर्ष है। इसकी गवाही के आधार पर मारे गए व्यक्ति के अवशेष कई दिनों बाद उत्तरी शहर मुर्मांस्क से बरामद किए गए हैं।
छानबीन करने वाले अधिकारियों के मुताबिक आरोपी ने बताया कि उसकी एक समलैंगिक संबंधों वाली सोशल नेटवर्किंग साइट पर एक 32 वर्षीय पुरूष से मुलाकात हुई, जो गे संबंधों में रूचि रखता था।
कुछ दिनों की बातचीत के बाद आरोपी ने उसे अपने घर आमंत्रित किया, जहां आरोपी ने उसे मौत के घाट उतार दिया। व्यक्ति को मारने के बाद उसने उसके शरीर के टुकड़े किए और उन्हें खा गया।
इस वीभत्स घटना के आरोपी के ने कहा "उसे मारने और खाने के पीछे मेरा मकसद केवल इंसान के मांस को खाना था।" इस संबंध में जांच कर रहे अधिकारी ने बताया कि आरोपी ने सोशल नेटवर्किंग साइट पर समलैंगिक साथी केवल इसलिए चुना क्योंकि विपरीत लिंग के अधिकांश लोग ऐसी जगह अपनी पहचान बताने से कतराते हैं और एक सीमा तक ही दोस्ती रखते हैं। ऐसे में 32 वर्षीय समलैंगिक व्यक्ति ने खुलेपन का परिचय देते हुए दोस्ती तो कर ली, लेकिन उसे अपनी जान गंवा कर इसकी कीमत अदा करनी पड़ी।
अधिकारियों ने बताया कि मनुष्य के मांस का भक्षण करने की नीयत से उसने लगभग 10-12 लोगों से संपर्क किया, लेकिन इस समलैंगिक व्यक्ति को ही वो अपने जाल में फंसा पाया।
दोबारा नहीं लौटी लोकपाल बिल पेश करने वाली सरकार
नई दिल्ली. संसद में लोकपाल बिल पेश करके राहत की सांस ले रही यूपीए सरकार के लिए यह अच्छी खबर नहीं है। इस विवादित बिल के इतिहास पर गौर करें तो पता चलता है कि अब तक जिस सरकार ने भी संसद में लोकपाल बिल पेश किया, वह सत्ता में लौट नहीं पाई। फिर चाहे वह कांग्रेस की सरकार रही हो, भाजपा-नीत एनडीए या फिर वीपी सिंह की संयुक्त मोर्चा सरकार।
पहली दफा 1 मई 1968 को यह बिल पेश हुआ। तब 20 अगस्त को लोकसभा में पारित भी हुआ मगर राज्यसभा में पारित होने से पहले ही लोकसभा भंग हो गई। उसके बाद 2 अगस्त, 1971 को इंदिरा गांधी सरकार में मंत्री रामनिवास मिर्धा ने यह बिल पेश किया पर पारित नहीं करा पाए और चुनाव आ गए।
1977 में कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर जनता पार्टी की सरकार दिल्ली पर काबिज हुई तो 23 जुलाई को चौधरी चरण सिंह ने फिर लोकपाल बिल सदन में रखा। वह सरकार 28 महीने में चली गई। उसके बाद कांग्रेस सत्ता में लौटी तो 25 अगस्त 1985 को एके सेन ने एक दफा फिर इस बिल को संसद के पटल पर रखा लेकिन वीपी सिंह की आंधी में वह सरकार भी हार गई। 1989 में 21 दिसंबर को वीपी सिंह की कैबिनेट में साथी दिनेश गोस्वामी लोकपाल बिल ले आए। इतिहास गवाह है कि वीपी सिंह बतौर पीएम दो साल भी पूरे नहीं कर पाए।
इसके बाद 10 दिसंबर, 1996 को प्रधानमंत्री देवेगौड़ा ने इस बिल पर हाथ आजमाया और सरकार से हाथ धो बैठे। आखिरी दांव 23 जुलाई 1998 को अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने चला लेकिन बिल पेश होने के कुछ ही दिन बाद सरकार महज एक वोट से गिर गई। बहरहाल, वाजपेयी लौट तो आए लेकिन 2001 में जब एनडीए सरकार ने फिर से बिल पेश किया तो वह अब तक रायसीना हिल पर राज करने का ख्वाब देख रही है।
समय सीमा पर आज फिर आमने-सामने हुए सरकार-टीम अन्ना!
नई दिल्ली. मजबूत जन लोकपाल बिल पारित करवाने की लड़ाई लड़ रहे अन्ना हजारे और उनके सहयोगियों का एक बार फिर सरकार से टकराव हो सकता है। टीम अन्ना के अहम सदस्य अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि मजबूत, प्रभावी लोकपाल के मुद्दे पर कोई बातचीत या समझौता करने का सवाल ही नहीं है। लेकिन स्थायी संसदीय समिति का कहना है कि वह तमाम मसौदों पर विचार कर अपनी राय देगा और इसी आधार पर नया मसौदा बनेगा। समिति के पास विचार के लिए 9 मसौदे हैं।
शुरू हुई कशमकश
मंगलवार को केजरीवाल अपने साथी प्रशांत भूषण के साथ संसदीय समिति के अध्यक्ष अभिषेक मनु सिंघवी से मिले। सूत्र बताते हैं कि यह अनौपचारिक मुलाकात हुई है। इसमें इस पर चर्चा हुई कि काम को कम समय में आगे कैसे बढ़ाया जाए। हालांकि अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
टीम अन्ना के एक और अहम सदस्य, पूर्व लोकायुक्त संतोष हेगड़े ने भी पुणे में कहा है कि हमने सरकार को चार हफ्ते का वक्त दिया है। देखें सरकार क्या करती है। वह केंद्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद के उस बयान पर प्रतिक्रिया दे रहे थे कि जन लोकपाल बिल पारित करने के लिए कोई समयसीमा तय नहीं की जा सकती।
अन्ना हजारे की तीन मांगों पर संसद में सैद्धांतिक सहमति के बाद इसे अमल में लाने के तरीके और समय को लेकर बहस शुरू हो गई है। सरकार विशेष सत्र बुलाने को तैयार नहीं दिख रही है। संसदीय स्थायी समिति के चेयरमैन अभिषेक मनु सिंघवी का कहना है कि समिति शीतकालीन सत्र के पहले अपनी रिपोर्ट दे देगी। उन्होंने कहा कि इतने महत्वपूर्ण विषय को समय सीमा में नहीं बांधना चाहिए।
लेकिन टीम अन्ना के प्रशांत भूषण का कहना है कि समिति की रिपोर्ट के बाद सरकार विशेष सत्र बुलाकर लोकपाल विधेयक पारित करा सकती है। प्रावधानों में सिटीजन चार्टर को लेकर ज्यादा कशमकश नहीं है। राज्यों में लोकायुक्त का मसला राज्यों से जुड़ा है लिहाजा इस मामले में केंद्र के पास एक विकल्प अपना मॉडल कानून राज्यों को भेजने का है। लेकिन सबसे पेचीदा मामला लोअर ब्यूरोक्रेसी को लोकपाल के दायरे में लाने का माना जा रहा है।
क्या है राय
सिंघवी ने कहा, हम संसद की भावना के साथ-साथ, समिति के सामने आए राहुल गांधी समेत सभी सुझावों पर पूरी गंभीरता से ध्यान देंगे। हालांकि उन्होंने साफ किया कि राहुल का सुझाव एक अंतिम उद्देश्य है और तात्कालिक कदमों को इसके लिए नहीं रोका जाएगा। समिति पूरे मामले में विशेषज्ञों की राय भी आमंत्रित करेगी। कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर का कहना है कि लोअर ब्यूरोक्रेसी को लोकपाल के दायरे में लाने के लिए दो तिहाई बहुमत से संविधान संशोधन की जरूरत होगी। यह मुश्किल लगता है। एक केंद्रीय मंत्री ने भी अय्यर की बात का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि फिलहाल हम देखेंगे कि समिति क्या उपाय सुझाती है। केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद का कहना है कि संसद देखेगी कि उसे क्या फैसला करना है। हमने लोअर ब्यूरोक्रेसी के लिए एक उपयुक्त तंत्र बनाने की बात कही है, संसदीय समिति हमें इसपर अपने बहुमूल्य सुझाव देगी।
जल्द होना चाहिए
प्रशांत भूषण का कहना है कि संसदीय समिति जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट दे सकती है, इसमें कोई मुश्किल नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार को समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार को संसद का विशेष सत्र बुलाकर इसे पारित कराने की पहल करनी चाहिए। भूषण लोअर ब्यूरोक्रेसी के मामले में किसी तरह की तकनीकी दिक्कत की बात से सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि संसद कानून बनाकर ऐसा कर सकती है।
समय सीमा
हालांकि समय सीमा के सवाल पर टीम अन्ना की मांग से भाजपा भी सहमत नहीं है। भाजपा नेता प्रकाश जावडेकर का कहना है कि अब संसद का प्रस्ताव होने के बाद सभी को कुछ व्यावहारिक पहलू पर ध्यान देना चाहिए। जद-यू नेता शरद यादव का कहना है कि अब संसद ने अपनी भावना प्रकट कर दी है और इसे मानने में कोई दिक्कत नहीं है। उन्होंने कहा कि हम तो पहले से ही इसके हिमायती थे, सरकार ही नहीं मानती थी।
कहां है मुश्किल
संविधान की धारा 311 के तहत सरकारी कर्मचारियों को संरक्षण प्राप्त है। लोकपाल के दायरे में लाने के लिए इस धारा में संशोधन की दरकार है। टीम अन्ना का मानना है कि संविधान संशोधन के बिना भी ऐसा संभव। संसद के प्रस्ताव में उपयुक्त मैकेनिज्म की बात है। संसदीय समिति देगी मैकेनिज्म पर सुझाव। सिटीजन चार्टर के तहत काम की समय सीमा तय करनी होगी। क्या काम कितने समय में होगा।
राज्यों में लोकायुक्त का गठन -
केंद्र का मानना है कि यह काम राज्यों को करना होगा। केंद्र दे सकता है मॉडल कानून। समिति की राय होगी अहम। समिति में सहमति बनाना भी पेचीदा काम। प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाने पर भी अभी तस्वीर साफ नहीं क्योंकि सरकार के बिल में इसका प्रावधान नहीं है। कांग्रेस और भाजपा की अलग अलग राय है। प्रधानमंत्री आएंगे तो किस सेफ गार्ड के सहारे, फिलहाल यह भी समिति के हवाले है। न्यायपालिका को लोकपाल के दायरे से बाहर रखने पर फिलहाल सहमति है। सांसदों के संसद के भीतर का आचरण भी संविधान की धारा 105 के तहत विशेष संरक्षण के दायरे में है। इस मसले पर संसदीय समिति में आमराय बनाना मुश्किल है।
दिल्ली पुलिस की जांच में असली निकली अमर सिंह-शांति भूषण की सीडी!
नई दिल्ली. सशक्त लोकपाल के लिए अन्ना हजारे के आंदोलन में बढ़चढ़कर हिस्सा लेने वाले मशहूर वकील शांति भूषण की मुलायम सिंह यादव और अमर सिंह के साथ बातचीत की कथित सीडी को दिल्ली पुलिस ने सही पाया है। दिल्ली पुलिस से जुड़े सूत्र ऐसा बता रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक जांचकर्ता जल्द ही उस मामले की क्लोजर रिपोर्ट फाइल करने वाले हैं, जिसमें शांति भूषण ने दावा किया था कि सीडी के साथ छेड़छाड़ की गई है। शांति भूषण ने अप्रैल में यह मामला दर्ज कराया था।
दूसरी तरफ, लोकपाल विधेयक को लेकर संसद की स्टैंडिंग कमिटी ने मंगलवार को कहा कि वह सदन को अक्टूबर तक अपनी सिफारिशें भेज देगी। यह बात समिति के अध्यक्ष अभिषेक मनु सिंघवी और टीम अन्ना के सदस्यों (अरविंद केजरीवाल, प्रशांत भूषण) की बैठक के बाद कही गई।
सीडी मामले में दिल्ली पुलिस ने तीन लैब में सीडी की जांच कराई थी। इनमें से दो लैब ने सीडी को असली बताया है। दिल्ली पुलिस ने सीडी को जांच के लिए सीएफएसएल और सीईआरटी लैब में भेजा था। इन दोनों लैब ने सीडी को सही बताया है। वहीं चंडीगढ़ की लैब ने सीडी को नकली बताया है। दिल्ली पुलिस का यह भी कहना है कि अमर सिंह ने पुलिस को जानकारी दी है कि टेप में उनकी आवाज ही है और इससे कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है।
इस खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रशांत भूषण ने कहा कि लगता है कि पुलिस, फॉरेंसिक लैब और सरकार के कुछ अधिकारियों समेत कई लोग आपराधिक साजिश रच रहे हैं। उन्होंने पूछा, वे सीएफएसएल, चंडीगढ़ की रिपोर्ट के बारे में क्या कह रहे हैं? गौरतलब है कि नई दिल्ली के सीएफएसएल में दिल्ली पुलिस द्वारा की कई फॉरेंसिक जांच में शांति भूषण के उस दावे को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि सीडी के साथ छेड़छाड़ की गई है। इसके बाद साझा ड्राफ्टिंग कमिटी से उनके इस्तीफे की मांग ने जोर पकड़ लिया था। प्रशांत भूषण ने अप्रैल में सफाई दी थी कि उनके पिता शांतिभूषण की आवाज कहीं से काटकर इस सीडी में जोड़ी गई है। इस सीडी में यादव की ओर से कहे गए सभी शब्दों को 2006 वाली सीडी से उठाकर इस बातचीत में जोड़ा गया है।
अप्रैल में लोकपाल के लिए अन्ना के अनशन के बाद सीडी कई मीडिया संस्थानों तक पहुंचाई गई थी। शांति भूषण पूर्व कानून मंत्री हैं और इंदिरा गांधी के खिलाफ मुकदमा लड़ चुके हैं। अप्रैल में लोकपाल बिल की साझा ड्राफ्ट समिति में शांति भूषण भी शामिल थे। शांति भूषण ने आरोप लगाया था कि सीडी से छेड़छाड़ करके सिविल सोसाइटी को बदनाम करने की कोशिश की गई है। सीडी में शांति भूषण कथित तौर पर मुलायम सिंह और अमर सिंह को बता रहे हैं कि उनका बेटा प्रशांत भूषण 'जजों को मैनेज' कर सकता है








