आपका-अख्तर खान

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16 मार्च 2010

ज़मानत न्यायलय अलग हो

देश भर में लाखों लोग अलग से जिलों में जमानत न्यायालय होने से बिना किसी कारन के जेल में रहते हें अव्वल तो थाने ४३६ सीआरपीसी के प्रावधानों के बाद भी मुलजिम को जमानत पर नहीं छोड़ते फिर ४३७ सीआरपीसी में मजिस्ट्रेट न्यायालय में मुलजिम पेश होता हे वहां से तकनिकी कारणों से जमानत ख़ारिज होती हे मुलजिम जेल जाता हे और उसकी दरख्वास्त जज साहब के यहाँ लगती हे सुनवाई में दो तिन दिन लगते हें छुट्टियाँ आ जाती हें फिर मुलजिम जमानत पर छूटता हे लेकिन वोह दो चार दिन तो जेल में बिना कारण के रह जाता हे इसे में अगर जमानत न्यायालय अलग से हो तो उसी दिन निचली अदालत से ख़ारिज होने पर सेशन में दरख्वास्त लग कर वोह छुट जाए और अनावश्यक जेल में न रहे देखो सरकार यह सब कब से करती हे जिससे जेल का भी बोझ कम होगा ।

मानवाधिकार न्यायालय नहीं खुल रहे

केंद्र और राजस्थान सरकार ने १९९३ में मानवाधिकार कानून लागू किया हे कानून में हर जिले में इस तरह के मामलों की सुनवाई के लियें अलग से सभी जिलों में मानवाधिकार न्यायालयों का खोलने का प्रावधान रखा हे आज १७ साल हो गये लेकिन आज तक हर साल हुमन रिलीफ सोसाईटी द्वारा याद दिलाने पर भी केंद्र या राजस्थान सरकार नें कोई कार्यवाही नहीं की हे मानवाधिकार आयोग ने भी इस मामले में सरकार पर दबाव बनाने का अपना दायित्व नहीं निभाया हे अब आप ही बताओ केसे होगा देश और राजस्थान में मानवाधिकारों का संरक्षण ? हे ना मानवाधिकार कानून के साथ मजाक ।

कोचिंग की लूट में सरकार साथ हे

कोटा हो या देश का कोई भी कोचिंग हो देश के बच्चों और उनके पेरेंट्स को लूटने में लगे हें सीबीएसइ और मानव संसाधन मंत्रालय दसवीं बाहरवीं का कोर्स चलाते हें लेकिन कोचिंगों को बढ़ावा देनें के लियें परसेंटेज खत्म कर दी हे अगर सीबीएस इ अपने इम्तेहान का मजाक उड़ा रही हे पहले कोई भी बोर्ड की परसेंटेज को आधार मान कर पीएमटी पी इ टी में एडमिशन देते थे फिर कोचिंग को बढ़ावा देनें के लियें नया काम शुरू हुआ और पीएमटी पी इ टी में एडमिशन के लियें कोम्पित्तिशन होनें लगा इसकी कोई ज़रूरत नहीं हे अगर सीबीएस ई या राजस्थान बोर्ड की बारहवीं के रिजल्ट की परसेंटेज को ही आधार मान कर मेरीट लिस्ट बना कर आगे एडमिशन होने लगे तो बोर्ड परीक्षाओं का स्तर भी सुधरेगा और कोचिंगों की लूट भी खत्म होगी लेकिन एसा चोर सरकारें जो कोचिंगों के संचालकों से पेसे खा कर बेठी हें वोह नहीं करेंगी इसके लियें हमारे बच्चे पढ़ते हों या नहीं पढ़ते हमें सब को मिलकर अभियान चलाना होगा हो सकता हे इससे लोग लुटनें से बच सकें ।

सवाईमाधोपुर के प्रशासन को निलंबित करें

कल १५/३/२०१० को माधोपुर की नदी में जुगाड़ {विधि विरुद्ध बनाया गया वाहन} से खानपुर बीएड कोलेज की बस नदी में गिर जाने से २६ लोगों की मोत हो गयी दर्जनों घायल हें एक हफ्ते पहले जेपुर हाईकोर्ट ने राजस्थान में जुगाड़ चलने पर रोक लगाने के आदेश हुए थे माधोपुर प्रशासन ने जुगाड़ पर रोक नहीं लगाई नतीजा सामने हे खानपुर झालावार के बीएड के बच्चे मोत के मुंह में चले गए काश माधोपुर कलेक्टर ने हाईकोर्ट के आदेशों की पालना में जुगाड़ का संचालन रोक दिया होता तो यह हादसा नहीं होता हाईकोर्ट या सरकार को निर्णय लेना हे के माधोपुर प्रशासन का क्या हाल करा जाए.

सूरत जाने से सुरत नहीं सुधरेगी

जी हाँ यह सच हे कोटा राजस्थान की सड़कों गलियों को साफ सुथरा रखने के लियें अगर कोटा की जनता से सुझाव लिए जाते तो शायद बहुत कुछ मिल जाता महापोर और पार्षद सूरत गए लाखों खर्च किये लकिन नतीजा शुन्य रहा शहर को योजनाबद्ध तरीके से साफ़ करने से काम होगा केवल सूरत जाने से नहीं सुधरेगी शहर की सूरत समझे जनाब इसलियें आज से ही कितने कर्मचारी हें कितने अधिकारी हें कितने साधन हें उसका हिसाब देखें और शहर महापोर से साफ़ नहीं हो तो दो माह के लियें हमें प्रबंधन दें इंशा अल्लाह शहर एक बार तो साफ़ हो ही जाएगा और अभी का जो खर्च हे उसमे से भी काफी बजट बच जाएगा ,,,,,,,,,,,,,,,,,,अख्तर खान अकेला
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